हर बेटी के भाग में पिता होता है !
मगर हर पिता के भाग्य में बेटी नहीं होती !!
किसी ने बहुत खूब कहा है !
हर किसी के नसीब एक जैसा नहीं होता !!
राजा दशरथ जब अपने चारों बेटों की बारात लेकर ,
राजा जनक के द्वार पर पहुंचे तो ,,
राजा जनक ने सम्मानपूर्वक ,,
बारात का स्वागत किया !!
तभी दशरथ जी ने आगे बढ़कर ,,
जनक जी के चरण छू लिए !!
चौक कर जनक जी ने,
दशरथ जी को थाम लिया !!
और कहां महाराज आप बड़े हैं !
और आप लड़के वाले हैं|
यह उलटी गंगा कैसे बहा रहे हैं,
इस पर दशरथ जी ने,
बड़ी सुंदर बात कही ,
महाराज आपदाता है |
कन्यादान कर रहे हैं|
मैं तो वाचक हूं ,
आपके द्वार कन्या लेने आया हूं |
अब आप ही बताइए ,
दाता और वाचक में कौन बड़ा है|
यह सुनकर जनक जी के नेत्रों से,,
आंसुओं की धारा बह निकली ,,
भाग्यशाली है वह.......
जिनके घर होती है बेटियां |
हर बेटी के भाग्य में पिता होता है |
लेकिन हर पिता के भाग्य में बेटी नहीं होती !!!

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