रवि नाम का लड़का है गांव में रहता था वह पढ़ने में बहुत तेज था एक दिन भारत सरकार के द्वारा निकाली गई कुछ वैकेंसी की जानकारी रवि को हुई रवि ने उसे विज्ञापन को दिखा और वह अपने सारे डॉक्यूमेंट लेकर चौराहे पर कंप्यूटर का चुने गया और उसे वैकेंसी के लिए अप्लाई कर दिया !!
कुछ समय बाद जो फार्म रवि ने भरा था उसकी डेट आ गई परीक्षा देने के लिए इधर अभी परीक्षा तक की तैयारी पूरी जोरों से कर रहा है उधर डेट भी आ गई रविंद्र पूरी तैयारी कर एडमिट कार्ड निकाल कर पैसा देने इलाहाबाद के लिए रवाना हो गया !!
वहां स्टेशन पर उतरने के बाद रवि को बहुत परेशानियां हुई स्कूल ढूंढने में रिक्शावाला ने अधिक भाड़ा ले लिया होटल पर नाश्ता किया वहां पैसे जाते देने पड़े क्योंकि तभी वहां है नया गया था पहली बार गया था इसलिए इलाहाबाद के विषय में से कुछ खास जानकारियां नहीं थी इसलिए थोड़ा और प्रताड़ना का शिकार बन गया और उसके अधिक पैसे खर्च होंगे जैसे तैसे वह स्कूल पहुंचा तैयारी तो कर ही रखा था जोरो के साथ परीक्षा का समय जाता है रवि कोई कर इंतजार करने के बाद रवि को क्वेश्चन पेपर मिलता है अब रवि बहुत सावधानी के साथ उसे परीक्षा के पेपर को साल करता है सॉल्व करने के बाद जैसे समय व्यतीत होता है रवि वहां से निकालकर अपने घर के लिए रवाना होता है !!
परीक्षा छूटने के बाद अभी भाग भाग आता है स्टेशन पर जैसे स्टेशन पहुंचता है कोई सही स्टेशन पर ठीक 5 मिनट बाद गाड़ी आ जाती है रवि उसका सवार होकर कुछ घंटे बाद अपने शहर पहुंचता हूं शहर से 5 किलोमीटर दूर उसका मकान का रवि को अपने शहर पहुंचने में देर हो गई थी रात के 11:30 बज रहे थे 11:30 बजे कोई साधन भी नहीं मिल रहा था तभी एक ट्रक वाला रवि के तरफ जा रहा था रवि नगर से रिक्वेस्ट किया भाई कहां जा रहे हो मुझे भी लेते चलो मुझे यहां तक जाना है ट्रक वाला मान गया और रवि को लिस्ट दे दिया रमेश पासवान और रवि 5 मिनट में 10 मिनट में वहां पहुंच गया अपने गांव के सामने !!
वाहन ट्रक से उतरते हैं रवि ने ट्रक वाले से 12 बजाकर 5 मिनट हो रहे हैं इतना कह कर ट्रक वाला वहां चला जाता है क्योंकि गांव से पहले रवि के बहुत बड़ा आम का बैग पड़ता है अंधेरी रात थी सड़के वो खड़ी हुई थी रोड सही तरीके से बनाने की और रवि को थोड़ा डर महसूस यह समय अधिक हो रहा है रात के 12:30 बजे यहां से घर से किलोमीटर दूर है अब मैं घर जाऊं तो कैसे हैं वह रवि ने जैसे तैसे हिम्मत बनकर अपनी बेल्ट निकाल कर हाथ में लिया और रहे भगवान का नाम लेकर रवि आगे बढ़ा वहां से 200 मीटर दूरी पर बाग के अंदर जाने पर कुछ सफेद चीज खड़ी हुई रवि को दिखाई दे रवि को डर तो लगा पर कोई दूसरा रास्ता भी नहीं था रवि को जाने के लिए मजबूरी थी रवि दर तो था लेकिन मैं किसी तरह हिम्मत बंद कर आगे बढ़कर धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया जैसे वहां पहुंचता है देखा क्या है एक सफेद गाढ़ा बिल्कुल दूध जैसा 20 रोड पर खड़ा हुआ अब रवि इधर को मुर्दा उधर को गधा आगे जाकर खड़ा हो जाता रवि को ऑर्डर लग गया भाई मेरे साथ क्या हो रहा है गधा ऐसा क्यों मेरे साथ बीएफ कर रहा है रवि ने अपनी बिल्डिंग निकाल और दो-चार बेल्ट कुछ गधे को मार दिया गधा जैसे तैसे रोड के नीचे उतर कर थोड़ी दूर जाता है रवि को और डर लग गया लगता है कोई बड़ी मुसीबत आने वाली है क्या रवि वहां से आगे जैसे 200 मीटर और आगे जाता है उसे चौराहे पर जैसे पहुंचता है अभी वहां एक बड़ा सा भैंस खड़ा हुआ था अब रवि तो पूरी तरीके से डर भी गया रवि ने पैसे को एक छोटा सा पत्थर मारा जैसे पत्थर मारा रवि ने वैसे पैसे नहीं रवि को दौड़ा लिया और अभी वहां से भाग जैसे-तैसे भाग कर खेतों से गुजरते हुए रवि रोड पर पहुंचा अब रवि पूरी तरीके से डर गया था उसके हाथ-पक भूल गए थे उसका दिमाग काम नहीं कर रहा था और जोर-जोर से चिल्लाने लगा बचाओ बचाओ पेस ने मुझे दौड़ा रखा है क्योंकि रात के 12:30 बज गए थे 600 मीटर की दूरी पर था इसलिए वहां तक रवि की आवाज नहीं जा सकती रवि दर समाज है जैसे तैसे अपने घर गया घर पहुंचते ही उसने आप भी थी अपने घर वालों को बताइए घर वालों ने से डंडा दिलाया डरो नहीं यह सब बहन है तुम परेशान हो जाओगे इसलिए डरो मत रवि हिम्मत नहीं हरा हालांकि रवि कई दिनों तक बीमार पड़ा था किसी धर्म पड़ा हुआ था उसकी सोच वही रहती थी घर वाले ने बहुत समझाया हो जाए तब जाकर रवि का दिमाग थोड़ा संतुष्ट हो लेकिन मैं तो डर ही गया था रवि के अंदर डर बैठ ही गया
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