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शुक्रवार, 26 अप्रैल 2019
गुरुवार, 25 अप्रैल 2019
नन्ही चिडिया
एक बार एक गांव में
आग लगी थी।गांव के
सारे लोग आग बुझाने में लगे हुए थे।तभी वहां पर एक छोटी सी
चिडिया आई,और थोड़ी दूर से अपनी
चोच मे पानी लाकर
आग पर डालने लगी।
वही बैठा हुआ कौवा
चिडिया की सारी हरकते देख रहा था।कौवा चिडिया के पास गया और बोला,
तुम बेकार मे परेेेशा न
हो,तुम जो कर रही हो
इससे आग बुझेगी नही।तब चिडिया
बोली ,कम से कम हम प्रयास तो कर रहे हैंं।तुुम्हारी तरह
निकम्मे तो
नही जो यहां डाल
पर बैठ कर तमाशा
देख रहे है। ......
अपनी सोच बदलिए...
छोटी चिडिया की
तरह बनिए,...
कौवा की तरह नही...
आग लगी थी।गांव के
सारे लोग आग बुझाने में लगे हुए थे।तभी वहां पर एक छोटी सी
चिडिया आई,और थोड़ी दूर से अपनी
चोच मे पानी लाकर
आग पर डालने लगी।
वही बैठा हुआ कौवा
चिडिया की सारी हरकते देख रहा था।कौवा चिडिया के पास गया और बोला,
तुम बेकार मे परेेेशा न
हो,तुम जो कर रही हो
इससे आग बुझेगी नही।तब चिडिया
बोली ,कम से कम हम प्रयास तो कर रहे हैंं।तुुम्हारी तरह
निकम्मे तो
नही जो यहां डाल
पर बैठ कर तमाशा
देख रहे है। ......
अपनी सोच बदलिए...
छोटी चिडिया की
तरह बनिए,...
कौवा की तरह नही...
- ..............................
बुधवार, 24 अप्रैल 2019
मन करता हैं
क ई बार करता हैं कि
अपने जिंदगी से हार मान
लू मगर एक बार फिर मन
मे सोचता हूूँ कि अभी तो
बहुत कुछ बाकी हैं।
मन कितना चंंंच ल
होता है।कभी कुछ
सोचता है ,सोचा हुआ
कुछ काम पूरा होता है
तो कुुु छ वैसे ही अधूरा
सा पडा रहता हैं।कहते
हैं जिन्दगी से कभी हार नही मान ना चाहिए।
सघर्ष करना चाहिए,
लडना चाहिए,
मन की उदासी
छोड़ कर,उस बिन्द्दू
पर फोकस करना चाहिए।
वैसे तो जिंदगी में
उतार चढ़ाव लगा
रहता हैं।कभी शुख
का पलडा भारी होता
है, तो कभी दुःख का।
हार मानना बुजदिली ही
नही कायरता भी है...
इसीलिए तो कहते हैंं....
सघर्ष करो और आगे बढो....
कयोंकि... डर के आगे जीत हैं।
अपने जिंदगी से हार मान
लू मगर एक बार फिर मन
मे सोचता हूूँ कि अभी तो
बहुत कुछ बाकी हैं।
मन कितना चंंंच ल
होता है।कभी कुछ
सोचता है ,सोचा हुआ
कुछ काम पूरा होता है
तो कुुु छ वैसे ही अधूरा
सा पडा रहता हैं।कहते
हैं जिन्दगी से कभी हार नही मान ना चाहिए।
सघर्ष करना चाहिए,
लडना चाहिए,
मन की उदासी
छोड़ कर,उस बिन्द्दू
पर फोकस करना चाहिए।
वैसे तो जिंदगी में
उतार चढ़ाव लगा
रहता हैं।कभी शुख
का पलडा भारी होता
है, तो कभी दुःख का।
हार मानना बुजदिली ही
नही कायरता भी है...
इसीलिए तो कहते हैंं....
सघर्ष करो और आगे बढो....
कयोंकि... डर के आगे जीत हैं।
सोमवार, 22 अप्रैल 2019
रविवार, 21 अप्रैल 2019
रविवार, 14 अप्रैल 2019
एक गरीब बालक
पंकज नाम का एक बालक था।
वह एक गरीब परिवार में पैदा हुआ
उसके पिता बहुत ही गरीब थे।
उसकी पढाई लिखाई बहुत
कठिन समय मे हुई।
वह बहुुु त कठिनाइयों के साथ
और बहुत गरीबी मे अपनी पढाई
लिखाई पूरी करता था।
उसके पिता दिन भर
दूसरो के यहाँ मजदूरी करके
अपना तथा अपने परिवार का
पालन करता था।
बहुत कठिनाइयों से वह
अपने लडके को पढा पाता था।
धीरे धीरे लडके की पढाई पूरी होती गयी।
और धीरे धीरे पंकज बडा होता गया।
और फिर एक दिन पंंंकज की पढाई
पूरी हुईं और वह शहर नौकरी की तलाश
मे निकल पडा....और वह शहर जाकर
एक कारखाने में नौकरी करने लगा।
धीरे धीरे उसने कुछ पैैसे का इंतजाम
किया और उसी पेैसे से उसने
बिजनेस शुरू किया।
और धीरे धीरे उसका बिजनेस
एक दिन निकल पडा।और
फिर उस बिजनेस से उसने
बहुत सा पैैैसा कमाया....
उसने अपने कमाये हूुुए
पैसे से अपने गांव के लोगों
के गरीब परिवार की बहुत
मदद त की ।उनके
परिवार में गरीब बेटियों के लिए
दान दिया ।उनकी शादी कराई।और गांव में एक छोटा सा कारखाना
लगाया।उसमेे गांव के लोगों को
रोजगार दिया।और गांव के सभी
लोग पंंं से बहुत खुश थे।
......।।।।।।।।।।................।।।।।।।।।..........................।।।.
वह एक गरीब परिवार में पैदा हुआ
उसके पिता बहुत ही गरीब थे।
उसकी पढाई लिखाई बहुत
कठिन समय मे हुई।
वह बहुुु त कठिनाइयों के साथ
और बहुत गरीबी मे अपनी पढाई
लिखाई पूरी करता था।
उसके पिता दिन भर
दूसरो के यहाँ मजदूरी करके
अपना तथा अपने परिवार का
पालन करता था।
बहुत कठिनाइयों से वह
अपने लडके को पढा पाता था।
धीरे धीरे लडके की पढाई पूरी होती गयी।
और धीरे धीरे पंकज बडा होता गया।
और फिर एक दिन पंंंकज की पढाई
पूरी हुईं और वह शहर नौकरी की तलाश
मे निकल पडा....और वह शहर जाकर
एक कारखाने में नौकरी करने लगा।
धीरे धीरे उसने कुछ पैैसे का इंतजाम
किया और उसी पेैसे से उसने
बिजनेस शुरू किया।
और धीरे धीरे उसका बिजनेस
एक दिन निकल पडा।और
फिर उस बिजनेस से उसने
बहुत सा पैैैसा कमाया....
उसने अपने कमाये हूुुए
पैसे से अपने गांव के लोगों
के गरीब परिवार की बहुत
मदद त की ।उनके
परिवार में गरीब बेटियों के लिए
दान दिया ।उनकी शादी कराई।और गांव में एक छोटा सा कारखाना
लगाया।उसमेे गांव के लोगों को
रोजगार दिया।और गांव के सभी
लोग पंंं से बहुत खुश थे।
......।।।।।।।।।।................।।।।।।।।।..........................।।।.
गुरुवार, 11 अप्रैल 2019
एक सेठ
एक दूर नगर मे मखन लाल
नाम का सेठ रहता था।
उसके पास किसी भी
चीज की कमी नही
थी।उसके पास धन
भैभव ,सोहरत सब
कुछ था।
लेकिन उसे मन की
शान्ति नही थी।
पडोस मे एक शन्त
जी रहते थे।सेठ उस
शन्त के पास गया,
और बोला...
हमारे पास सब कुछ
है पर मन की शान्ती
नही है...।
शन्त वहाँ से उठा
सेठ भी शन्त के पीछे
चला.....
शन्त कुटी मे जाकर
बैठ गया...और फिर
कुछ लकडिय़ों को
अपने पास रख कर
उसमे आग लगाई...
फिर उस आग मे
एक एक लकडी
बारी बारी डालने
लगा...एक के बाद
एक लकडिय़ों को
आग मे डालता..
जैसे जैसे आग मे
एक एक लकड़ी को
डालता वैसे वैसे आग
की लौ और तेज होती....
और फिर थोडी देर बाद
शन्त वहां से उठा और
फिर अपने स्थान पर
आकर बैठ गया....और
बहुत देर तक मौन बैठा
रहा कुछ बोला नही.....
यह देख कर सेेेठ
बोला ..
आप कुछ बोल नही
रहे हैं कुछ उपाय नहीं
बताया....
शन्त बोला ...
इतने देर से हम
आप को बताने की
कोशिश ही कर रहा
हूँ।....जिस
आग मे काम...क्रोध.. मोह..
माया...लोभ..यह सब
जल जायेगा ,तभी मन
को शुकून और शान्ती
मिलेेेगी.....सेठ
सब कुछ समझ गया
वह वहाँ से उठा और
अपने घर चला गया...
.........।............।।।।।
नाम का सेठ रहता था।
उसके पास किसी भी
चीज की कमी नही
थी।उसके पास धन
भैभव ,सोहरत सब
कुछ था।
लेकिन उसे मन की
शान्ति नही थी।
पडोस मे एक शन्त
जी रहते थे।सेठ उस
शन्त के पास गया,
और बोला...
हमारे पास सब कुछ
है पर मन की शान्ती
नही है...।
शन्त वहाँ से उठा
सेठ भी शन्त के पीछे
चला.....
शन्त कुटी मे जाकर
बैठ गया...और फिर
कुछ लकडिय़ों को
अपने पास रख कर
उसमे आग लगाई...
फिर उस आग मे
एक एक लकडी
बारी बारी डालने
लगा...एक के बाद
एक लकडिय़ों को
आग मे डालता..
जैसे जैसे आग मे
एक एक लकड़ी को
डालता वैसे वैसे आग
की लौ और तेज होती....
और फिर थोडी देर बाद
शन्त वहां से उठा और
फिर अपने स्थान पर
आकर बैठ गया....और
बहुत देर तक मौन बैठा
रहा कुछ बोला नही.....
यह देख कर सेेेठ
बोला ..
आप कुछ बोल नही
रहे हैं कुछ उपाय नहीं
बताया....
शन्त बोला ...
इतने देर से हम
आप को बताने की
कोशिश ही कर रहा
हूँ।....जिस
आग मे काम...क्रोध.. मोह..
माया...लोभ..यह सब
जल जायेगा ,तभी मन
को शुकून और शान्ती
मिलेेेगी.....सेठ
सब कुछ समझ गया
वह वहाँ से उठा और
अपने घर चला गया...
.........।............।।।।।
बुधवार, 10 अप्रैल 2019
पिता पुत्र
एक दिन की बात है,
बाप बेटा दोनो अपना
गधा लेकर किसी दूसरे
शहर उसे बेचने जा रहे
थे। दोनो गधे को हाकते
हुए जा रहे थे।
थोड़ी दूर जाने पर एक
आदमी ने देखा और बोला
कैसे पागल लोग हैं गधा
साथ मे है फिर भी दोनो
पैदल जा रहेे हैं.....
यह सुन कर बाप ने
बेटे को गधेे पर बिठा
दिया...
थोड़ी दूर जाने पर दूूूसरा
आदमी मिला और बोला...
अरे देखो इस पागल को...
बेटा गधे पर बैैैठा हुआ है
और बूढ़े बाप उसके पीछे
पैदल जा रहा है...
यह सुन कर बेटे ने
बाप को गधे पर विठा दिया..
ंऔर आगे बढेे तो तीसरा आदमी मिला और बोला...
अरे यह देखो...
बाप गधे पर बेटा पीछे ...
यह सुनकर बाप
बेटे ने गधेे को कंधे पर लादकर ले जाना चाहा...मगर इतने मे गधे ने
जोर से लातमारी
और बाप बेटे की पसली टूट गई... और फिर.. गधा भाग गया.....
बाप बेटा दोनो अपना
गधा लेकर किसी दूसरे
शहर उसे बेचने जा रहे
थे। दोनो गधे को हाकते
हुए जा रहे थे।
थोड़ी दूर जाने पर एक
आदमी ने देखा और बोला
कैसे पागल लोग हैं गधा
साथ मे है फिर भी दोनो
पैदल जा रहेे हैं.....
यह सुन कर बाप ने
बेटे को गधेे पर बिठा
दिया...
थोड़ी दूर जाने पर दूूूसरा
आदमी मिला और बोला...
अरे देखो इस पागल को...
बेटा गधे पर बैैैठा हुआ है
और बूढ़े बाप उसके पीछे
पैदल जा रहा है...
यह सुन कर बेटे ने
बाप को गधे पर विठा दिया..
ंऔर आगे बढेे तो तीसरा आदमी मिला और बोला...
अरे यह देखो...
बाप गधे पर बेटा पीछे ...
यह सुनकर बाप
बेटे ने गधेे को कंधे पर लादकर ले जाना चाहा...मगर इतने मे गधे ने
जोर से लातमारी
और बाप बेटे की पसली टूट गई... और फिर.. गधा भाग गया.....
मंगलवार, 9 अप्रैल 2019
जब बैंक से निकाला पैसा
अफ्रीका का जाना माना
बिज नेेशमैन "अलीको डेंगोट"
जो बहुत ही मशहूर हैं।
वह छोटे स्तर से लेकर
बडे स्तर तक अथवा यूं
कह सकते है आप सींमेट
बनाने से लेेेकर आटा ,
और खेेती बाढी तक
का विजनेेश करता हैै।
एक दिन वह देखना
चाहता था कि हम सही
मे अमीर हैंं यह महज
एक दिखावा हैै।
वह एक दिन अपनी
चार पहिया वाहन लेकर
बैैंक जा पहुुंुचा।और
अपने रखेे हुऐ बैंक मे
साारे पैैसे निकाल कर
गााडी मे भरकर घर
लेेेजाकर ऐक कमरे
मे। रख दिया।और
उस। पैसे को डेंगोट
ने जीी भर कर देेखा
और। फिर दूूसरे दिन
उसे बैैक मे लेे जाकर
जमा कर दिया।
बिज नेेशमैन "अलीको डेंगोट"
जो बहुत ही मशहूर हैं।
वह छोटे स्तर से लेकर
बडे स्तर तक अथवा यूं
कह सकते है आप सींमेट
बनाने से लेेेकर आटा ,
और खेेती बाढी तक
का विजनेेश करता हैै।
एक दिन वह देखना
चाहता था कि हम सही
मे अमीर हैंं यह महज
एक दिखावा हैै।
वह एक दिन अपनी
चार पहिया वाहन लेकर
बैैंक जा पहुुंुचा।और
अपने रखेे हुऐ बैंक मे
साारे पैैसे निकाल कर
गााडी मे भरकर घर
लेेेजाकर ऐक कमरे
मे। रख दिया।और
उस। पैसे को डेंगोट
ने जीी भर कर देेखा
और। फिर दूूसरे दिन
उसे बैैक मे लेे जाकर
जमा कर दिया।
सोमवार, 8 अप्रैल 2019
बुधवार, 3 अप्रैल 2019
पनी बेचने वाला लडका
एक लडका ,जो स्टेशन पर पानी
की बोतल बेेेचता था। पानी की
बोतल बेच कर अपना और अपने
परिवार का पालन करता था।
वह रोज शुबह उठ कर नहा कर
रोटी खाकर ,और हाथ मे पानी
की बोतल लेेे कर शुबह शुुुबह ही
स्टेशन पहुुंच जाता था।
एक दिन.....
जब वह पानी की बोतले
बेच रहा था तब एक सेठ ने उसे बुलाया और बोला.....
एक बोतल कितने की है....
लडका कुछ न बोला।
मुस्कुरा कर आगे निकल गया।
सेठ जी के बगल बैठा दूूूसरा
आदमी लडके को देख रहा था।
उस आदमी ने सोचा लडका
मुस्कुरा कर आगे निकल
गया... आखिर क्यों....
इसका मतलब कुुुछ तो है...
उस आदमी से रहा नही गया,
और वह वहाँँ से उठ कर
उस लडके के पास गया
और पूछा......
बेटा तुम वहां से मुस्कुरा कर
आगे निकल गयेे ......
इसका मतलव....
अरे भाई ...
इसका मतलब यह है कि ...
सेठ जी को प्यास लगी
ही नही थी...वह तो केवल
पानी के बोतल का दाम
पूछ रहे थे........
जिसको प्यास लगी
होती है वह पानी
पहले पीताा है दाम
बाद मे पूछता हैं।
इसी लिए हम आगे
निकल आऐ........
.।।.................।....................।।
.
की बोतल बेेेचता था। पानी की
बोतल बेच कर अपना और अपने
परिवार का पालन करता था।
वह रोज शुबह उठ कर नहा कर
रोटी खाकर ,और हाथ मे पानी
की बोतल लेेे कर शुबह शुुुबह ही
स्टेशन पहुुंच जाता था।
एक दिन.....
जब वह पानी की बोतले
बेच रहा था तब एक सेठ ने उसे बुलाया और बोला.....
एक बोतल कितने की है....
लडका कुछ न बोला।
मुस्कुरा कर आगे निकल गया।
सेठ जी के बगल बैठा दूूूसरा
आदमी लडके को देख रहा था।
उस आदमी ने सोचा लडका
मुस्कुरा कर आगे निकल
गया... आखिर क्यों....
इसका मतलब कुुुछ तो है...
उस आदमी से रहा नही गया,
और वह वहाँँ से उठ कर
उस लडके के पास गया
और पूछा......
बेटा तुम वहां से मुस्कुरा कर
आगे निकल गयेे ......
इसका मतलव....
अरे भाई ...
इसका मतलब यह है कि ...
सेठ जी को प्यास लगी
ही नही थी...वह तो केवल
पानी के बोतल का दाम
पूछ रहे थे........
जिसको प्यास लगी
होती है वह पानी
पहले पीताा है दाम
बाद मे पूछता हैं।
इसी लिए हम आगे
निकल आऐ........
.।।.................।....................।।
.
सोमवार, 1 अप्रैल 2019
एक आदमी
एक आदमी रोज बस से
सफर करता था पर बस
का टिकट नहीं लेता था।
बस वाला बोला...
भाई साहब
टिकट ले लो।
वह आदमी बोला हम
टिकट नहीं लिया करते।
अगले दिन फिर वह आदमी
आया । और बस पर सवार हुआ
बस वाला वोला टिकट....
वह आदमी रौब से बोला...
तेरे समझ मे नही आता हम
टिकट नही लेते।बस वाला
घबरा गया और उसने यह बात
दिल पर ले ली।
ऐसा करते करते उस आदमी
का तीन महीने बीत गया।और फिर.....
एक दिन बस वाला उस आदमी
के सामने जोश के साथ खडा
हो गया और बोला.......
भाई टिकट ले लो।
आदमी बोला समझ मे नही
आता है कि हम टिकट नहीं लेते हैं।
आज टिकट ले लो..
आदमी... पास बनवा रखा है।
इसलिए मै टिकट नहीं लेता।
सफर करता था पर बस
का टिकट नहीं लेता था।
बस वाला बोला...
भाई साहब
टिकट ले लो।
वह आदमी बोला हम
टिकट नहीं लिया करते।
अगले दिन फिर वह आदमी
आया । और बस पर सवार हुआ
बस वाला वोला टिकट....
वह आदमी रौब से बोला...
तेरे समझ मे नही आता हम
टिकट नही लेते।बस वाला
घबरा गया और उसने यह बात
दिल पर ले ली।
ऐसा करते करते उस आदमी
का तीन महीने बीत गया।और फिर.....
एक दिन बस वाला उस आदमी
के सामने जोश के साथ खडा
हो गया और बोला.......
भाई टिकट ले लो।
आदमी बोला समझ मे नही
आता है कि हम टिकट नहीं लेते हैं।
आज टिकट ले लो..
आदमी... पास बनवा रखा है।
इसलिए मै टिकट नहीं लेता।
सदस्यता लें
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तोतला बेटा...
मां अपने तोतले बेटे से कहा। बेटा आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत । वर्ना वह लोग भी मना कर देंगे। बेटा...
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