एक समय की बात है एक आदमी ने महान फिलोस पर सुकरात से पूछा सफलता का रहस्य क्या है !!
तब सुकरात ने कहा कल सुबह तुम हमें नदी के किनारे आकर मिलो वही तुम्हें सफलता का रहस्य मालूम पड़ जाएगा !!
वह आदमी सफलता कर जाने के लिए काफी उत्सव उसके दिमाग में यही चल रहा था कब सुबह हो कब मैं नदी किनारे जाऊं कब सुखराज से मिलो कब सफलता के विषय में पूरी जानकारी मुझे प्राप्त हो !!
जैसे ही सुबह हुई वह इंसान भाग भाग नदी के किनारे जा पहुंचा और सुकरात की सजा कर मिला तब सुकरात ने उसे इंसान से कहा तुमने नदी की गहराई को नापो को इंसान धीरे-धीरे नदी की गहराई को जैसे ही जा रहा था पीछे से सुकरात भी उसे इंसान के साथ नदी के अंदर जा रहे थे
जैसे वह इंसान पानी को और आगे बढ़ता गया उसे अपनी उसके ऊपर ना के पास पहुंच गया जैसे ना के पास पानी पहुंचता है सुग्रीव पीछे से उसका सब पानी के अंदर डुबो देते हैं वह पानी में चटपटाने लगता है सोचता है कितनी जल्दी में बाहर निकलूं क्योंकि सुकरात उससे ज्यादा आते करते थे इसलिए वह बाहर नहीं निकलने दिए और इंसान थोड़ी देर तक परेशान हूं तब सुकरात थोड़ी देर बाद उसे इंसान को छोड़ दिया जैसे उसे इंसान को छोड़ा और चटपटा कर भी हर बात के साथ जोर-जोर से सांस लेने लगा !!
तब सुकरात ने उसे इंसान से पूछा तुम पानी के अंदर क्या चाहते थे तब वह इंसान जोर से बोल मैं घबराहट के साथ सांस लेना चाहता था तब सुकरात ने कहा यही सफलता का रहस्य है जितनी तीव्रता के साथ तुम सांस लेना चाहते थे उतनी ही देवता के साथ तुम्हें आगे बढ़ना चाहिए आगे बढ़ना पड़ेगा तभी जाकर तुम्हें सफलता मिल पाएगी अन्यथा तुम जहां खड़े हो वहीं खड़े रह जाओगे तुम्हें कुछ भी प्राप्त नहीं हो पाएगा इसलिए ही मनुष्य तुम जाओ जितनी तीव्रता के साथ में घबराहट पानी के अंदर हुई थी उतनी देवता के साथ तुम आगे बढ़ाने की कोशिश करो फिर एक न एक दिन देखिए तुम्हें सफलता का रहस्य और सफलता दोनों ही स्पष्ट दिखाई देगा और एक दिन तुम सफल आवश्यक हो जाओगे !!
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