एक समयकी बात है ,दूर गांव में एक गरीब परिवार रहता था।
वह दिन भर मेहनत मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का पालन करता था।
एक दिन वह अपने घर पर रहकर घर का काम कर रहा था,तभीी वहाँ पर एक साधू आया,और उसने उस कि सान को एक पत्थर दिया।
किसान ने उस पत्थर कोठा कर दीवार के ऊपर रख दिया।
और वह साधू वहाँ से चला गया।
एक सााा बाद वह साधू फिर वापस उस किसान
के घर वापस आकर उस किसा न से बोला।
मैने जो तुमको पत्थर दिया था उसका तुमने काा किया।
तुमको मालुम है यह पा रस पत्थर है।
किसान बोला जी हाँ, मै चाहता तो इससे ढेेर सा सोना बना डालता।यदि हम ढेर सा
सोना बनाा लेेेता तो उसकी रखवाली कौन करता।
इस सोने से हमे शांती मिलती।
उस मालिक का नाम लेनेे का। समय हमे मिल पाता।
हमे और हमारे परिवार को शाांति चाहिए।
इस लिए महत्मा जी आप इस पारस पत्थर को लेेे जाऐ
वह दिन भर मेहनत मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का पालन करता था।
एक दिन वह अपने घर पर रहकर घर का काम कर रहा था,तभीी वहाँ पर एक साधू आया,और उसने उस कि सान को एक पत्थर दिया।
किसान ने उस पत्थर कोठा कर दीवार के ऊपर रख दिया।
और वह साधू वहाँ से चला गया।
एक सााा बाद वह साधू फिर वापस उस किसान
के घर वापस आकर उस किसा न से बोला।
मैने जो तुमको पत्थर दिया था उसका तुमने काा किया।
तुमको मालुम है यह पा रस पत्थर है।
किसान बोला जी हाँ, मै चाहता तो इससे ढेेर सा सोना बना डालता।यदि हम ढेर सा
सोना बनाा लेेेता तो उसकी रखवाली कौन करता।
इस सोने से हमे शांती मिलती।
उस मालिक का नाम लेनेे का। समय हमे मिल पाता।
हमे और हमारे परिवार को शाांति चाहिए।
इस लिए महत्मा जी आप इस पारस पत्थर को लेेे जाऐ

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