एक फकीर नदी के किनारे बैठा था !
तभी किसी ने पूछा बाबा यहां क्या कर रहे हो ?
तब फकीर ने कहा...
बेटा मैं इंतजार कर रहा हूं ?
की पूरी नदी बह जाए,
तो मैं नदी को पर करूं ?
उसे आदमी ने कहा
कैसे बहकी बहकी बातें करते हो बाबा !!
पूरा जल बहाने के इंतजार में तो ,
तुम कभी नदी पर ही नहीं कर पाओगे !!
तो फकीर ने कहा...
यही तो हम तुम लोगों को समझाना चाहता हूं ?
कि तुम लोग सदा यह कहते रहते हो कि....
एक बार जीवन की जिम्मेदारियां पूरी हो जाए तो !!
मौज करूं..
घूमो फिरू ....
सबसे मिल यू ...
सेवा करूं....
जैसे नदी का जल खत्म नहीं होगा !
हमको इस जल से ही पर जाने का रास्ता बनाना है !!
इसी प्रकार हमारा जीवन खत्म हो जाएगा !
लेकिन यह काम कभी खत्म नहीं होगा !!!

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