परासर मुनि नदी पार कर रहे थे।
जिस नाव पर परासर मुनि बैठे हुए थे, वह नाव कोई और नही बल्कि सत्यवती नामक एक खूबसूरत लडकी चला रही थी।
परा सर मुनि ने उस खूबसूरत
लडकी से सीधेे ही सम्बन्ध बनाने की बात कह डाली।
सत्यवती नामक लडकी ने पहले
तो इंकार किया और फिर
बाद मे राजी हो गयी।
लेकिन उसने तीन सर्ते रखी।
पहली बात यह कि हमे सम्बन्ध बनाते समय हमे कोई देख न ले
इसके लिए परााार मुनि ने चरो ओर कोहरे का एक जाल बना दिया।
दूसरी सर्तै प्रसूति के दौरान मै कुवारी रहूँ।
तीसरी यह कि मेरे शरीर से मछली की दुुर्रगंध नही आऐ,उसके लिए परासर मुनि ने उसके शरीर को
फूलों के समान सुगंधित बना दिया।
जिस नाव पर परासर मुनि बैठे हुए थे, वह नाव कोई और नही बल्कि सत्यवती नामक एक खूबसूरत लडकी चला रही थी।
परा सर मुनि ने उस खूबसूरत
लडकी से सीधेे ही सम्बन्ध बनाने की बात कह डाली।
सत्यवती नामक लडकी ने पहले
तो इंकार किया और फिर
बाद मे राजी हो गयी।
लेकिन उसने तीन सर्ते रखी।
पहली बात यह कि हमे सम्बन्ध बनाते समय हमे कोई देख न ले
इसके लिए परााार मुनि ने चरो ओर कोहरे का एक जाल बना दिया।
दूसरी सर्तै प्रसूति के दौरान मै कुवारी रहूँ।
तीसरी यह कि मेरे शरीर से मछली की दुुर्रगंध नही आऐ,उसके लिए परासर मुनि ने उसके शरीर को
फूलों के समान सुगंधित बना दिया।


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