मदनपुर नामक गांव में हरिया नाम का एक लकड़हारा रहता था !!
और सुबह उठकर पास के छोटे-छोटे से जंगल में जाकर लड़कियां बटोरता और उसे बाजार में ले जाकर अच्छे दाम में दे देता जिससे उसकी घर का खर्चा खर्चा चल रही थी !!
हरिया का काम है लकड़ी कोई इकट्ठा करना और उसे बाजार में बेचकर पैसे लाना और अपने घर की देखभाल करना !!
कुछ समय बाद हरिया नमक लकड़हारे का एक सुंदर सी कन्या के साथ विवाह हो गया और उसे कन्या को अपने घर लेकर आया !!
अब तो हारिया नमक लकड़ी का खर्चा और भी बढ़ गया क्योंकि उसकी बीवी बहुत खर्चीली थी वह कुछ ना कुछ रोज हरिया के सामने अपनी मांग को रखती हमारे पास आज यह नहीं आज हो नहीं आज हमारे पास साड़ी नहीं है आज हमें लिपस्टिक लाना है अजमेर सिंदूर खरीदना है तमाम प्रकार की यातना हरिया को देते रहते थे !
अब हरिया का गुजारा इतनी लड़कियों में नहीं हो पता था धीरे-धीरे हरिया बड़े से जंगल की ओर जाने लगा वहां से और अधिक लड़कियां लाकर बाजार में ले जाकर भेजता तो उसे अधिक पैसे मिल जाते हैं जिससे वह अपनी बीवी का शौक पूरा करता था !!
अब हरिया को अधिक पैसे मिलने लगे इसलिए उसके मन में लालच से आ गई धीरे-धीरे एक दिन जंगल में छोटे-छोटे पेड़ों को काटने लगा उन पेड़ों को काटकर छोटा-छोटा कट्ठा बनाकर बाजार में ले जाकर भेजता जिससे उसे और अधिक पैसे मिलते हैं उन पैसों से वह अपनी बीवी का शौक पूरा करता था !!
हरिया नमक लकड़हारे के मन में और बड़े लाल साहब मिलेगी और बड़े पेड़ों को काटने लगा उन पेड़ों को काटकर ले जाकर बाजार में मिलता इससे उसे और अधिक पैसे मिलते हैं हरिया बहुत खुश रहने लगा उसका परिवार भी खुशहाल रहने लगा हरिया को किसी तरह की दिक्कतें नहीं आ रही थी बड़े पेट कट करो जब बाजार में भेजता तो उसे ढेर सारे पैसे मिलते हैं जिससे वह अपनी बीवी के साथ और अच्छी तरह से देखभाल कर लेता था !!
एक दिन हरिया जब बड़े पेड़ को काटने वाला था जैसे ही उसने एक दो कुल्हाड़ी पेड़ पर मेरी वैसे पेड़ की कहानियां ने हरिया के ऊपर वार कर दिया फिर जैसा दोबारा उसने एक खिलाड़ी में आ रही है फिर दूसरी पेड़ के टहनी ने हरिया पर दोबारा वार कर दिया हरिया को कुछ समझ में नहीं आ रहा था तभी पेड़ बोला अरे मूर्ख तो यह क्या कर रहा है तुम मुझे काट रहा है अरे मैं भी जीवित इंसान की तरह हूं फिर तो मुझे क्यों काटता है मैं तुझे ताजी हवा देता हूं वातावरण को स्वच्छ रखता हूं तेरी देखभाल करता हूं इस पृथ्वी के पर्यावरण को सुंदर बनाए रखता हूं फिर भी तुझे समझ में नहीं आता जानता है एक पेड़ तैयार करने में कितने समय लग जाते हैं कितने वर्ष बीत जाते हैं तब जाकर एक पौधा तैयार होता है बड़ी आसानी से मुझे काट रहा है तभी हरिया पेड़ के सामने अपना सर झुकाकर की गिड़गिड़ा कर माफी मांगने लगता है सत्ता में बिल्कुल अकेला हो जाऊंगा आज से मुझे सुधारने का एक मौका दे दो आज के बाद में प्रॉब्लम लेता हूं मेरे को कभी नहीं कटुंगा यह हमारा वादा है लड़की देखभाल करूंगा अपने पैसों से और पौधे लाकर यहां लगा दूंगा लेकिन मैं पेड़ को नहीं कटुंगा !!!
उसी दिन से हरिया में प्रण लिया और लकड़िया जाकर चिंता था लेकिन पेड़ को कभी नुकसान नहीं पहुंचते तो मैं एक पेड़ को कभी काटा हरियाणा में जो पकड़ लिया था उसे पूरा किया अपने पैसों से कुछ और कर दे ले जाकर वहां लगाया सूखी लकड़ियों फोटो बोलकर बाजार में ले जाकर भेजता उसी से अपना गुजारा चलाने लगा !!!
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