याद रखिए -----
वरिष्ठ जन घर की धरोहर होत है !
वह हमारे संरक्षक और मार्गदर्शक है !!
जिस तरह आंगन में पीपल का वृक्ष फल नहीं देता है !
उसे तरह हमारे घर के बुजुर्ग भले ही आर्थिक रूप से सहयोग नहीं कर सकते ,,, परंतु उनसे संस्कार और अनुभव से कई बातें सीखने को मिलती है !!
हमारे बुजुर्ग हमारे परिवार की शान !
वह कोई कूड़ा करकट नहीं कि परिवार से निकल बाहर फेंका जाए !!
अपने प्यार से रिश्तों को खींचने वाले इन बुजुर्ग को भी बच्चों से प्यार और सम्मान मिलना चाहिए !!
अपमान और तिरस्कार नहीं !
हमारे घर के बुजर जी अपने बच्चों के खातिर अपना जीवन दांव पर लगा चुके इन बुजुर्गों को अब अपनों के प्यार की जरूरत है !!
याद रखिए -----
B.. किराए से भले ही प्यार मिल सकता है !
तुरंत संस्कार नहीं आशीर्वाद दुआएं नहीं !!
यह सब तो हमें मां-बाप से ही मिलता है !!!
और अच्छी कहानियों के लिए ब्लॉक को लाइक और फॉलो करें !!!

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें