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बुधवार, 31 मई 2023

भिखारी बना लखपती

 कहते हैं,समय बडा बलवान होता है /

कब किसकी तकदीर कहां बदल जाय,

कुछ कहॉ नही जा सकता ///

    कुछ समय पहले की बात है, 

रोड के किनारे दो  भिखारी हाथ में

कटोरा लिए सडक के किनारे बैठ कर

भीख माग रहे थे /


ऊपर वाले के नाम पर कुछ दे दे बाबा,

ऊपर वाला आप का भला करे गा ?

दे दे बाबा, ऊपर वाले के नाम पर 

कुछ देता जा बाबा //

    उधर से आते जाते लोग कुछ न कुछ

उस कटोरे मे डाल देते और चले जाते ? 

 वह दोनो दिन भर भीख मागते ,

और शाम को उस पैसे से दाल रोटी 

लेकर खा कर सो जाते , सुबह उठते

तो फिर भीख मागते,,,,,ऐसे करते 

कुछ दिन बीता,,,और एक दिन दोनो

भिखारी रोज की तरह रोड के किनारे बैठ कर 

भीख माग रहे थे, तभी वहॉ पर एक 

बडी सी गाडी आई और खडी हुई //

   और उस गाडी से एक मोटा सा 

तगडा सा सेठ आदमी उस गाडी 

से वाहर निकला,, फिर उस ्भिखारी

के पास गया,,और सेठ ने कहॉ.....

मै काफी दिनो से देख रहा हूं,

तुम दोनो,इसी पेड के नीचे छाव 

में बैठ कर,रोज भीख मागते हो,,,

    मैने सोचा आज तुम को कुछ देता जाऊ्ं ///

उस सेठ ने अपने जेब से एक लाटरी 

का टिकट निकाला और उस भिखारी

को दिया ///  सेठ बोला कल इस 

लाटरी का नंबर आयेगा ,पेपर से 

मिलान कर लेना,,,,,,बाकी तेरी

तकदीर जाने,,  दिन किसी तरह 

बीत गये,रात आई,,,धीरे,धीरे रात

भी बीत गयी,सुबह हुई,,

   वह भिखारी ,पेपर वाले के पास गया 

उससे पेपर खरीदा,और लाटरी का टिकट

निकाला उस पेपर से मिलान करने लगा,,, 

उसका नंबर पेपर से मैच कर गया,, 

  भिखारी बहुत खुश हुआ,,और

उस सेठ को धनबाद दिया.... उसकी 

25 लाख की लाटरी लग गई //' 

    तब से उसने भीख मागना बंद कर दिया....

बाद में उसने अपनी एक छोटी सी 

दुकान खोल ली,और अपने परिवार 

के साथ,,खुश रहने लगा,,,  

Tags..हसता है अपना परिवार !

           खुशी के दो पल !

 मै भिखारी हू्ंं !

हथ मे कटोरा !

एक महाजन सेठ !

दानवीर सेठ !

....




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