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मंगलवार, 31 दिसंबर 2019

बहुत समय पहले की बात

बात उस समय की है जब,
लोगों के पास मोबाइल फोन
नहीं हुआ करता था। तब
घर परिवार के सभी लोग
एक साथ रहते थे।
    उस समय उन लोगों के हाथों
मे कुछ न कुछ कला होती थी।
उस समय वह लोग खाली नहीं
बैठते थे , कुछ न कुछ कला
करते ही रहते थे।साथ बैठकर
खाना खाते थे,एक साथ बैठने
का मजा ही कुछ अलग होता है।
  पर अब देखो जब से लोगों के
हाथों में मोबाइल आ गयी है
तब से लोगों को एक साथ
बैठने का मौका ही नहीं
मिलता है।आज का समय
कितना बदल गया है,अब
पहले जैसे लोग नहीं रहे।
अब वह कला लोगों के हाथों,
में नहीं ,जो क ई वर्षों तक मठ
मन्दिरों का निर्माण किया जा ता
था।और पहृले के लोग अपनी
कलाओं का प्रर्दशन करने ,य अपना
हुनर दिखाने का मौका मिलता था।






शनिवार, 28 दिसंबर 2019

परिश्रम

हर इंसान को परिश्रम करना चाहिए।
यहाँ सभी सफल होने की इच्छा
रखते हैं।यहाँ सफल होने वाले

इंसान की संख्या बहुत ज्यादा
नही है।अधिकांस आदमी सफल
नही होते।असफल होने पर
दुख होना स्वभाविक हैं।लेकिन
फिर भी हमे निराश नहीं होना
चाहिए।हमे सफलता के लिए
लगातार प्रयास करते रहना
चाहिए। परिणाम की चिंता
किये बिना अपना कार्य करते
रहना ,,,,,,,,, सफलता का,,,
      मूल   मंत्र  हैं  ।

गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

चाँद ग्रहण की सराहना

देख आया चंद्र गहना...।
देखता हूँ दृशय अब मै,
मेड़ पर इस खेत की बैठा अकेला ...।।
एक बीते के बराबर...।
यह हरा ठिगना चना
बाँधे मुरैठा शीश पर....।
छोटे गुलाबी फूल का,,,,,
सज कर खडा हैं ....।।

मंगलवार, 24 दिसंबर 2019

सीखने का सिलसिला

अगर आप कुछ सीख रहें है,
य सीखना चाहते हैं तो आप, सीखने
का सिलसिला लगातार जारी रखे।बीते हुए कल
से आज हमारा कुछ बेहतर हो।
यह बेहतरी की सोच बिचार किसी भी
मामले मे हो सकता हैं।
   कुशलकरमी  बने रहने के लिए
अपने कौशल को बढातेऔर निखारते
रहना चाहिए।हम सब जानते हैं।
दुनिया परिवर्तन शील हैं।

नौकरी का बाजार भी कई प्रकार के
परिवर्तन का गवाह रहा।
 आज मै यानी वर्तमान मे जीना श्रेष्ठ माना जाता है।
यह विज्ञान नही एक कला हैं।

सोमवार, 23 दिसंबर 2019

सुबह उठकर न करे ऐसा

अगर आप सुबह उठकर
ऐसा करते हैं, तो आज से
आप यह जान ले,कि आगे से
आप ऐसा न करे...सुबह उठतेही
आप नहाये नही ,आप के शरीर
का तापमान विगड सकता हैं।


शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

यह प्यास कब बुझेगी

चुप खडा बगुला,
डुबाए टाँग जल मे,,
देखते ही मीन चंचल,
ध्यान निद्रा त्यागता हैं,,
चट दबाकर चोच मे,
नीचे गले के डालता हैं,,
एक काले माथ वाली, चतुर चिडिया,
सफेद पंखो के झपटे मार फौरन,,
टूट पडती हैं भले जल के ऊपर,
एक उजली चटुल मछली,,
चोच पीली मे दबाकर,
दूर उडती हैं गगन मे,,,,,,,,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

सही निर्णय

कुछ समय पहले की बात है,
  एक बार राजकुमार गौतम,
अपने बगीचे में सैर कर रहे थे।
    उसी समय अचानक एक,
घायल हंस उनके सामने आ गिरा।
  उसका शरीर
तीर लगने से घायल,
हो गया था।
  राजकुमार को उस  हंस पर दया
आ गयी।
और फिर उसने उस हनस को गोद
   मे उठा लिया।
वे प्यार से उनके पंखो को सहलाने लगे।
  फिर उसने धीरे से उसके शरीर से
तीर निकाला, और उसके घाव को साफ
  किया, फिर उस हंस को पानी पिलाया
धीरे धीरे हंस की पीडा कम होने लगी।
  कुछ समय बाद राजकुमार का चचेरा
भाई गौतम दौडता हुआ वहां आया।
  वह बोला यह।इस मजे दे दो यह मेरा
शिकार हैं।
  गौतम ने सवाल किया‌‌,,,तुमने इस पक्षी
     को घायल किया।इसने तुम्हरा किया
वीगाडा था।
    मैंने इसे बचाया हैं यह मेरा है,मैं इसे
तुमको नहीं दे सकता।यह कहकर वह
राजमहल की ओर चल दिया ,देवदत्त
भी पीछे पीछे चल दिया।
  दोनों निर्णय के लिए राजा के पास पहुंचे।
देवदत्त ने अपनी बात कही ।गौतम मेरा हंस
नहीं दे रहा है।यह हंस मेरा है इसे मैनै मारा है।
   गौतम बोला मैंने इसे बचाया हैं,यह मेरा है।
राजा ने दोनों की बातो को सुना।
  राजा ने कहा,,,, मारने वाले से बचाने
वाला अधिक बड़ा होता है,,,,
  अतः इस हंस पर गौतम का अधिकार है।
राजकुमार गौतम आगे चलकर,,,

गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

चालाक लोमडी और सारस

कुछ समय पहले की बात है।
  किसी जंगल में एक लोमडी,
और एक सारस रहते थे।
   दोनो मे खूब मित्रता थी।
दोनो सारे काम साथ साथ ,
   करते थे।
एक दिन की बात है, लोमडी ने,
    सारस को अपने यहाँ दावत
पर बुलाया।
  लोमडी ने अपने मित्र के सम्मान में,
     मीठी खीर बनाई।
उसने इस खीर को एक चौडी,
   थाली मे परोस दिया।
लोमडी बोली भाई सारस,
  आओ खाना शुरू करें।
दोनो साथ साथ खाने बैठ गये।
   लोमडी तो तेजी से सारी,
खीर खा गयी।
   लेकिन सारस की बडी चोच,
मे खीर न पहुंच सकी।
    उसे भूखा रहना पडा।
वह लोमडी से वोला.....
   आप का भोथन वहुत,
स्वादिष्ट था।
   आज शाम का खाना आप को,
मेरे यहाँ करना हैं।
   सारस लोमडी से बदला लेना,
चाहता था।
उसने बढिया शोरवा पकाया।
  शाम को लोमडी मित्र के घर,
आ पहुंची।
    शोरवे की मीठी सुंगध से,
लोमडी की भूख तेज हो गयी।
  सारस ने सुराही मे शोरवा परोसा।
जिसका मुँँह बहुत छोटा,और ,
   पतला था।
सारस ने बहुत आराम से,वर्तन
  मे चोच डाली और बडे मजे से
सारा सोरवा पी लिया।
   लोमडी भूख के मारे चुपचाप,
बैठी यह सब देखती रही।
  लोमडी अब समझ चुकी थी,
कि उसने अपने मित्र के साथ ,
 चालाकी दिखा कर बहुत बडी,
 गलती की हैं।
ऐसा करके अब वह अपने,
व्यावहार पर पछता रही थी।

रविवार, 8 दिसंबर 2019

मेरा कल्पना शील मन

मेरा कल्पनाशील मन अनेक
बार अनेक चीजो को देखता हैं।
कभी कभी मै कल्पना करता हूँ
कि यदि मेरा खुद का स्कूल
होता तो....
  मुझकों लगता कि मानो
हमारे ऊपर बहुत सी जिम्मेदारी
आ जाती।और मै उसे बाखूबी
निभाता।
 सबसे पहले मै स्कूल की सारी
व्यवस्था को नियमित रूप से
करता।
 स्कूल सही समय पर खुले,
सही समय पर उपस्थित,
  सही समय पर प्रार्थना हो,
समयनुसार सभी कलास
 पीरियड लगे,इस काम को
मै प्राथमिकता देता।
 हमारी देख मे ,परीक्षा की
योजना पढाई के लिए अत्यंत
 हितकर हैं।
और हम प्रयास करेंगे कि,
 छात्रो की समय समय पर
छोटी छोटी परीक्षाएं हो।
  साल भर मे कम से कम
दो बार बडी परीक्षा कराते।
 जिससे छात्र छोटी परीक्षा
के माध्यम से, विषय को
सारपूर्ण समझ सके।
 और बडी परीक्षा के द्धारा
पूरा पाठ्यक्रम तैयार कर सके।
  नकल और धोखाधड़ी को
समाप्त कर देता।
  मै स्कूल में उन गुदडी के
लालो को पहचानने और
विकसित करने का पूरा प्रयास
करता,...जो गरीबी के कारण..
अपनी प्रतिभा का विकास
नही कर पाते।ऐसे छात्रो
को प्रोत्साहन और सहायता
दिलाने का प्रयास करता।
  खेल कूद का बढावा देता।
बच्चों को समय समय पर
खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित
कराते,और उसमे उनको
पुरस्कार विजेता घोषित करते।
   बाद विवाद ,नाटक,अभियान,
भाषण,आदि कार्य मे बच्चों
को गहरी रूचि दिलाते।

 इसकेलिए मै कला संपन
अध्यापक का एक उत्साही
मंडल तैयार करता,जो
बच्चों में यह सब कला
विकसित करतेऔर
उनका चहुंमुखी विकास
करने मे उनकी सहायता प्रदान
करते।
  हमारा प्रयास होता कि
  हमारे स्कूल के छात्र केवल
ग्रहक न हो,अध्यापक ज्ञान
विक्रेता न हो।
  उनमे ज्ञान,श्रद्धा और प्रेम
का गहरा सम्बध हो।
   इसके लिए मै हर संभव
प्रयास करता।
   मै अपने अध्यापक और
छात्रो के बीच निरभयता का
वातावरण वनाता,जिससे
सब एक दूसरे को अपनी
भावनाऐ कहसुन सके।
     मै समझता हूँ कि...
इन उपायों मे मेरा स्कूल...
   एक श्रेष्ठ स्कूल बन जाता।

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

एक सज्जन इलाहाबाद पहुंचे

गांव से चलकर एक सज्जन इलाहाबाद
पहुंचे। जेसे ही ्् वह टेंशन से
उतर कर बाहर निकले , वैसे ही
एक लड़का आकर उनके पैरों
पर गिर जाता है,और कहता है,
अरे चाचा जी ,आप कहां थे,,,
    आप ने यहां तक आने में
इतनी देरी लगा दी।और हम
कब से आप की राह देख
रहे हैं।तभी सज्जन महोदय
ने कहा आप कौन हो भाई
हमने आप को पहचाना नहीं।
   अरे आप ने हमें नहीं पहचाना,,
हम आप के दूर के चाचा के
मामा का लड़का मोहन हूं।
  मोहन ,,कौन मोहन,,
खैर छोड़ो,अब मैं बूढ़ा हो गया,
इसीलिए,निगाहें कमज़ोर हो
गरीब हैं,हो तुम पहचान में
नहीं आ रहे हो।
   खैर छोड़ो,अब एक से भला
दो लोग हो गये
  अब इलाहाबाद घूमने मे काफी
मजा आएगा।
  अब वह सजजन अब मोहन
के साथ इलाहाबाद घूमने लगे।
   चलो कोई साथ तो मिला।
कभी इस मंदिर से उस मंदिर,
अब पहुंच गये गंगा घाट।
मोहन,,न हां ले।
 हां हां नहा लीजिए।इलाहाबाद
घूमने आऐ हैं, नहाये नहीं,
यह कैसे हो सकता हैं।
अब महासय  गंगा मे डुबकी लगाई
हर हर गंगे।बाहर निकले तो
महासय का सारा सामान गायब।
  कपड़े गायब,,मोहन भी गायब।
मोहन ऐ मोहन।
लेकिन मोहन वहां पर हो
तो बोले।अब महासय
तौलिया लपेटे खड़े हैं।अरे
भाई साहब आप ने मोहन
को  देखा है ।
कौ



गुरुवार, 5 दिसंबर 2019

एक बेटी का खत

एक पिता कहता है कि, बेटी हमें
अफसोस है कि तुम इस देश में
पैदा हु ई है। जहां लोग एक जुर्म
छुपाने के लिए,दूसरे जुर्म का सहारा
लेते हैं। जहां पीड़ित पीड़िता के
बजाय अपराधी और उसका धर्म
महत्व पूर्ण हो जाता है।
     औरत के शरीर के भूगोल
को देखने वाला हमारा समाज
पता नहीं उनकी आत्मा को क्यों
नहीं देख पाता।
  आप को पता है ,औरते चुप क्यों
रहती हैं, क्यों कि बोलना उन्हें
बचपन से ही सिखाया ही नहीं जाता।
      अगर वे आवाज ऊंची करके
बोलती हैं तो उनको धीमा बोलना
सिखाया जाता है।
    जहां तुम परी बनकर उतरी
थी वहां नारी को देवी मानकर
पूजा करना एक ढोंग है।
     तुम जैसे करोड़ों बेटियों
ने यहां पर जन्म लेकर गलती की है ‌।
       यहां राजनैतिक यह आर्थिक
बदला लेने के लिए बेटियों को ही
चुना जाता है।
   आपबीती सुनाने में
बेझिझक शब्द फूटते नहीं
गले से ।
   अपनी सखी सहेलियों से से ही
कह पाती है।


बुधवार, 4 दिसंबर 2019

अनुशासन की प्रथम पाठशाला

अनुशासन काअर्थ है,
       शासन .....ब्यवस्था के
अनुसार जीवन यापन करना।
यदि कोई ब्यवस्था निश्चित हैं,
तो उसके अनुसार जीना।
    जीवन मे कोई नियम ब्यवस्था,
या क्रम बनाना।
  अनुशासन जीवन को चुस्त दुरुस्त
बना देता है।
इससे कार्य कुशलता बढती हैं।
 समय का पूरा पूरा सदुपयोग होता हैं।
      अनुशासन का पहले पहल
परिवार से सीखा जाता हैं।
यदि परिवार में सब कार्य ब्यवस्था से
किये जाते हैं तो बच्चा भी अनुशासन
सीख जाता हैं।
इसलिए मनुष्य को सबसे पहले
अपना घर अनुशासित होनी चाहिए।
    सामाजिक जीवन में अनुशासन होना
अनिवार्य है। जैसे ‌‌‌‌,,,
     गाड़ी, बसे, स्कूल, कार्यालय,
सभी समय से खुले,,,
समय से बन्द हो।
    कर्मचारी ठीक समय पर अपने अपने
स्थान पर कार्य के लिए तैयार हो।
   यहां पर टालमटोल न हो।
  इसी के साथ छात्र भी समाजिक
कार्यो में यथासमय पर पहुंचे।
वेवहां की सारी नियम ब्यवस्था
 का पालन करें।
वास्तव में अनुशासन एक स्वभाव है।
     एक ज्ञान है।
जीवन को समधुर सुविधा पूरा करना।
वह न केवल स्वच्छता पर ध्यान
देता है, अपनी बोलचाल और ब्बयवहार
पर भी ध्यान देता है।
     इस प्रकार,,,,
  अनुशासन जीवन मूल्य है।
मनुष्य का आर्दश है।

मंगलवार, 3 दिसंबर 2019

लक्ष्य मानव का

हर मानव का कोई न कोई
लक्ष्य होना चाहिए।
लक्ष्य बनाने से जीवन में रस
आ जाता है।
मैने तय किया कि हम पत्रकार
बनूंगा।नव भारत टाइम में संबाददाता
बिरोधी बिभाग के प्रमुख पत्रकार।
  जो पिछले वर्ष गैस सिंलेडर
मे हुए बडे पैमाने पर धाधली
को अपने लेखो के माध्यम से
बन्द करवा दिया था।
उन्हीं के लेखो के कारण...
   आज हमारे शहर मे बहुत
से गरीब परिवार के लोगो
और दीन दुखियों को न्याय मिला।
    बस यही सब कारण है कि
आज हम उनका आदर करते हैं।
  और मेरा भी मन करता हैं कि
हम उनकी तरह पत्रकार बनकर
रोज बढती समस्या का डट कर
मुकाबला करें।
   जबकि हमको पूरी तरह से
पता हैं कि एक पत्रकार बनने
मे खतरा बहुत ज्यादा है, और
तो और पैसा भी बहुत कम मिलता


तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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