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शुक्रवार, 31 मार्च 2023

लालच वडी वला

 एक समय की बात है,  गॉव

से थोडा दूर पर नदी के किनारे

छोटी सी झोपडी बना कर उसी

झोपडी में  बाबा चतुर दास जी

शिव की अराधना करते थे! 

   बाबा चतुर दास को दुनिया

की सारी जमाने पर राज करना

था, इसलिए  बाबा चतुर दास

शिव की अकादमी कर शिव जी

सर वरदान पाना चाहते थे? 

   एक दिन बाबाचतुर दास 

शिव की अराधना में लीन थे, 

तभी भगवान शिव वहॉ

आये और बाबा चतुरदास

से बोले, चतुर दास मांगे, 

कौन सा वरदान मागना

चाहतें है, चतुर दास  बोला... 

शिव जी अगर आप हमें

वरदान देना चाहते हैं तो मुझे 

ऐसा वरदान दे कि.... 

जहां तक हमारी नजर

पड़े 

वहसारी जमीन हमारी हो जाए... 

शिव जी बोले ऐसा ही  होगा... 

इतना कह कर शिव जी गायन हो गये...

बाबा चतुर दास  यह

वरदान पाकर बहुत  खुश हो गया.... 

वह दुनिया की सारी जमीन देखने

के लिए  वहां से पैदल दौडा,

इस तरह जमीनो  की लालच में

भागते भागते उसकी शरीर में 

कमजोरी आगयी, बाबा चतुरदास 

को थकान महसूस होने लगी, 

फिर भी बाबा जी भागते रहे, 

और जमीनो को देखते रहे.. 

उनके अन्दर लालच की भावना

कम न हुई, और एक समय 

भागते भागते ऐसा आया कि

बाबा चतुर दास बे सुध होकर

जमीन पर गिर पड़े, और उन की

कमर की हड्डी टूट गयी, कुछ देर

जीवित रहने के बाद बाबा चतुर

दास नगरी रहे,  और इस तरह

बाबा चतुरदास के हिस्सा में

उतनी ही जमीन आयी,  जितने

पर बाबा चतुरदास पड़े हुआ थे??? 

इसलिऐ कहते हैं  लालच बडी वला है.. 

लालच किसी को नहीं करना चाहिए.. 

Tags.. #लालच#अहंकार#घमडं

        #अतिसेअधिक#संयोग

#शांतमन#अजबकहानी


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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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