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रविवार, 2 जुलाई 2017

🎂...........आगे बढते चले.........🎂          
                                                 मनी और रीमा  दोनो  साथ साथ पडते थे।कालेज मे मनी बढं चढं कर आयोजित होने वाले पृतियोगिता मे भाग  लेती थी ।जब उसने रीमासे कहा कि तुम भी इसमे भाग लो तो उसने सीधा मना कर दिया नही यह मेरे बस की बात नही है। मनी को रीमा  की बात सुनकर बेहद दु:ख हुआ।........समाज मे रीमा जैसे बहुत से किशोरियो व युवा जो आगे आने से घबडाते है व भाग नही लेते वह कलास मे हमेशा पीछे की सीट पर बैठना पसंद करते हैं।आप की सीमित दुनिया मे रहते हैं। लेकिन इस तरह उनका विकास नही हो पाता है। फलत: सफलता तो उनसे दूर रहती ही है। खुद को रीमा जैसी  को अपने बारे मे सोचना चहिए।लोगो से मुह चुरा कर ,आगे आने और पहल करने से बचकर उनको कौन सी चीज हासिल हो रही है।इसके बिपरीत भाग लेने मे लोगो से मिलने जुलने और पहल करने मे झिझक नही होती वे कही आगे सफल और आगे बढ़ते हैं।
पहले से ही खुद को अक्षम मान लेना सही नही है। अगर इस बात से चिंतित रहते हैं कि लोग आप की पहल पर आप के बारे मे कौन सी बाते करते हैं।तो आप शायद  ही सफल हो पाए।अलोचना सही लोग और सही काम की भी होती है। कोई रातो रात शिखर पर नही पहुच जाता हैं।
इसके लिए कठिन त्रम के साथ काम करते हुए संकलप के साथ आने वाली हर परेसानी को पार पाना होता है। हर किसी को कभी न कभी जीवन मे असफलता का सामना करना पडता है।...लेकिन सही दिशा मे पूरी ईमान दारी से काम करने से सफलता मिलती है।अधिकतर युवा य लोग अपने अंदर छिपी क्षमता को पहचान नही पाते और अगर पहचान भी ले तो इसे बाहर लाने की कोशिश नही करते हैं """""""""""अपनी क्षमताओं को बाहर लाने ,और उनका विकास करने का सारा त्रेय खुद का है।"""""""''यही सफलता का मूल मंत्र है ,,,,,,,,,,,,,,,,किलिक टेच मनी काम,,,,,,,,,,,,,सी ओ .....फाउंडर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,रमेश कुमार

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तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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