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बुधवार, 21 सितंबर 2022

Web story:Cristiano Ronaldo















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गुरुवार, 30 अप्रैल 2020

अच्छे दिन आयो रे

लाक डाउन का समय चल रहा है।
लोगों के घरों के सामने एक लक्ष्मण
रेखा खींच दी गई हैं।लोग घरों में
बैठे अपने परिवार के साथ,,,,
बच्चे,,,, स्कूल की छुट्टी चल रही हैं
            बच्चे बहुत खुश हैं।
पति-पत्नी,,,,शापिंग माल, मेकप
                सेन्टर बन्द।यह दोनों खुश।
बूढ़े बूजुरुग,,,,टीबी सीरियल में 
                रामायण , महाभारत चालू।
              यह दोनों लोग खुश।
अब इससे अच्छा दिन अब और
कब आयेगा।र
 ्

रविवार, 26 अप्रैल 2020

यादों के वे दिन

कहते हैं इंसान चाहे कितना भी
बड़ा वन जाय, लेकिन उसे
अपनी बीती हुई बातें कभी
नहीं भूलना चाहिए,,,,

शुक्रवार, 24 अप्रैल 2020

खामोशी

खामोशी इंसान को अंदर ही अंदर
खा जाती है, कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं
जो जुबान पर आते आते खामोश
हो जातें हैं,,,,,,,
  रिश्ते में निखार, सिर्फ हाथ मिलाने
से नहीं आता,उनके दु:खोऔर
हालातों
में हाथ थामने से आता है।।
  किसी का मजाक मत उड़ा ऐ मेरे दोस्त।
   तुझे नहीं पता कि वह , अंदर ही अंदर
      कौन सी जंग लग रहा है।।
"तकलीफ देने वाले को भले ही भूल जाओ।
 पर तकलीफ में साथ देने वाले को कभी न भूलना।।

  'Reality"
           
 आजकल लोग समझते कम
      समझते ज्यादा है,
इसलिए तो रिस्ते सुलझते कम
      उलझते ज्यादा है,,


मंगलवार, 21 अप्रैल 2020

बूढ़ा राजा

कहते हैं कि कला किसी की मोहताज
नहीं होती,एक न एक दिन वह कभी उभर कर
दुनिया के सामने उभर कर आ ही जाती हैं।
 यह कहानी भी कुछ ऐसी ही है,,,
   दूर प्रांत में एक बूढ़ा राजा राज करता था।
उसके शासन काल में , वहां की जनता
बहुत खुश हाल रहती हैं। लोग अपने राजा का
हमेशा गुण गान किया करते थे।
   उस बूढ़े राजा के शासन काल में कला का
अपना एक अलग ही महत्व रहता था।
 वहीं पड़ोसी गांव में दीना और गौरी जो
पति-पत्नी थे ,अपनी कला दिखाने के
लिए उस बूढ़े राजा के राज्य में बहुत प्रशिद्ध
थे। धीरे धीरे उनकी प्रशिद्धी इतनी बड़ी कि
वह उस बूढ़े राजा के दरबार तक गूजने लगी।
  और फिर का था,उस बूढ़े राजा ने दीना और
गौरी की कला देखने के लिए उतावले हो गये।
 राजा ने आदेश दिया,कि सम्पूर्ण मानवता के
दीना ,गौरी को दरवार में बुलाया जाय,और
उनको अपनी कला दिखाने का एक अवसर
प्रदान किया जाय।
   और राजा ने यह भी ऐलान किया कि,
अगर दीना,गौरी की कला हमें पसंद आई
तो हम दोनों को आधा राज्य दे देंगे।
 यह बात रानी को पसंद नहीं आई।
रानी ने कहा अब तो हमारा आधा राज्य
ही हमारे हाथ से निकल जायेगा।
 फिर का था रानी ने गौरी को मारने के
लिए एक योजना बना डाली।
 कला का जौहर दिखाने के लिए
बहुत ऊंचाई पर एक छोर से दूर दूसरी
छोर पर रस्सी बांध दिया गया,रानी ने
रस्सी को दूसरी छोर पर आधा कटवा दिया।
और गौरी को कला दिखाने के लिए
उस ऊं ची रस्सी पर चढ़ा दिया गया।
गौरी अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए,
रस्सी पर चलते-चलते आधी दूरी पर पहुंचती
है वैसे ही उस रस्सी का दूसरा हिस्सा टूट
जाता है,और गौरी ऊंचाई से नीचे गिरती
है और उसकी मौत हो जाती हैं,उधर
ढोलक की थाप पर दीना भी अपना प्राण
त्याग देता है।
इस तरह दीना और गौरी का प्राण निकल
जाता है।और उस बूढ़े राजा के राज्य को
उन दोनो का श्राप लग जाता है।
  कहां जाता है कि,उन दोनो का श्राप
उस बूढ़े राजा को इस कदर लगा कि
उसका पूरा का पूरा राज्य देखते-देखते
विरान हो गया,उस राजा का महल एक
खंडहर में तब्दील हो गया,
"अगर किसी के साथ हम भला न कर सके,
  तो उसके प्रति हम बुरा भी न सोचें"




शनिवार, 18 अप्रैल 2020

"अच्छे बच्चे"

रोज नियम का पालन करते।
सुबह समय से हम उठ जाते।।
नियम बना कर रोज नहाते।
माता पिता को शीश झुकाते।।
नहीं पढाई से हम घबराते।।
हंसते हंसते पढ़ ने जाते।
पढ़ लिख कर सीधे घर आते।।
अच्छे बच्चे वह कहलाते।।।


शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020

जब इंसान बने पत्थर

बहुत पुरानी बात है।शहर से हजारों मील दूर ,नदी के किनारे एक छोटा सा गांव था। वहां पर बहुत सीधे
साधे लोग निवास करते थे।उसी गांव से
थोड़ी दूर पर एक साधू संत अपनी झोपड़ी बना
कर रहता था। वह साधू त
पस्वी के साथ
ज्ञानी भी था। वह अपने तप और ज्ञान के
बल पर सब कुछ देख सकता था,आने वाले
कल के विषय में भी बता सकता था।
  गांव के लोग उस साधू संत की बातों
को मानते थे,और उसके ज्ञान को सुनते थे।
गांव से तकरीबन पांच किलोमीटर दूर
एक बहुत बड़ा पहाड़ी क्षेत्र था।वह वहुत
वडा पठार था।
   एक दिन लोग उस साधू संत के पास
बैठै हूं थे,तभी वह साधू बोला आप लोग
संभल जाओ और इस गांव को छोड़कर
कहीं दूर जाकर अपना आशियाना बना लो।
यहां बहुत बड़ा भूचाल आने वाला है।
उस साधू-संत की बात कुछ गांव के लोगों ने
मान कर उस गांव को छोड़कर चले ग्रे।
लेकिन कुछ लोग नहीं माने और वही
गांव में ठहरे रहे।
 इसलिए कि उस पहाड़ पर चंबा नाम की
डायन रहती थी।वह लोगों को डराती और
उस गांव में से जब भी आती तब वह एक
आदमी को उठा ले जाती थी।
और फिर एक दिन वह चंबा नाम की डायन
आई और पूरे गांव को श्राप देकर चली गई।
उसने श्राप इसलिए दिया कि वह साधू
अपने तप से उस चंबा नाम के डायन
को उस गांव में आने नहीं दे रहा था,और
न ही किसी आदमी को उस गांव से
ले जाने देता था, इसलिए उस डायन ने
वहां पूरे गांव को श्राप दे दिया और कहा
""अगर मैं किसी को यहां से ले नहीं जा,
सकती और इस गांव में आ नहीं सकती,
तो आज मैं इस पूरे गांव को श्राप देती हूं
कि इस गांव के सभी लोग आज पत्थर के
हो जायेंगे""
  उसी दिन सभी लोग पत्थर के हो गये।





मंगलवार, 24 मार्च 2020

दुनिया का सबसे बड़ा लाकडाउन

२२ मार्च दिन रविवार ,आज का दिन
शायद ही कोई ऐसा हो ,जो आज का
दिन भूले।कोरोना वाइरस,पूरे देश को
संक्रमण करने वाला।यह एक ऐसा खतरनाक
वाइरस है,जो अगर एक आदमी को
हुआ तो वह हजारों को संक्रमित
कर सकता है।
 २४ अप्रैल रात १२बजे के बाद,,,,
    पूरे देश को हमारे देश के प्रधानमंत्री
ने रात १२ बजे के बाद ,,पूरे देश को
२१ दिनों के लिए, अर्थात १४ अप्रैल
तक,पूरे देश को लाक डाउन कर दिया
गया।
 एक संक्रमित व्यक्ति सैकड़ों लोगों को
बीमार कर सकता है।
  एहतियात बरतिए।
अपने घरों में रहिए।
एक तरह से आप के घरों के,
बाहर लक्ष्मण रेखा खींच दी गरी है।
जिसे आप लोग पार न करें।
लोग अपने घरों में रहे,
सुरक्षित रहें।
  इस लाक डाउन में हमें अपना,,,
संकल्प निभाना है।
आग की तरह फैलने वाला संक्रामक
आज दिनांक २४/०३/२०२०को
रात बारह बजे से देश का सबसे
बड़ा लाक डाउन जो २१ दिनों
१४ अप्रैल तक पूरा देश बन्द,,
  को....... कोई
  रो.........रोड पर
 ना........न निकले
   कोरोना
देश इस संकट का सामना करेगा।
   और बाहर निकलेगा।।
चाहें कुछ भी हो जाये,
हमें घरों से बाहर नहीं
निकलना है।
संकट के इस घड़ी में,,,,
गरीबों के लिए, मुश्किल,,
की घड़ी लेकर आया है,,,
  इस कोरोना ने पूरी दुनिया
में कोहराम मचा दिया है।।
किलर कोरोना के खतरे से
पूरे देश को लाक डाउन कर
दिया है।
   इस खतरे से निपटने के लिए,
लोग घरों से न निकले,२१दिनो तक
  अफवाहों से बचें।।
इसे फैलने से रोके।
ऐसे परिस्थितियों में बिना,,
डा,की सलाह से किसी
तरह की दवा न लें।।
  यह जान लेवा बिमारी है।।
आज भारत में लगभग ,,,
१८७००० लोग इस किलर
कोरोना वाइरस की चपेट
से संक्रमित पाये गये हैं।
  अगर कोई इस लाकडाउन
को तोड़ता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई
की जाएगी।
 इस वाइरस का शिकार न बने।
अपने घरों में रहे।
चाहें कुछ भी हो जाये,
अपने घरों में रहे।
 बचाव ही ,सबसे बड़ा साधन है।।
घरों से बाहर निकले,मास्क लगा कर निकले।
शैनेटाईजर का प्रयोग करें।
लोगों से दूरी बना कर रखें।
भीड़ भाड़ वाले जगह पर न जाये।
इस वाइरस से बचें।
इसका एक मात्र उपाय,,,
 बाचाव ही है।




सोमवार, 23 मार्च 2020

राजा की सोच

वैसे तो कला का कोई
मोल नहीं होता,ऐसे ही
एक कहानी एक पढ़ें लिखे
जवां राजा की ही, कुछ समय
पहले की बात है,किसी
नगर में ,एक राजा था।
वह अपनी प्रजा का बहुत
ध्यान रखता था।उसके
राज में वहां की जनता
बहुत खुश रहती थी।
 एक दिन की बात है,
राजा अपने दरबार में
बैठा कुछ सोच रहा था।
तभी उसके मन में एक
बिचार आया,उसने अपनी
सभा में अपने मंत्री से कहा
कि हमें अपना चित्र बनवाना
है,तुम जाओ और जाकर
पूरे नगर में ऐलान कर दो,
कि जो राजा का खूबसूरत
चित्र वना कर या चित्र कारी
करके देखा ,उसे दस हजार
सोने  की मोहरें दी जाएगी।
  यह ऐलान सुन कर दूर
दूर से नगर के एक से एक
चित्र कार आऐ, और सभा
में उपस्थित हुए।
 फिर राजा ने सभी चित्र
कारों से कहा कि हमें अपनी
सूबसूरत चित्र चाहिए। जो खूबसूरत
चित्र नहीं वना कर देगा,
उसे हम मौत के घाट
उतार देंगे।यह बात सुन
कर सभी चित्र कारों ने
अपने हाथ खड़े कर लिए।
इस लिए कि राजा में एक
कभी थी। राजा जो था वह
,,,एक पैर का लंगड़ा,,,और
,,,एक आंख का खाना था,,,
इस लिए सभी चित्र कारों ने
अपने हाथ खड़े कर लिए।
लेकिन उन सभी चित्र कारों
में एक युवा चित्र कार था।
उसने राजा से कहां हम आप का
चित्र वनाऐगे,उस युवा चित्र
कार ने राजा को अपने
सामने राजा को खड़ा किया
और राजा का चित्र बनाना
शुरू किया,उस युवा चित्र कार
को राजा का चित्र बनाते बनाते
दो तीन घंटे बीत गए।राजा
बोला कितना समय लगाओगे,
अगर हमारा चित्र गलत हुआ
तो हम तुमको मौत के घाट उतार देंगे
यह सुनकर चित्र कार हसा और
बोला,महराज हम कोशिश
कर रहे हैं,कि मैं आप का
चित्र सूबसूरत बना सके।
उसके थोड़ी देर बाद
राजा का चित्र बना कर
वह चित्र कार राजा को
देता है,उस चित्र को राजा
देखता है और जोर से हंसता है,
यह देखकर दूसरे चित्र कार
अचंभित रह जाते हैं,और
आपस में बिचार करते हैं
ऐसा का बना दिया है उस
चित्र में,जिसे देख कर राजा
जोर से हंसा,,,,
 उस चित्र में उस युवा चित्र कार
ने राजा को शिकार खेलते हुए
बनाया था,राजा के साथ में
धनुष,बाड लिए हुए,और एक
आंख बंद किए हुए ,घुटनों के
बल बैठा हुआ दिखाया था।
जिससे राजा की आंख,
और राजा का पैर दोनों
चीजें छिपाती हैं।
 अपना चित्र देख कर
राजा ने उस युवा को
दस हजार सोने की
मोहरें दी,और वह
युवा चित्र कार
खुखी खुखी अपने
घर को गया।
 इस कहानी से हमें का
सीख मिली नीचे कमेंट
कर लिखे,,,,,,,



शुक्रवार, 20 मार्च 2020

अन्ध भक्ति

एक समय की बात है,
बरसात का समय था,
धीरे बारिश हो रही थी,
देखते ही देखते , बारिश
इतनी तेज हो गयी कि,
गांव में धीरे धीरे पानी
घुसने लगा,उधर बरसात
होते होते शाम हो गयी,
गांव में बाढ़ आ गई,
लोग त्राही त्राही करने
लगे ,और उस गांव के
लोग एक एक करके
गांव छोड़कर भागने
लगे,उसी गांव में रामू
नाम का एक आदमी
रहता था।
  वह जब बरसात हो
रही थी ,तब वह भगवान
की भक्ति में लीन था , गांव
के लोग जब अपना घर बाढ़
के डर के कारण छोड़कर
भाग रहे थे, तब रामू का पड़सी
रामू को जोर जोर से आवाज
दिया,
   अरे रामू काका, कहां हो तुम
अरे चलो गांव में जोर से बाढ़
आई हुई है,यह भगवान की
भक्ति छोड़ो और चलो हमारे साथ।
  परन्तु रामू काका तो रामू काका
ही थे वह माने ही नहीं।
   जब गांव के लोग नाव पर
बैठकर घर छोड़ कर जा रहे
थे ,तब भी लोगों ने जोर जोर
से आवाज लगाई,अरे रामू काका
कहां ईश्वर की भक्ति में लीन हो
आओ हमारे साथ चलो,देख
रहे हो पूरा गांव डूबरहा है,चारों
तरफ हां हां कार मचा हुआ है।
लोग नाव के सहारे गांव को
छोड़कर भाग रहे हैं, तुम भी
आओ और हमारे साथ चलो।
 लेकिन रामू काका फिर भी
नहीं माने,उधर गांव में पानी
इतना भर गया कि एक मंजिल मकान
डूब गया।
  उधर रामू काका दूसरे मंजिलें
पर जाकर भगवान की भक्ति करने
लगे।
   फिर उधर सेना का हेलीकाप्टर
आया ,सेना के जवानों ने रामू काका
को बहुत कहां, लेकिन रामू काका
फिर भी नहीं माने,रामू काका जाने
से मना कर दिया,और फिर भगवान्
की भक्ति में लीन हो गए।
   उधर गांव में इतना पानी भर
गया कि रामू काका उस बाढ़ में
भगवान् की भक्ति करते करते
डूब गये ,और रामू काका के प्राण
निकल गये।
  रामू काका के प्राण निकलने के
बाद वह भगवान् के पास गयेऔर
भगवान् से प्रार्थना की,
 कि हे ईश्वर हम आप की इतनी
भक्ति कर रहे थे,और हमारे गांव
में बाढ़ आ गयी और हम उस बाढ़
में डूबकर मर गया,और आप को
तनिक भी दया नहीं आई ,कि आप
हमें बचाने तक नहीं आए,
 भगवान् हंसे और बोले,
 हमने तो तुम को तीन वार
बचाने की कोशिश की लेकिन
तुम अपने जिद पर अंडे रहे
तो इसमें मेरी का गलती है।
 तब रामू को अपने किए पर
पछतावा आया।
काश रामू उन लोगों की बात
मानलेता तो आज वह भी
ज़िन्दा रहते।
 यह सच है कि ईश्वर है,
वह लोगों की मददत,
किसी न किसी रूप में
अवश्य करते हैं,यह जरूरी नहीं
है कि ईश्वर खुद प्रगट हो और
हम सब की मददत करें।
  हमें इन बातों को
  खुद समझना चाहिए।।





गुरुवार, 19 मार्च 2020

जंगल की गुफा

गांव से करीब १० किमी, दूर एक
बड़ा जंगल था। जहां पर अनेक प्रकार
के जानवर रहते थे।उन जानवरों में
एक जानवर सियार था। जो अपने
आप को बहुत चालाक और चतुर
समझता था।उसने जंगल के बीच में
एक गुफा बना रखी थी,और वह
चालाक सियार उसी गुफा में रहता था।
    उसी जंगल में एक बूढ़ा शेर
रहता था,वह दो दिनों से बहुत
भूखा था।वह बूढ़ा शेर शिकार
की तलाश में उस शिकार की गुफा
तक जा पहुंचा।
    शेर ने सोचा इस गुफा में हो न हो
कोई न कोई जानवर अवश्य रहता
होगा।वह शेर चुपके से जाकर उस
गुफा में जाकर बैठ गया।
     थोड़ी देर बाद सियार वहां आया
और उसने शेर के पंजों के निशान
जमीन पर देखें।
    वह सियार समझ गया कि शेर
हमारी गुफा में जाकर छुप कर बैठा
है,ताकि जैसे मैं अंदर जाऊं वह मुझे
पकड़ कर खा जाय।
 शिकार ने अपना दिमाग लगाया,
वह गुफा के पास गया और बोला
अंदर कौन हैं,
अंदर से आवाज आई,
कौन बोल रहा है,
वाह्रर से शिकार बोला,
मैं इस गुफा का मालिक
बोल रहा हूं।
   इतना कह कर शिकार वहां
से एक ,दो, तीन हो गया।
और वह वहां से भाग निकला।
इस तरह शियार की चतुराई से
उसकी जान बच गई।

बुधवार, 4 मार्च 2020

उड़ान ,,हौसलों की,,

शाम का समय था।रीता सुबह
ही स्कूल के लिए निकली और
शाम  छः बजे तक घर वापस
नहीं आई।इससे पहले कभी ऐसा नहीं
हुआ था।उधर मां को रीता को
लेकर बहुत चिंता हो रहा था।तभी
सोहन घर पर आता है, मां
सोहन से कहती हैं,बेटा सोहन
बाहर देख जरा अंधेरा छा गया
है ,पर रीता बिटिया का अभी
तक कुछ पता नहीं चला, आखिर
कुछ बता कर गयी है कि वह कब
तक घर वापस आयेगी।
  अरे मां चिंता मत करो रीता
ने हमें बताया है,कि आज उसे
उसके कालेज में,,,म हिला सुरक्षा
के उपाय को लेकर उसके कालेज
में कुछ जानकारियां दी जायेगी।
   अरे मां मैं आप को यह सब
कुछ बताना भूल गया था।
 तभी दरवाज़े पर दस्तक हुई,,
 खट, खट ,खट, रीता आ गयी
थी। मां का उदास चेहरा देख
रीता ने कहा,,अरे मां चिंता मत करो,,
अब डरने से काम नहीं चलेगा,,
हमें मजबूत बनना होगा।और
हमारे हौसले की उडान ही
उन राक्षसों का सबक बनेगा ,
जो बेटियों को महज एक
खिलौना समझते हैं।

शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

अहंकारी व्यक्ति

किसी नगर में कर्मदीन का एक
छोटा सा परिवार रहता था ।उनका
एक लड़का था,जिसका नाम हर्ष
था।वह राजा के साथ रत्नों में शामिल
होना चाहता था। इसलिए वह हमेशा
गांव के हर भाग का नक्शा बनाकर
राजा को दिखाना चाहता था।उसे
अपने ऊपर ,और अपने भाग्य पर
पूर विश्वास था। लेकिन फिर भी
वह हर वार इतनी कोशिश करने
के वाद विफल ही हो जाता था।
  उसके पिता उसे वार वार कहते
कि बेटा तुम अपनी शादी कर लो
का पता तुम्हरी पत्नी के भाग्य से
तुम्हरा भी  भाग्य बदल जाय,और
तुम राजा के उन सात रत्नों में शामिल
हो जाओ।
   लड़का हर बार यही ज़बाब देता
पिताजी हमें अपने भाग्य पर पूरा
विश्वास है, पत्नी के भाग्य से कुछ
नहीं होता,धन कमाने के लिए मेहनत
करना पडता है।
   और फिर आखिर एक दिन बहुत
समझाने के बाद हर्ष मान गया और
उसने साथी कर ही ली, शादी कर के
जैसे ही वह अपनी पत्नी को अपने घर
लाता है और उसकी पत्नी जैसे ही घर
में प्रवेश करती हैं वैसे ही राजा के
दरबार से बुलावा आ जाता है,और
वह राजा के दरबार में जाकर अपने
बनाते हुए नक्शा को राजा को दिखाता
है,राजा बहुत खुश होता है और फिर
राजा हर्ष को अपने उन सात रत्नों में
शामिल कर लेता है। 
   और उसे खूब ढेर सा धन मिलता है।
कहते हैं कि पत्नी के भाग्य से,
पती का भाग्य जुडा होता हैं।।
   पर यह बात हर्ष मानने को तैयार नहीं।
उसे तो अपने भाग्य पर विश्वास था।
धन पाते ही वह अहंकार में चूर हो गया।
वह अपनी पत्नी की कद्र नहीं करता।
वह  जो भी धन राजा के दरबार से
कमाई कर लाता उसे कोठे पर
लेजाकर उड़ा आता।
पत्नी उसकी लाख मना करती पर
वह मानने को तैयार नहीं था।
धीरे धीरे उसका अत्याचार इतना
बढ गया था कि एक दिन उसने
अपनी पत्नी को अपने घर से ही
धक्का देकर बाहर निकल दिया।
    पत्नी के घर से निकलते ही उसके
भाग्य ने उसका साथ छोड़ दिया।
लेकिन फिर भी हर्ष यह बात मानने
को तैयार नहीं था।
   और अब वह जो भी काम करता
वह उसका उल्टा ही हो जाता था।
धीरे धीरे उसके घर का सारा धन
खत्म हो गया।
और राजा ने भी उ,से अपने दरबार
से निकाल दिया।वह दर दर इधर
उधर ठोकरें खाने लगा।और एक दिन
वह चोरी के इल्ज़ाम में भी पकड़ा गया।
 इतना कुछ होने कै बाद हर्ष को
अपनी पिछली गलतियों का एहसास हुआ।
   फिर आखिर में वह भागकर अपनी पत्नी के
पास गया ।और उससे अपनी गलतियों
की क्षमा मांगी। फिर अपनी पत्नी को अपने घर
लेकर आया।और फिर जैसे ही
उसके कदम घर पर पड़े फिर
हर्ष के भाग्य बदल गये।




शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

पुरुषों की कमजोरी का राज

जब पुरुष को लगे कि हमको
शरीर की कमज़ोरी का आभास
हो रहा है तो उस पुरुष को यह
सभी चीजों का सेवन अवश्य करना चाहिए
जैसे,,,दूध,,, सोयाबीन,,,खजूर,,,
यह सभी चीजें ,शरीर के लिए
अति आवश्यक हैं,,
 जो शरीर को ताकत के साथ दूध
शरीर के हड्डियों को मजबूत बनाता
हैं, सोयाबीन, शरीर के सभी अंगों
का विकास करता है।
ताकत वर चीजें
शरीर को स्वस्थ रखता है
खजूर शरीर के अंगों 
का विकास करता

बुधवार, 22 जनवरी 2020

दबंग कप्तान

एक कामयाब कदम,
विराट कोहली,एक
जाना माना नाम,
जो पहले यह चुके
भारत के कप्तान नही
कर पाये वह कर दिखाया
विराट कोहली ने।आज
जब यह युवा खिलाड़ी
मैदान पर उतरता है तो
भारतीय प्रशंसक उसका
पूरा आनन्द लेते हैं।
भारत ने आस्ट्रेलिया में
शुरुआत 2019मे पहली
बार 2-1से टेस्ट सीरीज
जीतकर की। हालांकि
2019मे उन्होंने बेस्ट इंडीज़
को उनके मैदान पर ही
दो टेस्ट मैच
तीन वनडे मैच
तीन टी-20मैचो
की सीरीज भराई।
वन डे मैच की 222
पारियों में सबसे तेज
11000 रन बनाने वाले
खिलाड़ी बने।वे International
Circket 417 पारी में
सबसे तेज 20,000 रन
बनाने वाले खिलाड़ी भी बने।
  वे टेस्ट में सात दोहरे
शतक लगाने वाले पहले
भारतीय खिलाड़ी और
भारतीय कप्तान बने।
कमाई के मामले में भी
भारत की 100 हस्तियों
की सूची में पहले नंबर पर
आ गये।
  252.72 करोड़ की
कमाई के साथ बिराट
को सबसे ऊपर जगह दी।




रविवार, 19 जनवरी 2020

हाजी अली दरगाह

यह मुम्बई में समुद्र तट पर स्थित है।
यह एक ऐसी दरगाह है, जहां सभी
धर्म के लोग दर्शन करने आते हैं।
यह दुनिया की सबसे अमीर दरगाह
मानी जाती है।इसे सैप्यदपीर हाजी
अली शाह बुखारी की स्मृति में
सन् 1431 में बनवाया गया था।
  मोईनुद्दीन चिश्ती,,,,,,का जन्म
      ,,,536 हिजरी संवत अर्थात
,,,1141,ई, पू, एशिया के सिस्तान
क्षेत्र में हुआ था।यह भी दुनिया की
सबसे मशहूर दरगाह हैं, यहां पर भी
सभी धर्मों के लोग दर्शन के लिए आते
है।

शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

नौकरी के इतने काम

नौकरी के इतने काम
कि ,,,,पहले एक कमाते थे,
        ,और नौ लोग बैठ खाते थे,
      , इसलिए उसे,, नौकरी,,कहते थे,
   ,बाद में एक कमाता था,
 ,और चार का लेते थे,
, इसलिए उसे,,चाकरी,,कहते थे,
, इसके बाद जितना मिलता था,
,वह खुद के तन के लिए पूरा पड़ता था,
, इसलिए उसे,,तनख़ा ,,कहते थे,
,अब तन को भी नहीं पूरा पड़ता,
, इसलिए उसे ,,बेतन,,कहते थे,
अब आज कल लड़के,
, फोन लेने के लिए ,जांब, करते हैं,
इसलिए उसे ,, सेलरी,,कहते हैं,,,,,
     अगर आप को पैसा कमाने का
शौक है तो यहां जाये,और खूब पैसा
कमाते यहां पर जाकर,,,,,

गुरुवार, 16 जनवरी 2020

एक किसान की अधूरी कहानी

एक गांव में एक गरीब किसान
रहता था। वह दिन भर मेहनत
मजदूरी कर के किसी तरह
अपना और अपने परिवार
का भरण पोषण करता था।
वह इतना गरीब था कि उस
के तन का कपडा भी फटा
पुराना र हता था।वह अपने
लाइफ के विषय मे हमेशा
सोचता कि अब आगे हमारे
का होगा।हर तरफ उसको
अंधेरा नजर आने लगा।
उस किसान को कही पर भी
कोई मार्ग नजर नही आ
रहा था।उधर खेत मे जुताई
बुआई का समय आ गया।
पर उस किसान के पास
जुताई करने के लिए खुद
का बैल तो था,मगर उसके
पास बीज बोने के लिए पैसे
नही था।उसने अपने पडोसी
मनिक राम से कुछ पैसे कर्ज
के तौर पर लिया,और किसान
बोला जैसे ही हमारी फसल
पक कर तैयार हो जायेगी
वैसे ही हम आप का लिया
हुआ उधार पैसा हम अपनी
फसल बेच कर आप को
चुका दूगा।
और फिर दूसरे दिन उस
किसान ने सुबह उठकर
उसने अपने दोनो बैलो को
चारा खिलाया फिर थोडी
देर बाद उसने खेत मे जुताई
करने के लिए उसने अपने
बैलो को अपने साथ ले गया।
   फिर वह किसान अपने खेत
मे बैलो से जुताई करने लगा।
थोडी देर जुताई करते करते
उस किसान के हल मे कुछ
फस गया।और बैल रूक
गये,उस किसान ने हल को
उठाया और देखा,वह एक
छोटा सा घडा था,जोसोने
के सिक्कों से भरा हुआ था।
वह किसान उसे थोडी देर
देखता रह गया,मनो उसे
यकीन ही न रहा,
 फिर उसने अपने बैलो को
खोल और उस घडे को
लेकर घर वापस लौट आया।
दूसरे दिन वह किसान उसमे
से पाँच सिक्के लेकर वह
अपने नजदीकी बजार मे
एक सोनार के पास गया।
और उसने उस सिक्के को
सही दाम मे बेचा।फिर वह
घर वापस आया,उसने सबसे
पहले उधार के लिए कुछ
पैसे उन लोगो को दिया,
और बचे हुए रूपया को
उसने पहले अपनी जरुरत
की घर की चीजो को खरीदा।
और अपनी परिस्थितियों में
सु

बुधवार, 8 जनवरी 2020

नौकरी की तलाश

किसी नगर में एक युवक अपने
नौकरी की तलाश में थककर एक
पेड़ के नीचे लेट गया। कुछ समय
बाद एक महिला वहां पर आई।
  सहानुभूति प्रकट करते हुए उसने
पूजा,,, बेटे तुम बिमार हो।
   लड़के ने कहा नहीं मैं तक गया हूं।
यह सुनकर वह महिला जोर से
चिल्ला ई ,,, तुम बड़े मूर्ख हो,,,
तुम नहीं जानते यह मेरा बगीचा है।
यहां बिना अनुमति के कोई प्रवेश
नहीं कर सकता,,,,,,,,,,,

मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

बहुत समय पहले की बात

बात उस समय की है जब,
लोगों के पास मोबाइल फोन
नहीं हुआ करता था। तब
घर परिवार के सभी लोग
एक साथ रहते थे।
    उस समय उन लोगों के हाथों
मे कुछ न कुछ कला होती थी।
उस समय वह लोग खाली नहीं
बैठते थे , कुछ न कुछ कला
करते ही रहते थे।साथ बैठकर
खाना खाते थे,एक साथ बैठने
का मजा ही कुछ अलग होता है।
  पर अब देखो जब से लोगों के
हाथों में मोबाइल आ गयी है
तब से लोगों को एक साथ
बैठने का मौका ही नहीं
मिलता है।आज का समय
कितना बदल गया है,अब
पहले जैसे लोग नहीं रहे।
अब वह कला लोगों के हाथों,
में नहीं ,जो क ई वर्षों तक मठ
मन्दिरों का निर्माण किया जा ता
था।और पहृले के लोग अपनी
कलाओं का प्रर्दशन करने ,य अपना
हुनर दिखाने का मौका मिलता था।






शनिवार, 28 दिसंबर 2019

परिश्रम

हर इंसान को परिश्रम करना चाहिए।
यहाँ सभी सफल होने की इच्छा
रखते हैं।यहाँ सफल होने वाले

इंसान की संख्या बहुत ज्यादा
नही है।अधिकांस आदमी सफल
नही होते।असफल होने पर
दुख होना स्वभाविक हैं।लेकिन
फिर भी हमे निराश नहीं होना
चाहिए।हमे सफलता के लिए
लगातार प्रयास करते रहना
चाहिए। परिणाम की चिंता
किये बिना अपना कार्य करते
रहना ,,,,,,,,, सफलता का,,,
      मूल   मंत्र  हैं  ।

गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

चाँद ग्रहण की सराहना

देख आया चंद्र गहना...।
देखता हूँ दृशय अब मै,
मेड़ पर इस खेत की बैठा अकेला ...।।
एक बीते के बराबर...।
यह हरा ठिगना चना
बाँधे मुरैठा शीश पर....।
छोटे गुलाबी फूल का,,,,,
सज कर खडा हैं ....।।

मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

सीखने का सिलसिला

अगर आप कुछ सीख रहें है,
य सीखना चाहते हैं तो आप, सीखने
का सिलसिला लगातार जारी रखे।बीते हुए कल
से आज हमारा कुछ बेहतर हो।
यह बेहतरी की सोच बिचार किसी भी
मामले मे हो सकता हैं।
   कुशलकरमी  बने रहने के लिए
अपने कौशल को बढातेऔर निखारते
रहना चाहिए।हम सब जानते हैं।
दुनिया परिवर्तन शील हैं।

नौकरी का बाजार भी कई प्रकार के
परिवर्तन का गवाह रहा।
 आज मै यानी वर्तमान मे जीना श्रेष्ठ माना जाता है।
यह विज्ञान नही एक कला हैं।

सोमवार, 23 दिसंबर 2019

सुबह उठकर न करे ऐसा

अगर आप सुबह उठकर
ऐसा करते हैं, तो आज से
आप यह जान ले,कि आगे से
आप ऐसा न करे...सुबह उठतेही
आप नहाये नही ,आप के शरीर
का तापमान विगड सकता हैं।


शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

यह प्यास कब बुझेगी

चुप खडा बगुला,
डुबाए टाँग जल मे,,
देखते ही मीन चंचल,
ध्यान निद्रा त्यागता हैं,,
चट दबाकर चोच मे,
नीचे गले के डालता हैं,,
एक काले माथ वाली, चतुर चिडिया,
सफेद पंखो के झपटे मार फौरन,,
टूट पडती हैं भले जल के ऊपर,
एक उजली चटुल मछली,,
चोच पीली मे दबाकर,
दूर उडती हैं गगन मे,,,,,,,,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

सही निर्णय

कुछ समय पहले की बात है,
  एक बार राजकुमार गौतम,
अपने बगीचे में सैर कर रहे थे।
    उसी समय अचानक एक,
घायल हंस उनके सामने आ गिरा।
  उसका शरीर
तीर लगने से घायल,
हो गया था।
  राजकुमार को उस  हंस पर दया
आ गयी।
और फिर उसने उस हनस को गोद
   मे उठा लिया।
वे प्यार से उनके पंखो को सहलाने लगे।
  फिर उसने धीरे से उसके शरीर से
तीर निकाला, और उसके घाव को साफ
  किया, फिर उस हंस को पानी पिलाया
धीरे धीरे हंस की पीडा कम होने लगी।
  कुछ समय बाद राजकुमार का चचेरा
भाई गौतम दौडता हुआ वहां आया।
  वह बोला यह।इस मजे दे दो यह मेरा
शिकार हैं।
  गौतम ने सवाल किया‌‌,,,तुमने इस पक्षी
     को घायल किया।इसने तुम्हरा किया
वीगाडा था।
    मैंने इसे बचाया हैं यह मेरा है,मैं इसे
तुमको नहीं दे सकता।यह कहकर वह
राजमहल की ओर चल दिया ,देवदत्त
भी पीछे पीछे चल दिया।
  दोनों निर्णय के लिए राजा के पास पहुंचे।
देवदत्त ने अपनी बात कही ।गौतम मेरा हंस
नहीं दे रहा है।यह हंस मेरा है इसे मैनै मारा है।
   गौतम बोला मैंने इसे बचाया हैं,यह मेरा है।
राजा ने दोनों की बातो को सुना।
  राजा ने कहा,,,, मारने वाले से बचाने
वाला अधिक बड़ा होता है,,,,
  अतः इस हंस पर गौतम का अधिकार है।
राजकुमार गौतम आगे चलकर,,,

गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

चालाक लोमडी और सारस

कुछ समय पहले की बात है।
  किसी जंगल में एक लोमडी,
और एक सारस रहते थे।
   दोनो मे खूब मित्रता थी।
दोनो सारे काम साथ साथ ,
   करते थे।
एक दिन की बात है, लोमडी ने,
    सारस को अपने यहाँ दावत
पर बुलाया।
  लोमडी ने अपने मित्र के सम्मान में,
     मीठी खीर बनाई।
उसने इस खीर को एक चौडी,
   थाली मे परोस दिया।
लोमडी बोली भाई सारस,
  आओ खाना शुरू करें।
दोनो साथ साथ खाने बैठ गये।
   लोमडी तो तेजी से सारी,
खीर खा गयी।
   लेकिन सारस की बडी चोच,
मे खीर न पहुंच सकी।
    उसे भूखा रहना पडा।
वह लोमडी से वोला.....
   आप का भोथन वहुत,
स्वादिष्ट था।
   आज शाम का खाना आप को,
मेरे यहाँ करना हैं।
   सारस लोमडी से बदला लेना,
चाहता था।
उसने बढिया शोरवा पकाया।
  शाम को लोमडी मित्र के घर,
आ पहुंची।
    शोरवे की मीठी सुंगध से,
लोमडी की भूख तेज हो गयी।
  सारस ने सुराही मे शोरवा परोसा।
जिसका मुँँह बहुत छोटा,और ,
   पतला था।
सारस ने बहुत आराम से,वर्तन
  मे चोच डाली और बडे मजे से
सारा सोरवा पी लिया।
   लोमडी भूख के मारे चुपचाप,
बैठी यह सब देखती रही।
  लोमडी अब समझ चुकी थी,
कि उसने अपने मित्र के साथ ,
 चालाकी दिखा कर बहुत बडी,
 गलती की हैं।
ऐसा करके अब वह अपने,
व्यावहार पर पछता रही थी।

रविवार, 8 दिसंबर 2019

मेरा कल्पना शील मन

मेरा कल्पनाशील मन अनेक
बार अनेक चीजो को देखता हैं।
कभी कभी मै कल्पना करता हूँ
कि यदि मेरा खुद का स्कूल
होता तो....
  मुझकों लगता कि मानो
हमारे ऊपर बहुत सी जिम्मेदारी
आ जाती।और मै उसे बाखूबी
निभाता।
 सबसे पहले मै स्कूल की सारी
व्यवस्था को नियमित रूप से
करता।
 स्कूल सही समय पर खुले,
सही समय पर उपस्थित,
  सही समय पर प्रार्थना हो,
समयनुसार सभी कलास
 पीरियड लगे,इस काम को
मै प्राथमिकता देता।
 हमारी देख मे ,परीक्षा की
योजना पढाई के लिए अत्यंत
 हितकर हैं।
और हम प्रयास करेंगे कि,
 छात्रो की समय समय पर
छोटी छोटी परीक्षाएं हो।
  साल भर मे कम से कम
दो बार बडी परीक्षा कराते।
 जिससे छात्र छोटी परीक्षा
के माध्यम से, विषय को
सारपूर्ण समझ सके।
 और बडी परीक्षा के द्धारा
पूरा पाठ्यक्रम तैयार कर सके।
  नकल और धोखाधड़ी को
समाप्त कर देता।
  मै स्कूल में उन गुदडी के
लालो को पहचानने और
विकसित करने का पूरा प्रयास
करता,...जो गरीबी के कारण..
अपनी प्रतिभा का विकास
नही कर पाते।ऐसे छात्रो
को प्रोत्साहन और सहायता
दिलाने का प्रयास करता।
  खेल कूद का बढावा देता।
बच्चों को समय समय पर
खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित
कराते,और उसमे उनको
पुरस्कार विजेता घोषित करते।
   बाद विवाद ,नाटक,अभियान,
भाषण,आदि कार्य मे बच्चों
को गहरी रूचि दिलाते।

 इसकेलिए मै कला संपन
अध्यापक का एक उत्साही
मंडल तैयार करता,जो
बच्चों में यह सब कला
विकसित करतेऔर
उनका चहुंमुखी विकास
करने मे उनकी सहायता प्रदान
करते।
  हमारा प्रयास होता कि
  हमारे स्कूल के छात्र केवल
ग्रहक न हो,अध्यापक ज्ञान
विक्रेता न हो।
  उनमे ज्ञान,श्रद्धा और प्रेम
का गहरा सम्बध हो।
   इसके लिए मै हर संभव
प्रयास करता।
   मै अपने अध्यापक और
छात्रो के बीच निरभयता का
वातावरण वनाता,जिससे
सब एक दूसरे को अपनी
भावनाऐ कहसुन सके।
     मै समझता हूँ कि...
इन उपायों मे मेरा स्कूल...
   एक श्रेष्ठ स्कूल बन जाता।

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

एक सज्जन इलाहाबाद पहुंचे

गांव से चलकर एक सज्जन इलाहाबाद
पहुंचे। जेसे ही ्् वह टेंशन से
उतर कर बाहर निकले , वैसे ही
एक लड़का आकर उनके पैरों
पर गिर जाता है,और कहता है,
अरे चाचा जी ,आप कहां थे,,,
    आप ने यहां तक आने में
इतनी देरी लगा दी।और हम
कब से आप की राह देख
रहे हैं।तभी सज्जन महोदय
ने कहा आप कौन हो भाई
हमने आप को पहचाना नहीं।
   अरे आप ने हमें नहीं पहचाना,,
हम आप के दूर के चाचा के
मामा का लड़का मोहन हूं।
  मोहन ,,कौन मोहन,,
खैर छोड़ो,अब मैं बूढ़ा हो गया,
इसीलिए,निगाहें कमज़ोर हो
गरीब हैं,हो तुम पहचान में
नहीं आ रहे हो।
   खैर छोड़ो,अब एक से भला
दो लोग हो गये
  अब इलाहाबाद घूमने मे काफी
मजा आएगा।
  अब वह सजजन अब मोहन
के साथ इलाहाबाद घूमने लगे।
   चलो कोई साथ तो मिला।
कभी इस मंदिर से उस मंदिर,
अब पहुंच गये गंगा घाट।
मोहन,,न हां ले।
 हां हां नहा लीजिए।इलाहाबाद
घूमने आऐ हैं, नहाये नहीं,
यह कैसे हो सकता हैं।
अब महासय  गंगा मे डुबकी लगाई
हर हर गंगे।बाहर निकले तो
महासय का सारा सामान गायब।
  कपड़े गायब,,मोहन भी गायब।
मोहन ऐ मोहन।
लेकिन मोहन वहां पर हो
तो बोले।अब महासय
तौलिया लपेटे खड़े हैं।अरे
भाई साहब आप ने मोहन
को  देखा है ।
कौ



अच्छे इंसान ही ठगे जाते हैं...

 ठगे जाने पर भी, अफ़सोस नहीं होना चाहिये।     क्यों कि  ठगे जाने के लिए, इंसान के भीतर क ई      खूबियां होती हैं। अच्छे दिल, साफ सोच,,   और ...

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