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मंगलवार, 21 मई 2024

गरीब लकड़हारा

 एक समय की बात है किसी गांव में रोशन नाम का गरीब लकड़हारा रहता था !!

वह अपनी जीभ का चलाने के लिए दिन रात कठिन परिश्रम करता था मेरे पास के जंगलों में जाकर लड़कियां कटता और बाजार में से बचकर पैसे जो मिलते उसे अपनी जेब का चलता था !!

एक दिन और लकड़हारा सुबह उठा और अपने हाथ में कुल्हाड़ी ली लकड़ी काटने के लिए पास के जंगल में गया जंगल से सटी हुई नदी भी थी और नदी के किनारे पेड़ से लड़कियां काट रहा था तभी उसके हाथ से कुल्हाड़ी छोड़ जाती है और वह खिलाड़ी नदी में जाकर गिर जाती है नदी का पानी इतना गहरा था कि वह लकड़हारा उसे नदी में जा नहीं सकता था तो वह लकड़हारा वही नदी के किनारे जाकर बैठ गया और जोर-जोर से रोने लगा!!!

ठीक कुछ समय बाद उसके रोने की आवाज सुनकर जल की देवी वहां प्रगति हुई और उसने उसे लकड़हारा से पूछा अरे बेटा तुम क्यों रो रहे हो तो मैं क्या परेशानी है तब उसे लकड़हारे ने अपनी सारी कहानी और जल की देवी से बोल देता है !!

अफजल की देवी लकड़हारे को आश्वासन देती है ठीक है बेटा तुम परेशान ना हो तुम्हें तुम्हारी कुल्हाड़ी मिल जाएगी इतना कहकर जल की देवी गायब हो जाती है थोड़ी देर बाद जल्द से फिर ना फिर प्रगट होकर हाथ में सोने की कुल्हाड़ी लेकर जल की देवी आती है और लकड़हारे से बोलता है बेटा है क्या है तुम्हारी कुल्हाड़ी है जो सोने की है तो गरीब लकड़हारा बोलता है नहीं है मेरी कुल्हाड़ी नहीं है मैं तो गरीब हूं मेरे पास होने की गाड़ी कहां से आ जाएगी ना कह कर जल की देवी बन गया हो !!

थोड़ी देर बाद पूनम जल की देवी प्रकट होती है और इस बार उसके हाथ में चांदी के खिलाड़ी होते हैं तो फिर वह जल की देवी लकड़हारा से पूछता है बेटा क्या तुम्हारी कुल्हाड़ी है मेरे खिलाड़ी नहीं है यह तो शादी की है मैं तो गरीब आदमी हूं मेरे पास होगा चांदी कहां से आ जाएगा इतना कहकर जल की देवी हो जाती है !!

थोड़ी देर बाद जल की देवी पुनः प्रकट होती है इस बार जल की देवी के हाथ में लोहे की कुल्हाड़ी होती है लोहे की कुल्हाड़ी जल की देवी के हाथ में देखकर बोल कर बोलता है हां हां यही मेरी कुल्हाड़ी है तब जल की देवी उसे लड़का हर की सच्चाई और ईमानदारी पर खुश होकर सोने क सोने क चांदी की लोहे क खुश होकर उसे लकड़हारे को दे देती है वह लकड़हारा खुशी खुशी सोने चांद चांदी के कुल्हाड़ी लेकर अपने घर जाता है.....

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