बात उन दिनो की है ,पतझड कामौसम था !
हाथी और बकरी मे बहुत गहरी दोसती थी !
देनोएक दूसरे के बैगैर रह नही पाते थे !
एक दिन की बात है,जहॉ पर हाथी और बकरी
रह रहे थे वहॉ पर पतझड के मौसम के कारण
पेड से सभी पाती गिर गयी उन दोनो को खाने
के लिए वहॉ पर कुछ न बचा,हाथी और बकरी
दोनो वहॉ से खॉने की तलाश में निकल पडे !
चलते चलते कुछ दूरी पर उन दोनो को एक
बैर का हरा भरा पेड दिखाई दिया, जो तालाब के
किनारे एक किसान के खेत के मेढ पर था ! हाथी
और बकरी वे दोनो वहॉ उस बेर के पास पहुंचगये !
हाथी ने अपनी सूड से उस बैर की डाली को
पकड कर जोर से हिलाया, उसमें से ढेर सारी बैर
नीचे गिरी, और बकरी ने उस गिरे हुऐ बैर का ढेर
लगाया, तभी उस पेड पर बैठीहुई एक चिडिया,
जिसके पंख टूटे हुऐ थे वह चिडिया तालाब में जा
गिरी और वह ढूबने लगी तभी बकरी उस चिडिया
को बचाने के लिऐ तलाब मे कूद गई, पर यह का
बकरी तो तैरना ही नहीजानती थी ,अब तो बकरी
भी पानी मे ढूबने लगी,यह देख हाथी को रहा न
गया हाथी भी उन दोनो को बचाने के लिए पानी
मे कूद गया, और फिर हाथी ने चिडिया और बकरी
दोनो को पानी से निकाल कर बाहर सा कुशल
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें