बहुत पुरानी बात है।शहर से हजारों मील दूर ,नदी के किनारे एक छोटा सा गांव था। वहां पर बहुत सीधे
साधे लोग निवास करते थे।उसी गांव से
थोड़ी दूर पर एक साधू संत अपनी झोपड़ी बना
कर रहता था। वह साधू त
पस्वी के साथ
ज्ञानी भी था। वह अपने तप और ज्ञान के
बल पर सब कुछ देख सकता था,आने वाले
कल के विषय में भी बता सकता था।
गांव के लोग उस साधू संत की बातों
को मानते थे,और उसके ज्ञान को सुनते थे।
गांव से तकरीबन पांच किलोमीटर दूर
एक बहुत बड़ा पहाड़ी क्षेत्र था।वह वहुत
वडा पठार था।
एक दिन लोग उस साधू संत के पास
बैठै हूं थे,तभी वह साधू बोला आप लोग
संभल जाओ और इस गांव को छोड़कर
कहीं दूर जाकर अपना आशियाना बना लो।
यहां बहुत बड़ा भूचाल आने वाला है।
उस साधू-संत की बात कुछ गांव के लोगों ने
मान कर उस गांव को छोड़कर चले ग्रे।
लेकिन कुछ लोग नहीं माने और वही
गांव में ठहरे रहे।
इसलिए कि उस पहाड़ पर चंबा नाम की
डायन रहती थी।वह लोगों को डराती और
उस गांव में से जब भी आती तब वह एक
आदमी को उठा ले जाती थी।
और फिर एक दिन वह चंबा नाम की डायन
आई और पूरे गांव को श्राप देकर चली गई।
उसने श्राप इसलिए दिया कि वह साधू
अपने तप से उस चंबा नाम के डायन
को उस गांव में आने नहीं दे रहा था,और
न ही किसी आदमी को उस गांव से
ले जाने देता था, इसलिए उस डायन ने
वहां पूरे गांव को श्राप दे दिया और कहा
""अगर मैं किसी को यहां से ले नहीं जा,
सकती और इस गांव में आ नहीं सकती,
तो आज मैं इस पूरे गांव को श्राप देती हूं
कि इस गांव के सभी लोग आज पत्थर के
हो जायेंगे""
उसी दिन सभी लोग पत्थर के हो गये।
साधे लोग निवास करते थे।उसी गांव से
थोड़ी दूर पर एक साधू संत अपनी झोपड़ी बना
कर रहता था। वह साधू त
पस्वी के साथ
ज्ञानी भी था। वह अपने तप और ज्ञान के
बल पर सब कुछ देख सकता था,आने वाले
कल के विषय में भी बता सकता था।
गांव के लोग उस साधू संत की बातों
को मानते थे,और उसके ज्ञान को सुनते थे।
गांव से तकरीबन पांच किलोमीटर दूर
एक बहुत बड़ा पहाड़ी क्षेत्र था।वह वहुत
वडा पठार था।
एक दिन लोग उस साधू संत के पास
बैठै हूं थे,तभी वह साधू बोला आप लोग
संभल जाओ और इस गांव को छोड़कर
कहीं दूर जाकर अपना आशियाना बना लो।
यहां बहुत बड़ा भूचाल आने वाला है।
उस साधू-संत की बात कुछ गांव के लोगों ने
मान कर उस गांव को छोड़कर चले ग्रे।
लेकिन कुछ लोग नहीं माने और वही
गांव में ठहरे रहे।
इसलिए कि उस पहाड़ पर चंबा नाम की
डायन रहती थी।वह लोगों को डराती और
उस गांव में से जब भी आती तब वह एक
आदमी को उठा ले जाती थी।
और फिर एक दिन वह चंबा नाम की डायन
आई और पूरे गांव को श्राप देकर चली गई।
उसने श्राप इसलिए दिया कि वह साधू
अपने तप से उस चंबा नाम के डायन
को उस गांव में आने नहीं दे रहा था,और
न ही किसी आदमी को उस गांव से
ले जाने देता था, इसलिए उस डायन ने
वहां पूरे गांव को श्राप दे दिया और कहा
""अगर मैं किसी को यहां से ले नहीं जा,
सकती और इस गांव में आ नहीं सकती,
तो आज मैं इस पूरे गांव को श्राप देती हूं
कि इस गांव के सभी लोग आज पत्थर के
हो जायेंगे""
उसी दिन सभी लोग पत्थर के हो गये।

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