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सोमवार, 17 जुलाई 2017
गुरुवार, 6 जुलाई 2017
💐.......जेब खर्च बढवाना.....💐टेलीफोन पर पिता पुत्र के बीच बात.....
पुत्र....पिताजी
पिता.... हाँ कहो ।
पुत्र......मै आप से कुछ कहना चाहता हूँ।
पिता....... बोलो।
पुत्र........आजकल महगाई बहुत बढ गयीं है ।
पिता....... हाँ त़ो ।
पुत्र........सभी चीजे इतनी महगी आती हैं कि जेब खर्च महीने के शुरूवात
मे ही समाप्त हो जाताहै।
पिता.......अपना खर्र्च सभाल कर करना चाहिए।
पुत्र.....मै तो फिजूल खर्च भी नहीं करता हूँ, फिर भी थोड़ी कमी हो जाती है ।
महीने के आखिरी दिनों तक कुछ भी नहीं बचता है।
पिता...... ठीट हैं । अगले महीने तुमको जेब ..खर्च और दे दूगा ।
पुत्र.....धन्यबाद पिताजी ।
....किलिकटेच मनी.काम...सी ई ओ..फाउंडर... रमेश कुमार....................
......................................................................................................
🎂.......एकता.......🎂
..............................
एक गांव था ,चस गांव का नाम जलालपुर था।जलालपर बहुत छोटा गांव था।
परंतु वहाँ के लोगोमज आपस मे बहचत लडाई झगडा होता था।किसी भीलोग़
के अंदर मित्रता नही थी।एक बार अचानक जलाल पर मे एक बाघ की दहसत फैल
गयीं।वह बाघ रोज एक लोग को अपना शिकार बनाता था।कयी दिन बीत गये।आपस
की फछट और लडाई के कारण सभी एक दूसरे की सहायता लेने के लिऐ हिचकते थे।
लगभग एक महीने बाद जलालपुर मे पंचायत की सभा बुलाई गयी।गांव के सारे लोग वहां इकट्ठा हो गए।बाघ की समस्या पर बिचार किया गया। सरपंच ने कहा कि हम सब को अपने बैर भुलाकर एक जुट होना पडे गा।तभी हम उस बाघ का सामना टर सकते हैं।
दूसरे आदमी ने कहा आप ठीक कह रहे हैं। हर घर का ऐक आदमी हाथ में मशाल लेकर आज से गांव मे पहरा देगा। उसी रात से सभी गांव के लोग एक साथ होकर पहरा देने
लगे। वह बाघ फिर गांव में आया।सभी गांव के लोगों ने मिलकर उसको मार डाला।
उस दिन के बाद गांव के सभी लोग मिल जुल कर रहने लगे।,,,,,,,वह समझ गए कि एकता मे बहुत ताकत होती है।...........कि लिकटेचमनी.. सीई ओ फाउंडर... रमेश कुमार....................................................................................................
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एक गांव था ,चस गांव का नाम जलालपुर था।जलालपर बहुत छोटा गांव था।
परंतु वहाँ के लोगोमज आपस मे बहचत लडाई झगडा होता था।किसी भीलोग़
के अंदर मित्रता नही थी।एक बार अचानक जलाल पर मे एक बाघ की दहसत फैल
गयीं।वह बाघ रोज एक लोग को अपना शिकार बनाता था।कयी दिन बीत गये।आपस
की फछट और लडाई के कारण सभी एक दूसरे की सहायता लेने के लिऐ हिचकते थे।
लगभग एक महीने बाद जलालपुर मे पंचायत की सभा बुलाई गयी।गांव के सारे लोग वहां इकट्ठा हो गए।बाघ की समस्या पर बिचार किया गया। सरपंच ने कहा कि हम सब को अपने बैर भुलाकर एक जुट होना पडे गा।तभी हम उस बाघ का सामना टर सकते हैं।
दूसरे आदमी ने कहा आप ठीक कह रहे हैं। हर घर का ऐक आदमी हाथ में मशाल लेकर आज से गांव मे पहरा देगा। उसी रात से सभी गांव के लोग एक साथ होकर पहरा देने
लगे। वह बाघ फिर गांव में आया।सभी गांव के लोगों ने मिलकर उसको मार डाला।
उस दिन के बाद गांव के सभी लोग मिल जुल कर रहने लगे।,,,,,,,वह समझ गए कि एकता मे बहुत ताकत होती है।...........कि लिकटेचमनी.. सीई ओ फाउंडर... रमेश कुमार....................................................................................................
बुधवार, 5 जुलाई 2017
मंगलवार, 4 जुलाई 2017
💐.........आगे बढ़िए.........💐
यह तो आप भी मानते हैं कि खुद को आगे बढने के लिए हर युवा पीढी को कितनी जादा मेहनत करना पडता है ।आगे बढने के लिए किन किन राहो और किन हालातो से गुजरना पडता है ,यहाँ तक कि कभी खुद को बेचना भी पडता है।एक पुरानी कहावत है कि ........":बोलने वाला घास भी बेच लेता है, पर गूगे का गुड भी नही बिकता है,":......आगे बढ़ने के लिए शायद सबसे अहम जरूरत है, हम खुद से आगे बढेंगे कैसे।,"...याद रखे जो दिखता है वही बिकता है,"....हम अपने आप को निखारे और खुद को पहचाने.....कि कैसे आगे बढ़ सकते हैं। यह हमें ही तय करना होगा, । हममे जो पहली और सबसे बड़ी बाधा होती हैं वह हैं ,..खुद को परखना..।हम खूबियों के बदले अपनी खमियो को अधिक तरजीह देते हैं।पर यदि आप किसी बढिया आदमी को देखे तो पाएंगे कि वह इसका उल्टा सोचते हैं,।कमियाँ खूबियाँ हर किसी मे होती है, पर यह तय हम करते हैं कि हमें दिखाना किया।शुरूवात छोटी छोटी चीजों से ही कीजिए, मसलन हमारे कपडे वैसे नही होने चाहिए जैसे हम हैं।वरन वैसे होना चाहिए जो पद हम पाना चाहते हैं, ।इसके बाद नंबर आता है सँवाद और अपना व्यवहार का। अब देखेगे कि चीजे अपने आप बदल रही है ।और लोगों के संपर्क मे रहिए।बास से दिन मे कम से कम एक बार जरूर मिलिए। जरूरी नही कि कोई गंभीर मामला हो तभी मिले।और उनसे संवाद बनाए रखें।........तो फिल हाल अपनी कमियो को भूल जाइये और आज से एक नई शुरूवात कीजिए........ सी ओ फाउंडर...........रमेश कुमार..............
सोमवार, 3 जुलाई 2017
🎂.......लोक कथा......."जाल ठगो का"...........🎂
एक बार रमाशकंर नाम का आदमी अपने कंधो पर बकरी लाद कर जा रहा था।
तीन ठगो ने उनको देखा और बकरी हथियाने का निर्रणय लिया।
तीनो ने एक योजना बनाई।
वे एक एक कोस के अन्तर पर खडे हो गये।
🎂.......लोक कथा......."जाल ठगो का"...........🎂
एक बार रमाशकंर नाम का आदमी अपने कंधो पर बकरी लाद कर जा रहा था।
तीन ठगो ने उनको देखा और बकरी हथियाने का निर्रणय लिया।
तीनो ने एक योजना बनाई।
वे एक एक कोस के अन्तर पर खडे हो गये।
जैसे ही रमाशकर एक ठग के पास से बकरी को कंधे पर लाद कर निकला ,वह ठग बोला हे पथिक तुम कहाँ से आ रहे हो।रमाशकर वोला समीप के एक गाँव से आ रहा हूँ।यह सुनकर वह ठग बोला ,वह तो ठीट है मगर इस कुत्ते को अपने कंधे पर काहे को लाद रखे हो। यह बीमार है।
रमाशंकर बोला..यह बकरी कुत्ता दिखाई दे रहा है। मूर्ख कही का।ठग ने अपने कंधे उचकाए और कहा...ठीक है भाई तुमको यह बकरी दिखाई देती है। तो ऐसा ही सही।रमाशंकर उस ठग की बातो को अनदेखा कर आगे चल दिया।
आगे वह कुछ दूर पहुचा था कि दूसरा ठग उसे मिला उसने भी बकरी को कुत्ता बताया।रमाशकर उसे भी मूर्खकहकर आगे चल दिया।थोडा आगे जाकर वह सोचने लगा कही उसे धोखा तो नही हो रहा है।दो लोग एक ही बात कह रहे हैं।यह सोच कर वह बकरी को कंधे से उतारा और चारो तरफ उसे देखने लगा।फिर वह यकीन के साथ उसे कंधे पर लादा और आगे चल दिया।
थोडा और आगे चलकर उसे तीसरा ठग मिला।उसने भी बकरी को कुत्ता बता कर रमाशंकर के दिमाग को पूरी तरह बदल दिया।......कहते हैं कि झूठ को जोर देकर बार बार कहा जाय तो वह सच लगने लगता है।ऐसा ही कुछ रमाशकर के साथ भी हुआ था।वह सोचने पर विबश हो गया कि यह बकरी नही सचमुच में ही एक कुत्ता है।उसकी ही आँखें धोखा दे दिया ऐसा बिचार मन मे आते ही उसने बकरी को कंधे से उतारा और वही पटक कर अपने घर चला गया।तीनो ठग यही तो चाहते थे।उन सब ने बकरी ले जाकर किसी दूसरे गाँव मे बेच लिया।........कलिक टेच मनी.काम...रमेश कुमार
एक बार रमाशकंर नाम का आदमी अपने कंधो पर बकरी लाद कर जा रहा था।
तीन ठगो ने उनको देखा और बकरी हथियाने का निर्रणय लिया।
तीनो ने एक योजना बनाई।
वे एक एक कोस के अन्तर पर खडे हो गये।
🎂.......लोक कथा......."जाल ठगो का"...........🎂
एक बार रमाशकंर नाम का आदमी अपने कंधो पर बकरी लाद कर जा रहा था।
तीन ठगो ने उनको देखा और बकरी हथियाने का निर्रणय लिया।
तीनो ने एक योजना बनाई।
वे एक एक कोस के अन्तर पर खडे हो गये।
जैसे ही रमाशकर एक ठग के पास से बकरी को कंधे पर लाद कर निकला ,वह ठग बोला हे पथिक तुम कहाँ से आ रहे हो।रमाशकर वोला समीप के एक गाँव से आ रहा हूँ।यह सुनकर वह ठग बोला ,वह तो ठीट है मगर इस कुत्ते को अपने कंधे पर काहे को लाद रखे हो। यह बीमार है।
रमाशंकर बोला..यह बकरी कुत्ता दिखाई दे रहा है। मूर्ख कही का।ठग ने अपने कंधे उचकाए और कहा...ठीक है भाई तुमको यह बकरी दिखाई देती है। तो ऐसा ही सही।रमाशंकर उस ठग की बातो को अनदेखा कर आगे चल दिया।
आगे वह कुछ दूर पहुचा था कि दूसरा ठग उसे मिला उसने भी बकरी को कुत्ता बताया।रमाशकर उसे भी मूर्खकहकर आगे चल दिया।थोडा आगे जाकर वह सोचने लगा कही उसे धोखा तो नही हो रहा है।दो लोग एक ही बात कह रहे हैं।यह सोच कर वह बकरी को कंधे से उतारा और चारो तरफ उसे देखने लगा।फिर वह यकीन के साथ उसे कंधे पर लादा और आगे चल दिया।
थोडा और आगे चलकर उसे तीसरा ठग मिला।उसने भी बकरी को कुत्ता बता कर रमाशंकर के दिमाग को पूरी तरह बदल दिया।......कहते हैं कि झूठ को जोर देकर बार बार कहा जाय तो वह सच लगने लगता है।ऐसा ही कुछ रमाशकर के साथ भी हुआ था।वह सोचने पर विबश हो गया कि यह बकरी नही सचमुच में ही एक कुत्ता है।उसकी ही आँखें धोखा दे दिया ऐसा बिचार मन मे आते ही उसने बकरी को कंधे से उतारा और वही पटक कर अपने घर चला गया।तीनो ठग यही तो चाहते थे।उन सब ने बकरी ले जाकर किसी दूसरे गाँव मे बेच लिया।........कलिक टेच मनी.काम...रमेश कुमार
रविवार, 2 जुलाई 2017
🎂..................मेहनत हमारा साथी है....................🎂
मेहनत हमारे शरीर को ही मजबूत नही बनाता और हमारे दिमाग को मन को भी मजबूत बनाता है। हम समय नुसार काम करते करते इतने ठोस हो जाते हैं कि बडी से बडी कठिनाइयाँ भी छोटी और फूल की तरह मालूम पडने लगती हैं।अपने जीवन मे जिन जिन लोगों ने काम किया है,,,, मेहनत ऐसे लोगो का मित्र रहा है।इसलिए मेहनत मे भला घबराना कैसा।,,,,,,,,,,
मेहनत हमारे शरीर को ही मजबूत नही बनाता और हमारे दिमाग को मन को भी मजबूत बनाता है। हम समय नुसार काम करते करते इतने ठोस हो जाते हैं कि बडी से बडी कठिनाइयाँ भी छोटी और फूल की तरह मालूम पडने लगती हैं।अपने जीवन मे जिन जिन लोगों ने काम किया है,,,, मेहनत ऐसे लोगो का मित्र रहा है।इसलिए मेहनत मे भला घबराना कैसा।,,,,,,,,,,
💐.....मेहनत करने का मतलव होता है, शरीर ,दिमाग, और मन को कसरत करना। जो यह कसरत नही करते हैं वह कमजोर पड जाते हैं,चाहे वह कितने ही बडे आदमी हो।
💐....लोगो को लगता है कि मेहनत मे दू ख होता है,जबकि सच यह है कि मेहनत न होने पर दु:ख होता है।
🎂.....दुनिया मे शायद ही आप ने किसी आदमी को देखा जिसने मेहनत न किया हो।🎂......सच तो यह है कि जितना बडा काम होता है सफलता भी उतनी ही बडी मिलती है।
🎂........आप एक बार मेहनत से डरना छोडिए,और फिर देखिए कि जिंदगी के मायने किस तरह से बदल जाती है।........किलिक टेच मनी.काम..सी ओ..फाउंडर...रमेश कुमार
🎂,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,खुद को बनाए बास,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,🎂
आज जमाना बास का है।हर क्षेत्र मे अपनी पृतिभा दिखाने वालो को सफलता अपेक्षा कृत बहुत हाली मिलता है।लेकिन आज हर युवा किसी क्षेत्र विशेष तक ही न सीमित रहे। और जरूरत पडने पर वह अपने बिभाग ,आफिस आदि मे संबंधित कोई भी काम कभी भी कर सके और आफिस मे किसी के न आने पर उ सका असर न पडे।,,,,,,,,,इस तरह की सोच आज आने वाले लोगों को जरूरी है।चाहे वह युवा हो या किसी सरकारी निजी या एम एन सी का कोई भी कमँचारी। छात्र को खुद को इस शेप मे ढालना कही आसान है ।उसे अपनी बिशेषक्षता वाला क्षेत्र चुनने और उनमे आगे बढने के साथ साथ समय की माग को देखते हुए क्षेत्रो की पहचान भी कर लेनी चाहिए। किसी भी तरह के काम को करने मे सकोच नही होना होना चाहिए।आप को जो काम दिया जाय उसे पूरी लगन के साथ करे। इसके अलावा अपने आँख कान खुले रखते हुऐ कामन सेंस के साथ और काम गतिबिधी पर नजर रखे।अपनी क्षमता का पृदशँन इस तरह करे कग आप अपनी जगह बनाऐ रखे।हमेशा पाजिटिब सोचे,
. .. कि लिक टेच मनी.काम......सी ओ ..फाउंडर...रमेश कुमार
आज जमाना बास का है।हर क्षेत्र मे अपनी पृतिभा दिखाने वालो को सफलता अपेक्षा कृत बहुत हाली मिलता है।लेकिन आज हर युवा किसी क्षेत्र विशेष तक ही न सीमित रहे। और जरूरत पडने पर वह अपने बिभाग ,आफिस आदि मे संबंधित कोई भी काम कभी भी कर सके और आफिस मे किसी के न आने पर उ सका असर न पडे।,,,,,,,,,इस तरह की सोच आज आने वाले लोगों को जरूरी है।चाहे वह युवा हो या किसी सरकारी निजी या एम एन सी का कोई भी कमँचारी। छात्र को खुद को इस शेप मे ढालना कही आसान है ।उसे अपनी बिशेषक्षता वाला क्षेत्र चुनने और उनमे आगे बढने के साथ साथ समय की माग को देखते हुए क्षेत्रो की पहचान भी कर लेनी चाहिए। किसी भी तरह के काम को करने मे सकोच नही होना होना चाहिए।आप को जो काम दिया जाय उसे पूरी लगन के साथ करे। इसके अलावा अपने आँख कान खुले रखते हुऐ कामन सेंस के साथ और काम गतिबिधी पर नजर रखे।अपनी क्षमता का पृदशँन इस तरह करे कग आप अपनी जगह बनाऐ रखे।हमेशा पाजिटिब सोचे,
. .. कि लिक टेच मनी.काम......सी ओ ..फाउंडर...रमेश कुमार
🎂...........आगे बढते चले.........🎂
मनी और रीमा दोनो साथ साथ पडते थे।कालेज मे मनी बढं चढं कर आयोजित होने वाले पृतियोगिता मे भाग लेती थी ।जब उसने रीमासे कहा कि तुम भी इसमे भाग लो तो उसने सीधा मना कर दिया नही यह मेरे बस की बात नही है। मनी को रीमा की बात सुनकर बेहद दु:ख हुआ।........समाज मे रीमा जैसे बहुत से किशोरियो व युवा जो आगे आने से घबडाते है व भाग नही लेते वह कलास मे हमेशा पीछे की सीट पर बैठना पसंद करते हैं।आप की सीमित दुनिया मे रहते हैं। लेकिन इस तरह उनका विकास नही हो पाता है। फलत: सफलता तो उनसे दूर रहती ही है। खुद को रीमा जैसी को अपने बारे मे सोचना चहिए।लोगो से मुह चुरा कर ,आगे आने और पहल करने से बचकर उनको कौन सी चीज हासिल हो रही है।इसके बिपरीत भाग लेने मे लोगो से मिलने जुलने और पहल करने मे झिझक नही होती वे कही आगे सफल और आगे बढ़ते हैं।
मनी और रीमा दोनो साथ साथ पडते थे।कालेज मे मनी बढं चढं कर आयोजित होने वाले पृतियोगिता मे भाग लेती थी ।जब उसने रीमासे कहा कि तुम भी इसमे भाग लो तो उसने सीधा मना कर दिया नही यह मेरे बस की बात नही है। मनी को रीमा की बात सुनकर बेहद दु:ख हुआ।........समाज मे रीमा जैसे बहुत से किशोरियो व युवा जो आगे आने से घबडाते है व भाग नही लेते वह कलास मे हमेशा पीछे की सीट पर बैठना पसंद करते हैं।आप की सीमित दुनिया मे रहते हैं। लेकिन इस तरह उनका विकास नही हो पाता है। फलत: सफलता तो उनसे दूर रहती ही है। खुद को रीमा जैसी को अपने बारे मे सोचना चहिए।लोगो से मुह चुरा कर ,आगे आने और पहल करने से बचकर उनको कौन सी चीज हासिल हो रही है।इसके बिपरीत भाग लेने मे लोगो से मिलने जुलने और पहल करने मे झिझक नही होती वे कही आगे सफल और आगे बढ़ते हैं।
पहले से ही खुद को अक्षम मान लेना सही नही है। अगर इस बात से चिंतित रहते हैं कि लोग आप की पहल पर आप के बारे मे कौन सी बाते करते हैं।तो आप शायद ही सफल हो पाए।अलोचना सही लोग और सही काम की भी होती है। कोई रातो रात शिखर पर नही पहुच जाता हैं।
इसके लिए कठिन त्रम के साथ काम करते हुए संकलप के साथ आने वाली हर परेसानी को पार पाना होता है। हर किसी को कभी न कभी जीवन मे असफलता का सामना करना पडता है।...लेकिन सही दिशा मे पूरी ईमान दारी से काम करने से सफलता मिलती है।अधिकतर युवा य लोग अपने अंदर छिपी क्षमता को पहचान नही पाते और अगर पहचान भी ले तो इसे बाहर लाने की कोशिश नही करते हैं """""""""""अपनी क्षमताओं को बाहर लाने ,और उनका विकास करने का सारा त्रेय खुद का है।"""""""''यही सफलता का मूल मंत्र है ,,,,,,,,,,,,,,,,किलिक टेच मनी काम,,,,,,,,,,,,,सी ओ .....फाउंडर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,रमेश कुमार
💐........सुभाष चंद बोस.......💐 कुछ समय पहले भारत अगे्जो के अधीन था। देश मे जगह जगह उनके शाशन का विरोध हो रहा था। भारत को आजाद कराने के लिए अनेक लोगो ने अपना जीवन बलिदान कर दिया।सुभाष चंद बोस उनमे से एक थे।.....सुभाष चंद बोस का जंम कटक मे 23 जनवरी 1897 को हुआ। यह जगह अब उडीसा शहर मे है। उनके पिता सरकारी वकील थे। पाँच वषृँ मे उनकी शिक्षा शुरू हुई।हमेशा कक्षा मे 1फसट.आते थे।बीए परीक्षा पास करने के बाद वे इगंलैंड जाकर आइ.सी.एस की परीक्षा पास कर ली।सरकारी नौकरी के लिए यह उस समय सबसे बडी परीक्षा थी।भारत लौटने पर यह तय किया कि हम नौकरी नही करेगे।गुलाम भारत को आजाद कराने का निणँय लिया।उस समय देश को आजाद कराने के लिए आनंदोलन चल रहा था।..........सन् 1938 मे भारतीय कागेँस का मुखिया चुना गया।सन् 1939 मे अपना पद छोड कर फारवडँ बलाक नामक दल समूह का गठन किया।...........सुभाष चंद बोस ने सोचा कि देश को आजाद कराने के लिए देश से बाहर जाकर कुछ करना होगा।......काबुल पठान के वेश मे पुलिस से बचने ते हुए वे अफगानिसतान पहुँचे। वहाँ से जमँन और फिर जापान गये।जापान से वमाँऔ आए और वही पर भारतीय सैनिक के सहयोग से ,...आजाद हिंद फौज..... का गठन किया।और ...देलही....च लो का नारा दिया।और जवानो से कहा ......तुम मुझे खून दो, मै तुमको आजादी दूगा........। देश वासी उनको ..नेता जी....कह कर पुकारते है .......................किलिक टेच मनी.काम......को ...फाउंडर.....रमेश कुमार
शनिवार, 1 जुलाई 2017
👍...........किशोर अपराध का कारण........👍 किशोरो के अपराध का कारण गरीबी भभी है।
इसके लिए बडे पैमाने परसमाजिक सुधार की जरूरत है।
इसके साथ ही समाज मे समानता का भाव आना भी जरूरी है।
अगर मासूम को बढिया शिक्षा मिले,बढिया क्षान,और बेहतर माहौल मिले तोइससे उनके मनो बढेगल बढेगा।और उनको बढिया दिशा मे मोडा जा सकता है। दर असल गरीबी भूख और भटकाव के कारण माशूमगलत लोगो के हाथो मे फस जाते है।ऐसे माहौल मे। माशूमो को तलीम मे समानता जरूरी है
👍........विकास का पैमाना........👍....जनसुविधांए बेहतर हो और आम नागरिक का जीवन सुखमय हो। हमारे यहाँ शिक्षा,सचार, और बिमारी के साधन आम नगगरिक तक किस तरह से पहुँचाया जाय। और आने वाले समय मे किस तरह उनको मिल सके।साक्षार होने का मतलव हमने महज अक्षर क्षान से लगा लिया है।महानगरो मे रेल की पटरियो पर शौच करती एक बडी आबादी को पहले शौचालय तक नहीं पहुँचाना चाहिए? हमारे देश मे जनसँखया का जोतेजी से शहरो मे समाता जा रहाहै।उनको नियंत्रित करने या समाहित कर लेने की क्षमता हमारे नियोजन मे है।हमारे जीवन के संसाधन समिटते जा रहे हैं। हवा पानी और अनाज बिशैले होते जा रहे हैं।इस दिशा मे सोचना ही समाज निमा्ँण की पहली सीडी होगी........किलिक टेच मनी.काम...........को फाउंडर.........रमेश कुमार
👍*******सीमा पर वीर जवान*******👍 "उन दिनो ठंड का मौसम था। करीब छ: हजार फिट ऊची रेजंगला की पहाडी भी उस ठंड से मानो काप रही थी। इस भंयानक ठंड मे भी "मेजर कुलदीप सिंह "अपनी कंपनी के साथ देश की शीमा के रक्षा के लिए डटे हुए थे । 18नवंबर 1962 को चीन की सेना ने अपने भारी सैनिको के साथ इस चौकी पर हमला कर दिया। चीनी सैनिको के पास भारी बडी तोपे थी। वे गोले बरसाते हुए आगे बढ़ने लगे। "मेजर कुलदीप सिह "नेअपनी कंपनी के साथ बहादुरी के साथ मुकाबला किया। अपनी कंपनी का मोचा्ँ कमजोर होने नही दि
या।"मेजर कुलदीप सिहं का शरीर छलनी हो चुका था। बाहे बुरी तरह घायल हो चुकी थी।लेकिन मेजर कुलदीप सिह ने शत्रु सेना को भारी नुकसान पहुचाया।सैकडो चीनी सैनिक हताहत हुऐ।घायल होने के वजूद भी वह डटे रहे और हटने का नाम नही लिया।उनके साथियो ने बार बार कोशिश की मगर वह डटे रहे और शत्रु से लडते हुए अपनी अंतिम सासो को तोड दिया।
"मेजर कुलदीप सिह "की पे्ँरणा पाकर उनका एक एक जवान अंतिम
सांस तक लडता रहा।
कुमाऊँ रेजिमेंट के वीर जवान मेजर कुलदीप सिह को इस अटूट साहस के लिए मरणोपरांत परमवीर चकृ पृदान किया गया।।...।।ऐसे वीर जवानो को शत् शत् बार नमन।...किलिक टेच मनी काम....फाउंडर
या।"मेजर कुलदीप सिहं का शरीर छलनी हो चुका था। बाहे बुरी तरह घायल हो चुकी थी।लेकिन मेजर कुलदीप सिह ने शत्रु सेना को भारी नुकसान पहुचाया।सैकडो चीनी सैनिक हताहत हुऐ।घायल होने के वजूद भी वह डटे रहे और हटने का नाम नही लिया।उनके साथियो ने बार बार कोशिश की मगर वह डटे रहे और शत्रु से लडते हुए अपनी अंतिम सासो को तोड दिया।
"मेजर कुलदीप सिह "की पे्ँरणा पाकर उनका एक एक जवान अंतिम
सांस तक लडता रहा।
कुमाऊँ रेजिमेंट के वीर जवान मेजर कुलदीप सिह को इस अटूट साहस के लिए मरणोपरांत परमवीर चकृ पृदान किया गया।।...।।ऐसे वीर जवानो को शत् शत् बार नमन।...किलिक टेच मनी काम....फाउंडर
💐******कोई शक है******💐 "एक आदमी बाजार मे तोता बेच रहा था।तोता बेचने वाला ,जोर-जोर से बोल रहा था, तोता लेलो, तोता ले लो,।बहुत समझ दार तोता है,आप से बात भी कर सकता है,।एक सेठ उधर से जा रहा था,।उसने देखा और तोते से पूछा ,-बोलो तुम बात भी कर सकते हो,।तोता--कोई शक है,। सेठ खुश हुआ और तोते को यर ले गया,। एक दिन सेठ ने तोते से पूछा,----मै सही सेठ हू,। तोता----कोई शक है,। सेठ---मेरे गृहक मुझसे खुश है,। तोता---कोई शक है,। सेठ----मेरा कोई शत्रु भी है,।। तोता---कोई शक है,। सेठ---तुम उसे जानते हो,। तोता---कोई शक है,।। सेठ---नाम बताओ गे,। तोता----कोई शक है,। सेठ---बताओ न,।। तोता--कोई शक है,। सेठ---बताओ भी,।। तोता----कोई शक है,।। सेठ---एक ही रट लगा रखे हो,। तोता----कोई शक है,।। सेठ----बेवकूफ हो तुम,।। तोता---कोई शक है,। सेठ -----मै ही बेवकूफ था,जो तुमको खरीद कर घर ले आया,।। तोता---कोई शक है,। ...........फाउंडर....किलिक टेच मनी.काम...............
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मां अपने तोतले बेटे से कहा। बेटा आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत । वर्ना वह लोग भी मना कर देंगे। बेटा...
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