दूधवाली और उसकी बाल्टी
मौली एक ग्वालिन थी जिसका काम गायों का दूध दुहना और बेचना था। वह उन चीजों के बारे में दिवास्वप्न देखा करती थी जो वह उन पैसों से खरीदेगी जो उसके पास अभी नहीं थे। एक दिन वह दूध से भरी बाल्टी लेकर बाजार जा रही थी। रास्ते में उसने एक मुर्गी देखी और मुर्गी खरीदने और उसके अंडे बेचने के बारे में दिवास्वप्न देखने लगी। उसने सपना देखना शुरू कर दिया कि अन्य ग्वालिनें मौली को अंडे और दूध बेचकर मिलने वाली चीजों से बहुत ईर्ष्या करेंगी। और फिर उसने अपने सपने की उत्तेजना में बाल्टी से सारा दूध गिरा दिया। वह एक खाली बाल्टी और बिना पैसे के अपने घर वापस चली गई। उसकी माँ ने उससे इस घटना के पीछे का कारण पूछा। मौली ने उसे पूरी कहानी बताई जिसके बाद उसकी माँ ने उपदेश दिया कि उसे अपने मुर्गियों को तब तक नहीं गिनना चाहिए जब तक कि वे अंडे न दे दें।
शिक्षा: यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें दिवास्वप्न नहीं देखना चाहिए बल्कि अपने लक्ष्यों के प्रति यथार्थवादी कार्रवाई करनी चाहिए।

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