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बुधवार, 13 मार्च 2019

अमीर सेठ

हसवर पुरा नामक गांव में एक सेठ रहता था।उनका नाम सेठ जनक लाल था। उनकी पत्नी का नाम तारा था,और पुत्री का नाम सोना था।उनकी पुत्री बहुत ही खूबसूरत थी।सेठ जनक लाल ने अपनी पुत्री सोना के लिए ,वर की तलाश की।लडके का नाम मोहन था।
  सेठ जनक लाल ने अपनी
पुत्री सोना की शादी मोहन नामक लडके से कर दी।और खूब सारा सोन चाँदी लडकी कोो देकर घर से विदा किया।
    कुुुछ समय तक सब कुछ  ठीक ठाक था। और फिर  आगे......
  मोहन की लत जुआ और शराब की पडी। धीरे धीरे लत इतनी बढ गयी कि..घर का सारा समान और दहेज में मिला सोना ,चाँँदी बेेच कर जुुुआ और  शराब मे उडा दिया... अब आगे...
   अब मोहन एक एक पायी को मोहताज हो गया।
  यह सब कुछ देख  सेठ  जनक  लाल की पत्नी तारा ने कहाँ.... अपनेे ..
 दमाद मोहन की हालात   ठीक नहीं है,
उसको कुछ मुुद्रा दे दो...
  यह सुन सेेे ठ।    ने। मना  कर दिया।
 इतना सब  कुछ  दिया लेकिन उसने
जुआ  और  शराब  मे उडा दिया, अब मै उसेे कुछ भी न दूगा।
   और फिर  अचानक एक दिन...
सेठ जी को किसी कार्य  से  बाहर
जाना था....फिर उसके बाद...
  सेठ की पत्नी तारा ने अपने दमाद ...
  मोहन  को  घर पर बुलाया, और लड्डू की टोकरी में  खूब ढेर सारी मुद्ररा    रख कर
विदा किया।
  मोहन गांव से कुछ दूूूर  जाकर यह सोचता है यह टोकरी बहुत भारी है हम
इसको  बेेच  दे  । और   वह  दुुुकान पर
जाकर बेच देेेता   है  । और बदले मे पैैसे
लेकर घर चला  जाता है।
...इधर सेठ जी अपने घर पर आते है ,और सेठ को लड्डू खाने का मन होता है, और  फिर  सेठ उसी  दुुुकान पर  जाकर  दुुुकान दार  से लड्डू माँगते है,....
दुुुकान दार  वही  लड्डू  की  टोकरी
 उठा कर सेठ  को  दे देता है।
सेठ उस टोकरी को  घर पर लाकर
खोलते हैै, और यह सब   माजरा देख
सेठ को  समझने  मे  जरा भी देेे र
नही लगती।...फिर।  सेठ जी...
  अपनी पत्नी। तारा से  कहते हैं...
      देेखा यह मेरी मेहनत का धन है।

    मेेेहनत  से  कमया  हुआ है।
इसलिए यह धन उनको नही। मिला..

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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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