" पैर से काटा निकल जाए तो ,चलने मे मजा आ जा ता है .।
" और मन से अहंकार निकल जाए तो ,जीवन जीने मे मजा आ
जाता है,..............................................................................
चलने वाले पैर मे कितना अन्तर है, एक आगे है एक पीछे ।।
पर न तो आगे वाले को अभिमान है , और न पीछे वाले को
अपमान ,उनको पता होता है कि , पल भर में यह बदलने वाला
है ............................यहीं मीठी बात जिन्दगी है ...............
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" और मन से अहंकार निकल जाए तो ,जीवन जीने मे मजा आ
जाता है,..............................................................................
चलने वाले पैर मे कितना अन्तर है, एक आगे है एक पीछे ।।
पर न तो आगे वाले को अभिमान है , और न पीछे वाले को
अपमान ,उनको पता होता है कि , पल भर में यह बदलने वाला
है ............................यहीं मीठी बात जिन्दगी है ...............
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