माधव पुरा गांव में एक महिला रहती थी।
जिसका नाम राखी था। उस महिला को
बचपन सेे ही गहने पहनने का शौक था।
वह बचपन से ही गहनो का शौक
रखती थी,और। ब जार से खरीद कर
पहनती थी।
पर एक दिन वह एक दुकान पर आर्टिफिसल समझ कर 850 ₹ की
एक अगूूंठी खरीद ली।वह अगूंठी
उस महिला को बहुुुत पँसन्द आई
और उस महिला उस।
अगूूंठी को खरीद कर अपने
हाथो मे पहन ली।
उस महिला ने उस अगूंठी
को अपने हााथो मे
30 वर्ष तक सँभाल
कर पहन कर रखी थी।
पर अचानक एक दिन
उस महिला के मन मे यह
ख्याल आया 30 वर्ष के
बाद कि हम इस अगूूंठी
को बेच दे।
वह महिला उस अगूूंठी को
लेकर दुुुकान दार के पास गयी।
दुकान दाार। ने उस अगूूंठी को
देखा जाचा परखा और बोला.....
यह अगूूंठी। हीरे की है.....
फिर उस महिला ने उस
अगूँठी को नीलम की।
नीलामी मे महिला को
उस अगूूूठी के 5,6000000₹
मिले। इतने पैसेे पा कर वह
महिला इतनी खुश थी, मानो
पूरी दुनिया की खुशी उसको
मिल गयी ।सच पूछो तो
30 साल पहले वह महिला
इतनी कभी खुुु नही थी।
जिसका नाम राखी था। उस महिला को
बचपन सेे ही गहने पहनने का शौक था।
वह बचपन से ही गहनो का शौक
रखती थी,और। ब जार से खरीद कर
पहनती थी।
पर एक दिन वह एक दुकान पर आर्टिफिसल समझ कर 850 ₹ की
एक अगूूंठी खरीद ली।वह अगूंठी
उस महिला को बहुुुत पँसन्द आई
और उस महिला उस।
अगूूंठी को खरीद कर अपने
हाथो मे पहन ली।
उस महिला ने उस अगूंठी
को अपने हााथो मे
30 वर्ष तक सँभाल
कर पहन कर रखी थी।
पर अचानक एक दिन
उस महिला के मन मे यह
ख्याल आया 30 वर्ष के
बाद कि हम इस अगूूंठी
को बेच दे।
वह महिला उस अगूूंठी को
लेकर दुुुकान दार के पास गयी।
दुकान दाार। ने उस अगूूंठी को
देखा जाचा परखा और बोला.....
यह अगूूंठी। हीरे की है.....
फिर उस महिला ने उस
अगूँठी को नीलम की।
नीलामी मे महिला को
उस अगूूूठी के 5,6000000₹
मिले। इतने पैसेे पा कर वह
महिला इतनी खुश थी, मानो
पूरी दुनिया की खुशी उसको
मिल गयी ।सच पूछो तो
30 साल पहले वह महिला
इतनी कभी खुुु नही थी।


















































