कहते हैं समय एक जैसा नही होती....
समय बदलता रहता है, समय के साथ
सब कुछ बदल जाता है, ...कुछ ऐसा
ही सेठ जमुना दास जी के भी साथ हुआ....
सेठ जमुना दास एक जाना माना नाम
जिनकी अपनी एक पहचान है ,जिनका
अपना एक अलग नाम है..उनका एक
लडका राजू दास था ! जो पढने में तेज
बोलने में होशियार काफी चंचल भी था!
पर पढाई के दौरान ही राजू दास गलत
लडको के साथ पड कर उसे नशे की लत
लग गई ,वहलपूरी तरह विगड गया !
सेठ जमुना दास को जब अपने लडके
राजू दास के बारे में मालूम पडा , तब तक
बहुत देर हो चुकी थी ! तब तक राजू दास
बिगड गया था ! अब सेठ जमुना दास जी
को अपने लडके राजू दास की चिंता सताने
लगी! उसने अपने लडके की नशे की लत छुडवाने
के लिए बहुत दवा करवाई मगर कोई फायदा
नही हुआ ! सेठ जी बहुत परेशान रहते , अब
सेठ जी के समझ में कुछ भी नही आ रहा था,
पर एक दिन सेठ जी बैठे हुऐ थे, उनके
दिमाग में एक आइडिया आया! सेठ जमुना दास
जी बजार गये और बजार से कुछ फल ले आये,,
उसमें कुछ फल खराब भी थे,उस फल को घर
ले आऐ और उस फल को अपने लडके राजू दास
को अलमारी में रखने के लिये बोले , राजू दास
उस फल को लेजाकर आलमारी में रख देता है,
और फिर दूसरे दिन सेठ जमुना दास जी ने अपने बेटे
राजू दास से बोले , बेटा जो हमने तुम को कल फल
दिया था ,उस फल को जरा हमारे पास ले कर आओ !
वह उस फल को ले आया, राजू ने देखा , और बोला
पापा इसमें तो आधे से अधिक फल सडे हुऐ है,
हॉ बेटा, जिस चरह तुम नसा कर रहे हो , उस
तरह से एक दिन तुमारी सारी शरीर भी खराब हो
जायेगी,,,बेटा यह नशा छोड दो ...
राजू दास को पूरी बात समझ में आ गयी !
उसने गलत ....संगति ...छोड दी गलत लोगो के
साथ उठना बैठना छोड दिया .......
गलत संगति का असर छोडते ही
राजू दास धीरे धीरे फिर पहले जैसा
दिखने लगा,,,और वह खुश भी रहने
लगा...इधर सेठ जी की भी चिंता दूर हो गयी !
अब दोनो खुशी खुशी रहने लगे ...
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हो ज

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