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शुक्रवार, 4 जनवरी 2019

हांडी महारानी,16शताब्दी की घटना

यह घटना 16शताब्दी की है।जब सलूम्बर राज्य में हांडी नाम की एक महारानी हुआ करती थी।उस समय राजा मान सिंह का शासन किशन गढ मे हुआ करता था।बाबर और अत्याचारी मुगल शासक औरंगजेब ने किशनगढ़ पर हमला कर दिया।ऐसे में मेवाड़ के शासक राज सिंह ने औरंगजेब को रोकने का काम सलूम्बर के राजा रावरतन सिंह को शौपा था।
      रानी हांडी का विवाह राव रतन सिंह से  मात्र एक दिन पहलेे ही हुुुआ था।अभी महारानी हांडी के हाथो की मेहदी भी नही सूखी थी,कि राजा रावरतन सिंह कोणभूमि के लिए रवाना होना पडा।राजा रावरतन सिंह रानी हाडी बहुुत अधिक प्रेम करते थे। उनकोो एक पल के लिए भी छोोो कर दूूू र जाना गवारा नही था।
    युद्ध की तैयारी में होोने के बाावजूद भी उनका मन रानी हाडी मे ही लगा हुुुआ था।तभी राजा ने राानी हाडी की एक निशानी को लेने के लिए अपने एक भरोसेमन्द सैनिक को महारानी हांंडी के पास भेजा।जब राजा रावरतन सिंंके द्धाराा  भेजे हुए  सैनिक को  रानी हांंडी ने देेेखा तो वह समझ गयी कि राजा   रावरतन   सिह अपने प्ररेम के कारण विचलित हैं और इस कारण से उनको युद्ध में  भारी नुकसान पहुंच सकता है।रानी ने सैैैनि से कहाा कि वह राजा को अपनी आखिरी निशानी दे।इसके बाद महाारानी हांडी ने अपना शीष काटकर राजा को उपहार स्वरूप भेेजा।  धन्य वह राजपूता नी वीरांगनाएं जिन
को अपने प्राण से अधिक देेश की चिंता थी।

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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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