किसी गॉव मे रामूनाम का एक आदमी रहता था !
उसका एक लडका था, जिसकाऩाम देवा था !
उसका लडका देवा पढने मे बहुत तेज धा !
रामू दिनभर दूसरो के यहॉ मजदूरी करता. और शाम
को जो पैसा पाता था, उसमे मे से थोडा पैसा बचा कर
अपने लडके देवा के लिए रखता,बाकी वचे हऐ पैसे से
घर मे खाने के लिए बाजार से सामान लाता,
अपने बचाऐ हुऐ पैसे से रामू अपने लडके के लिऐ
कपडे और अपने लडके देवा के लिऐ पढने की फीस
जमा करता..
इधर रामू का लडका धीरे धीरे बडा होरहा है !
उधर रामू दिनभर मेहनत मजदूरी कर थक
हार कर घर आता, और शाम काभोजन पका कर,
रामू और उनका लडका देवा खाना खाते
और फिर सो जाते....
मगर देवा अपने पिता को मेहनत मजदूरी करते हुआ
यह सब देखा रहा ॉ्
और फिर देवा ने यह अपने मन मे ढाना की एक
दिन जबमै बडा हो जाऊगॉ तो, इस घर से गरीवी
हमेशॉ के लिऐ १़
और फिर एक दिन वाहर से एक विधालय की
टीम आई ऊसविधालय मे फिरी मे लडकॉ को
पडाया जाता था
जो टीम उस विधालय मे आई थी
वह टीम उस विधालय मे परीछा का ॉआयेजन
किया, उस परीछा मे देवा ने पास होकर यह
सावित कर दिया कि,,,,हम भी किसी से कम नही..
और इस तरह देवा ने वह परीछा पास कर एक
बडे कालेज मे दाखिला लिया !!!
उधर देवा के पिता रामू खूब मेहनत
मजदूरी कर कमाते, और अपने लडके
देवा को पढाते.... और इधर देवा खूब मन
लगा कर पडता था, ताकि वह अपना
सपना पूरा कर सके....
और धीरे धीरे देवा के कालेज की पढई
पूरी कर एक बडी नौकरी की तैयारी
करने लगा....उधर रामू को चिता लगी
रहती थी कि हमारा पास हो जाय
और कही कुछ करने लगे,जिससे
हमारी गरीबी कम हो जाय..
और फिर देवा ने एक बडी कंमपनी
मे परीछा दिया और पास हुआ..
उसे अमेरिकन कंमपनी मे बडे
पद पर रखा गया...
इस तरह वह कमाने लगा
और उसके पिता खुश हुऐ...

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