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गुरुवार, 31 अक्टूबर 2019

संत की बात

गांव की एक गरीब महिला, जो
बहुत परेशान रहती थी वह एक
दिन पडोस मे रह रहे एक कुटी
पर संत के पास गयी।उस गरीब
महिला ने उस संत से कहा....
   बाबा मै बहुत परेशान रहती हूँ।
    मै मेहनत करती हूँ, पर घर मे,
      हमारे बरकत नही होती हैं।
मेरा परिवार बहुत दुखी  हैं।
बाबा.. मुझे कोई उपाय बताए।
उस गरीब महिला की बात को
सुनकर बाबा ने महिला को एक
पर्ची दी और कहा इसे सहेज कर
रख देना,और इसे तब खोलकर
देखना जब तुमको बहुत जरूरत हो।
   उस महिला ने वैसे ही किया।
  उस पर्ची को सहेज कर रख दिया।
और खाना पका खा कर सो गयी।
     सुबह जब वह महिला उठती हैं,
तो देखती हैं उसके आगन मे एक
नोटो से भरा हुआ बैग पडा हुआ हैं।
उस महिला ने उस बैग को उठाया
और उसे खोला ,उसमे एक बडी सी
पर्ची भी थी,जिसमे लिखा था कि इस
पैसे से कोई करोबार कर लेना....
  उस महिला ने दूसरे दिन किराये पर
दुकान लेकर कारोबार शुरू किया।
उस महिला को उस कारोबार से
इतना फायदा हुआ मानो पैसों की
बारिश उस महिला के घर मे होने
लगी..उस महिला का कारोबार ठीक चलने लगा।
     कुछ दिन बाद अचानक एक दिन
     उस महिला को बाबा की दी हुई
    पर्ची की याद आई...
फिर उस महिला ने छट से जाकर
उस पर्ची को देखा और उसे खोला...
    फिर पढा...
   "जिस पर्चा मे लिखा था"
"यदि किसी के घर मे रात को,
बच्चों की रोने की अवाज आए,
तो कुछ पैसे उनके घरो मे भी डाल देना"/

मंगलवार, 22 अक्टूबर 2019

राम राम दो बार

सदियों से चला आ रहा हैं।
जब लोग एक दूसरे से मिलते,
हैं तो आपस मे एक दूसरे को
दो बार "राम राम"बोलते हैं।
   आखिर क्क्यो हम हम राम
राम एक य तीन बार नही बोलते।
   दो बार राम राम बोलने के पीछे
बहुत बडा राज छुपा हुआ हैं।
जो आदि काल से चला आ,
रहा हैं। जो कि ...
"हिंदी की शब्दावली मे
   र  सत्ताइसवा शब्द हैं...27
               और
आ की मात्रा दूसरा शब्द हैं...2
              और
म पच्चीस वा शब्द हैं...25
      और
अब तीनो का योग करे तो...
  27+2+25=54
        अब
एक राम का योग 54 आता हैं
          इसी तरह
दूसरे राम का योग
   27+2+25 =54
       अब दोनो राम क योग...
      54+54=108 होता हैं।
और हम जब कोई जाप करते
हैं तो "मन के की माला"
गिन कर करते हैं..
    इस तरह से
राम राम
दो बार
कह देने
से ही
पूरी
मन के
की माला
का जाप
हो जता हैं।
एक पौध

रविवार, 13 अक्टूबर 2019

यह वक्त गुजर जायेगा

एक समय की बात हैं,
     अकबर ने बीरबल को अपने दरबार
    मे बुलाया, और कहा,
बीरबल...मै जहाँ बैठा हू इसके ठीक
            सामने वाली दीवार पर कुछ
           ऐसा लिखो कि,मै...
"गम मे उसे पढूं  तो खुशी हो" !
"खुशी मे मै उसे पढूं, तो गम हो" !
     यह सुनकर बीरबल थोड़ी देर
     खडे होकर सोचने लगे ,और फिर
वह जाकर सामने वाली दीवार पर लिखा...
       "'यह वक्त गुजर जायेगा"
अकबर को बीरबल की लिखी हुई यह
बात बहुत पसंद आई,फिर अकबर ने
बीरबल को ढेरों, सोने चादी के उपहार दिया।
  किसी ने सच ही कहा हैं...
    यह वक्त कब गुजर जाता है,
किसी को पता ही नही चलपाता,
इसलिए समय के साथ चलना सीखो,
जो समय के साथ चला हैं,
वही आगे वढा है।।
   चलते रहने का नाम जिंदगी है।
चलते रहेगे तो एक दिन, मंजिल तक
अवश्य पहुंच जायेंगे।.....C.t.m.founder

गुरुवार, 10 अक्टूबर 2019

एक गरीब आदमी

किसी गांव में एक बहुत ही
गरीब परिवार रहता था।उस
परिवार के मुखिया का नाम
दीनानाथ था।उस परिवार में
दीनानाथ और उनकी पत्नी
रीना ,और एक बेटा राहुल था।
दीनानाथ का परिवार बहुत ही
गरीब था। वह दिन भर मेहनत
मजदूरी कर किसी तरह अपना
और अपने परिवार के लिए
कमा कर लाता था,और बडे
ही मुश्किल से रोटी का जुगाड़
कर पाता था।वह गाँव मे जब
निकलता था,गांव के लोग
उसके गरीबी का मजाक उडाते
थे। दीनानाथ को यह सब ठीक
नही लगता था।उसे गांव के लोगों
की बाते सुनकर बहुत दुख होता
था।उनको समझ मे नही आता था
कि आखिर वह का करे कि उनका
परिवार भी खुशहाल जीवन जिये।
   एक दिन दीना नाथ मजदूरी करने
गांव से कुछ दूर पर गया।वहा पर बहुत
पुरानी जमीन जो कई सालो से
बंजर पडी हुई थी ,उसी जमीन पर
उसे खुदाई करना था।वह अपने
हाथ मे एक फावडा और टोकरी
साथ लेकर गया था।उसने वहाँ
पर खुदाई करने लगा।धीरे धीरे
उसने दो घंटे तक खुदाई किया।
    चूंकि जमीन कफी पुरानी,
     और बंजर थी इस लिए
 खुदाई करने मे परेशानी होती
  थी,लेकिन फिर भी ,दीनानाथ
  ने खुदाई बन्द नही कीऔर
धीरे धीरे पाँच फिट गहरा गडढा
खोद डाला,पांच फिट के बाद
दीनानाथ ने जैसे ही और गहरा
गडढा खोदना चाहा, उनको
कुछ दिखाई दिया।उसने फावडे
से मिटटी हटा कर देखा तो वह
दंग रह गया।वहां एक संदूक मे ढेर
सी अर्सफी भरी हुई थी।
   अब तो दीनानाथ की तकदीर
ही बदल गई।वह उसे उठा कर
घर ले आया।
  और फिर दूसरे दिन वह नहां
धोकर तैयार हुआ, और उसने
कुछ अर्सफी लेजाकर बाजार
मे बेच दी।और उस पैसे को
घर ले आया। चूंकि घर की
माली हालात ठीक नही थी
इसलिए पहले उसने उस पैसे
से बाजार से अनाज ,और खाने
पहनने का सामान खरीदा,फिर
उसे घर ले आया।उसके बाद
फिर उसने अपना रहने के लिए
घर का प्रबंध किया।
और ठीक ठाक रहने लगा।
अब गांव के जो लोग
उस पर हसते थे वही
लोग राह चलते य इधर
उधर कही पर मिलते
दीनानाथ को नमस्कार
अवश्य करते थे।
कहते हैं.. मालिक जब देता हैं..
  तो छप्पर फाड कर देता हैं।।
यह कहावत दीनानाथ पर
बहुत सही साबित हु ई।
  कभी किसी गरीब का
  मजाक नही उडाना चाहिए।
कब किसकी किस्मत कहाँ
बदल जाय यह कोई नही जानता।।
          Co founder. R.kumar
            "Click tech money.com"
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शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2019

स्वच्छता ही जीवन

स्वच्छता के कमी के कारण
बच्चों में डायरिया, और कुपोषण
बढ जाता हैं जिससे बच्चों की
मृत्यु हो जाती हैं।
 विश्व बैंक की रिपोर्ट....
         दूनिया भर मेएक वर्ष मे
गंदगी के कारण लगभग 17 लाख
मौते होती हैं, जिसमे 30%बच्चे
होते हैं।
  लोगों मे स्वास्थ्य मे सुधार के
  लिए व्यक्तिगत और समुदायिक
दोनो स्तर पर स्वच्छता अनिवार्य है।

   स्वच्छता ग्राही रिपोर्ट......
           यह दरशाता हैं कि हम अपने 
आस पास फैली सक्रामण विमारियों
पर काबू पा सकते हैं, यह वदलाव
केवल स्वच्छ भारत मिशन की
वजह से देखने को मिल सकता
हैं। आज हम स्वचछ भारत मिशन
से संतुष्ट हैं, लोगों मे जागरूकता
देखने को मिल रही हैं।
  स्वच्छ भारत मिशन का मिशन
का यह आन्दोलन देश के समस्त
विकास का आधार भी बनेगा।

             ,स्वच्छ भारत मिशन, से
                     आर .कुमार,


गुरुवार, 3 अक्टूबर 2019

एक कदम स्वच्छता की ओर

गांधी जी के स्वच्छ भारत के
सपनो को पूरा करने के लिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2अक्टूबर
2014 को स्वच्छ भारत अभियान की
शुरुआत की।इस अभियान में प्रशासन के साथ
आम लोगों को भी जोडा गया।
  और उनको जागरूक किया,
यही कारण हैं कि आज देश
के हर गाँव में,शौचालय का
निमार्ण हुआ।स्वच्छता को
लेकर आम लोगों मे अधिक
जागरूकता देखने को मिली।
  इसे आनदोलन का रूप देकर
स्वच्छ भारत मिशन मे स्वच्छता ग्राही
की नियुक्ति की गई और इनकी
तैनाती गांव मे की गई।
इन्होंने गांव में जाकर वहां के
प्रधान, आशा बहू, आगनबाड़ी
कार्य कत्री,सेक्रेट्री के साथ
मिलकर  गांव के लोगों को
इकट्ठा कर लोगों को इसके
विषय में जानकारी दी।
 और घर घर जाकर सव्रेक्षण
कर लोगों को इसकी पूरी
जानकारी दी,।और शौचालय
का निर्माण कार्य करा गाँव को
"खुले मे शौच मुक्त"
 करा एक मुकाम हासिल किया।
कहते हैं... जिसने ठान ली
          ... जीत उसी की हैं,,
और यह सब कर दिखाया
गाँव में तैनात "स्वच्छता ग्राही"ने।।
इनहोने इस काम में अपना
पूरा योगदान दिया है।...S b.m...R.ku.

तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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