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लेकिन यहॉ तक पहुंचना बहुत कठिन हैं !
यहॉ तक पहुंचने के लिऐ बगुंत कठिन डगर से
गुजरना पडता है ,किन परेशानियो से लोग
यहॉ मंजिल तक पहुचते है,यह तो वही लोग
जान सकते है!!!
शहर से दूर ,गांव के किनारे एक छोटा सा
जंगल था ! उसी जंगल में रघू नाम का बदमाश
अपने कुछ साथियों के साथ रहता था !
वह इतना बडा बदमाश था कि वहॉं
आस पास के जितने भी गॉंव थे, उस गॉंव
के सभी लोग रघू नाम के बदमाश से डरते थे !
उसका लूटने का तरीका सबसे अलग था !
वह जब भी किसी को लूटने जाता था,
तो उस गॉंव में डुगडुगी बजवा देता था, कि हम
इस दिन को इस आदमी को लूटने आ रहा हूं ,
इतना अधिक लोग उससे डरते थे !
रघू जिस दिन डुगडुगी बजवाता ,वह उस दिन
उस के पास पहुंच जाता ,और उसेलूट कर दिन में
ही चला जाता था ! लोग खुशी से उसे अपने घर
का सारा सामान दे भी देते थे !
रघू बदमाश को ऐसे करते करते कुछ
समय बीत गया, तब एक दिन रघू अपने
साथियो के साथ बैठा और बोला ! अरे भाई
अब हम लूट पाट बंद कर अपनी शादी
करना चाहते है....
इसमे हम आप सब की राय जानना चाहते हैं,आप लोग अपनी राय बताये हम अपनी शादी
कैसे करें !
एक ने कहा...यारअपनी लडकी तुम को कौन देगा !
दूसरे ने कहॉ..यह कैसे संभव है, तुम तो एक डाकू हो !
तीसरे ने कहॉ...तुम आस पास के गॉंव में इतने मशहूर
हो तुम को सब जानते हैं !
चौथे ने कहॉ...यार इन सब की बाते छोडो और मेरी सुनो !
रघू ने कहॉ...चल ठीक है भाई तू भी अपनी राय बोल,,,
ठीक है तो सुनो...हम सब यह चोरी छोड कर शहर
चल चलते है, शहर में अपना एक साथी रामू है हम
लोग उसी के साथ रह लेगें,,,का बोलते हो भाई लोग,,
सही है यार ,वहॉं हम को कोई पहचाने गा भी नही,
और हम लोग शहर में सराफत की जिंदगी से रह कर
अपनी अपनी शादी कर लेगे....
एक दम सही हैं हम लोग कल ही शहर के
लिए रवाना होगे, सभी लोग कल की तैयारी कर
लो,ठीक कल सुबह ही हम लोग शहर के लिऐ
निकलते हैं, सुबह हुई रघू अपने साथियो के
साथ शहर के लिए रवाना हो जता है ...
गाडी पर बैठकर रघू ,शहर नें रह रहेअपने
साथियो के सथ शहर पहुंच जाता है !
वहॉं रघू अपनेसथियों के साथ एक नई
जिंदगी के साथ खुशी खुशी वहॉ पर
रहता है,और कुछ दिन शहर ंमें रहने के बाद
रघू अपनी और अपने साथियो की सादी
कर लेता है , और अपने परिवा के साथ
खुश रहता है ...इस कहानी से हम सब को का सीख मिली
कमेंट करें...tags: # motivationstory
# motivationfactstory
#newstory#likestory
किसी एक गांव में राघव नाम का आदमी रहता था !
वह बहुत आलसी था, काम बूत कहीं करता नहीं था ,
ऊपर से वह अपनी वीवी को बेवकूफ बनाता,बोलता
देखो जी ,गरमी के महीने में हमें बहुत गरमी लगती है,
और ठडं के महीने में हमें ,बहुत ठडं लगती है ! और रहा
सवाल बरसात का तो वरसात में ,काम कहीं लगता ही
नही,इसीलिए हम कहीं काम पर जाते नही!!
हमारी बीबी दूसरो के खेत में ,~घरो में बरतन झाडू
कर , और बचे हुऐ खाने ,जो लाती है ,वही हम दोनो
मिल बॉंट कर खॉं लेते है ....
गरमी का समय था, एक दिन राघव की बीबी गरमी
में काम कर घरआई , और राघव से बोली.....
देखो जी...
कल से तुम काम पर जाओगे,मै इतनी गरमी में काम पर
नही जाऊगी, गरमी के मारे हमारा बुरा हाल हो गया है !
य तो पॉंच दिन के अंदर हमारे लिए पंखा ला दो नहीं तो
कल से तुम काम पर जाना,मै काम पर नही जाने वाली !
सुना तुमने ,,,काम के न काज के,
दिन भर घर में आलसी के तरह पडे रहते हो,,,
न तो तुम गरमी में,और न ही ठडी में ,काम करोगे,
तो बताओ तुम काम कब करोगे,,,,मैं कुछ सुनना
नही चाहती,हमें पंखा चाहिए तो चाहिऐ ,!
बीबी की इतनी बात सुन राघव का मूड
खराब हो गया,,,,वह
घर से बाहर आ कर एक पेड के नीचे बैठ गया,,,और सोचने लगा,इतना पैसा कहॉ से लाऊ !
जिससे हम एक पंखॉ खरीद सकें,,,
तभी वहॉं एक भिखारी आया,बोला मालिक
के नाम पर कुछ दे दे बाबा,,,,राघव बोला
एक तो मेरा दिमाग खराब है, दूसरे यह मेरे
से पैसे माग रहा है ! राघव बोला ,चल भग
यहॉं से ,भिखारी बोला ,मै तो जा रहा हूं
लेकिन तू आज किसी के हाथो पिटने वाला है !
राघव वोला ,कौन मारेगा मुझे तू जा न यहॉं से !
वह भिखारी,वहॉं से चला गया,,,,,
अब राघव के कुछ समझ न आ रहा था,
वह पेड के पास से उठा,गांव की ओर चल दिया,
गॉंवमें जा कर राघव सब के घरो मे इधर उधर
ताकाझाकी करने लगा, तभी उसने देखा कि
एक घर में पंखॉं रखा हुआ है, राघव चोरी की
नियत से उस घर में घुसा और पंखा चुरा कर
जैसे ही घर से बाहर,आना चाहा, घर के मालिक
ने राघव को पंखा ले जाते देख लिया, फिर जोर
से सोर मचा दिया,,,,,चोर चोर चोर देखो मेरा पंखॉ
लेकर भाग रहा है,,,यह देख ,गॉंव के लोगो ने
राघव के पकड लिया ,फिरखूब धोये....
तभी वहॉ गॉंव का मुखियॉ आ जाता है
फिर ऱाघव को वचा लेता है,,,
Tags..motivation story
#faststory#longstory
Shortstory
कहते हैं,समय बडा बलवान होता है /
कब किसकी तकदीर कहां बदल जाय,
कुछ कहॉ नही जा सकता ///
कुछ समय पहले की बात है,
रोड के किनारे दो भिखारी हाथ में
कटोरा लिए सडक के किनारे बैठ कर
भीख माग रहे थे /
ऊपर वाले के नाम पर कुछ दे दे बाबा,
ऊपर वाला आप का भला करे गा ?
दे दे बाबा, ऊपर वाले के नाम पर
कुछ देता जा बाबा //
उधर से आते जाते लोग कुछ न कुछ
उस कटोरे मे डाल देते और चले जाते ?
वह दोनो दिन भर भीख मागते ,
और शाम को उस पैसे से दाल रोटी
लेकर खा कर सो जाते , सुबह उठते
तो फिर भीख मागते,,,,,ऐसे करते
कुछ दिन बीता,,,और एक दिन दोनो
भिखारी रोज की तरह रोड के किनारे बैठ कर
भीख माग रहे थे, तभी वहॉ पर एक
बडी सी गाडी आई और खडी हुई //
और उस गाडी से एक मोटा सा
तगडा सा सेठ आदमी उस गाडी
से वाहर निकला,, फिर उस ्भिखारी
के पास गया,,और सेठ ने कहॉ.....
मै काफी दिनो से देख रहा हूं,
तुम दोनो,इसी पेड के नीचे छाव
में बैठ कर,रोज भीख मागते हो,,,
मैने सोचा आज तुम को कुछ देता जाऊ्ं ///
उस सेठ ने अपने जेब से एक लाटरी
का टिकट निकाला और उस भिखारी
को दिया /// सेठ बोला कल इस
लाटरी का नंबर आयेगा ,पेपर से
मिलान कर लेना,,,,,,बाकी तेरी
तकदीर जाने,, दिन किसी तरह
बीत गये,रात आई,,,धीरे,धीरे रात
भी बीत गयी,सुबह हुई,,
वह भिखारी ,पेपर वाले के पास गया
उससे पेपर खरीदा,और लाटरी का टिकट
निकाला उस पेपर से मिलान करने लगा,,,
उसका नंबर पेपर से मैच कर गया,,
भिखारी बहुत खुश हुआ,,और
उस सेठ को धनबाद दिया.... उसकी
25 लाख की लाटरी लग गई //'
तब से उसने भीख मागना बंद कर दिया....
बाद में उसने अपनी एक छोटी सी
दुकान खोल ली,और अपने परिवार
के साथ,,खुश रहने लगा,,,
Tags..हसता है अपना परिवार !
खुशी के दो पल !
मै भिखारी हू्ंं !
हथ मे कटोरा !
एक महाजन सेठ !
दानवीर सेठ !
....
बहुत समय पहले की बात है...
किसी गॉंव में तीन चोर रहते थे !!
वह कही भी चोरी करने जाते तो तीनो,
साथ साथ चोरी करने जाते थे !!
एक दिन तीनो चोरो ने मिलकर बडी ,
चोरी करने का फैशला किया !!
तीनो चोर चोरी करने के इरादे से ,
घर से रात में निकले....
गांव से थोडी दूर पर एक सेठ जी का
मकान था,तीनो चोर चोरी करने के
इरादे से उस सेठ के घर में घपुसे,
घर में खट पट की आवाज सुनकर
सेठ जग गया,उसे लगा कि मेरे
घर में कोई चोर घुस आया है !!
सेठ जी ने अपने घर मे आहट
से जोर जोर से गांव वालो को
आवाज दिया,वचाओ हमारे़:
घरमें चोर घुसआयाहै...
|यह सुन कर गॉंव के सब
लोग दौड पडे, और उन ़तीनो
चोरो को पकड लिय !!
और तीनो चोरो को राजा
के पास ले गये !
राजा ने गॉव वालो की बात
सुनकर तीनो चोरो की फासी की,
सजा सुनाई गयी !!
जिसमे दो को फासी दे दी गयी,
जब तीसरे का नंबर आया तो ,
तीसरा चोर बोला ,
महराज,महराज हम सोने के
खजाने का राज जानता हूॉं
तब राजा बोले बको...
चोर ने कहा, महराज ,
आप यह सामने पडे हुऐ परती खेत में,
आप सोना बो दीजिये, इससे जो
पैदावारी होगी वह डबल हो जयेगी !!
राजा बोले,
तुम ने मुझे बेवकूफ समझ रखा है,
सोना कभी खतो में बोया जाता है का !!!
हॉं महराज यह सच है,
लेकिन इसका भी एक नियम है !!
नियम ,वह का..
नियम यह है..कि इतने बडे राज
में किसी ऐसे इंसान को बुलाया
जाय जिसने बचपन से लेकर ,
आज तक कोई चोरी य पाप न,
किया हो,उसके हाथो से इस
खेत में सोना बुआई कराया
जाय तो इस खेत में सोना पैदा होगा..
अब राजा सकते में आ गये,
तब राजा ने कहा मैने भी तो ,
वचपन मे चोरी की थी, वहॉ
उस दरबार में बैठे और पदाधिकारी गण
वह सब भी बोले कि हमने भी चोरी की थी !!
तब चोर बोला,,,,,
महराज ,यहॉ पर बैठे हुऐ ,
सभी पदाधिकारी गण चोर है,
जिसमें महराज आप भी सामिल हैं !!
तो पहले यहॉ बैठे सभी पदाधिकारी
गण को फासी दी जिये, और महराज
आप अपने आप को फासी दीजिये,,,,
तब बाद में हमें फासी दीजिये....
राजा थोडी देर चुप रहे....
उसके बाद बोले ,इस चोर को ,
छोड दिया जाया????
Tags..#thief#raja#people#land#gold
बगीचा में एक बडा सा आम का पेड हैं,
पेड बहुत हरा भरा हैं,
पेड के इधर उधर और भी छोटे छोटे पेड हैं,,
वह भी हरा भरा हैं,
पेड के पास एक छोटा सा तालाब हैं,,
तालाब में पानी भरा हुआ है,
पेड के आस पास छोटी बडी घास भी है,,
घास भी हरी हरी दिखाई देता है,
बडे आम के पेड पर एक हरा तोता बैठा है,,
तोता उस हरियाली को पेड पर बैठ कर देख रहा है,
एक समय की बात है, गॉव
से थोडा दूर पर नदी के किनारे
छोटी सी झोपडी बना कर उसी
झोपडी में बाबा चतुर दास जी
शिव की अराधना करते थे!
बाबा चतुर दास को दुनिया
की सारी जमाने पर राज करना
था, इसलिए बाबा चतुर दास
शिव की अकादमी कर शिव जी
सर वरदान पाना चाहते थे?
एक दिन बाबाचतुर दास
शिव की अराधना में लीन थे,
तभी भगवान शिव वहॉ
आये और बाबा चतुरदास
से बोले, चतुर दास मांगे,
कौन सा वरदान मागना
चाहतें है, चतुर दास बोला...
शिव जी अगर आप हमें
वरदान देना चाहते हैं तो मुझे
ऐसा वरदान दे कि....
जहां तक हमारी नजर
पड़े
वहसारी जमीन हमारी हो जाए...
शिव जी बोले ऐसा ही होगा...
इतना कह कर शिव जी गायन हो गये...
बाबा चतुर दास यह
वरदान पाकर बहुत खुश हो गया....
वह दुनिया की सारी जमीन देखने
के लिए वहां से पैदल दौडा,
इस तरह जमीनो की लालच में
भागते भागते उसकी शरीर में
कमजोरी आगयी, बाबा चतुरदास
को थकान महसूस होने लगी,
फिर भी बाबा जी भागते रहे,
और जमीनो को देखते रहे..
उनके अन्दर लालच की भावना
कम न हुई, और एक समय
भागते भागते ऐसा आया कि
बाबा चतुर दास बे सुध होकर
जमीन पर गिर पड़े, और उन की
कमर की हड्डी टूट गयी, कुछ देर
जीवित रहने के बाद बाबा चतुर
दास नगरी रहे, और इस तरह
बाबा चतुरदास के हिस्सा में
उतनी ही जमीन आयी, जितने
पर बाबा चतुरदास पड़े हुआ थे???
इसलिऐ कहते हैं लालच बडी वला है..
लालच किसी को नहीं करना चाहिए..
Tags.. #लालच#अहंकार#घमडं
#अतिसेअधिक#संयोग
#शांतमन#अजबकहानी
नवल में छाना कुछ खास है,,
जहां आता जाता कोई खास है,
हासिल करना मुझे वहां मुकाम है,,
राहे मंजिल पास नहीं...
खतरे सर भरा सफर आसान नहीं,,,
जब समय बुरा होता हैं, तो इंसान को
झुकना ही पड़ा है.....
Tag.. #newstorymotivation#newlikestory
#newmotivationstory2023
आदत डाल लो
ऐसे जमीन पर बैठ कर
खाना खाने की आदत डाल ले
ऐसे जमीन पर बैठ कर खाना
खाने से आप के सेहत के
लिए लाभदायक है...
साधा आदमी विदेश कमाने के लिए जाता है,
जिसका नाम लालमणि था! / विदेश पहुंचने
पर लालमणि एक सेठ के यहां नौकरी कर लेता
है /वह उस सेठ के यहॉं तकरीबन तीन साल
तक नौकरी करता है! तीन साल के बाद
बीजा की अवधि खत्म हो जाती है, और
लालमणि अपने घर आने की तैयारी करता
हैं, तभी उस के मन में एक आयडिया आता है,
लालमणि विदेश से कुछ डिजाइन कपड़े
खरीदा हैं, और उस कपडे को अपने साथ
लालमणि अपने गांव लेकर आता है /
लेकिन उस कपड़े में बहुत कुछ खासियत
थी जिसे लालमणि समझ न पाया,
पांच दिन आराम करने के बाद,
छठे दिन लालमणि उस कपडे को
एक ठेले पर सजा कर बजार ले
जाता है , और उस कपडे का दाम
पॉच सौ का एक बेचता है चूकि
कपडे डिजाइनर था इस लिए
खरीद दारो की लाइन लग
गई ,उधर सर एक जौहरी जा
रहा था भीड़ देख वह
भी ठहर गया और लालमणि
के पास गया उस कपडे को
नजदीक से देखा...
उस कपडे में एक खाशियत
यह थी कि उस कपडे में लगी
हुई बटन सोने की थी!
उस जौहरी को सबसे कुछ
समझ में आ गया, उस जौहरी
Fz पूछा भाई यह कपडा कितने
का हैं, लालमणि Fz कहे...
पंच सौ में एक,,,, इससे कम
में नही, तब जौहरी Fz लालमणि
सर कहॉ हम तुम को एक का हजार
दूगा..यह सुन कर लालमणि बहुत
खुश हुआ... उसने हजार के एक
के हिसाब से ठेले पर रखें सारे
कपडे गिन दिया, जौहरी उस
कपडे को लेकर अपने घर चला गया???
कभी कभी ऐसा हो जाता है,
इंसान को सही चीज का पता
ही नही ले पाता.....
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हनुमान बहुत ही वलशाली थे ,
उनके आगे बडे से बडे योधा,
पीछे हट जाते थे ?
विराट समुंदर को देखकर वानर दल
में निराशा छा जाती है,हनुमान भी
निराश होकर एक शिला पर बैठ जाते
हैं,तब जामवंत ने हनुमान जी को उन
के बल का एहसास दिलाया,तब हनुमान
अपने विराट अवतार मे आ जाते हैं,और
सिंधू लाघ जाते हैं,लंका पहुंचकर सीता
जी की खोज करते करते अशोक वाटिका
पहुंच जाते हैं? यहॉ सीता जी को रावण
अपनी अंतिम चेतावनी देता है,कि एक
माह के भीतर मुझे अंगीकार कर ले
अथवा वह उनको मार देगा....
रावण के अशोक वाटिका से
जाते ही ,हनुमान सीता माता के
सामने राम की अगूंठी पेडं से नीचे
गिराते हैं,और सीता के सामने आते
हैं,और अपना पूरा परिचय राम के
सेवक के तौर पर देते हैं,माता सीता
समझ जाती हैं यह राम का सेवक
हनुमान ही है,हनुमान माता सीता
को राम की सारी बाते बताते हैं,
यकीन दिलाते हैं , तुम हमारे कंधो
पर बैठ कर हमारे साथ चलो ,भले
ही रावण कितना ही बलशाली हो, मगर
उनकी राछसी सेना मेरा कुछ भी नही
बिगाड सकती,मगर सीता मॉं
हनुमान के साथ जाने से मना कर
देती है,और हनुमान से कहते हैं,
जब हमारे रघुनंनदन यहॉ लकां
आऐगे तब हम उनके साथ जाऊगी...
तब हनुमान जी सीता से कहते हैं..
आया हूं सिधूं लाघ कर मै..इस कारण
हमे भूंख सताती है, यह पेडं फलो
सेलदा देख कर हमारी भूख बढती ही
जा रही है,सीता माता के आदेश के बाद
हनुमान जी भर कर पूरी वाटिका का
फल खाते हैं, और साथ ही वहॉ रखवाली
कर रहे राछसो की खूब पिटाई भी की ,
और सारी अशोक वाटिका उखाड कर
तहस नहस कर दिया ?
जब यह समाचार रावण के पास
पहुंचता है तो तब वह अपने बेटे
अछय कुमार को हनुमान को
पकडने भेजता है....
हनुमान के इस लडाई में अछय
कुमार मारा जाता है,इसके बाद
मेघनाथ हनुमान को पकडने के
लिऐ अशोक वाटिका जाता हैं,
और अपने मयावी बाणो से
हनुमान जी को वंदी वना लेता है,
और रावण के पास ले जाता है...
अरे रानी के पापा जरा सुनते हो, हॉं
रानी की मॉं बोलो मैं सुन रहा हूं ,अरे
आज अपनी बीटिया की सगाई है,सूब
धूम धाम से सगाई होनी चाहिऐ,कही कोई
कमी न रह जाय , उधर लडके वाले घर
पहु्ंचते है! रानी की सगाई धूम धाम से होती है,
रानी को किसी भी चीज की कमी नही होने दिया,
सब कुछ,दिया गया, और रानी को विदा किया
गया! रानी अपने घर पहुंचती हैं, वहॉं पर रानी
को दो चार दिन किसी भी चीज की तकलीफ
नही हुई, उसके बाद रानी को परताडित किया
जाने लगा ! और एक दिन रानी अपने पापा
को फोन करके जोर जोर से रोने लगी!
रानी बेटी का हुआ, पापा मुझे आकर
घर ले चलो,इतना कह कर रानी रोने लगी !
और अगले दिन रानी के पापा रानी के
घर पहुंचे ! रानी बहुंत परेशॉन दिख
रही थी ,उसके चेहरे से परेशानिया साफ
झलक रही थी, दर असल रानी के ससुराल
वाले बहुंत लालची थे ! वह रानी को इस लिऐ
परेशान करते थे कि उनको और धन की मॉंग
कर रहे थे ,पर रानी के पापा के पास और
कुछ देने के लिऐ बचा ही नही था , रानी
के पापा के पास जो भी धन था वह तो पहले
ही दान के तौर पर रानी को दे चुके थे !
पर रानी के ससुराल के लालची लोग
मानने को तैयार नही और एकदिन
रानी के ससुराल वालो ने मिलकर
पैसो के लालच में रानी को आग से जला
दिया ,रानी बेटी जल गयी, यह सुन कर
रानी के पापा को सदमा लग गया , मगर
रानी के पापा ने अपने आप को सभाला,
और फिर , ससुराल वालो के नाम एफ,
आई, आर हुआ, पुलिस आई, रानी के
ससुराल के सभी लोगो को पकड कर
अपने साथ ले गयी ! रानी के ससुराल
के सभी लालची लोगो को जेल हो गयी !
..कहते हैं कभी भी किसी को लालच
नही करना चाहिए, लालच का फल बुरा
होता है....
Tags..#मेरीरानीबेटी#एकघरकीकहानी
#बापबेटीकीकहानी#छोटीकहानी
............
कहते हैं समय एक जैसा नही होती....
समय बदलता रहता है, समय के साथ
सब कुछ बदल जाता है, ...कुछ ऐसा
ही सेठ जमुना दास जी के भी साथ हुआ....
सेठ जमुना दास एक जाना माना नाम
जिनकी अपनी एक पहचान है ,जिनका
अपना एक अलग नाम है..उनका एक
लडका राजू दास था ! जो पढने में तेज
बोलने में होशियार काफी चंचल भी था!
पर पढाई के दौरान ही राजू दास गलत
लडको के साथ पड कर उसे नशे की लत
लग गई ,वहलपूरी तरह विगड गया !
सेठ जमुना दास को जब अपने लडके
राजू दास के बारे में मालूम पडा , तब तक
बहुत देर हो चुकी थी ! तब तक राजू दास
बिगड गया था ! अब सेठ जमुना दास जी
को अपने लडके राजू दास की चिंता सताने
लगी! उसने अपने लडके की नशे की लत छुडवाने
के लिए बहुत दवा करवाई मगर कोई फायदा
नही हुआ ! सेठ जी बहुत परेशान रहते , अब
सेठ जी के समझ में कुछ भी नही आ रहा था,
पर एक दिन सेठ जी बैठे हुऐ थे, उनके
दिमाग में एक आइडिया आया! सेठ जमुना दास
जी बजार गये और बजार से कुछ फल ले आये,,
उसमें कुछ फल खराब भी थे,उस फल को घर
ले आऐ और उस फल को अपने लडके राजू दास
को अलमारी में रखने के लिये बोले , राजू दास
उस फल को लेजाकर आलमारी में रख देता है,
और फिर दूसरे दिन सेठ जमुना दास जी ने अपने बेटे
राजू दास से बोले , बेटा जो हमने तुम को कल फल
दिया था ,उस फल को जरा हमारे पास ले कर आओ !
वह उस फल को ले आया, राजू ने देखा , और बोला
पापा इसमें तो आधे से अधिक फल सडे हुऐ है,
हॉ बेटा, जिस चरह तुम नसा कर रहे हो , उस
तरह से एक दिन तुमारी सारी शरीर भी खराब हो
जायेगी,,,बेटा यह नशा छोड दो ...
राजू दास को पूरी बात समझ में आ गयी !
उसने गलत ....संगति ...छोड दी गलत लोगो के
साथ उठना बैठना छोड दिया .......
गलत संगति का असर छोडते ही
राजू दास धीरे धीरे फिर पहले जैसा
दिखने लगा,,,और वह खुश भी रहने
लगा...इधर सेठ जी की भी चिंता दूर हो गयी !
अब दोनो खुशी खुशी रहने लगे ...
Tags....संगति का असर #story
#motivation #boystory
हो ज
एक गॉव की अदभुत कहानी....
एक गॉव में एक परिवार में मॉं और बेटे जिसका नाम
राजू था, निवास करते थे ? मॉं बेटै बहुत गरीब थे ?
मॉं दूसरो के घरो और खेतो में काम करके राजू को
पढाती थी ? राजू भी पढने में ठीक था, वह खूब मन
.लगा कर पढाई करता था ?
बात उन दिनो की है जब राजू 7 वी कलास में पढ
रहा था , तभी वहॉं पर खेल कूद का आयोजन किया
गया, उस खेलकूद में राजू (first) आया, और राजू
को इनाम के तौर पर एक थाली मिली ? उस थाली को
राजू घर ले आया, और फिर राजू अपनी मॉं से बोला...
मॉं मॉं देखो मॉं, आज मुझे इनाम के तौर पर
यह थाली मिली हुई है ,यह थाली कितनी खूबसूरत
है, है न मॉं,....तब राजू की मॉ बोली, हॉं बेटा यह थाली
बहुत बहुत खूब सूरत है ! फिर का ,राजू की मॉं ने उसी
दिन से उस राजू की इनाम वाली थाली में खाना चालू
कर दिया ! अब तो राजू की मॉं बस एक ही राजू की
इनाम वाली थाली में खाना खाती ! ऐसे ही सुबह,
दोपहर और शाम मॉं जी को जब भी भूख लगती
मॉं जी वस उसी थाली में खाना खाती....
ऐसे करते करते दिन बीतता गया समय
वीतता गया,इधर राजू धीरे धीरे बडा होता गया,
इधर राजू 25 साल का हो गया, उधर मॉं की
ममता देखो, मॉंने राजू की थाली में खाना ,खाना
नही छोडा ! मॉं जी करीब 15 सॉल तक राजू
की इनाम वाली थाली में खाना खाती रही....
पर एक दिन मॉं की तबियत अचानक विगड गई!
वहइतना वीमार हुई कि पलग से उठ न सकी
और मॉं जी की तबियत अधिक खराब होने
के कारण उनका निधन हो गया !
मॉं के निधन के बाद राजू अब अकेला पड गया !तब एक दिन की निगाह उस थाली पर गई, जिस
थाली में मॉं जी 15 सालो से रोज सुबह शाम
खाना खाया करती थी ! राजू को 15 सॉल बाद
उस थाली का राज पता चला, राजू को अपने
बचपन की याद आ गई ! राजू ने देखा यह तो
वही थाली है, जो मुझे 7वी में इनाम में मिली थी !
यह सब देख कर राजू की आखों में आंसू आ गये !
एक मॉ की ममता ऐसे होती है....
एक मॉ अपनी औलाद से कितना पेरेम करती है,
यही तो मॉ की ममता है !!!!
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सेठ देवधर अपनी मॉ के साथ रहते थे !
उनके पास खूब ढेर सारा धन दौलत थी !
ढेर सा खेत भी था ! सेठ देवधर की मॉ
हमेशा गरीबो को दान दिया करती थी !
सेठ देवधर के घर में हमेशा खुशियॉ
रहती थी ! सेठ देवधर कॉ खेत हमेंशा
हरे भरे रहते थे ,सेठ के घर में कभी
किसी भी चीज की कमी नही रहती थी !
पर एक दिन सेठ की मॉ अचानक
बीमार पड गई ! सेठ जी अपनी मॉ का
इलाज कराते ,पर वह ठीक न हो सकी,
और एक दिन सेठ की मॉ का देहांत हो गया !
अब सेठ जी अकेले पड गये, सेठ जी का रो रो कर
बुरा हाल हो रहा था ! दर असल सेठ जी अपनी
मॉ की अंतिम इचछॉ पूरी न कर सके ! सेठ जी
की अंतिम इचछा थी कि मरते समय सेब खाना
चाहती थी,पर सेठ जी अपनी मॉ को सेब न
खिला सके और सेठ की मॉ इस दुनियॉ को
छोड कर चल बसी !
तब एक दिन लालच मे अंधा पंडित
उस सेठ के पास आया और सेठ जी से बोला ,
हम तुमहारी मॉ की शॉति के लिए हवन पाठ
करमा पडेगा, और हम पंडितो को एक एक
सोने कॉ आम दान देना पडेगा ! तबजा कर
मॉ जी को शॉति मिलेगी !
सेठ जी तैयार हो गये ,और दूसरे दिन
पंडित जी को अपने धर आने के लिए बोला,
दूसरे दिन पंडित वहॉ आया ,हवन का
समान मगा कर हवन पॉठ करने लगा !
हवन पाठ पूरा होने के बाद ,उन पंडितो ने
सोने का एक एक सेब लेकर वहॉ से चले गये !
यह है लॉलच में अंधॉ पंडित....Tags..#लालच में अंधा पंडित
#एक सेठ की कहॉनी
#छोटीकहानी
एक परिवार में तीन लोग रहते थे ?
मॉ, बाप और उनका एक लडका, तीनो
हसी खुशी अपने घर में रहते थें ? लडके
के पिता एक जौहरी थे,वह सोने चॉदी के
जेवर बना कर बेचते और अपने परिवार का
पेट पालते थे ? एक दिन लडके के पिता जौहरी
अचानक बीमार पड गये, वह इतनी तेज बीमार
हुऐ कि चारपाई से उठ नही पाये, वह इस कदर बीमार पडे
कि कुछ ही दिनो के बाद वह दुनिया छोड चल वसे ?
अब अचानक ही जौहरी के मरने के बाद उमके
घर में मुसीबतो का पहाड गिर गया ? उनके घर
मेंदूसरा कमाने वाला था नही,वही एक लडका था ?
यहदेख कर लडके की मॉ उदास रहती थी ?
एक दिन लडके की मॉ ने लडके से कहॉ, बेटा
अब घर कैसे चलेगा, लडके की मॉ ने कहॉ ,
हमारे पास कुछ जेवरात है , इसे बजार में
अपने चाचा के पास ले जा कर बेच ला ?
बदले में इससे जो पैसे मिलेगा, उससे ःघर
चलाया जायेगा ? और तब लडका उस जेवरात
को लिया और अपने चाचा की दुकान पर चल दिया ?
वहॉ दुकॉन पर पहुचने के बाद लडके ने उस जेवरात
को अपने चाचा को दिया,और उसे बेचने के लिऐ बोला,
उसके चाचा ने उस जेवरात को देखा ,और लडके से
बोलॉ...बेटा अभी बजार का भाव गिरा हुआ है, जैसे ही
बजार का भाव चढेगा,वैसे हम तुम को बोल देगे
तब इसे लाकर बेच देना,,, अभी मुझे एक भरोसे
मंद लडका चाहिए जो हमॉरे दुकान पर रह सके,
और सोने चॉदी की परख सीख सके ? लडका
तैयार हो गया और वह दुकान पर जाने लगा ?
उसने मन लगा कर सोने चॉदी के परख का
काम सीखा....
धीरे धीरे वह मन लगा कर कॉम कियॉ...
उसे सोने चादी का असली नकली गहनो
की पूरी परख हो गयी, उस लडके ने
उस बजारमें अपनी एक पहचान बना ली...
लोग दूर दराज से अपनी गहनो की पहचान
कराने के लिए उसके पास आते और अपने
गहनो की परख करा कर ले जाते, तब
आखिर में उसके चाचा ने उस लडकें को
उसके गहने वापस दिया, और बोले इसे
घर ले जाओ ? तब लडका उन गहनो को
घर ले जाता है , घर ले जा कर जब वह
लडका उन गहनो की जॉच करता है तो
वह गहने नकली निकलते है , तब वह लडका
भाग कर अपने चाचा के पास जा कर बोलता
है ,चाचा यह का ,यह गहने तो नकली है,,
तब उसके चाचा कहते हैं ,यदि हम उस
समय ,जब तुम यह गहने बेचने आऐ थे
तब तुम को हम यह कह देते कि यह नकली
है तो तुमको आज असली और नकली
गहनो की परख कैसे होती.
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#कहानीएकलडकेकी#कहानीएकमॉकी#कहॉमीएकपिताकी
बात उन दिनो की है ,पतझड कामौसम था !
हाथी और बकरी मे बहुत गहरी दोसती थी !
देनोएक दूसरे के बैगैर रह नही पाते थे !
एक दिन की बात है,जहॉ पर हाथी और बकरी
रह रहे थे वहॉ पर पतझड के मौसम के कारण
पेड से सभी पाती गिर गयी उन दोनो को खाने
के लिए वहॉ पर कुछ न बचा,हाथी और बकरी
दोनो वहॉ से खॉने की तलाश में निकल पडे !
चलते चलते कुछ दूरी पर उन दोनो को एक
बैर का हरा भरा पेड दिखाई दिया, जो तालाब के
किनारे एक किसान के खेत के मेढ पर था ! हाथी
और बकरी वे दोनो वहॉ उस बेर के पास पहुंचगये !
हाथी ने अपनी सूड से उस बैर की डाली को
पकड कर जोर से हिलाया, उसमें से ढेर सारी बैर
नीचे गिरी, और बकरी ने उस गिरे हुऐ बैर का ढेर
लगाया, तभी उस पेड पर बैठीहुई एक चिडिया,
जिसके पंख टूटे हुऐ थे वह चिडिया तालाब में जा
गिरी और वह ढूबने लगी तभी बकरी उस चिडिया
को बचाने के लिऐ तलाब मे कूद गई, पर यह का
बकरी तो तैरना ही नहीजानती थी ,अब तो बकरी
भी पानी मे ढूबने लगी,यह देख हाथी को रहा न
गया हाथी भी उन दोनो को बचाने के लिए पानी
मे कूद गया, और फिर हाथी ने चिडिया और बकरी
दोनो को पानी से निकाल कर बाहर सा कुशलहम को समय के साथ चलना चाहिए ?
जो समय के साथ नही चला वह पीछे ही खडा रह गया ?
समय के साथ साथ अपने सेहत का भी खयाल रखना चाहिए अपने शरीर के सेहत के लिए हम को रेसे दार चीजो का
सेवन करना चाहिए जैसे मूली, गाजर, चुकंदर, सेब,संतरा,
ताजी पतते दार हरी सबजियां आदि का अधिक से अधिक
सेवनकरना चाहिए, जिससे हमारे सेहत पर कोई असर
न पडे ? अपने शरीर में पानी की कमी न होने दे, दिन
मे कम से कम आठ लीटर पानी पीये ! सुवह उठ कर
कम से कम दस मिनट तक घास पर नंगे पैर चले ,
अपने सेहत का अधिक खयाल रखें !
चभी हमारा शरीर हिट और फिट रहेगा ?
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मां अपने तोतले बेटे से कहा। बेटा आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत । वर्ना वह लोग भी मना कर देंगे। बेटा...