किसान और कुआँ
एक किसान था जिसे अपने खेत के लिए पानी की ज़रूरत थी। उसने अपने पड़ोसी से एक कुआँ खरीदा। उसका पड़ोसी बहुत चालाक था। जब किसान कुएँ से पानी भरने गया, तो पड़ोसी ने उसे रोक दिया। उसने कहा कि उसका अधिकार कुएँ पर है, पानी पर नहीं। परेशान होकर किसान न्याय पाने के लिए बादशाह के पास गया। बादशाह ने इस मसले को सुलझाने की ज़िम्मेदारी बीरबल को सौंपी। बादशाह के नौ दरबारियों में से बीरबल सबसे बुद्धिमान था। बीरबल ने पड़ोसी से पूछा कि क्या उसने अपना कुआँ किसान को बेच दिया है। पड़ोसी ने माना कि उसने कुआँ तो बेच दिया, लेकिन कुएँ का पानी नहीं।
बीरबल ने कहा कि अगर उसने किसान को कुआँ बेचा है, तो उसे कुएँ से पानी निकालना चाहिए या फिर उस पानी का किराया देना चाहिए। बीरबल को एहसास हुआ कि उसकी योजना नाकाम हो गई है, इसलिए पड़ोसी ने माफ़ी मांगी और अपने घर वापस चला गया।
नैतिक: धोखा देने से आपको कुछ नहीं मिलेगा और आपको इसकी कीमत अवश्य चुकानी पड़ेगी।

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