सेठ देवधर अपनी मॉ के साथ रहते थे !
उनके पास खूब ढेर सारा धन दौलत थी !
ढेर सा खेत भी था ! सेठ देवधर की मॉ
हमेशा गरीबो को दान दिया करती थी !
सेठ देवधर के घर में हमेशा खुशियॉ
रहती थी ! सेठ देवधर कॉ खेत हमेंशा
हरे भरे रहते थे ,सेठ के घर में कभी
किसी भी चीज की कमी नही रहती थी !
पर एक दिन सेठ की मॉ अचानक
बीमार पड गई ! सेठ जी अपनी मॉ का
इलाज कराते ,पर वह ठीक न हो सकी,
और एक दिन सेठ की मॉ का देहांत हो गया !
अब सेठ जी अकेले पड गये, सेठ जी का रो रो कर
बुरा हाल हो रहा था ! दर असल सेठ जी अपनी
मॉ की अंतिम इचछॉ पूरी न कर सके ! सेठ जी
की अंतिम इचछा थी कि मरते समय सेब खाना
चाहती थी,पर सेठ जी अपनी मॉ को सेब न
खिला सके और सेठ की मॉ इस दुनियॉ को
छोड कर चल बसी !
तब एक दिन लालच मे अंधा पंडित
उस सेठ के पास आया और सेठ जी से बोला ,
हम तुमहारी मॉ की शॉति के लिए हवन पाठ
करमा पडेगा, और हम पंडितो को एक एक
सोने कॉ आम दान देना पडेगा ! तबजा कर
मॉ जी को शॉति मिलेगी !
सेठ जी तैयार हो गये ,और दूसरे दिन
पंडित जी को अपने धर आने के लिए बोला,
दूसरे दिन पंडित वहॉ आया ,हवन का
समान मगा कर हवन पॉठ करने लगा !
हवन पाठ पूरा होने के बाद ,उन पंडितो ने
सोने का एक एक सेब लेकर वहॉ से चले गये !
यह है लॉलच में अंधॉ पंडित....Tags..#लालच में अंधा पंडित
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