आदि आधी रात का समय था सन्नाटा छाया हुआ था राम भरोसे घर के बाहर अपने पलंग पर पेड़ के नीचे आराम से सो रही थी गर्मियों का मौसम था सन्नाटा छाया हुआ था तभी बाजू से छम छम की आवाज सुनाई पड़ती है राम भरोसे उठकर खड़े हो जाते हैं कहीं पर दिखाई नहीं देता अब तो राम भरोसे के पसीने पसीने छोटा लगे और डर के मरे उनकी हालत खराब हो गई सर से लेकर पैर तक पसीने पसीने होंगे बैठ गया कि हो ना हो तो किसी भूत आत्मा ही है जो हमें डरा रही है रात भर राम भरोसे सो ना सके अलग कर बैठे बैठे पूरी रात बता दी सुबह हुई चारों के बीच में बैठे चर्चा होने लगी आज हमारे साथ ही ऐसी ऐसी घटना एन कुछ लोगों मैं तो राम भरोसे का मजाक उड़ा कुछ नहीं कहा नहीं यह सही है भूत होता है आत्मा होती है हो सकता है तुम्हें डरा रही है अब तो राम भरोसे और भी परेशान दिखाई देना और फिर दूसरे दिन.....
राम भरोसे फिर उसे पेड़ के नीचे लेटे हुए थे तभी उन्हें जोर की आवाज सुनाई दे अरे भाई राम भरोसे तुम इतनी गहरी नींद में सो रहे हो उठो उठो जल्दी उठो इतने में राम भरोसे की नींद मिलती है और चारों तरफ देखते हैं को दिखाई नहीं देता अब तो भाई इनकी और हालत बेकार होगी
तीसरा दिन राम भरोसे अपने चारपाई पर लेटे हुए थ अभी वह पेड़ की तरफ देखते उसमें उन्होंने एक डोरी बंधी हुई दिखाई दी राम भरोसा को समझने में देर नहीं लगी हो ना हो किसी गांव की सेक्स नहीं हमें डराने की कोशिश की है आओ चले इसका पता लगे तब राम भरोसे हाथ में छड़ी और लालटेन लेकर इस डोरी के सहारे धीरे-धीरे आगे की ओर बढ़ते हैं जहां डोरी खत्म होने की होती है गांव का एक लड़का जिसका नाम रहा था वह अपनी पलंग पर लेटा हुआ सो रहा उसके हाथ में डोरी बनी हुई थी वही राघव नाम का लड़का है मुझे डरा रहा था गुमनाम आदमी बनकर लेकिन मैं डरा नहीं मैंने हिम्मत से कम लिया और उसके नाम आदमी को अंतत पकड़ने में कामयाब रहे .....
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