अब हाल ,
पूछने की जरूरत नहीं !
जख्म पुराने हो गए हैं !
रिश्तो की बातें मत करना,
वह किस्सा पुराने हो गए हैं !
जिंदगी अब किसी के,
जाने से ठहरती नहीं है !
जो दिल से चले गए हैं,
वह याद से भी बेगाने हो गए हैं !!
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अब हाल ,
पूछने की जरूरत नहीं !
जख्म पुराने हो गए हैं !
रिश्तो की बातें मत करना,
वह किस्सा पुराने हो गए हैं !
जिंदगी अब किसी के,
जाने से ठहरती नहीं है !
जो दिल से चले गए हैं,
वह याद से भी बेगाने हो गए हैं !!
बहुत से फल आते हैं ..
कुछ पहले पक जाते हैं ,
कुछ समय का,
इंतजार करते हैं !
प्रकृति....
मनुष्य को ,
यही शिक्षा देती है !
दूसरों की सफलता ,
का मतलब,,
यह नहीं है कि......
आप हार गए....
धैर्य रखें,,,
एक दिन आपका भी समय आएगा !!
एक वक्त के बाद,
जैसे-जैसे इंसान,,
की समझ बढ़ती जाती है !
वैसे वैसे,
भीड़ से दूरियां,,
बढ़ती जाती है,,
क्योंकि
दुनिया की सच्चाई ,
जानने वाले लोग ,
अकेले रह जाते हैं.....
सोना जब तक ,
आग में नहीं ता पाया जाता.....
तब तक कुंदन नहीं बनता है !!
इसी तरह जब तक इंसान ,
संघर्षों से नहीं गुजरता है !
तब तक इसलिए उसकी ,
असली चमक सामने नहीं आती....
संघर्ष में मजबूत बनाता है,
संघर्ष में अनुभव सिखाती है ,
जीने का मार्ग बताता!!
जो आज मेहनत से भागेगा,
वह कल बहुत पछतायेगा !
जो कोशिश,
करना छोड़ देगा,,
वह मंजिल तक कैसे,
पहुंच पाएगा !!
जो अंधेरों से भी ,
उम्मीद रखेगा...
वह एक दिन सूरज बन जाएगा...!
सफलता....
उसी के कदम चूमेगी,,
जो एक दिन ...
गिरकर उठना सीख जाएगा....!
इंसान,
तब तक सहन कर सकता है ,
जब तक ,,
उसके अंदर,
सहन करने की क्षमता होती है !!
उसके बाद तो ,
ना तो ,
रिश्तों की जरूरत समझता है ,
ना ही अपनों की.....
वक्त एक जैसा नहीं होता,
बदलता रहता है !!
जब बदलता है ,
तो सब कुछ,,
बदल कर रख देता है !!
जिन कपड़ों पर ,
अंग्रेजों को,,
अभिमान हुआ करता था,
वह कपड़े आज,
बैंड बाजे वाले,,
पहनते हैं !!
जिन महल में,
राजाओं और बादशाहों की,,
हुकूमत गुंजा करती थी,,,,
वह सुनसान पड़े हैं ,
वहां पक्षियों के निवास बन गया है !!
जिन हवेलियों मे,
भीड़ हुआ करती थी ,
वह सुनसान पड़े हुए हैं !!
वक्त किसी को,
नहीं छोड़ता है ,,
वह सब का,
हिसाब करता है,,
बस वक्त को,
थोड़ा वक्त लगता है !!
यदि आपके ,
मीठे बोलने से ,,
किसी का रक्त बढ़ता है ,,,
तो यह भी रक्तदान है !!
यदि आपके द्वारा ,
किसी की पीठ,,
थप तपने से ,,
उसकी थकावट दूर होती है ,,
तो यह भी एक तरह का श्रमदान है !!
यदि आप कुछ,
खाते समय ....
उतनी ही प्लेट मैं खाना ले ,,
जितना कुछ व्यर्थ न जाए ......
तो यह भी ,,
एक तरह का अन्नदाज है !!
परिवार का सच,
कभी बाहर नहीं,,
करना चाहिए !!
क्योंकि,
घर की बातें,,
घर के चौखट ,,
के भीतरी अच्छी लगती है !!
जब हम,
अपने रिश्तों की कमजोरी ,,
दूसरों को दिखाते हैं !
तो लोग हमें,
जोड़ने के बजाय ,,
तोड़ने लगते हैं !!
समझदार,
इसी में है कि....
परिवार की बातें ,,
परिवार में ....
ही सुलझाई जाए !!
तभी हमार परिवार मजबूत बने रहेंगे....!!
दीपावली पर ....
घर सजाने से पहले,,
अपने मां-बाप,
के चेहरे पर ....
मुस्कान सजाओ !
क्योंकि .....
असली रोशनी दीपों से नहीं,
उनके आशीर्वाद,
और ,,,
दुआओं से होती है !!
हैप्पी दीपावली....
आपका दिन शुभ हो !!
बेटा अपने ,
बूढ़े बाप को,,
अनाथ आश्रम छोड़कर ,,
वापस आ रहा था ?
तब उसकी पत्नी ने,
फोन किया और कहा ?
अपने आप को ,
यह भी कह देना कि,,
त्योहार पर.....
घर आने की जरूरत नहीं है ?
हां वही रहे ,
और हमें शांति से जीने दे...?
बेटा वापस लौट गया,
और फिर ,,
अनाथ आश्रम पहुंचा ?
उसका बाप ,,
आश्रम के मैनेजर के साथ ,,
बहुत खुश था ?
दोनों इस तरह ...
बातें कर रहे थे जैसे एक दूसरे को बरसों से जानते....!
मत करो,
किसी से उम्मीद...
की उम्मीद के टूटते ही ,
आप पूरी तरह बिखर जाए !!
यह दुनिया है ,
यहां आपके जैसा
कोई नहीं है !!
हर किसी को आप समझ नहीं सकते !
और ना ही,
किसी को आप ,,
समझ सकते हैं !!
कितना बदल गया इंसान ,
खेतों में काबिले तोड़े,,
दौलत में घर बार ,
टीवी ने समाज तोड़ा ,,,,
मोबाइल में परिवार.....
सभ्यता में तरक्की की,,,
पर संस्कृत पीछे छूट गए ...
चांद पर पहुंची दुनिया,,
मगर इंसानियत टूट गई !!
मर्द घर चलते हैं !
लेकिन....
औरत...
मर्द का वंश चलते हैं !
एक मजबूत घर ,
वही है ...
जिसमें औरत का ....
मान सम्मान,,
सबसे ऊपर रखा जाता है !
जिस घर की....
औरत ,,,
अपने इज्जत की कीमत...
समझती है !
वह घर ...
बिल्कुल सम्मान का मंदिर बन जाता...!
मजबूत किरदार वाली औरतें ,
नसीब से मिला करती है !
क्योंकि....
मर्यादा उनके अंदर,
में.....
कूट-कूट कर भरी होती है....
और
जिस घर की औरत ....
मर्यादा को समझती है....
फिर चाहे हालात...
कितने ही बुरे,,
क्यों ना हो....
गरीबी भी ...
.सर झुका कर...
सलाम करती है...!!
घर से निकले, दुनिया देखो....!
लोगों से मिले !
व्यवहार बनाएं, दोस्त बनाएं... !
धोखा खाओ, अनुभव करो...
मजबूत बनो....!
इसी तरह से आगे बढ़ोगे...
वरना...
घर में बैठे-बैठे...
!
उम्र गुजर जाएगी.....!
और पता भी नहीं,,,,
चल पाएगा....
इसीलिए कहते हैं...
घर से निकला करो ...
दुनिया देखो...!!
चार दिन गायब होकर,
देख लीजिए ,,
लोग आपका नाम ,
भूल जाएंगे !
इंसान सारी जिंदगी,
धोखे में रहता है ,,
कि वह लोगों के लिए अ हम हैं !
लेकिन हकीकत....
यह होती है कि ,,
आपके होने ना होने से ,,
किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है !!
जिसकी जितनी जरूरत ...
होती है !
उसकी उतनी ही ,
अहमियत होती है !!
ना रुकी वक़्त की गर्दिश...
ना कामना बदला ,,
पेड़ सुखा तो ...
परिंदों ने,,
ठिकाना बदला.......
.........................
.
कोई भी इंसान,
अपने आप नहीं बदलता ?
जिंदगी में कुछ,
हादसा,,
ऐसे हो जाते हैं ...
जो इंसान को,
बदलने पर मजबूर कर देते हैं !
वास्तविक पीड़ा,
तब और अधिक होती है ....
जब कोई अपना होकर,,
भी दूसरे जैसा.....
व्यवहार करने लग जाता है !!
एक साधु,,
बिजली ठीक कर रहा था !
अचानक उसे करंट ,
लग गया ......
साधु......
हर हर गंगे.....
हर हर गंगे.......
बुढ़िया....... और ले ली पंगे...
झू ले तार नंगे .....🍀🍀🍀☘🌳🌳🌳🌳
बिना धन के व्यक्ति का कोई मूल्य नहीं है !
निर्धन व्यक्ति का साथ,
उसके रिश्तेदार ,,
और,
परिवार वाले भी नहीं देते !!
हाथ में अगर धन होता है तो ,
बेरी अर्थात दुश्मन,,
को भी चुप,,
करवाया जा सकता है !!
हाला की पैसा जरूरी नहीं है,
लेकिन फिर भी बहुत जरूरी है !!
हालात को ठीक रखने के लिए ,,
पैसा बहुत जरूरी है !!
यह पैसा बोलता है......
आज के दौर में,,
पैसा बहुत जरूरी है !!
इसलिए खूब कमाए,,
स्वस्थ रहे और मस्त रहे !!
एक गांव में तीन कुआं था !
1... पहला कुंआ सूखा हुआ था ?
2... दूसरे कुएं में मगरमच्छ था
3... तीसरी कुएं में जहर था ?
अगर किसी को प्यास लगी तो ,
कौन से कुएं में जाकर,,
पानी पिएगा,,,
कमेंट कर बताएं.....!
जन्म लिया है तो,
सिर्फ सांसे मत लीजिए,,
जीने का शौक भी रखिए !!
शमशान ऐसे लोगों से ,
भरा पड़ा है,,
जो समझते थे ,
दुनिया उनके बिना चल नहीं सकती !!
हाथ में टच फोन,
बस स्टेटस के लिए अच्छा है !!
सबके टच में रहो,,
जिंदगी के लिए सबसे अच्छा है !!
...............
तीन दोस्त थे.....
हिंदी गणित और अंग्रेजी !
और एक दिन....
तीनों का एक्सीडेंट हो गया,,
हिंदी ने कहा सहायता करो.....
अंग्रेजी ने कहा हेल्प मी......
तो बताओ अब.....
गणित ने क्या कहा......
कमेंट में लिखो....
.............
मान लो 500 लोग बिग बाजार जाते हैं,
वहां कोई भी खुले पैसे नहीं लेता,,
और ना ही कोई देना चाहता है !!
500×1Rs=500Rs
365 Day
500×365=1,82,500
यह सिर्फ एक बिग बाजार ...
देश में
1500 बिग बाजार है !
1,82,500×1500=273,750,00
270 करोड़ प्रतिवर्ष
यह इनकम टैक्स के अंतर्गत नहीं आती....!!
जिंदगी को अपने....
ढंग से जीना जरूरी है !!
दुनिया की सोच छोड़ !
दिल की सुनना जरूरी है !
हर कोई नहीं समझेगा !
हमारे सपनों का सच !!
इसलिए खुद पर ,
भरोसा करना ,,
सबसे जरूरी है !!
........................................
.
कोई भी इंसान अपने आप !
नहीं बदलता जिंदगी में कुछ,
हद से ऐसे हो जाते हैं !
जो इंसान को ,
पहचान पर मजबूर कर देता है !!
वास्तविक पीड़ा ,
तब और अधिक होती है ,,
जब कोई अपना होकर ,,,
पराई जैसा व्यवहार करने लगता है !!
.....................................................
जो कहीं बिखर गई है !
तलाश में हूं खुशी की !!
जो चुपके से छुप गई है,
तलाश में हूं मैं खुशी की !!
जो जाने कहां खो गया है,
तलाश में मैं हूं खुशी की !!
तलाश में मैं हूं जिंदगी की,
जो मायूस होकर बैठ गई !!
0 तलाश में मैं हूं खुद की ,
जो शायद कहीं बदल गई है !!
शरीर को इतना ,
मत साफ रखो ,,
क्योंकि ....
यह मिट्टी से बना,
मिट्टी में ही मिल जाएगा !!
यदि कुछ चमकना ही चाहते हैं ,
तो......
अपने कर्मों को चमक औ !!
क्योंकि यही .....
परमात्मा के घर ,
ले जा सकते हो .....!
कर्मों के अलावा,
कुछ भी नहीं ....
ले जा सकते हो !!
समझ कर भूल गए !!
हम ही उन्हें सुनहरा ख्वाब,
समझकर दिल में छुप गए !!
जिन्हें अपना जानकर ,
दिल की धड़कनों में बसाया था !!
वही हमें गैर समझकर ,
दिल से बेदर्दी से भूल गए !!
हर हार के पीछे ?
जीत का सबक छुपा होता है !!
छोटी सी उम्मीद में भी ?
हौसलो का समंदर होता है !!
अपने विश्वास को तुम ?
कभी टूटने मत देना !!
सफलता पंखों से नहीं ?
मजबूत इरादों से होती है !!
जिंदगी तन्हा सफर है ?
हर मोड़ पर सया मिलता हैं !
कभी हंसी तो कभी आंसू !!
कभी गम तो कभी सिलसिले मिलते हैं !
रास्ते खुद से जूझते हैं
मंजिलें पहचान मांगती है !!
बस चलते रहो थाके बिना !
यही जिंदगी पैगाम मांगती है !!
जिंदगी को देखने का सबका !
अपना अपना नजरिया होता है !!
कुछ लोग भावना में ही !
दिल की बात कह देते हैं !!
और कुछ लोग,
गीता पर हाथ रखकर ,,
भी सच नहीं बोलता !!
आदमी के गुण ,
और गुना ह ,,
दोनों की कीमत होती है !!
अंतर सिर्फ इतना है कि....
गुड़ की कीमत होती है...
गुना ह की कीमत चुकानी पड़ती है !!
धैर्य रखो वक्त सदा बदलते हैं !
अंधेरी रात के बाद ही सूरज निकलता है !!
मुश्किल चाहे जितनी गहरी क्यों ना हो !
लगन से हर सवाल का जवाब मिलता है !!
रुकावटें कदम कदम पर आती है राहों में !
यह हौसलों से ही मंजिल का दरवाजा खुलता है !!
सब्र करो यही जिंदगी का सच है !
पतझड़ के बाद ही तो बसंत खिलता है !!
जीवन ने मृत्यु से पूछा ?
हर कोई तुमसे,
प्यार करता है,,
और मुझसे नफरत करता है,,
ऐसा क्यों ?
जीवन ने कहा ?
क्योंकि मैं एक खूबसूरत,
झूठ ह !!
और तुम एक" दर्दनाक"
सच हो !!
थकावट में हिसाब है !!
अपनों की नजर में,
अक्सर सवालों का जवाब !!
शिकायतों की आंधी,
जब भी सामने आती है !!
लगता है जिंदगी छोटी है,
मगर इम्तिहान दे हिसाब है !!
अपमान सहकर भी,
अलग होना,
रिश्तो को तोड़ना,,
यह काम तो कोई भी कर सकता है !!
अपमान सहकार,
भी रिश्तों का दामन ,
पकड़ रखने के लिए ,,
एक बहुत बड़ा दिल होना चाहिए !
जो बहुत कम लोगों के पास,
होता है !!
ज़िद करने की आदत,
बचपन से ही साथ रहे ,
हर खिलौने हर सपने पर नजर रही !!
पर सच तो यह है
,जिद की मासूमियत ,,
सिर्फ मां-बाप के सामने ही जचती रहे !!
दुनिया के आगे जिद,
अहंकार बन जाती है,,
मगर मां की गोद में,
पिता की छांव में,,
वह प्रेम की पहचान बन जाती है !!
यह जिंदगी है
हौसला तो टूटेगा ही,
लोग भी छूटेंगे ?
हिम्मत भी जवाब दे देगी,
सपने भी टूटेंगे ?
मगर तुम हार मत मानना,
लड़ना तुम अंत तक ?
जब तक तुम्हें जो चाहिए....,
वह हासिल ना हो जाए !!
बड़ा उदास है म न ,
तेरे बिना !
यह झूठी मुस्कुराहट,
अब कैसे सजाऊ !!
कब तक खामोशी में ,
मैं तुझे पुकारू ,,
आ जाओ अब हकीकत ?
बन कर मुझसे मिलो ,
ख्वाबों से दिल को
कब तक बह लाई हम !!
दिल की सुनो,
मगर दिमाग की बातों को,,
नजर अंदाज मत करो !!
जिंदगी के फैसले ,
हमेशा सोच समझ कर ही करो !!
कुछ लोग अपने होकर भी ,
धोखा दे जाते हैं
इसलिए आंख बंद कर कभी भी ,
किसी पर विश्वास मत करो !!
ऐसा नहीं की वक्त हमारे !
सारे गम मिटा देता है !!
यह तो बस हमें दर्द के साथ !
जीना सिखा देता है !!
ऐसा नहीं की वक्त मुश्किल है !
जिंदगी से हटा देता है !!
मगर तजुर्बे देकर उनका !
सामना करना सिखा देता है !!
धूप के बिना, धूप के बिना !
कहां कोई सुबह मुस्कुराती है !!
संघर्ष के बिना कहां हमें !
मनचाही मंजिल मिल जाती !!
हिम्मत जो रखते हैं राह में !
उन्हें मंजिल मिल पाती है !!
अंधेरों के बिना कहां हमें !
रोशनी की पहचान मिल पाते हैं !!
झूठ कितना भी सजा लो !
वह एक दिन उजागर हो ही जाता है !!
सच भरे देर से आए !
मगर वह जीत कर सामने आ ही जाता है !!
झूठ की पर बने रिश्ते !
वक्त ही हमें सवारत है !
वक्त ही तो आज माता है !!
जिंदगी के हर मोड़ पर !
यह हमें नया सबक सिखाती है !!
कभी भर देता है गहरे घाव !
तो कभी ताजा जख्म दे जाता है !!
नहीं ठहरता यह एक जगह !
हर पल नया रंग दिखलाता है !!
जीवन को जितना सरल रखोगे !
उतना ही आगे जाओगे !!
ला हज जितना विनम्र रखोगे !
उतना ही सम्मान पाओगे !!
मुस्कुराते जितनी बाटोगे !
उतने ही खुशियां पाओगे !!
कर्म पथ पर चलाते रहोगे तो !
अपने सपनों को सच कर पाओगे !!
जीवन जितना सरल रखोगे !
उतना ही आगे जाओगे !!
एक गांव में नंदराम नाम के किसान रहता था !
उसके दो बेटा और एक बेटी थी !
किसान ने अपने मेहनत के बल पर,
तीनों बच्चों को खूब अच्छी शिक्षा दी !
और आगे चलकर तीनों बच्चों को,
नौकरी मिल गई !
किसान बहुत खुश था कि हमारे तीनों बच्चों को नौकरी मिल गई !
उसने खुशी-खुशी तीनों बच्चों की शादी कर दी !
दोनों बेटे बाहर नौकरी करने चले गए !
बेटी की भी शादी करती होगी अपने घर चली गई !
किसान बूढ़ा हो चला था !
एक दिन किसान ने सोचा...
क्यों ना अपने बच्चों की परीक्षा ली जाए !
किसान ने रुपए से भरा बैग,
अपने कंधे पर रखकर,,
अपने बच्चों से मिलने घर से निकल पड़ा !
किसान पहले अपने बड़े बेटे के पास गया,
और बोल बेटा हमारे घुटनों में दर्द हो रहा है,,
हमें इलाज के लिए कुछ पैसे चाहिए !
बड़े बेटे इनकार कर दिया पापा हमारे पास पैसे नहीं है !
और फिर किस दूसरे बेटे के पास गया.....
और बोल बेटा हमारे घुटनों में दर्द हो रहा है,
इलाज के लिए पैसे चाहिए !
छोटे बेटे ने मन कर दिया कि पापा मेरे पास पैसे नहीं है !
और अंत में किसान अपनी बेटी के घर जाता है ,,
और कहता है बेटा हमारे घुटनों में दर्द हो रहा है इलाज के लिए पैसे चाहिए,,
तब बेटी ने कहा...
क्यों नहीं पापा हमारे पास पैसे हैं हम आपका इलाज कराओगी
आपने हमें पढ़ा लिखा है इतना बड़ा किया ,
कि आज हम अपने पैरों पर खड़े हुए हैं !
पापा बिल्कुल परेशान मत हो आप यही रखो यही से आपका इलाज होगा !
तब किसान बोला....
बेटा हम कुछ लेने नहीं कुछ देने आए हैं !
रुपए से भरा बैग अपनी बेटी को देते हुए कहा...
बेटा हम दोनों बेटों के पास गए थे उन्होंने मुझे मना कर दिया !
मैं देखना चाहता था हमारे तीनों बच्चों में कौन सबसे अच्छा लड़का है, तीनों बच्चों में सबसे अच्छी तुम ही हो बेटा
!
इसलिए इस रुपए पर सिर्फ तुम्हारा हक है !
इसीलिए कहा गया है....
बेटा तब तक बेटा रहता है जब तक उसकी शादी नहीं होती..
लेकिन बेटी जिंदगी भर बेटी रहती है !
बेटी हमेशा अपने पापा के सुख और दुख में हमेशा साथ खड़ी होती है.......
चेहरे पर हंसी सजी है ,
अंदर गहरा राज छुपा है !!
किस बातें अपना दर्द हम !
जब हर अपना पराया दिखा है !!
ख्वाब अधूरे रह जाते हैं !
कहानियों में बस खालीपन अपना मिलता है!
जिंदगी के हर मोड़ पर !
हर एक नया इम्तिहान मिलता है !!
शिकतों से जिंदगी नहीं बदलती है !
रास्ते कोशिश से निकलती है !!
थोड़ा सबर , थोड़ा हौसला रखो !
हर रात सुबह में ढलती है !!
मुश्किल है रास्ता रोकेगी मगर !
हौसलों से ही मंजिल मिलती है !!
हिम्मत हारने से कुछ नहीं मिलता !
मेहनत से किस्मत बदलती है !!
इसलिए कहा गया है मेहनत करना सीखो !
मेहनत में सफलता छुपी हुई है !!
👫
💑
😀..........
यहां बड़ा कौन है !
बड़ा होने के लिए ,
हमेशा मर्यादा में रहे !!
क्योंकि.....
हर बड़ी कंपनी के आगे,
Limited लिखा होता है !!
कोशिश जब दोनों ओर से की जाए !
तो रिश्ते सांवर जाते हैं !!
सिर्फ एक तरफ की मेहनत से !
अक्सर रिश्ते बिखर जाते हैं !!
जहां वह अपनापन और इज्जत !
वहां रिश्ते बहुत गहरी हो जाते हैं !!
पर जब लाजो में ठंडापन घुल मिल जाए !
तो रिश्ते खामोश हो जाते हैं !!
अंधेरा जितना ही गहरा होता है,
सितारे उठना ही चमकते हैं !!
इम्तिहानो से गुजरते ही ,
यह किरदार दिखता है !!
हौसला जिसकी रग रग में हो ,
वह टूट कर भी कहां बिखर जाता है !!
जो टूटे नहीं हालातो से,
वही लोग मंजिल तक पहुंच जाते हैं !!
दोनों ही आते जाते रहते हैं !!
किसी का ठहरना मुमकिन नहीं है !
वक्त की नजर में सब एक समान है !!
मिलन बिछड़न की राहों में ही !
छुपा जीवन का सग विधान है !!
जो भी पल मिले खुले दिल से जियो !
हर सांस दर असल एक वरदान है !!
आंख में पड़ा तिनका,
पैर में गड़ा हुआ कांटा !!
रुई में दबी हुई आग से,
भी ज्यादा भयानक होता है दिल !!
मैं छिपा कपट और पाप !!
उस नन्हे बी ज से सीखिए !!
जो जमीन में है!!!
दफन होकर भी लड़ाई लड़ रहा है !
और तब तक लड़ता है !
जब तक धरती का सीना ,
चीर कर !!
अपने अस्तित्व को,
साबित नहीं कर देता है !!
मैं मतलबी नहीं हूं !
मैं मतलबी नहीं हूं !यह बस सबक लिया है !!
जहां कदर नहीं हो मेरी! वहां से मैं खुद को !!
हटा लिया है......
जिस दिल ने सबके लिए वक्त दिया !
उसी को सबसे कमजोर समझ लिया !
गया !!
अब खुद से वफा करना सीखा है हमने !
हर मुस्कान के पीछे दर्द छुपाना छोड़ा है !
मैंने !!
नफरत नहीं बस दूरी बना ली है !
जिन्हें मेरी कदर ने उसे र जुदा कर !
ली है !!
रिश्ते सबके निकल आते हैं !!
और बुरे हो तो,
निगाह चुराकर निकल जाते हैं !!
देगा कोई कुछ नहीं,
तने सबके सुनते होंगे !!
मेरे दोस्त.....
अगर हालात तुम्हारे बुरे हैं तो,
तुमको ही बदलने होंगे !!....R..
पत्थर तब तक सलामत है,
जब तक पहाड़ से जुड़ा है !!
पता जब तक सलामत है ,
जब तक वह पेड़ से जुड़ा हुआ है !!
इंसान तब तक सलामत है,
जब तक वह परिवार से जुड़ा हुआ है !!
क्योंकि परिवार से अलग होकर,
आजादी तो मिल जाती है,,
लेकिन संस्कार चला जाता है !!
नदी का पानी मीठा होता है,
क्योंकि हमेशा को पानी देती रहती है !!
सागर का पानी खारा होता है,
क्योंकि हमेशा वह लेता रहता है !!
गंदे नाले का पानी दुर्गंध देता है,
क्योंकि वह पानी रुका हुआ रहता है !!
यही जिंदगी है ....
देते रहोगे सबको मीठे लगोगे ,
लेते रहोगे तो सबको खरे लगोगे !!
एक दिन वह बेनकाब जरूर होता है !!
सच देर ही सही,
लेकिन वह एक दिन कामयाब जरूर होता है !!
झूठ पर टिके हुए रिश्ते,
अक्सर ही बिखर जाते हैं !!
सच की बुनियाद का रिश्ता,
हमेशा सबसे खरा होता है !!
दिमाग को चंगा रखो !!
पॉकेट को गरम रखो !
आंखों में शर्म रखो !!
जुबान को नरम रखो !
दिल में रह म रखो !!
क्रोध पर लगाम रखो !
व्यवहार बिल्कुल साफ रखो !!
होठों पर मुस्कुराहट रखो !
फिर स्वर्ग जाने की क्या जरूरत !!
स्वस्थ रहो,
मस्त रहो......!!
पर इंसानियत पीछे छोड़ गई !!
प्यार की जगह अब नफरत बड़ी !
हर दिल में अजनबी यत की दीवार उठ खड़ी हुई !!
सच कहना बोझिल सा हो गया !
झूठ की पर त हर और फैल गई !!
खुद को तलास्त रहा इंसान हरदम !
मगर भीड़ में उसकी पहचान खो गई !!
इम्तिहान लेती है !
कभी धूप नहीं मिलती है तो !
कभी छाया भी नसीब नहीं होता है !!
जिंदगी हर मोड़ पर वही देता है !
जो हमारे करीब कभी नहीं होता है !!
आखिरकार मिलने वही है !
जो किस्मत के पन्नों पर लिखा होता है !!
सिर्फ ख्वाब देख लेने से !
ना जमी बदलता है,
ना तो आसमान अपना हो जाता है !!
ताना ...
मारो कसोगे ,तो दूरियां बढ़ेगी !
सम्मान दोगे तो ,सम्मान मिलेगा !!
अहंकार मैं रहते हो ,तो मुश्किल बढ़ेगी !
मदद करोगे तो , दुआएं मिलेंगी !!
दिल दुखाओगे तो ,नफरत बढ़ेगी !
साथ चलोगे तो , राह आसान होगी !!
स्वार्थी बनोगे तो, तनहाइयां मिलेंगे !!!
लकीरों को हल्के में मत लो ,
"मेरे दोस्त"
यह माथे पर खींची तो चिंता,!
हाथ पर खींची तो तकदीर !!
जमीन पर खींची तो "बटवारा" !
और अगर...
रिश्तो में खींची तो !
"दरार "बन जाती है !
मां वह शब्द नहीं पूरा संसार है !
मां वह है जो हमें इस दुनिया में आने से पहले ही.......
मां तुम्हें इस दुनिया में आने से पहले ही !
तुमसे बेइंतहा मोहब्बत करने लगी थी !!
मां वह है...
जो खुद गीले कपड़ों में सो जाती है !
तुम्हारे लिए सुखी चादर डाल देती है !!
जो तेरे हर दर्द को,
बिना कहे ही समझ जाती है !!
मां वह है....
जो खुद टूट कर भी,
तुम्हें नहीं टूटने देती है !!
जो खुद थक हार कर भी,
तुमसे कभी नहीं कहती है,,
कि मैं थक गई हूं..
.. मां ऐसी होती है.....
आखिर माता माही है ना !!
छोटी सी इस जिंदगी में,
यूं ही नफरतों में ना गवाना,
कल किसने देखा है यहां.....
आज को ही अपना बनाना,
शिकायत से क्या मिलेगा आखिर.......
कोशिशें से आगे बढ़ना !
हर हाल में आगे बढ़ना
यही है जिंदगी का अफसाना..
मनुष्य कितना चालाक है !
108 मोती वाला माला गिनते वक्त,
उसका मन भटकता है !
और नोटों की गड्डियां,
गिनते समय,
उसका मन एकाग्र रहता है !
मनुष्य कितना चालाक है !
ब्रांडेड चीज !
तभी अच्छे लगते हैं !
जब उसमें,
कुछ खास गुण हो !!
रंग छोड़ने कपड़े !
रंग बदलते लोग !
कितने ही ब्रांडेड क्यों ना हो !
दिल से उतर ही जाते हैं !!
भगवान का एक , !
उपहार है परिवार !
वे लोग भाग्यशाली होते हैं !
जिनका अपना परिवार है !
परिवार ......
यानी हमारी परवाह,
करने वाले लोग !
इसीलिए...
धन कमाने के चक्कर में,
कभी भी अपने परिवार को ,
नजर अंदाज,
नहीं करना चाहिए !!
वह लोग ही,
हमारे बुरे समय में,
साथ खड़े रहते हैं !!
और हमें परेशानी से,
निकालने की......
निस्वार्थ कोशिश करते हैं !!
मैं दौड़ा चला आया !
बर्तन खाली हो,
तो यह मत समझो,
कि मांगने चला है !
हो सकता है !
वह सब कुछ , !
बांट कर आया हो !
जब तक ,
किसी के बारे में ,
पता ना हो ,
गलत धारणा मत बनाइए !!
तू मुझे आवाज दे
मैं दौड़ा चला आया !
मैं भाग चला आया !!
जब समय खराब चलता है ना !
तू जिंदगी हर मोड़ पर,
परीक्षा लेने खड़ी हो जाती है !
जीजी करने वाले भी,
तू तू पर उतर आते हैं !
जिन कुत्तों की तुम्हारे सामने,
भौंकने की औकात नहीं,
वह भी काटने को,
दौड़े चले आते हैं ....!
दुनिया में आपका सच्चा साथी,
ना तो माता-पिता है,
और ना ही आपके भाई बहन,
आपका सच्चा साथी,
आपका शरीर है !
जिस दिन शरीर ने,, साथ छोड़ दिया !
उस दिन आपसे हर कोई , मुंह मोड़ लेगा !
जब तक आप स्वस्थ हैं,
आपके पास हजारों समस्याएं होगी !
मगर जिस दिन आप गंभीर रूप से,
बीमार पड़ जाओगे तो,
उस दिन आपके पास,
केवल एक ही समस्या होगी !
कि मैं कैसे भी करके ठीक हो जाऊं !
इसलिए आप अपने स्वास्थ्य पर,
विशेष करके ध्यान दें.......!
बाकी तो जिम्मेदारियां,
ऐसे ही चलती रहेगी !
यह जिंदगी है ,
हंसते खेल खिलाते,
मुस्कुरा करके,
चलती रहेगी !!
जिंदगी कभी ,आसान नहीं होती है !
हर मोड़ पर एक चुनौती होती है !
जो ठोकर से डरते हैं !
जो मंजिल से पहले ,थक जाते हैं !
हर दिन एक नई परीक्षा है !
हर रात एक सबक सिखाती है !
जो मुस्कुरा कर चल लेते हैं !
वही जीत की रास्ते पाते हैं !
तुम्हें " मां "की कीमत !
उस दिन पता चलेगी !
जिस दिन तुम,
दर्द से कर तड़पते रहोगे !
लेकिन " सर " पर हाथ ,
फेर कर सुकून देने वाला ,
कोई नहीं होगा !
और " पिता " की कीमत ,
उस दिन समझोगे,
जिस दिन " पिता " बनकर,
खुद बच्चों को,
काम करके खिलाओगे...!
अहंकार को दिल में ना बसाना !
विनम्रता से हर रिश्ता निभाना !
मिटकर हृदय से नफरतों को !
मुस्कुराहटों से जीवन स जाना !
हंसना नहीं किसी के गम पर !
दर्द में उनके साथ निभाना !
लहजे में सदा मिठास रखना !
कभी किसी का दिल ना दुखाना !!
जीवन एक अवसर है !
इसे व्यर्थ न जाने दो !!
हर दिन एक नई शुरुआत है !
उम्मीद जगाई रखो !!
खुशियां बांटने से बढ़ती है !
दुख बांटने से घटता है !!
हर पल को सम्मान दो !
वक्त लौट कर नहीं आता !!
जब मैं गिरा कुएं में,
तब मुझे रस्सी की याद आई !
जब मैं फंसा नदी में,
तब मुझे नाव की याद आई !
जब उदास हुआ,
तब दोस्त की याद आई !
जब मैं बीमार पड़ा,
तब दवा की याद आई !!
ऐसे ही याद आते हैं लोग,
हमेशा जरूरत में !!!...
सोने की लंका और पुष्पक विमान,
तो रावण के पास ही थे !
"श्री राम" ने तो" बनवास "ही देखा था ना !!
सारे राज पाठ तो " कंस "के पास था ना !
जेल में जन्म तो " श्री कृष्णा " ने लिया था !!
राजमहल में तो "कौव राव " रहते थे ना !
बनवास तो "पांडवों " को भोगना पड़ा !!
संघर्ष हमेशा सत्य के साथ चलता है !
जब सत्य के लिए" भगवान " को संघर्ष करना पड़ा !!
तो फिर भी.....
हम तो इंसान हैं !!!
................Motion...
ज्ञान सबसे बड़ा धन होता है !
जो बांटने से और बढ़ता है !!
शिक्षा से इंसान समझदार बनता है !
जो अंधकार में भी उजाला करता है !!
ज्ञान से ही होती है उन्नति !
इसी में छपी है सारी संपत्ति !!
विद्या को कभी व्यस्त ना जाने दो !
पर ज्ञान को ही अपना गुरु मानो !!
पर हम खुद से अनजान रह गए !
दूसरों के जख्म भरते रहे !
पर हम खुद को पहचान ना सके !!
हर किसी को दिल के करीब रखा !
पर खुद से दूरी कभी मिटा ना सके !!
हमेशा औरों की खुशियों की दुआ की !
मगर अपनी मुस्कान तक पहुंच ना सके !!
गधे..... गधे की गैंग !
तलवार लेकर भाग रही है !
शेर ने पूछा..... क्या हुआ !
तुम लोग इतने गुस्से में क्यों भाग रहे हो !!
गधा.... हाथी की बेटी को ,
किसी ने प्रपोज किया है!
!नाम हमारा आ रहा है !!
ला से बिछा दूंग!
सभी कहते हैं,
दुनिया बदल गई ,,
क्या बदला है दुनिया में !!
मिर्ची ने अपना" तीखापन" नहीं बदला !
आपने अपनी" मिठास" नहीं बदली !
पत्तों ने अपना "हरा पीला रंग "नहीं बदला !
बदली है तो इंसान ने.....
अपनी "
"इंसानियत"
और दोषी बनता है पूरी दुनिया को !!
आंखें प्यास नहीं रखती ,
फिर भी भर आती है !!
दिल शीशा नहीं होता ,
फिर भी
चटक कर बिखर जाता है !!
इंसान मौसम नहीं होता,
फिर भी
वक्त के साथ बदल जाता है !!
यही जिंदगी का खेल ,
जहां
आंसू बेवजह बह जाते हैं !!
कभी-कभी छोड़ देना ही ! बेहतर होता है, !!
जैसे कि वह सवाल ! जिसका जवाब ना हो !!
वह हाथ जो वक्त ! पर साथ ना दे !!
वह रिश्ता जो !कदर ना करें !!
और वह प्यार !जो मतलब के लिए ! जुड़ा रहा हो !
रिश्ते खून से नहीं,
भरोसा से बनते हैं !
साथ रहने से नहीं,
समझने से टिकते हैं !!
शब्दों से नहीं,
भावनाओं से चलते हैं !!
जहां परवाह खत्म,
वहां पर रिश्ता भी खत्म !!
रिश्ते हमें बहुत कुछ सीखते हैं!
जिंदगी मैं हमें हर मोड़ पर,
कुछ ना कुछ सिखाया है!
जिस पर भी उम्मीद रखी,
उनको ही दूर पाया है !
रिश्ते बदलते हैं,
दोस्त बदलते हैं!
सब कुछ यहां पर आया है ,!
सिर्फ वक्त ही अपना है !
जिसने भी हमें सच सिखाया होता !
ना तुम अपने आप को,
गले लगा सकते हो !
ना तुम अपने कंधे पर,
सर रखकर रो सकते हो !!
एक दूसरे के लिए जीने का,
नाम ही जिंदगी है !
इसलिए वक्त उन्हें दो,
जो तुम्हें चाहते हो दिल से!!
रिश्तो पैसों के मोहताज नहीं होते,
क्योंकि कुछ रिश्ते मुनाफा नहीं देते,,
पर जीवन अमीर जरूर बना देते हैं !!
सुई अकेले चलती है तो,
उसका कर्म सिर्फ चुभना होता !
लेकिन
जैसे ही धागा साथ चलता है तो,
उसका काम...
फटे हुए कपड़ों को जोड़ना,
अलग-अलग को जोड़ना होता है !
यह सब संगत का असर है !
संगत से स्वभाव तो नहीं,
बदलते पर कर्म जरूर बदल जाते हैं !
यदि पुत्र अच्छा है तो,
उसके लिए धन इकट्ठा करने की,
कोई आवश्यकता नहीं है !
बड़ा होकर वह खुद ही ...
धन कमा लेगा !
लेकिन यदि पुत्र दुराचारी है तो...
उसके लिए धन इकट्ठा करने की,
आवश्यकता नहीं ....
क्योंकि वह सब कुछ
खत्म कर देगा!
... बेटा एक ही हो लेकिन अच्छा हो....
किसी बाजार में एक चिड़ीमार,
तीतर बेच रहा था! उसके पास बहुत सारे तीतर थे!
वहीं पास रखा अलग पिंजरे में केवल एक ही तीतर था !
तभी वहां उस चिड़िमार के पास एक ग्राहक आया !
ग्राहक बोला..... यह तीतर कितने का है !
चिड़ीमार बोला .... यह तीतर ₹300 का है !
ग्राहक फिर बोला !.... अलग पिंजरे में एक तीतर है इसका दाम बताओ !
चिड़ीमार बोला ... इसका दाम ₹2000 है !
ग्राहक बोला.... यह इतना महंगा क्यों है !
चिड़ीमार बोला ... यह हमारा पालतू तीतर है इसलिए इतना महंगा है!
ग्राहक बोलो.... दोनों तीतर में अंतर बताओ !
चिड़ीमार बोला... यह जो पालतू तीतर ऐसे ले जाकर मैं जंगल में छोड़ देता हूं तभी इसकी आवाज सुनकर और तीतर इकट्ठा हो जाते हैं और मैं उन पितरों को पकड़ लेता हूं !
तब ग्राहक बोला.. येलो ₹2000 हमें यह तीतर दे दो !
ग्राहक ने उसे तीतर को पकड़ा और उसकी गर्दन मरोड़ दी !
और बोला ऐसे गद्दार को जीने का कोई अधिकार नहीं !
इतना करके और ग्राहक वहां से चला गया !
किसी कंपनी में काम करने वाला एक कर्मचारी ,
को जब प्रमोशन नहीं मिला तो,
उसे कर्मचारियों को बहुत तेज गुस्सा आया,
इस गुस्से में उसने अपने बॉस का घर ही खरीद लिया !
कुछ महीने उसे घर में रहने के बाद ,
उसे कर्मचारियों को फिर से गुस्सा !
इस गुस्से में उसने मिशन बुला करके,
इसमें इतने बड़े घर को उसने तुड़वा दिया !
अर कंपनी से रिजाइन देकर,
दूसरी जगह नौकरी करने लगा....
चार मित्र जंगल में राह भटक गए। रात का अँधेरा गहरा गया तो मजबूरन उन्हें एक खंडहरनुमा मंदिर में शरण लेनी पड़ी। मंदिर में देवी की अत्यंत प्राचीन मूर्ति समय के प्रभाव से काली पड़ चुकी थी। यहां-वहां लटक रहे चमगादड़ वातावरण को भयानक बना रहे थे। झींगुर अनवरत बोल कर सन्नाटे की छाती को चीर रहे थे पर उससे कोई दिलासा मिलने की बजाय भय ही बढ़ रहा था ।
चारो एक दूसरे का हाथ थामे गोल घेरा बनाकर सट कर बैठ गए। मंदिर की छत टूटी हुई थी और उसमें से चंद्रमा का प्रकाश छन कर आ रहा था। समय काटने और भय दूर भगाने के लिए वे कहानियां कहने सुनने लगे। पहले मित्र ने अपने दादाजी से सुनी हुई वीर राणा सांगा की कहानी सुनाई। जिसने उनमें कुछ साहस का संचार किया । दूसरे ने भूत-प्रेत की कहानी आरम्भ की तो सबने उसे डांट कर चुप करा दिया। तीसरे और चौथे मित्र ने क्रमशः मजाहिया और वीरता पूर्ण कहानियाँ सुनाईं। अभी वे आपस में चुहलबाजी ही कर रहे थे कि अचानक कलेजे को चीरने वाली हंसी वातावरण में गूँज उठी। किसी नारी स्वर का यह अट्टहास उनकी रूह को भी कंपा गया। उस ठंडी रात में भी उन चारों के बदन पसीने से भीग गए। वे भयभीत होकर, हंसने वाली उस औरत को देखने के लिए इधर-उधर गर्दन घुमाने लगे पर उन्हें कोई नजर नहीं आया। वे एक दूसरे को कातर नजरों से देख ही रहे थे कि एक बार फिर वही हंसी गूंजी और इस बार उसकी तीव्रता और अधिक थी। उन चारों ने मंदिर से बाहर निकल भागने की चेष्टा की परन्तु आश्चर्य! उनके हाथ पैरों ने उनका साथ ही नहीं दिया। ऐसा लगा मानो पूरे बदन को लकवा मार गया है। वे असहाय से बैठे रहे। एक ने जोर से चिल्लाकर कुछ कहना चाहा पर उसकी आवाज उसके गले में ही घुट कर रह गई। जुबान तालू से जा चिपकी। लेकिन उन चारों के हृदय रेलगाड़ी की तरह धड़-धड़ कर रहे थे। फिर एक विचित्र घटना और हुई। मंदिर के एक कोने में अपने आप अग्नि प्रज्वलित हो उठी। और न जाने क्यों दीवारों पर लटके चमगादड़ उसमे कूद-कूद कर भस्म होने लगे। वातावरण में जीवित पक्षियों के जलने की असहनीय बदबू फ़ैल गई। यह सब तिलस्म देखकर वे चारों थर-थर कांपने लगे।
एक गांव में एक लड़का रहता था । उसके मां-बाप बचपन में ही गुजर गए थे । इस दुनिया में उसका सगा कोई न था । उसके जन्म लेते ही उसकी मां की मृत्यु हो गई थी । सब लोग उसे कैनी कहकर पुकारते थे ।
मेहनत करने वालों की कभी हार नहीं होती!
एक दिन वह सफल होता है !
सफल होने में कुछ समय ल6गता है !
कला छोटी बड़ी नहीं होती !
हमें कल की कद्र करनी चाहिए !
मेहनत का फल.......
आखिर में वह लड़का एक दिन सभी लोगों के पीछे छोड़कर सफल हुआ.....
उसे लड़के ने राजा के दरबार में हंसने वालों की बोलती बंद कर दी.....
उसे लड़के ने धैर्य और संयम का परिचय दिए !
कैनी को अड़ोसी-पड़ोसियों ने मिलकर पाला था । वह एक वक्त का खाना किसी एक के घर खा लेता और दूसरे वक्त का खाना किसी दूसरे के यहां खा लेता था । सभी ने उसे बचपन से अनाथ देखा था, इसलिए सबकी हमदर्दी उसके साथ थी ।
कैनी सबका प्यार और हमदर्दी पाकर आलसी बन गया था । वह बारह-तेरह वर्ष का हो चला था, लेकिन उसका किसी काम में मन नहीं लगता था । वह अपना वक्त इधर-उधर खेतों में घूमते हुए गुजार देता था । खाली बैठकर वह बांसुरी बजाता रहता था ।
कैनी बहुत ही मीठी बांसुरी बजाता था । उसकी मीठी आवाज सुनकर लोग मुग्ध हो जाते थे । कुछ लोग उसकी बांसुरी की धुन सुनकर उसे इनाम भी दे जाते थे । इसी तरह समय बीतता गया और कैनी जवान होता गया । परंतु कैनी वैसा ही आलसी बना रहा ।
उसे जिस जैकी व उसकी पत्नी ने पाला था, उन्हें वह चाचा-चाची कहकर पुकारता था । चाचा-चाची का अपना बेटा भी बड़ा होकर काम पर जाने लगा था ।
एक दिन कैनी सुबह को देर तक सोया था । उसकी चाची उसे बार-बार उठाने की कोशिश कर रही थी, परंतु कैनी उठ नहीं रहा था । चाची ने गुस्से में आकर बाल्टी में पानी भरा और कैनी के ऊपर डाल दिया, कैनी घबराकर उठ बैठा । चाची को क्रोध तो पहले से ही आ रहा था, वह बोली - "कैनी, यह कोई तरीका है कि इतनी धूप चढ़ने तक सो रहे हो ? अपने चाचा की कमाई पर ऐश कर रहे हो । खुद कमाई करो तो पता लगे कि मेहनत क्या होती है ?"
कैनी यह बात लोगों से सैकड़ों बार सुन चुका था कि खुद कमाई करोगे तो पता लगेगा, परंतु उसे कभी इस बात का बुरा नहीं लगा था, परंतु आज सुबह-सुबह चाची के मुंह से ये शब्द सुनकर उसके दिल में तीर की तरह चुभ गए, उसने चाची से कुछ नहीं कहा, लेकिन मन ही मन निश्चय किया कि वह अब घर तभी लौटेगा, जब कुछ कमाने लगेगा ।
कैनी ने घर से निकलते समय जैकी चाचा और चाची के पैर छुए, फिर उनसे गले मिलकर बाहर निकल गया । शाम को जब कैनी देर तक नहीं लौटा तो जैकी और उसकी पत्नी कैनी के सुबह के बदले हुए व्यवहार के बारे में चर्चा करने लगे । कुछ और समय बीतने पर जैकी को कैनी की चिंता सताने लगी और वह पत्नी से कहने लगा - "तुमने सुबह ही उसे अच्छी-खासी डांट लगाई थी । लगता है वह तुमसे रूठकर भाग गया है ।"
पत्नी को अब अपनी भूल का एहसास हो रहा था । परंतु अब कैनी के इंतजार के सिवा कुछ नहीं किया जा सकता था ।।
धीरे-धीरे कई दिन और फिर सप्ताह बीत गए, परंतु कैनी नहीं लौटा । उधर, कैनी चलते-चलते दूर निकल गया था । रास्ते में उसे भूख लगने लगी, परंतु भोजन के लिए उसके पास पैसे न थे ।
चलते-चलते वह पास के एक नगर में पहुंच गया । वहां जाकर उसने अनेक लोगों से काम मांगा, लेकिन उसे कहीं काम नहीं मिला । एक तो वह कोई काम जानता नहीं था, दूसरे बिना किसी जान-पहचान के कोई उसे नौकरी देने को तैयार न था ।
थककर वह एक पेड़ के नीचे बैठ गया और जेब से निकालकर बांसुरी बजाने लगा । इत्तफाक से उधर से एक संगीतज्ञ अपने घोड़े पर निकल रहा था । उसने कैनी की बांसुरी की मीठी धुन सुनी तो वह उसकी योग्यता पर मुग्ध हो गया । संगीतज्ञ कैनी को अपने साथ ले गया और उसकी खूब आवभगत की ।
वह संगीतज्ञ राजा के दरबार में गिटार बजाकर राजा का दिल बहलाया करता था । अगले दिन जब वह राजदरबार में गया तो राजा से कैनी की खूब प्रशंसा की । राजा ने संगीतज्ञ से कहा - "हो सकता है कि कैनी वास्तव में गुणी कलाकार हो, परंतु हम पहले उसकी परीक्षा लेना चाहते हैं ।"
अगले दिन राजा ने अपने राज्य के अनेक बड़े-बड़े संगीतविदों को अपने दरबार में बुलाया । सभी विद्वान अपने-अपने वाद्य यंत्र लेकर दरबार में पहुंचे । कैनी को भी दरबार में आमंत्रित किया गया था । उसने अपनी बांसुरी अपनी जेब में रखी और राजा के दरबार में पहुंच गया ।
सभी विद्वान एक-एक करके आने वाद्य बजाकर राजा को खुश करने लगे । जब उन्हें यह पता लगा कि वह युवक भी संगीत की परीक्षा देने आया है, तो वे सब कैनी को खाली हाथ आया देखकर हंसने लगे । वे आपस में खुसर-फुसर करने लगे कि यह छोकरा उनकी योग्यता के आगे कहां टिक पाएगा ।
सबके पश्चात् कैनी की बारी आई तो उसने राजा के सामने जाकर नतमस्तक होकर प्रणाम किया, फिर वहीं जमीन पर बैठकर अपनी बांसुरी बजाने लगा । उसकी बांसुरी की धुन वास्तव में इतनी मीठी थी कि सभी लोग मंत्र-मुग्ध होकर धुन में खो गए ।
कैनी ने जैसे ही बांसुरी की धुन समाप्त की, राजदरबार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा । राजा ने कैनी की प्रशंसा करते हुए कहा - "कैनी, हम तुम्हारी योग्यता से बहुत खुश हुए हैं । सबसे बड़ी बात यह है कि सबके हंसी उड़ाने के बावजूद तुमने अपना आत्मविश्वास नहीं खोया । किसी भी व्यक्ति की योग्यता और आत्मविश्वास उसे कहीं भी ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है । तुममें अपनी योग्यता का घमंड नहीं है । यह बहुत खुशी की बात है । हम तुम्हें अपने दरबार में नौकरी देते हैं ।"
राजा की बात सुनकर कैनी खुश हो गया । वह महल के एक कमरे में रहने लगा । एक माह बीतने पर जब कैनी को पहली पगार मिली तो वह पैसे लेकर जैकी चाचा और चाची के पास गया और उन्हें अपनी तनख्वाह देते हुए पूरी बात बता दी ।
कैनी की बात सुनकर चाचा-चाची बहुत खुश हुए । उसके पैसे उसी को वापस देते हुए चाचा बोले - "बेटा तुम जहां रहो, सुखी रहो । परंतु यह बात याद रखना कि कोई भी कला छोटी नहीं होती । तुम्हारी बांसुरी ने ही तुमको यहां तक पहुंचाया है ।"
तभी कैनी की चाची भीतर से आई और बोली - "ईश्वर की कृपा से तुम्हें सब कुछ प्राप्त हो गया है, अपनी मेहनत और लगन से तुम और तरक्की करते जाना, यही हमारा आशीर्वाद है । यह बात याद रखना कि आलस्य आदमी को निकम्मा बना देता है ।"
कैनी चाची से लिपटते हुए बोला - "हां चाची, मैं मेनहत की कीमत पहचान गया हूं । अब कभी आलस्य नहीं करूंगा और जी लगाकर काम करूंगा ।"
चाचा-चाची का आशीर्वाद लेकर कैनी राजदरबार में चला गया और सुख से अपने दिन काटने लगा ।
भानगढ़ किले के डरावनी कहानी
यह किला राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है और इसे भारत के सबसे प्रेतवाधित स्थानों में से एक माना जाता है।
हिंदी की एक रोचक कहानी....
वह गांव वाली भोली भाली लड़की....
शहर जाकर कुछ ऐसा हुआ....
कुछ आने से मुझे पल....

Desi Kahani in Hindi : गांव के एक छोटे से घर में सुधा अपने माता पिता के साथ रहती थी। सुधा के पिता किसान थे। उनके पास एक खेत था।
जिसमें वे खेती किया करते थे। सुधा गांव के बच्चों को पढ़ाती थी। जिससे उसे कुछ पैसे मिल जाते थे। इधर गांव में कभी सूखा पड़ जाता था। कभी बाढ़ आ जाती थी। जिससे फसलें नष्ट हो जाती थीं। कभी कभी तो भूखे मरने की नौबत आ जाती थी।
ऐसे में सुधा अपने परिवार को लेकर बहुत परेशान रहती थी। इधर उसके माता पिता उसकी शादी को लेकर बहुत परेशान रहते थे।
सुधा की एक सहेली थी। सपना वह अच्छे सम्पन्न परिवार से थी। उसके पिता ने उसे पढ़ने के लिये शहर भेज दिया। एक बार सपना छुट्ट्यिों में गांव आई –
‘‘सुधा तू इतनी परेशानी उठा रही है तू मेरे साथ शहर चल वहां तुझे मैं नौकरी दिलवा दूंगी। मजे से रहना। घर भी पैसे भेज देना।’’
सुधा ने ध्यान से उसकी बात सुनी बात उसे समझ आ रही थी वैसे भी वह दिन रात परेशान रहती थी, कि अपने परिवार की मदद कैसे करे। सुधा बोली – ‘‘ठीक है मैं पिताजी से बात करके देखती हूं।’’
इस पर सपना ने कहा – ‘‘अरे तू चिंता मत कर मैं अपने पापा से कह दूंगी वो चाचा से बात कर लेंगे। तू मेरे साथ रहेगी तो किसी को तेरी फिक्र भी नहीं होगी।’’
उसी दिन शाम को सुधा ने बात की लेकिन उसके पिता ने मना कर दिया। सुधा बोली – ‘‘पिताजी कब तक यहां भूखे मरते रहेंगे। यहां कुछ नहीं रखा है मुझे जाने दीजिये अगर अच्छी सी नौकरी लग गई तो मैं आपको भी बुला लूंगी।’’
पिताजी बोले – ‘‘नहीं नहीं अब हम तेरी कमाई पर जिन्दा रहेंगे क्या?’’
यह सुनकर सुधा ने कहा – ‘‘इसमें मेरी कमाई की बात कहां से आ गई कुछ दिन की बात है थोड़े पैसे इकट्ठे हो जायें तो आप भी कुछ काम शुरू कर लेना वहां तो छोटी सी रेहड़ी पर सामान बेच कर भी अच्छे पैसे कमाये जा सकते हैं।’’
कुछ ही देर में सपना के पापा भी आ गये वे पढ़े लिये समझदार आदमी थे। उन्होंने सुधा के माता पिता को समझाया तो वे सुधा को शहर भेजने के लिये राजी हो गये।
एक सप्ताह बाद दोंनो सहेलियां शहर आ गईं। सुधा ने कुछ पैसे जोड़ रखे थे। जिससे कुछ दिन काम चल गया। इसी बीच सुधा को एक नौकरी मिल गई। वह ऑफिस जाने लगी। पढ़ी लिखी तो वह थी, लेकिन शहर के तौर तरीके उसे नहीं आते थे। इसलिये वह हमेशा चुपचाप अपने काम में लगी रहती थी।
सुधा का ऑफिस वह घर जिसमें सुधा, सपना के साथ रहती थी। बहुत दूर था। बस से जाने आने में उसे दो घंटे लग जाते थे। शाम को ऑफिस से निकल कर घर आते आते उसे रात हो जाती थी। रात को आवारा लड़के इधर उधर घूमते थे। जिनसे बचते बचाते वह घर पहुंचती थी।
एक दिन सुधा ऑफिस के बाद बस स्टेंड की ओर जा रही थी। तभी पीछे से एक बाईक पर महेश उसके पास आकर रुका। महेश उसके ही ऑफिस में काम करता था और कभी कभी काम में सुधा की मदद भी कर दिया करता था।
वह बोला – ‘‘सुधा घर जा रही हों लेकिन आज तो बसों की हड़ताल है। दोपहर को यहां बस से किसी का एक्सीडेंट हो गया था। पब्लिक ने बस फूंक दी तब से सारे बस वाले हड़ताल पर चले गये।’’
यह सुनकर सुधा डर गई अब वह घर कैसे जायेगी। वह इधर उधर ऑटो ढूंढने लगी लेकिन जो भी ऑटो आ रहा था वह पहले से भरा हुआ था। तब महेश ने कहा – ‘‘सुधा बैठो मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूं। बस न होने के कारण आटो पहले से ही भरे हुए आ रहे हैं।’’
सुधा डरते डरते महेश की बाईक पर बैठ गई। कुछ ही देर में दोंनो घर पहुंच गये। सुधा ने महेश से कहा – ‘‘आपका बहुत बहुत धन्यवाद आज आप नहीं होते तो पता नहीं क्या होता।’’
महेश बोला – ‘‘मैं यहां पास ही में रहता हूं और रोज इसी रास्ते से जाता हूं। अगर तुम्हें बुरा न लगे तो मेरे साथ चला करो जाना तो हमें एक ही जगह है फिर बसो में धक्के खाने का क्या फायदा।’’
सुधा झेपते हुए बोली – ‘‘नहीं आप क्यों परेशान हो रहे हैं मैं चली जाउंगी।’’
महेश ने मुस्कुराते हुए कहा – ‘‘अच्छा बाबा तुम्हारा आत्मसम्मान आड़े आ रहा है तो कभी कभी बाईक में पेट्रोल भरवा देना या कभी कभी चाय पिला देना।’’
फिर उसने सीरियस होते हुए कहा – ‘‘देखो सुबह की तो कोई बात नहीं लेकिन रात को यहां गुंडागर्दी शुरू हो जाती है। अन्जान शहर हो तुम अकेली हो अपनी सेफ्टी के बारे में सोचो।’’
सुधा हां कर देती है और मुड़ कर अपने फ्लेट की ओर चल देती है। रात को सुधा सपना को सारी बातें बताती है तो सपना कहती है – ‘‘सुधा अपनी गांव की सोच से बाहर निकल कर दुनिया देख अच्छा खासा दोस्त मिल रहा है। शहरों में यह सब आम बात है। यहां कोई टोकने थोड़े आ रहा है।’’
अगले दिन से सुधा, महेश के साथ ऑफिस जाने लगी धीरे धीरे उनकी नजदीकियां बढ़ने लगीं। दोंनो को एक दूसरे का साथ अच्छा लगने लगा। ऑफिस से निकल कर दोंनो इधर उधर घूमते। साथ में काफी पीते बातें करते फिर महेश सुधा को घर छोड़ देता था।
समय जैसे पंख लगा कर उड़ रहा था। एक दिन सुधा जब घर पहुंची तो देखा उसके पिताजी बैठे थे।
‘‘अरे पिताजी आप कब आये?’’
पिताजी बोले – ‘‘बस बेटा तुझे बहुत समय से देखा नहीं था। इसलिये चला आया। कैसी है तू? और इतनी देर से घर आती है।’’
सुधा को लगा जैसे उसकी चोरी पकड़ी गई वह बोली – ‘‘बाबा शहर में ऐसा ही होता है नौकरी में बहुत काम करना पड़ता है आते आते रात हो जाती है।’’
पिताजी ने चिंता जताते हुए कहा – ‘‘बेटा देख ले नहीं तो घर चल वहां भी तो खर्चा चल ही रहा था। तुझे परेशान देख कर बहुत तकलीफ होती है। तेरी मां भी बहुत परेशान रहती है।’’
यह सुनकर सुधा सकपका गई वह बोली – ‘‘नहीं पिताजी आप परेशान न हों मैं बहुत मजे में हूं। यहां रहना मुझे बहुत अच्छा लग रहा है और मैंने काफी पैसे भी जोड़ लिये हैं कल मैं बैंक से निकाल कर आपको दे दूंगी आप ले जाना।’’
यह सुनकर उसके पिता बोले – ‘‘नहीं बेटा हम तेरी कमाई कैसे ले सकते हैं तू अपने पास ही रख पर जब भी तू परेशान हो घर आ जाना।’’
अगले दिन सुबह होते ही उसके पिता गांव चले गये। उस दिन सुधा को थोड़ा डर तो लग रहा था। कि कहीं उसकी चोरी पकड़ी न जाये क्योंकि वह महेश के प्यार में पड़ चुकी थी, और गांव में यह सब बहुत बुरा माना जाता है।
महेश उसे लेने आया तो वह उसके साथ ऑफिस के लिये निकल गई। रास्ते में उसने सारी बात बता दी। वह महेश से कुछ नहीं छुपाना चाहती थी।
यह सुनकर महेश हसने लगा वह बोला – ‘‘पगली बस इतनी सी बात बात इसमें डरने की क्या बात है। हम एक दूसरे से प्यार करते हैं कोई गुनाह नहीं किया मैं कुछ दिनों में गांव जाकर तुम्हारे माता पिता से मिल लूंगा।’’
सुधा बोली – ‘‘नहीं नहीं ऐसा मत करना पहले मौका देख कर मैं बात करूंगी।
इसी तरह समय पंख लगा कर उड़ रहा था। महेश के साथ रहते रहते सुधा के तौर तरीके बदल गये थे। अब वह गांव की भोली सी लड़की नहीं शहर की तेज तरार लड़की बन चुकी थी।
सुधा ने काफी पैसे इकट्ठे कर लिये थे। इस बार उसने सोचा क्यों न दिवाली पर मां-पिताजी से मिल आउं। वह ऑफिस से छुट्टी लेकर गांव के लिये निकल गई मां-पिताजी के लिये उसने कपड़े खरीदे शहर से बढ़िया सी मिठाई ली और गांव पहुंच गई।
अचानक बेटी को देख कर सुधा की मां बहुत खुश हुई उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। दोंनो मां बेटी घंटो बातें करती रहीं। फिर उसकी मां उसकी पसंद का खाना बनाने चली गईं। शाम तक उसके पिताजी भी खेत से आ गये थे। सुधा को देख कर वे बहुत खुश हुए, लेकिन जैसे जैसे सुधा उनसे बात कर रही थी उन्हें एहसास हो रहा था कि यह वो सुधा नहीं है जो गांव से शहर गई थी।
अब वह केवल पैसों की बातें करती थी। शहर की चमक दमक की बातें। उसे अब उसके माता पिता बेकार नजर आ रहे थे। सुधा के पिता उसकी बातों को सुनकर असहज महसूस कर रहे थे।
दो दिन बात दिवाली थी। सबने मिल कर दिवाली मनाई। लेकिन सुधा के पिता अपनी बेटी के व्यवहार से खुश नहीं थे। उन्हें लग रहा था। कि अब वह उनकी बेटी नहीं रही।
दिवाली के अगले दिन सुधा अपनी मां के साथ बैठी थी – ‘‘मां कल मैं चली जाउंगी मेरी छुट्टी खत्म हो रही हैं। आपसे एक बात करनी थी। मां मैं एक लड़के से प्यार करती हूं हम दोंनो शादी करना चाहते हैं। आप पिताजी से बात कर लीजिये।’’
‘‘बेटी यह तू क्या कह रही है तेरे पिता सुनेंगे तो बहुत गुस्सा करेंगे। यह सुनकर सुधा बोली – ‘‘मां यह सत्य है आप दोंनो को मानना ही पड़ेगी अब में किसी गांव के लड़के से शादी करके यहां तो रह नहीं सकती। आप मान जाओ तो अच्छा है वरना शादी तो हम वैसे भी कर लेंगे।’’
अपनी बेटी अब पराई सी लगने लगी थी। शाम को सुधा की मां ने उसके पिता को सारी बात बता दी। यह सुनकर उसके पिता बहुत गुस्सा हुए – ‘‘इसी दिन के लिये मैंने तुझे शहर भेजा था कि तू हमारी नाक कटवा दे। यह रिश्ता नहीं हो सकता और न तुझे अब शहर जाने की जरूरत है। मैं कोई ढंग का लड़का देख कर तेरी शादी करा दूंगा।’’
सुधा बोली – ‘‘देखिये पिताजी मैं शादी करूंगी तो महेश से ही करूंगी। मैं आपको शादी का निमंत्रण भेज दूंगी मन करे तो आशीर्वाद देने आ जाना।’’
सुधा की बात सुनकर उसके माता पिता आश्चर्यचकित रह गये। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था। सुधा की मां ने कहा – ‘‘सुनों जी अभी आप गुस्से में हो वो भी उल्टे जबाब दे रही है। सुबह बात कर लेंगे।’’
रात भर दोंनो करवटें बदलते रहे। उनकी आंखों से नींद उड़ चुकी थी। सुबह जब दोंनो उठे तो देखा सुधा एक चिट्ठी छोड़ कर चली गई है। उसमें लिखा था – ‘‘पिताजी मैं इस गांव और यहां के दकियानूसी विचारों को छोड़ कर जा रही हूं। शादी का कार्ड भिजवा दूंगी। आपका मन हो तो आ जाना आशीर्वाद देने।’’
सुधा को अब किसी की परवाह नहीं थी। वह शहर पहुंच गई अगले दिन सुबह वह ऑफिस जाने के लिये तैयार हुई उसे आज महेश को सारी बातें बतानी थीं।
वह महेश का इंतजार कर रही थी। लेकिन वह नहीं आया। न ही सुधा का फोन उठा रहा था। सुधा ऑफिस पहुंची तो भी महेश ने उससे बात नहीं की। वह बहुत परेशान थी। लंच में उसने महेश को रोक लिया –
‘‘क्या बात है तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे हो?’’
महेश बोला – ‘‘सुधा अब मेरे तुम्हारे रास्ते अलग अलग हैं मैंने शादी का फैसला कर लिया है मेरा रिश्ता पक्का हो गया। है।’’
यह सुनकर सुधा के पैरों तले जमीन खिसक गई – ‘‘यह तुम क्या कह रहे हो हम दोंनो शादी करने वाले थे?’’
महेश ने कहा – ‘‘मैंने अपने पापा से बात की थी लेकिन वो नहीं माने और मेरा जिस जगह रिश्ता पक्का किया है वे करोड़पति हैं उनकी इकलौती लड़की है। मैं तो इस ऑफिस से भी रिजाईन दे रहा हूं। शादी के बाद मुझे ही उनका सारा बिजनेस संभालना है और तुमसे शादी करके मुझे क्या मिलता हम दोंनों जिन्दगी भर इसी ऑफिस में घिसते रहते एक एक चीज के लिये तरसते रहते हो सके तो मुझे भूल जाओ।’’
सुधा वहां से उठ कर सीधे अपने बॉस के केबिन में गई और बोली – ‘‘सर मेरी तबियत ठीक नहीं है मुझे हाफ डे चाहिये।’’ उसके बॉस ने उसे छुट्टी दे दी वह अपना बैग उठा कर ऑटो लेकर अपने फ्लेट पर आ गई। आते ही बिस्तर पर लेट गई उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे – ‘‘मेरे साथ ठीक ही हुआ मैंने अपने माता पिता को धोखा दिया बदले में मुझे तो धोखा मिलना ही था। अब किस मुंह से गांव जाउं। मन कर रहा है आत्महत्या कर लूं।’’
शाम को उसने सपना को सारी बात बता दी। सपना समझ गई कि परिस्थिती बहुत नाजुक है सुधा कुछ गलत कदम न उठा ले इसलिये उसने कहा – ‘‘माता पिता आखिर माता पिता ही होते हैं वे तुझे माफ कर देंगे कल सुबह हम दोंनो गांव चलेंगे।’’
सुधा मना करती रही लेकिन सपना उसे लेकर गांव पहुंच गई। घर पहुंचते पहुंचते शाम हो गई थी। सुधा सपना के साथ अपने घर पहुंची। आंगन में उसके माता पिता एक चारपाई पर बैठे थे। सुधा जाते ही अपने पिता के पैरों में गिर गई – ‘‘पिताजी मुझे माफ कर दीजिये मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई मैंने आपके सपनों को तोड़ा आपको धोखा दिया उससे बड़ा धोखा मुझे भी मिला। अब मैं कभी शहर नहीं जाउंगी। जहां आप मेरी शादी करेंगे मैं कर लूंगी।’’
सुधा के पिता ने उसे उठाया और गले से लगा लिया – ‘‘बेटा सब भूल जा जो बीत गया उस पर पछतावा करने की जरूरत नहीं। मेरी बेटी मुझे वापस मिल गई इससे बड़ी कोई बात नहीं है।’’
ठगे जाने पर भी, अफ़सोस नहीं होना चाहिये। क्यों कि ठगे जाने के लिए, इंसान के भीतर क ई खूबियां होती हैं। अच्छे दिल, साफ सोच,, और ...