ज़िद करने की आदत,
बचपन से ही साथ रहे ,
हर खिलौने हर सपने पर नजर रही !!
पर सच तो यह है
,जिद की मासूमियत ,,
सिर्फ मां-बाप के सामने ही जचती रहे !!
दुनिया के आगे जिद,
अहंकार बन जाती है,,
मगर मां की गोद में,
पिता की छांव में,,
वह प्रेम की पहचान बन जाती है !!
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