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रविवार, 29 सितंबर 2019

एक बन्दर

किसी जंगल मे बन्दरो का
झुंड रहता था।वह सव बहुत उछल कूद
करते रहते थे।उसी जंगल मे
शेर भी रहता था।
एक दिन शेर सो  रहा था।
तभी एक वन्दर ने
उस शेर के पास जाकर
उसका एक कान खीच
लिया,शेर उठा और बोला
किसी ने देखा तो नही
हमारा कान खीचते हुए,
वन्दर वोला नही,
शेर फिर वोला ,दुवारा
खीचो खीचते रहो,
मझे अच्छा लगता है।
इस जंगल में अकेला
रहते रहते मै बोर हो
गया हूँ, कम से कम एक
मुझे दोस्त तो मिल गया।
जिसके साथ मै कुछ पल
विता तो सकता हूँ।

गुरुवार, 26 सितंबर 2019

"अपनो की याद"

"जहाँ अपनो की याद न आऐ।
"वह तन्हाई किस काम की।।
"बिगडे रिश्ते न मिले।
"वह खुदाई किस काम की।।
"बेशक अपनी मंजिल तक ।
          "जाना है मुझे।।
"पर जहाँ से अपने न दिखे"
"वह ऊँचाई किस काम की"

"रिश्ता वह नही होता हैं"
"जो दुनिया को दिखाया जाता हैं।।
"रिश्ता वह होता हैं।
"जिसे दिल से निभाया जाता हैं।।
"अपना कहने से कोई अपना नही होता।
" अपना वह होता हैं ,।
"जिसे दिल से अपनाया जाता हैं।।
🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
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बुधवार, 25 सितंबर 2019

कहानी एक घर की

सेठ हीरा चंद ,बडी ही,
खुशी से कही आने जाने,
के लिए बडे ही प्यार से,
अपने और पूरे परिवार की,
खुशी के लिए ,एक महगी,
फोर ब्बीहीलर कार घर ,
लेकर आया।और उसी कार ,
से वह और उसका परिवार,
जहां कही भी आना जाना,
होता था वह लोग आया जाया,
करते थे।एक दिन सेठ हीरा चंद,
अपनी गाडी की धुलाई,
कर रहे थे,तभी वहां पर,
उनकी पोती पहुचती हैं,
और उसके हाथ मे एक ,
नुकीला पत्थर था ,वह
उसी से गाडी के सीसे पर,
लिख देती हैं, पापा "आई...
लव यू"....इससे पहले की
वह कुछ लिखा हुआ देखता,
सेठ ने अपनी पोती को यह,
करते देख इतनी जोर से छिटका,
कि उसके हाथ मे जोर की,
चोट आ गयी...फिर उसने डा.कटर,
को बुलाया और उसका इलाज,
कराया...बाद मे सेठ को बहुत,
पछतावा हुआ।फिर सेठ जाकर,
गाडी पर अपना गुस्सा निकालने,
लगा ,तभी उसकी नजर उस ,
लिखे हुए स्क्रेच पर पडती हैं,
जिस पर लिखा हुआ था..
"पापा आई लव यू"
  यह लिखा हुआ देख सेठ की ,
आँखे भर आती हैं और वह,
जोर से फफक कर रोने लगता,हैं,
उसे अपनी गलतियों पर ,
पछतावा होता हैं।..?
...गुस्से और प्यार की सीमा,
             नही होती हैं।
...याद रखे चीजे प्रयोग,
         करने के लिए होती हैं।
...और इंसान प्यार करने,
           के लिए होते हैं।
.... 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
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🌲🌲🌲🌲🌲

सोमवार, 23 सितंबर 2019

यह जिन्दगी

जिन्दगी एक अभिलाषा हैं।
गजब इसकी परिभाषा हैं।।
जिन्दगी कैसे हैं, मत पूछो।
सवर गयी तो तकदीर,
         और
बिगड गयी ,तो
तमाशा हैं।।
  यह जिन्दगी अजीब है।
सपने तो सब देखते हैं,
ऊची उडान सब कोई ,
उडना चाहता हैं, पर
दौडते तो सब हैं, लेकिन
इस दौड मे ,पहला स्थान
केवल एक ही को मिलता
हैं।ठीक उसी तरह सब लोग आगे
निकलना चाहते हैं।पर कोई हाथ
उठाकर आसमान को छू लेता हैं
तो कोई पीछे रह जाता हैं।
 ऐसे लोगों को केवल इतना
समझाने की आवश्यकता है
कि उनका जीवन सही वने
या बुरा इसका निणर्य पूरी
तरह उसे खुद ही करना हैं।
  उसे य उस जैसे मानवो
को य तो स्यम की विचार
मेधा के सहारे अथवा किसी
को विवेक वान आदमी के
शिक्षण द्धारा निरंतर मनन
करना होगा,कि जीवन काल
मे किसी भी मनुष्य की विफलताऐ
भूल जाने वाले दु:ख दर्द और
       सुख शांति
पाने मे किसी भी प्रकार
की मदद नही कर सकते।

रविवार, 22 सितंबर 2019

"अचानक एक मोड पर"

एक समय की बात है।
किसी रास्ते से ,इधर से,
दु:ख जी जा रहे थे,और ,
उसी रास्ते से उधर से सु:ख,
जी चले आ रहे थे। कि उसी,
रास्ते पर एक तिराहा था,उसी,
तिराहे पर दु:ख और सु:ख दोनो,
की मुलाकात हती है। दु:ख ने सु:ख,
से कहा,तुम कितने भाग्य शाली हो,
जो लोग तुमको पाने की कोशिश,
मे लगे रहते हैं।तब सु:ख ने,
हसते हुऐ कहा...भाग्य शाली मै,
नही तुम हो....तब दु:ख ने हैरानी,
से पूछा, भाई वह कैसे.... तब सु:ख,
ने बडी ईमानदारी से जबाब दिया......,
यह ऐसे कि , .......
"तुमको पाकर लोग "
"अपनो को याद करते हैं"
"लेकिन मुझको पाकर"
"सब अपनो को भूल जाते हैं"

शनिवार, 21 सितंबर 2019

काम चोर आदमी

एक गांव में बच्चों के पढने के।
लिए स्कूल नही था।उस गांव में।
बच्चे बहुत दूर नाव के सहारे ,नदी।
पार कर ,अपनी जान जोखिम में।
डाल कर बच्चे स्कूल पढने जाया।
करते थे।....
  और फिर एक दिन गांव के लोग
इकट्ठा हुए और आपस मे बिचार,
किया कि हम लोग थोडा ,थोडा
पैसा ,चन्दा लगा कर गांव के पास ,
जो थोडी सी जमीन पडी हुई हैं ,उसी
पर छोटा सा स्कूल बना लिया जाय।
गांव के सभी लोग राजी हो गये।
गांव के सरपंच, और लेखपाल, सेक्रेट्री,
को बुलाया गया।यह सभी लोग आये
जमीन देखी गयी,और उस जमीन की
पैमाइस की गयी।....
    और फिर गांव के सभी लोगों ने,
अपने अपने पास से ,थोडा थोडा पैसा,
₹पया ,देकर ढेर सा पैसा इकट्ठा किया।
      फिर उस इकट्ठा किया हुआ पैसा से
समान मगाया गया।और फिर निमार्ण का
काम चलू कर दिया गया।
     उस गांव के महिला, पुरुषों ने मिलकर
अपना श्रम दान भी दिया।और काम तेजी
से होने लगा।
  दूसरे दिन सभी लोग काम कर रहे थे,
पर रामू मुह लटकाकर खडा हुआ था।
तब वहां पर खडा हुआ देखकर सेक्रेट्री
ने पूछा,अरे रामू का हुआ तुम ऐसे,काहे
को खडे हुऐ हो,जाओ काम करो....
   तब रामू बोला,...मुझे जोर से भूख
लगी हुई हैं।तब सेक्रेट्री ने अपने पास से
पैसे निकाल कर दिया और  बोले जाओ
खाना खा आओ। तब रामू भागकर
जाता हैं और खाना खाकर वापस आता हैं।
     तब रामू से सेक्रेटरी कहते हैं.....
    अरे रामू अब तो तुम खाना भी..
   खा लिए, अब काम पर लग जाओ..
  रामू बोला...अभी नही, हमने खाना,
इतना अधिक खा लिया है कि हमारा
पेट भर गया हैं, अब थोडा आराम कर ले
तब हम काम करेंगे।।।
 इसीलिए तो....
   काम करने वाले काम करते हैं।
 और काम न करने वालो के बहुत,
       बहाने होते हैं।
उधर निर्माण कार्य कुछ दिन में पूरा
हो गया,और गांव के छोटे बच्चे उसी
स्कूल मे हसी खुशी पढने लगे....
इसी लिए तो कहते हैं.....
 अनेकता से ऐकता ठीक होती हैं।
 ऐकता मे बहुत बल होता हैं।।

🌲🌲🌲🌲🌲एक पौधा लगाओ......
🌲🌲🌲🌲🌲प्रयावरण वचाओ......।।

शुक्रवार, 20 सितंबर 2019

जिस घर के लोग

"जिस घर के लोग,
"ऐसे होते हैं।
"उ स घर मे,
"ऐसा ही होता हैं।
 अपने घर में। सुख शांति ,
बना कर रखे, कभी लडे नही,
कभी झगडे नही,कोई भी बात ,
हो घर मे खुलकर करे, और,
आपस मे बैठ कर उस पर बिचार,
करे,इसी मे सब की भलाई.......
🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
🌲🌲🌲 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
🌲🌲 🌲एक पौधा लगाओ 🌲 tree
🌲🌲🌲स्वच्छ भारत मिशन
........................................







मंगलवार, 17 सितंबर 2019

"पैसे से"

"माना कि आज के इस दौर मे
पैसा आगे आगे चल रहा हैं, और
इंसान उसके पीछै पीछे भागता
चला जा रहा है, पर इंसान अगर
सौ मे एक दो लोग इसे पा भी लेते
हैं तो इससे सारी सुख सुविधाएं नहीं
खरीद सकते हैं ,वह सुख सुविधाएं
हैं क्या आइए जानते हैं.....?
"पैसे से सुख खरीद सकते हैं"
      पर शांति नही ।।

"पैसे से औरत खरीद सकते हैं"
          पर पत्नी नही ।।

"पैसे से नौकर खरीद सकते हैं"
        पर सेवक नही ।।

"पैसे से कलम खरीद सकते हैं"
           पर विचार नही ।।

"पैसे से पाउडर खरीद सकते हैं"
         पर सुन्दर ता नही ।।

"पैसे से दवा खरीद सकते हैं"
         पर स्वास्थ्य नहीं ।।

"पैसे से आदमी खरीद सकते हैं"
          पर वफादारी नहीं ।।

"पैसे से ऐनक खरीद सकते हैं"
          पर आँखे नहीं ।।

"पैसे से भोजन खरीद सकते हैं"
          पर भूख नहीं ।।

"पैसे से विस्तर खरीद सकते  है"
         पर नीद नहीं ।।

इंसान कमाता तो है,
पर हर इंसान के पास,
हर सुख सुविधा उपलब्ध,
नहीं होता हैं, कुछ न कुछ,
उसके पास कमी अवश्य,
        रहती हैं ,?/₹₹₹₹₹₹
₹₹₹₹₹₹₹₹₹


₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹₹

रविवार, 15 सितंबर 2019

"Two bullocks in a forest"

"There were two bullocks
In a forest.they were
Fast friends.they always
Kept company and were
Always ready to help
Each other.Even the
Lion did not dare attack
Them .Once the thought
If he could separate
Them,he might kill one
Of them .so he went to
One of the bullock and
Said ,"Look! your friends
Is very selfish.He himself
Eats green grass ,and
Leaves you dry one
."The bullock beloved
The lion and began to graze
Alone.the lion whispered 
The same word to the
Second bullock.the
Result was that the
Second bullock also
Started grazing alone.
The lion got the chance.
He attacked one and
Devourd it.
  Soon , he devourd
  The second one.
.............. 🌲🌲🌲🌲🌲.........

शनिवार, 14 सितंबर 2019

निन्दा से घबरा कर

"निन्दा से घबराकर अपने
लक्ष्य को न छोडे"
"लक्ष्य मिलते ही निन्दा
करने वालो की राय बदल
जाती हैं"।
"निन्दा उसी की होती हैं,
जो जिन्दा हैं, मरने के बाद
तो सिर्फ तारीफ होती हैं"।
"कभी पीठ पीछे आप की
बात चले तो,घबराना मत,
बात तो उन्हीं की होती हैं
जिनमे कोई बात होती हैं"।
"छोटी छोटी बात दिल मे
रखने से बडे बडे रिश्ते
कमजोर हो जाते हैं"।
"प्रोत्साहित करने की आदत
डालो, हतोत्साहित करने
वालो की कमी नही हैं"।
"ऊपर उठने की आदत
डालो, टाँग खीचने वालो
की कमी नही है"।
"मुस्कुराने की आदत डालो,
रूलाने वालो की कमी
नही है"।
"सुनने की आदत डालो,
ताने मारने वालो की कमी
नही है"।
  यदि आप ऐसा करते हैं,
तो निन्दा से बचे रहेगे।
 यह समाज है, यहाँ पर
हर तरह के लोग रहते हैं।
हर लरह की बाते करते हैं,
पर इनकी बातो पर ध्यान
मत दे,जो सही हो उसे चुने
बाकी बाते दिमाग से निकाल दे।

गुरुवार, 12 सितंबर 2019

कभी वक्त मिले तो पढ लेना

यह दुनिया भी कितनी निराली हैं।
कैसे कैसे विचार धारा और सोच के
लोग रहते हैं।
?...जिनकी आँखो मे नींद है,..
.....उनके पास अच्छा विस्तर नहीं है...
...जिनके पास अच्छा विस्तर हैं....
...उनकी आँखो मे नींद नहीं.........
आज के इस दौर मे अच्छी सोच,और
सही विचार धारा के लोग बहुत कम मिलेंगे।
?...जिनके मन मे दया हैं........
....उनके पास खर्च करने के लिए धन नही...
...जिनके पास खर्च करने के लिए धन हैं..
...उनके मन मे दया नहीं हैं.......
यह रिश्ते भी अजीब होते हैं, किसी को
बाखूब निभाना आता है, तो कोई इस
रिश्ते की कदर नही करत और निभा
नही पाता।
?...जिन्हें कद्र हैं रिश्ते की....
...उनसे कोई रिश्ता नहीं रखना चाहता है...
...जिनसे रिश्ता रखना चाहता हैं.....
....उन्हें कद्र नहीं है रिश्तो की........

यह पेट की भूख भी अजीब होती हैं।
कोई भर पेट भोजन कर आराम के,
विस्तर पर सोता हैं, तो किसी को भोजन
नसीब नहीं होता, वह भूखो पेट सो जाता हैं।।
?...जिनको भूख हैं......
.....उनके पास खाने के लिए भोजन नही है...
.....जिनके पास खाने के लिए भोजन है...
.....उनको भूख नही हैं........

यह इंसानी रिश्ता भी अजीब होता हैं,
कोई अपनें के लिए आधा पेट भोजन करता हैं,
तो कोई भोजन के लिए ही,अपनो से
रिश्ता तोड़ देता हैं।
?...कोई अपनो के लिए .....
....रोटी छोड देता हूँ......
....तो कोई रोटी के लिए.....
....अपनो को छोड देता हैं......

...बिना सघर्ष के इंसान....
...चमक नही सकता....
.....जो जलेगा उस दिये मे.....
...तो उजाला होगा ही.......

...उदास होने के लिए....
...उम्र पडी हैं.......
...नजर उठाओ .....
...सामने जिन्दगी खडी हैं........

...अपनी हसीं को होठोँ से मत जाने देना...।
...आप की मुस्कुराहट के पीछे, दुनिया पडी हैं...।

बुधवार, 11 सितंबर 2019

भागम भाग जिन्दगी

इंसान की लाइफ भी किसी "भागम भाग
जिन्दगी "से कम नही है। सुबह हुआ कि
फ्रेश हुऐ और न हाया नास्ता किया फिर
घर से निकल लिए।
  हाय पैसा हाय पैसा हाय पैसा...
इतना पैसा आऐ कहाँ से, कौन सा
काम करे कौन सा बिजनेस करे ,
कौन सी नौकरी करे ,कौन सा कोर्स करे,
दिन भर माथापच्ची, इस भाग दौड मे
टेंसन अलग बनी रहती हैं।
   फिर भी समझ मे नही आता ...
अपनी जिंदगी को कैसे सुधारा जाय।
समस्या जटिल है, दिन का दिन परेशानी
बढती जा रही हैं।
  आज जो हो रहा हैं वह कुछ हद तक ठीक
हैं, पर आने वाला कल कैसा होगा,यही
सोचकर दिमाग फटा जा रहा है।माथे पर
चिंता की लकीर बढती जा रही हैं।
   ऐसा न हो इसके लिए कुछ करे।
समय रहते चेत जाय।
    परेशानी कितनी भी कठिन हो,
हमेशा डट कर उसका सामना करें।
    किसी भी परेशानियों में डरे नही।
परिस्थितियों से इतनी जल्दी समझौता न करे।
     अपनी परेशानिया अपने दोस्तों से साझा करे।
इससे आप का मन हल्का हो जायेगा।
       मन मे घबराहट और बेचैनी न लाये।
घर से निकले तो ,घर की परेशानी घर छोड जाये।
     आप जिस काम से निकले हैं उसके विषय मे सोचे।
परेशानिया तो हर घर मे हैं, पर डट कर ,
   इसका सामना हम सब को करना ही पडेगा।

सोमवार, 9 सितंबर 2019

India ke former

An Indian former is poor.
So his house is not good.
It is not cemented.
It has no decent roof.
There is a thatch on
It.its door and window
Are old-fashioned.
... His life is very hard.
He rises early is the
Morning.he works
hard throughout the
Whole day.He goes to
his field before sunrise.At
Noon he takes his food.
And rests . for sometime
.He return home in
the evening.then he
Takes his food.
...He is poor and backward
.......................................

शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

"साहसी बूढा आदमी"

"गाँव से दूर एक बहुत बडा बाग,
था।उस बाग मे बहुत सारे बन्दर,
रहते थे।एक बार वह बन्दर कूदते,
फादते पहाडी पर बने एक मन्दिर,
पर पहुंच गये।उस मन्दिर मे उन्होंने,
कुछ घंटियों को देखा।और उन
बन्दरो ने उस घंटी को निकाल
कर अपने साथ ले गये।जब बन्दर
घंटी को हाथ में लेकर भाग रहा
था तव घंटी बज उठी और दूसरे
बन्दर बहुत खुश हो उठे।....
"इस तरह घंटी का बजना दूसरे
बन्दरो के लिए एक खेल बन गया।
उनको यह इतना पसंद आया कि,
वह दिन और रात घंटियों को
बजाने लगे।....
" गांव के लोग इस विचार से अनभिज्ञ
थे और सोचते थे कि कोई राक्षस पव्रत
पर घंटी बजाता हैं।इस कारण गांव के
लोगों मे राक्षस का डर बैठ गया।
इस तरह गांव के लोगों ने उस राक्षस
का नाम "घंटालिका" रख दिया।
और उसके डर से गांव छोडकर
भागने लगे।....
"उसी गांव में एक गरीब बूढ़ा
आदमी रहता था।वह गांव
छोडने मे स्र्समर्थ था।
और कही जा नही सकता था।
लेकिन वह बहुत साहसी था।
एक दिन इसका कारण जानने
के लिए वह पहाड पर चला गया।
वहां उसने देखा कि कुछ बन्दर
इधर उधर उछल कूद कर रहे थे,
और उनके हाथ मे घंटी थी वह
बज रही थी।यह देखकर वह हसा
और गाँव में आ गया।
वह गांव के मुखिया के पास गया,
और बोला...यदि हम पहाड से
राक्षस को खींच लाऊ तो ,आप हमे इनाम देगे।
गाँव का मुखिया खूशी से उसे
इनाम देने के लिए सहमत हो गया।
अगले दिन वह एक टोकरी में
कुछ फल लेकर पहाड़ी की ओर
गया।पहाड़ी पर उसने बन्दरो को
घंटी बजाते देखा।उसने कुछ दूरी
पर एक एक करके फल रख दिया।
बन्दर घंटी बजाना छोडकर
फलो की ओर दौडे।और उस बूढ़े
आदमी ने सभी घंटियों को अपने
हाथ मे लिया, और गाँव की ओर
चल दिया।
...उसने रास्ते में घंटियों को जमीन
मे गहराई में दवा दिया।तव वह
गाँव के मुखिया के पास गया,और
उसने कहा...कि उसने "घंटालिको"को
भगा दिया।सभी लोग और गाँव का
मुखिया उससे बहुत खुश हुए।उन्होंने
उस बूढे आदमी को धन्यबाद दिया।
और उसे उचित इनाम दिया।
..अब गांव के लोग शान्ति..
...से रहते थे।.....

गुरुवार, 5 सितंबर 2019

"अब चला मन्दी का दौर"

"बढती आबादी और जनसंख्या"
को देखकर यह अंदाजा लगाया
जा सकता हैं, कि इस समय
मंदी का दौर तो आना ही हैं।
" इस बढती हुई जनसंख्या वृद्धि
यह पूरी तरह से पहले से ही
इसारा करती हैं कि बेरोजगारी
तो बढना तय हैं।
"सरकार का ध्यान भी इस
ओर नहीं जा रहा हैं।
" कि एक कमेटी गठित कर
इसपर विचार किया जाय ,
और इसे रोकने का कोई,
उपाय ढूढा जाय,य प्रयास
किया जाय।
"लोग अपने घरो से निकलते,
 हैं काम के लिए चौक मंडी
मे जाकर घंटों इंतजार करते
हैं कि कोई अभी आयेगा, और
हमे काम पर लेकर जायेगा।
मगर ऐसा नहीं होता हैं, उसमे से 85%लोग
घरो को वापस लौट जाते हैं,
जिनको काम नही मिल पाता।
"अगर ए
ऐसा ही मंदी का दौर चलता
रहा तो वह दिन दूर नही जब
जब लोग अपने घरो मे दो
वक्त की रोटी जुटा पाना
मुश्किल हो जायेगा।
"सरकार को इस ओर ध्यान
देना चाहिए और यू.पी मे
जगह जगह कारखाने लगवाना
चाहिए और उधौगो को बढावा
देना चाहिए।"
"बडे बडे उधोगपति के साथ
सरकार को मीटिंग करना
चाहिए ,और उन से इस विषय पर
खुल कर विचार करे,और उनको
यह जानकारी दे,कि वेरोजगारी
की दर दिन प्रति दिन बढती ही
जा रही हैं।
"आखिर इसे कैसे रोका जाय"
इसे रोकने का उपाय अगर जल्द
ही न किया गया तो आने वाले कल मे इसका परिणाम क्या
होगा, इस बात का अंदाजा
इस बढ़ती हुई जनसंख्या वृद्धि
से लगाया जा सकता हैं।
"बेरोजगारी दर को कम करने,
का उपाय किया जाय"।
"इस तरह से बढ़ती हुई जनसंख्या वृद्धि
पर अंकुश लगाया जाय"/
"रोजगार को बढावा दिया
जाय"
" रोज गार के नया अवसर
वनाया जाय"।
"बढती हुई महगाई पर अंकुश लगाया
जाय"।
"सरकार को इस पर गहराई के
साथ सोच विचार करना चाहिए"
" यहां पर आज के इस मंदी
के दौर मे हर युवा पीढ़ी, चाहे
वह वेरोजगार हो य रोजगार
मे हो ,जागरूक बने,अपने
और अपने दोस्तों के साथ
इस बिषय पर बाते करे,
चर्चाएं करे,अपने आस
पडोस के लोगों को जागरूक
करे और उनको बताऐ कि,
वह ऐसा न करे"।
"हम दो हमारे दो "
  का नाम दे।
 आप जहाँ चाय पीते हो,
         य
पान खाते हो
  अथवा
जहाँ पर आप चार छ:लोगों
के साथ उठते बैठते हो,
वहां लोगों के साथ इस विषय पर
चर्चा अवश्य करें, और बताये
और उनसे यह कहे कि कम
से कम तीन लोगों को वताये"।
कि जनसंख्या वृद्धि पर अंकुश
लगाये और रोके।
"आप यकीन मानो दोस्त
अगर हम तीन को वताये,
"आप ने तीन को बोला"
"फिर अगले ने तीन को बोला"
इस तरह से हम सब मिलकर
इसे बढती हुई जनसंख्या को,
पूरी तरीके से रोक तो नही,
सकते,मगर हाँ इसे कुछ हद
तक कम किया जा सकता है"।

बुधवार, 4 सितंबर 2019

एक ऐसा राजा

" एक समय की बात है,
महाराजा "विजय सिंह"
अपने सिपाहियों के साथ
सैर पर जा रहे थे।तभी

अचानक एक ढेला आकर
राजा के सर पर लगा।राजा
को बहुत ज्यादा कष्ट हुआ।
 तव सैनिकों ने देखा ढेला
किधर से आया,उसने देखा
कि पास खडी हुई एक बुढिया
पके हुऐ आम के फल को ढेले
से तोड रही थी। तभी सैनिकों
ने उसे पकड लिया।
और बुढिया को महराजा के
सामने लाया गया।वह डरी हुई
थी।बुढिया ने हाथजोडकर
विनती करते हुऐ कहा,....
, महराज मेरा बेटा दो दिनो
से भूखा है।हमने पके हुए आम
के फल को देखकर ढेला मारा था।
ढेला लगने से पका हुआ आम गिर जाता
तभी आप बीच में आ गये।
..,मै यह ढेला आप को नही मारना
चाहती थी,मुझे क्षमा कर लीजिए।
,,,,महाराजा ने बुढिया की बात को
सुन कर अपने सैनिकों से कहा....
" इसे खाने के समान के साथ कुछ
धन देकर इज्ज़त से  घर भेज दो।
सैनिकों ने पूछा....सरकार इसे तो
इस अपराध का दंड मिलना चाहिए।
राजा ने कहा....जब ढेले की चोट
खाकर पेड़ सुन्दर फल दे सकता हैं,
"तो मै एक बुद्धि वाला प्राणी होकर
सजा कैसे दे सकता हूँ?/।ःःःःःःःः

मंगलवार, 3 सितंबर 2019

एक दयालु राजा

एक समय की बात है।
जूनागढ़ नामक राज्य में,
एक वीर और दयालू राजा,
रहता था।वह सदैव अपनी,
प्रजा की भलाई के बारे मे,
सोचा करता था।वह अपनी ,प्रजा
का हाल जानने के लिए खुद ही
अपने राज्य में प्रजा से मिलने
जाया करता था।
...एक दिन वह इसी प्रकार घूमने
निकला तो उसने एक बूढ़े आदमी
को देखा,वह बूढा आदमी जमीन
पर बैठ कर पौधा लगाने का काम
कर रहा था।वह इतना बूढा था,कि
उसका पूरा शरीर कमजोर पड गया
था।और पेड लगाते समय उसका
हाथ पैर काप रहा था।लेकिन
फिर .भी वह बूढा आदमी धैर्य
के साथ पौधा लगाने का काम
कर रहा था।
   उसकी मेहनत को देखकर
राजा सोचने लगा.....
..कि यह बूढा आदमी इतनी
मेहनत से पेड लगा रहा हैं,
पेड बडा होने तक यह आदमी
जीवित ही नही रहेगा।और फिर,
...राजा उस बूढा आदमी के पास
गयाऔर पूछा....."बाबा "जो पेड आप लगा
रहे हैं, आगे चलकर उसके फल
आप खाँ पाऐंगे।?"
...बूढा आदमी.... ने राजा को जबाब दिया...
...ऐसा तो नही हो पाऐगा राजा?"।
   "राजा ने फिर पूछा":::तो बाबा आप
फिर भी यह पेड  कियो लगख रहे हो?"।
"""बूढे आदमी ने राजा से कहा"...
  राजन हमने भी अजीवन दूसरे
के लगाये हुए फल खाऐ हैं।
वैसे ही आगे चलकर लोग,
हमारे लगाये हुए पौधे से
लोग फल खायेंगे।।""राजा
य  ह उत्तर सुन कर बहुत
खुश हुआ।और वह खुश
होकर बूढे आदमी को ढेर
सा री सोने की मुद्राऐ दी।।"
""इसीलिए कहते हैं"
हर आदमी को कम से कम ,
एक पौधा अपने जीवन मे,
अवश्य लगाना चाहिए।।"

सोमवार, 2 सितंबर 2019

दो दोस्त

कहते हैं एक दोस्त दूसरे
दोस्त के काम आता हैं, और
समय आने पर एक दूसरे
का साथ देते हैं।..
   राहुल और रवि दो सच्चे
दोस्त थे।गांव में लोग उनकी
दोस्ती की मिशाल देते थे।
गांव के लोग कहते थे ,दोस्त
हो तो ऐसा।
 एक दिन दोनो घूमने
निकले । रास्ते में उनको
एक भालू मिला।भालू ने
दोनो को दौडा लिया।
 चूंकि राहुल तेज था ,पेड
पर चढने जानता था,इस लिए
राहुल तेज दौड कर पेड पर
चढ गया।उस समय राहुल
अपनी दोस्ती भूल गया।
 मगर रवि ऐसा कुछ कर नही
सका,वह थोडी दूर भागा
उसके बाद उसे कुछ भी न समझ
मे आया तो वह जमीन पर लेट गया।
और थोड़ी देर के लिए
रवि ने अपनी सास को
बंद कर लिया।इतने मे
वह भालू रवि के पास
आया।और रवि को
सूंघने लगा।भालू ने
देखा कि रवि की सासे
बंद हैं, और वह मर गया।
यह देख भालू वहां से
वापस चला गया।
 यह सारा नजारा राहुल
पेड पर चढ कर देख रहा
था।.... 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲
  फिर राहुल पेड से नीचे उतरने
के वाद ,रवि से पूछता है कि
भालू ने तुम्हारे कान मे का कहा..
  तव रवि वोला...भालू ने
मुझसे कहा कि सही लोगों के साथ रहो
गलत लोगों के साथ मत रहो..
गलत लोग कभी भी साथ
नही देते हैं। 🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲🌲

रविवार, 1 सितंबर 2019

एक घटना उस रात की

पहाड़ियों की वादियों में वसा
हुआ एक सुंदर सा गांव।जहां
का रहन सहन बेश भूसा पहनावा
अपने आप मे बिल्कुल अलग
और लोगो को आर्कषित करता
और अपनी ओर खीचता।
...वहां के लोग खेती बाडी कर
अपना और अपने परिवार का
भरण पोषण करते थे।।
...उसी गांव में भानू चिरापली
नामक व्यक्ति अपने वीवी और
दो वेटियो के साथ रहता था।
...खेती बाडी कर वह अपना
और अपने परिवार का पेट पालता
था। उसकी दो बेटियां थी ।बडी
बेटी की उम्र 18 वर्ष से अधिक
और छोटी की उम्र दस वर्ष थी।
...एक दिन उस गांव में पडोस
के गांव से एक लडका उस सुन्दर
से गांव में घूमने के लिए आया।
जिसका नाम वीरहोत्री था।उसके
साथ उसका एक दोस्त भी था।
दोनों उस सुन्दर सेगांव में घूमते
घूमते, भानू चिरापली के घर के
पास पहुचते हैं।और वहां देखते
हैं कि भानूचिरापली की बडी बेटी
छत पर खडी होकर अपने बालो
को सुखा रही थी।
..तभी वीरहोत्री की नजर उस
लडकी पर पडी ,और वह उस
लडकी को देखता ही रहा,कब
तक जब तक वह लडकी छत
से नीचे नही उतर गयी।
...यह बात बीरहोत्री ने अपने
दोस्त को बताई....
उसी रात दोनो ने दोस्त ने मिलकर एक पलान
बनाया।कियो न हम इस लडकी
की फोटो खीचते हैं।फिर दोनो
ने मिलकर रात को चुपके से
भानू चिरापली के घर मे घुसते
हैं, और बाथरूम में जाकर
मोबाइल के कैमरे को आन
कर चुपके से रख कर बाहर
निकल आते हैं।उसकेबाद
...भानूचिरापली की बडी बेटी
बाथरूम में जा स्नान कर बाहर
आती हैं, और फिर क्या...
वीरहोत्री नामक लडका चुपके से फिर  वहां
जाता हैं और अपनी मोबाइल फोन
उठा कर बाहर चला आता हैं।
....यह बात उस लडकी के पिता
को मालूम पड जाती हैं।और फिर
अपनी घर की मान मर्यादा
बचाने के लिए उस लडके को ठूठने
लगते हैं।लडका वहां से भाग कर
अपने गांव चला जाता हैं।
तब लडकी के पिता पुलिस के पास
जाकर अपनी घर मे हूए घटनाओं के
बारे मे डिटेल मे बताते हैं।
पुलिस इस मामले को अपने संक्षान
मे लेती हैं, और पडोस के गांव में
जाकर छापा मारकर ,उस लडके
को जिसका नाम बीरहोत्री था ,जो
उस गांव मे घूमने गया था,पकड
लेती हैं और उससे वह मोबाइल
भी बरामद कर लेती हैं।और उसके
ऊपर धाराएं लगा कर उसे जेल
भेज देती हैं।यह एक कालपनिक
घटना है, इसका किसी घटना
य कहानी से कोई मतलव
नही हैं....
...अगर लक्ष्य को पाना हैं तो।
...निरन्त आगे बढ़ते रहना हैं।।
....एक पौधा लगाओ....
...धरती को खुशहाल बनाओ...
...................................।।।।।
पहाडियो के वादियों में वसा
एक सुंदर सा गांव.....

तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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