रूह कंपा गई....
उस वक्त,जब मां ने मेरे पास
बैठ कर
मेरे बालों में उंगलियां फेरते हुए कहा ।
मैं पूरी जिंदगी.....
तेरे साथ नहीं रह पाऊंगी,
बेटा.....
उसकी आवाज कांप रहीं थी,
और
मेरी आवाज़ थम सी गई थी ।
वह बोली.....
बेटा तू अपना ध्यान रखना सीख ले ।
दुनिया बहुत बेरहम है ।
मां हर वक्त ढाल बनकर,
खड़ी नहीं रह सकतीं।
उस दिन
पहली बार समझ आया।
मां की ममता सिर्फ प्यार नहीं।
आने वाले अकेले पन की .....
ख़ामोश तैयारी भी है ।

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