एक समय की बात है, किसी नगर मे शैलू नाम का एक आदमी रहता था।
एक दिन उसे पैसेे की कमी आ गयीं, फिर का था उसने एक सेठ के घर चोरी
कर ली।चोरी करतेे समय वह पकडा गया।फिर शैलू को राजा के पास ले गये।राजा ने
उसे फांसी की सजा दी।और उसकी अन्तिम इचछा पूछा गया।उसनें कहा कि हमें खेत में मोती बोना है। राजा ने उसे मोती बोने के लिए महल के अन्दर कुुछ जमीन दी।
शैलू ने उस जमीन की खुुदाई करा कर ,उसमें पानी भरावा दििया।अब जमीन मोती
बोने के लिए पूरी तरह तैयार हो गई। शैैलू ने राजा से कहा राजा, मै तो चोर हूूँ,इस लिए
मै तो मोती बो नही सकता।आप अपने ऐलान कर किसी आदमी को बुला लीजिए
जिसने कभी चोरी न की हो वह आकर मोती बोऐ। मोती बोने के लिए कोई नहीं आया।राजा समझ गया ,कियहाँ सभी चोर हैं, इसलियेे उस चोर को माफ कर छोड
दिया।
एक दिन उसे पैसेे की कमी आ गयीं, फिर का था उसने एक सेठ के घर चोरी
कर ली।चोरी करतेे समय वह पकडा गया।फिर शैलू को राजा के पास ले गये।राजा ने
उसे फांसी की सजा दी।और उसकी अन्तिम इचछा पूछा गया।उसनें कहा कि हमें खेत में मोती बोना है। राजा ने उसे मोती बोने के लिए महल के अन्दर कुुछ जमीन दी।
शैलू ने उस जमीन की खुुदाई करा कर ,उसमें पानी भरावा दििया।अब जमीन मोती
बोने के लिए पूरी तरह तैयार हो गई। शैैलू ने राजा से कहा राजा, मै तो चोर हूूँ,इस लिए
मै तो मोती बो नही सकता।आप अपने ऐलान कर किसी आदमी को बुला लीजिए
जिसने कभी चोरी न की हो वह आकर मोती बोऐ। मोती बोने के लिए कोई नहीं आया।राजा समझ गया ,कियहाँ सभी चोर हैं, इसलियेे उस चोर को माफ कर छोड
दिया।

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