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गुरुवार, 23 नवंबर 2017

राजा की सोच

बहुत पहले की बात है। किसी नगर मे एक राजा रहता था।उसके राज्य में ,उसकी प्रजा बहुत खुश थी । एक दिन राजा अपने महल से निकल कर ,घर से दूर अपने सिपाहियों के साथ, जगंल की ओर जा रहा था ।दूर छाव देखकर वह अपने सिपाहियों के साथ वही छाव मे ठहरा।ठहरने के बाद उसकी निगाह उसके कुर्ता पर गई।उसनें देखा कि हमारे कुर्ता की एक बटन टूटी हुई है।उसनें अपने सिपाही को आदेश दिया कि,गांव में जाकर कि सी दरजी को लेकर आए।उसके सिपाही गांव में जाकर दरजी को खोजने लगे।बहुत खोजने के बाद एक दरजी मिला।सिपाही उस दरजी से बोला ,राजा की बटन टूट गई हैं उसे लगाना है। दरजी बोला ठीक है चले।सिपाही दरजी को लेकर राजा के पास लाए।।                                    
        राजा दरजी से बोला।हमारी यह बटन टूट गई हैं लग जाएगी।दरजी बोला हाँ ठीक है, लग जाएगी।ठीक है लगाओ।दरजी बटन को लगा देता है।राजा दरजी से बोला कितने पैसे हुए।दरजी सोचने लगा कि मैं राजा से कितने पैसे लू ।दरजी ने मन मे सोचा मैं राजा से एक ₹लेता हूँ।फिर वह मन मे बिचार किया।यह अधिक है, मेरा धन्धा टूट जाएगा।फिर दरजी ने बहुत दूर तक सोचा और बोला ।राजा जो समझ मे आए वह दे दो। राजा तो राजा होता है।उसने अपने मंत्री को आदेश दिया, कि इस दरजी को दस एकड़ जमीन दे दी जाए।दरजी बहुत खुश हुआ, उसने कभी सोचा नही था कि राजा हमें इतना सब कुछ दे देगें ।.............. "यह है राजा की सोच".........

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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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