हनुमान बहुत ही वलशाली थे ,
उनके आगे बडे से बडे योधा,
पीछे हट जाते थे ?
विराट समुंदर को देखकर वानर दल
में निराशा छा जाती है,हनुमान भी
निराश होकर एक शिला पर बैठ जाते
हैं,तब जामवंत ने हनुमान जी को उन
के बल का एहसास दिलाया,तब हनुमान
अपने विराट अवतार मे आ जाते हैं,और
सिंधू लाघ जाते हैं,लंका पहुंचकर सीता
जी की खोज करते करते अशोक वाटिका
पहुंच जाते हैं? यहॉ सीता जी को रावण
अपनी अंतिम चेतावनी देता है,कि एक
माह के भीतर मुझे अंगीकार कर ले
अथवा वह उनको मार देगा....
रावण के अशोक वाटिका से
जाते ही ,हनुमान सीता माता के
सामने राम की अगूंठी पेडं से नीचे
गिराते हैं,और सीता के सामने आते
हैं,और अपना पूरा परिचय राम के
सेवक के तौर पर देते हैं,माता सीता
समझ जाती हैं यह राम का सेवक
हनुमान ही है,हनुमान माता सीता
को राम की सारी बाते बताते हैं,
यकीन दिलाते हैं , तुम हमारे कंधो
पर बैठ कर हमारे साथ चलो ,भले
ही रावण कितना ही बलशाली हो, मगर
उनकी राछसी सेना मेरा कुछ भी नही
बिगाड सकती,मगर सीता मॉं
हनुमान के साथ जाने से मना कर
देती है,और हनुमान से कहते हैं,
जब हमारे रघुनंनदन यहॉ लकां
आऐगे तब हम उनके साथ जाऊगी...
तब हनुमान जी सीता से कहते हैं..
आया हूं सिधूं लाघ कर मै..इस कारण
हमे भूंख सताती है, यह पेडं फलो
सेलदा देख कर हमारी भूख बढती ही
जा रही है,सीता माता के आदेश के बाद
हनुमान जी भर कर पूरी वाटिका का
फल खाते हैं, और साथ ही वहॉ रखवाली
कर रहे राछसो की खूब पिटाई भी की ,
और सारी अशोक वाटिका उखाड कर
तहस नहस कर दिया ?
जब यह समाचार रावण के पास
पहुंचता है तो तब वह अपने बेटे
अछय कुमार को हनुमान को
पकडने भेजता है....
हनुमान के इस लडाई में अछय
कुमार मारा जाता है,इसके बाद
मेघनाथ हनुमान को पकडने के
लिऐ अशोक वाटिका जाता हैं,
और अपने मयावी बाणो से
हनुमान जी को वंदी वना लेता है,
और रावण के पास ले जाता है...

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