देहात मे एक कहावत है !
जब देने वाला देता है तो छपरा ,फार तर देता है !!
यह कहावत सटीक बैठती है ,मोहित नाम के
लडके साथ...मोहित जो एक गरीब किसान
का बेटा था ! वह किसान खेती बाडी और मजदूरी
करके अपने परिवार का पेट पालता था !
वह किसान अपने बेटे मोहित को उसी मजदूरी
के पैसे से पढाता था! धीरे धीरे समय बीतता
गया,इधर उस किसान का लडका मोहित
धीरे धीरे बडा होता गया ! मोहित समझ दार
हो गया! मोहित 18 वरस का हो गया ,मोहित
जानता था कि उसके घर की हालात ठीक नही
है, इस लिए मोहित ने अपने पिता जी से कहा...
पिता जी मै भी कमाना चाहता हूं, और आप के
काम मे हाथ बटाना चाहता हूं.यह बात मोहित ने
अपने पिता से कहा....तब मोहित के पिता जी ने
मोहित से बोला...नही बेटा मजदूरी करना ठीक नही
है,तब मोहित ने कहां,लेकिन पिता जी मै कुछ करना
चाहता हूं, जिससे घर मे पैसा आए और. घर का सुधार
हो ! तब मोहित के पिता ने कहां,तुम एक काम करो
विदेश चले जाओ,तब मोहित ने कहां,ठीक है पिता जी,
जैसे आप कहें ! मोहित विदेश जाने के लिए तैयार हो
गया ! मोहित के पिता ने कहा, उधर विदेश मे हमारे
पहचान के कुछ लोग है,हम उन लोगो से बात करते हैं,
और पैसो का इंतजाम कर तुमको विदेश भेजने का
परबंध करते है़ ! मोहित के पिता ने विदेश मे रह रहे
लोगो से बात की,तब उन लोगो ने कहॉं ,कि ठीक है
तुमअपने लडके को भेज दो,तब मोहित के पिता ने
अपने नजदीक के लोगो से पैसे उधार लेकर मोहित
को विदेश भेज दिया !
मोहित विदेश पहुंच जाता है ! वहॉ विदेश पहुचने
पर मोहित को कार की धुलाई का काम मिलता है !
मोहित काम पर लग जाता है, और कार की धुलाई
का काम करने लगता है ! मोहित को कार की धुलाई
करते करते एक महीना गुजर जाता है ! तब एक महीने
बाद मोहित को पगार मिलती है ,पगार पा कर मोहित
बहुंत खुश होता है ! उन पैसो से वह अपने सपने को
सजो ने लगता है ! मोहित कुछ पैसे अपने पास रख कर
बाकी के पैसे को अपने पिता के पास भेज देता है !
मोहित के पिता जी पैसे पाकर खुश होते है, पैसा
पाते हीवह सबसे पहले उधार चुकता करते है....
अब इधर मोहित अपने बचाऐ हुऐ पैसो मे से
कुछ पैसो की लाटरी का टिकटले लेता है !
मोहित लाटरी का टिकट लेने के बाद ,सीधा
काम पर चला जाता है,और कार की धुलाई
करने लगता है ! इस तरह दिन बीत गया, रात
आई, रात भी बीत गई दिन आया !मोहित मन
लगा कर काम करने लगा ! और इस तरह काम
करते करते चार दिन बीत गया ! उसी दिन शाम
को चर बजे लाटरी के टिकट का परिणाम वहां के
एक पेपर मे आया ! मोहित को यह बात मालूम
पडी कि आज लाटरी टिकट का नं.वर पेपर मे आया
हुआ है तो मोहित दौड कर गया अपना लाटरी का टिकट
ला कर उस पेपर मे मिलान करने लगा !
मोहित के टिकट का नंबर पेपर मे निकले हुऐ
नंबर से मैच कर गया ! यह देख कर मोहित बहुंत
खुश हुआ,एक बार तो मोहित को यकीन नही हुआ,
लेकिन फिर बाद में मोहित खुश हुआ !
वह कोई छोटा मोटा इनाम नही था........
.....पूरे 21 करोड का इनाम था .....
इतनी बडी रकम को पा कर मोहित अपने
सपने को संजोने लगा........
**इसी को कहते हैं किसमत का तेज**
उधर मोहित के पिता को जब यह बात
मालूम पडी तो वह बहुंत बहुंत बहुंत खुश हुऐ....
और अपने बेटे मोहित को विदेश से अपने गांव बुला लिया..
अब गांव मे खुशहाली का माहौल है !!!!!
यह किसी घटना पर आधारित नही हैै..

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