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गुरुवार, 17 जनवरी 2019
सोमवार, 14 जनवरी 2019
शुक्रवार, 11 जनवरी 2019
सोमवार, 7 जनवरी 2019
इंसान मरने से पहले
इंसान का पूरा शरीर जब उसका साथ छोडने लगता है, य यू कहे इंसान जब मरने लगता हैं तो उसे कुछ चीजें स्यंम को नही दिखाई देती ,जैसे आइये जानते हैं .....
1....इंसान के शरीर का रंग पीला,य सफेद पडना....इंसान का शरीर जब उसका साथ छोडने लगता है तो, उसके शरीर का रंग पीला य सफेद होने लगता हैं।
२.....प्रकाश का कम दिखना...ऐसी स्थिति में जाने के बाद इंंसान को प्रकाश कम दिखाई देता है।
३......स्यम के प्रतिबिम्ब का न दिखना...प्राण निकलते समय इंंसान को खुद की छाया नही दिखाई देती है।
४......शरीर में शिथिलता का होना.....जब इंसान का शरीर साथ छोडने लगता है तो , इंंसान का पूरा
शरीर ढी ला पड जाता है,य शिथिल हो जाता है।
......यमराज का आगमन..... तब उस इंसान के पास यमराज आते हैं और उसके प्राण कोर कर अपनेे साथ लेकर चले जातेे हैं।....
1....इंसान के शरीर का रंग पीला,य सफेद पडना....इंसान का शरीर जब उसका साथ छोडने लगता है तो, उसके शरीर का रंग पीला य सफेद होने लगता हैं।
२.....प्रकाश का कम दिखना...ऐसी स्थिति में जाने के बाद इंंसान को प्रकाश कम दिखाई देता है।
३......स्यम के प्रतिबिम्ब का न दिखना...प्राण निकलते समय इंंसान को खुद की छाया नही दिखाई देती है।
४......शरीर में शिथिलता का होना.....जब इंसान का शरीर साथ छोडने लगता है तो , इंंसान का पूरा
शरीर ढी ला पड जाता है,य शिथिल हो जाता है।
......यमराज का आगमन..... तब उस इंसान के पास यमराज आते हैं और उसके प्राण कोर कर अपनेे साथ लेकर चले जातेे हैं।....
रविवार, 6 जनवरी 2019
रावण सीता को न छू सका ...
आईऐ जानते हैं इसके पीछे का कारण...रावण परम भक्त शिव का था। वह परम क्षानी था।
एक बार रावण कुवेेे केे शहर अलाका पहुंचा।
वहाँ पहुुचर उसे वहाँ का नजारा इतना भाया,कि उसने अपना आसन वहीं जमा लिया।
वहाँ का नजारा देखकर मोहित हो गया, और धीरे धीरे कामवासना उसे सताने लगी।
तभी उसकी नजर रंभापर पडी।
रंभा रावण की पुत्र वधू थी।
रंभा की खूबसूरती देखकर रावण
खुद को रोक न सका।
और रावण ने रंभा को पकड लिया, फिर उसके साथ दुुुराचार किया।
इस बात की खबर नल कुबेर को लगी,तो वह बहुत क्रोधित हो उठे।और रावण को त्राप दे दिया....
...कि यदि किसी नारी की इच्छा के विना वह उसको छूूूता है तो उसका सर सौ टुकडो मे बट जाएगा।
....इस कारण रावण सीता को छू नही सकता था...............
एक बार रावण कुवेेे केे शहर अलाका पहुंचा।
वहाँ पहुुचर उसे वहाँ का नजारा इतना भाया,कि उसने अपना आसन वहीं जमा लिया।
वहाँ का नजारा देखकर मोहित हो गया, और धीरे धीरे कामवासना उसे सताने लगी।
तभी उसकी नजर रंभापर पडी।
रंभा रावण की पुत्र वधू थी।
रंभा की खूबसूरती देखकर रावण
खुद को रोक न सका।
और रावण ने रंभा को पकड लिया, फिर उसके साथ दुुुराचार किया।
इस बात की खबर नल कुबेर को लगी,तो वह बहुत क्रोधित हो उठे।और रावण को त्राप दे दिया....
...कि यदि किसी नारी की इच्छा के विना वह उसको छूूूता है तो उसका सर सौ टुकडो मे बट जाएगा।
....इस कारण रावण सीता को छू नही सकता था...............
अपने हाथों अपनो का कत्ल
आईऐ जानते हैं आखिर क्यों ऐसा हुआ...
उस समय। दिल्ही का। शासक शेेेर शाह
सूरी ने चार महीनों तक रायसेन के किले
को घेरा हुुु आ था।
लेकिन फिर भी वह किले को नही जीत सका।
तव उसने ताावे के पैैसे को गलवा कर उनसे
तोपो का निर्माण किया था।
ऐसा करने से वह जीत गया था।
उस समय यहां के राजा पूरन मल हुआ करते थे।
शेरशाह ने धोखे से पूरन मल के किले पर हमला कर दिया।
जब इसकी जानकारी पूरनमल को हुई तो......
उन्होंने अपनेे ही। हाथो से अपनी प्रियतमा ....
पत्नी का सिर धड से अलग कर दिया।
यह कठोर निर्ण् य इस लिये लिया था
रत्नावली की सतीत्व की रक्षा हो सके.......
और वह शत्रुओं के हाथ न लगे।.....
उस समय। दिल्ही का। शासक शेेेर शाह
सूरी ने चार महीनों तक रायसेन के किले
को घेरा हुुु आ था।
लेकिन फिर भी वह किले को नही जीत सका।
तव उसने ताावे के पैैसे को गलवा कर उनसे
तोपो का निर्माण किया था।
ऐसा करने से वह जीत गया था।
उस समय यहां के राजा पूरन मल हुआ करते थे।
शेरशाह ने धोखे से पूरन मल के किले पर हमला कर दिया।
जब इसकी जानकारी पूरनमल को हुई तो......
उन्होंने अपनेे ही। हाथो से अपनी प्रियतमा ....
पत्नी का सिर धड से अलग कर दिया।
यह कठोर निर्ण् य इस लिये लिया था
रत्नावली की सतीत्व की रक्षा हो सके.......
और वह शत्रुओं के हाथ न लगे।.....
दुष्ट रानी
दूर देश में एनजिंगा ऐमबांदे नाम की रानी राज करती थी।
वह बहुत ही खूंखार और हैैवान तरीकों की रानी थी।
वह नये नये मर्द् के सा थ अपनी प्यास बुझाने के लिए दो लोगों को आपस मे लडवााती थी,और ई स लडाई
मे जो जीत जाता था ,उसके साथ अपनी राते रगींन
करती और उससें शरीरि क सम्बन्ध बनाती।
शरीरिक सम्बन्ध बनाने के बाद, उस आदमी को
जिन्दा आग मे जला देती थी।
कहते हैं यह राज पाठ लेनेे केे लिए इसने
अपने भाईयों को भी मरवा डाला था।
वह बहुत ही खूंखार और हैैवान तरीकों की रानी थी।
वह नये नये मर्द् के सा थ अपनी प्यास बुझाने के लिए दो लोगों को आपस मे लडवााती थी,और ई स लडाई
मे जो जीत जाता था ,उसके साथ अपनी राते रगींन
करती और उससें शरीरि क सम्बन्ध बनाती।
शरीरिक सम्बन्ध बनाने के बाद, उस आदमी को
जिन्दा आग मे जला देती थी।
कहते हैं यह राज पाठ लेनेे केे लिए इसने
अपने भाईयों को भी मरवा डाला था।
यह ऐक ऐसी रानी हैै जो अपनी तडप बुझाने के लिए
न जाने कितने लोगों को जिन्दा आग के हवाले कर दिया।
परासर मुनि और सत्यवती
परासर मुनि नदी पार कर रहे थे।
जिस नाव पर परासर मुनि बैठे हुए थे, वह नाव कोई और नही बल्कि सत्यवती नामक एक खूबसूरत लडकी चला रही थी।
परा सर मुनि ने उस खूबसूरत
लडकी से सीधेे ही सम्बन्ध बनाने की बात कह डाली।
सत्यवती नामक लडकी ने पहले
तो इंकार किया और फिर
बाद मे राजी हो गयी।
लेकिन उसने तीन सर्ते रखी।
पहली बात यह कि हमे सम्बन्ध बनाते समय हमे कोई देख न ले
इसके लिए परााार मुनि ने चरो ओर कोहरे का एक जाल बना दिया।
दूसरी सर्तै प्रसूति के दौरान मै कुवारी रहूँ।
तीसरी यह कि मेरे शरीर से मछली की दुुर्रगंध नही आऐ,उसके लिए परासर मुनि ने उसके शरीर को
फूलों के समान सुगंधित बना दिया।
जिस नाव पर परासर मुनि बैठे हुए थे, वह नाव कोई और नही बल्कि सत्यवती नामक एक खूबसूरत लडकी चला रही थी।
परा सर मुनि ने उस खूबसूरत
लडकी से सीधेे ही सम्बन्ध बनाने की बात कह डाली।
सत्यवती नामक लडकी ने पहले
तो इंकार किया और फिर
बाद मे राजी हो गयी।
लेकिन उसने तीन सर्ते रखी।
पहली बात यह कि हमे सम्बन्ध बनाते समय हमे कोई देख न ले
इसके लिए परााार मुनि ने चरो ओर कोहरे का एक जाल बना दिया।
दूसरी सर्तै प्रसूति के दौरान मै कुवारी रहूँ।
तीसरी यह कि मेरे शरीर से मछली की दुुर्रगंध नही आऐ,उसके लिए परासर मुनि ने उसके शरीर को
फूलों के समान सुगंधित बना दिया।
गरीब परिवार
एक समयकी बात है ,दूर गांव में एक गरीब परिवार रहता था।
वह दिन भर मेहनत मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का पालन करता था।
एक दिन वह अपने घर पर रहकर घर का काम कर रहा था,तभीी वहाँ पर एक साधू आया,और उसने उस कि सान को एक पत्थर दिया।
किसान ने उस पत्थर कोठा कर दीवार के ऊपर रख दिया।
और वह साधू वहाँ से चला गया।
एक सााा बाद वह साधू फिर वापस उस किसान
के घर वापस आकर उस किसा न से बोला।
मैने जो तुमको पत्थर दिया था उसका तुमने काा किया।
तुमको मालुम है यह पा रस पत्थर है।
किसान बोला जी हाँ, मै चाहता तो इससे ढेेर सा सोना बना डालता।यदि हम ढेर सा
सोना बनाा लेेेता तो उसकी रखवाली कौन करता।
इस सोने से हमे शांती मिलती।
उस मालिक का नाम लेनेे का। समय हमे मिल पाता।
हमे और हमारे परिवार को शाांति चाहिए।
इस लिए महत्मा जी आप इस पारस पत्थर को लेेे जाऐ
वह दिन भर मेहनत मजदूरी करके अपना और अपने परिवार का पालन करता था।
एक दिन वह अपने घर पर रहकर घर का काम कर रहा था,तभीी वहाँ पर एक साधू आया,और उसने उस कि सान को एक पत्थर दिया।
किसान ने उस पत्थर कोठा कर दीवार के ऊपर रख दिया।
और वह साधू वहाँ से चला गया।
एक सााा बाद वह साधू फिर वापस उस किसान
के घर वापस आकर उस किसा न से बोला।
मैने जो तुमको पत्थर दिया था उसका तुमने काा किया।
तुमको मालुम है यह पा रस पत्थर है।
किसान बोला जी हाँ, मै चाहता तो इससे ढेेर सा सोना बना डालता।यदि हम ढेर सा
सोना बनाा लेेेता तो उसकी रखवाली कौन करता।
इस सोने से हमे शांती मिलती।
उस मालिक का नाम लेनेे का। समय हमे मिल पाता।
हमे और हमारे परिवार को शाांति चाहिए।
इस लिए महत्मा जी आप इस पारस पत्थर को लेेे जाऐ
शनिवार, 5 जनवरी 2019
मेहमान ने उसकी बीबी पर डाली बुरी नजर
आपने चितौड़ का नाम तो सुना ही होगा।वहां पर पदमावती नाम की महारानी थी।जिनके पति का नाम था राजा रतन सिंह ।कहते हैं इस राजा के पीछे से वार कर इनकी हत्या कर दी गयी।आइये और अधिक इनके वारे मे जानते हैं।
कहते हैं उस समय अलाउद्दीन खिलजी हुआ करता था। जो कि अपना दिल रानी पदमावती पर हार चुका था।
कहते हैं उस समय अलाउद्दीन खिलजी हुआ करता था। जो कि अपना दिल रानी पदमावती पर हार चुका था।
इस लिए वह राजा रतन सिंह से मिलनेे उनके महल पर गया। राजा रतन नेे उनसे मेेेहमान जैसा सलूक किया।
मगर अलाउदीन ने रानी को देखने कीी इच्छा जाहिर की।
राजा रतन सिंह यह सुन कर आगबबूला हो गया।
मगर वह कुछ नहीं बोला
और सही सलामत उनको महल से बाहर कर। दिया ।
फिर अलाउदीन खिलजी
भारी संख्या में सैनिक के साथ राजातन सिंह के महल पर हमला कर दिया।
दोनो के बीच भयंकर युद्ध हुआ और राजा रतन सिंह जीत गये।
लेकिन उसी समय अलाउदीन की सेना ने राजा रतन सिह पर पीछे सेे हमला कर दिया।
और इसी वजह से उनकी मौत हो गयी।
रानी पधमावती को देखनेे के लिए उसने धोखे से राजा रतन सिंह को मार दिया।
मगर रानी पधमावती भी आग मे कूदकर अपनी जान दे देती है।इस तरह
अलाउद्दीन खिलजी हार जाता है।
शुक्रवार, 4 जनवरी 2019
हांडी महारानी,16शताब्दी की घटना
रानी हांडी का विवाह राव रतन सिंह से मात्र एक दिन पहलेे ही हुुुआ था।अभी महारानी हांडी के हाथो की मेहदी भी नही सूखी थी,कि राजा रावरतन सिंह कोणभूमि के लिए रवाना होना पडा।राजा रावरतन सिंह रानी हाडी बहुुत अधिक प्रेम करते थे। उनकोो एक पल के लिए भी छोोो कर दूूू र जाना गवारा नही था।
युद्ध की तैयारी में होोने के बाावजूद भी उनका मन रानी हाडी मे ही लगा हुुुआ था।तभी राजा ने राानी हाडी की एक निशानी को लेने के लिए अपने एक भरोसेमन्द सैनिक को महारानी हांंडी के पास भेजा।जब राजा रावरतन सिंंके द्धाराा भेजे हुए सैनिक को रानी हांंडी ने देेेखा तो वह समझ गयी कि राजा रावरतन सिह अपने प्ररेम के कारण विचलित हैं और इस कारण से उनको युद्ध में भारी नुकसान पहुंच सकता है।रानी ने सैैैनि से कहाा कि वह राजा को अपनी आखिरी निशानी दे।इसके बाद महाारानी हांडी ने अपना शीष काटकर राजा को उपहार स्वरूप भेेजा। धन्य वह राजपूता नी वीरांगनाएं जिन
को अपने प्राण से अधिक देेश की चिंता थी।
गुरुवार, 3 जनवरी 2019
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तोतला बेटा...
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