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मंगलवार, 27 जून 2017

👍-अगर घर भी चलते होते👍.......अगर घर भी चलते होते,,।कितने मजे हमारे होते,,।।...बाध मै घर को रसी से,,चाहे जहां घर को ले जाते,,।।जहां कही भी लगती धूप,,घर मे छट से हम छिप जाते,,।।भूख सताती अगर अचानक,,घर के अंदर खाना बनाते खाते,,।।आता पानी ,लगे बरसने,,झट उसके अंदर हो जाते,,।।.....किलिक टेच मनी...फाउंडर...सी ई ओ....     ...........................................................................................................................................💐लोमडी ओर चीटे की दौड्💐.......-लोमडी और चीटे दोनो साथी थे।दोनो ने मिलकर गेहूं बोया।लोमडी हर रोज पेट दरद का बहाना करती और काम से बच जाती।चीटा अकेले सुबह से शाम तक मेहनत करता रहता था।.....जब गेहू पक कर तैयार हुआ तब लोमडी ने सोचा,,...यदि हम पूरा का पूरा गेहू मै रख लू,.....उसने चीटे से कहा ,...गेहू का बटवारा कर ले।....चीटा बोला ,....फिर आगे कय होगा।....लोमडी बोली,.....हम दोनो यहां से दौड लगाते है,,...जो पहले खलिहान पहुचे गा ,,...वह पूरा गेहू ले जाएगा।चीटा तैयार हो गया,,..लोमडी बोली ,,,,एक..दो....तीन..फिर वह पूरा जोर लगा कर दौडी।चीटा चालाक था वह झट से लोमडी के दुम मे चिपक गया।.....लोमडी को पता नहीं चला।....खलिहान मे पहुच कर लोमडी ने ,अपनी दुम जोर से हिलायी।....चीटा झिटक कर ,..गेहू के ढेर पर जा गिरा।....चीटा ,जोर से बोला,,...लोमडी तुम कहां ,रह गई थी।...मै कब का यहां ,...आ गया।...लोमडी चुप रह गयी।....चीटा सारा गेहू ले गया।............।...किलिक टेच मनी...सी ई ओ...फाउंडर....आर.के..........।।............।।।।।।।।।।।।।।।।।।....................................................ःःःःः🎂::-बढिया आदत🎂::-.......उठो सुबह तुम कभी न रोओ..।हाथ आंख ,मुह, पहले थोओ.।।शौच,कृया से आकर ,रंजन.।करो दातंमे सुंदर मंजन.।।जीभ नाक कीकरो सफाई.।...पैरो की भी करो धुलाई.।...मल कर बदन करो नहाओ.।खेलो कूदो कुछ तो पाओ.।।।ः.....किलिक टच मनी..सी ई ओ ...फाउंडर...आर.के....................।......................।....................।................।.............।.................

4 टिप्‍पणियां:

Lava Mobile Display ने कहा…

बाढ मे ंफसी सीमा::-रात का समय था।सीमा घर मे अकेली थी ।उसके माता पिता सामान लेने बाजार गये थे।अचानक शोर सुन कर सीमा उठी ।ंगाव मे शोर मचा हुआ था,भागो...भागो बचाओ...बचाओ,गाव मे बाढ आ गयी है।सीमा ने दरवाजा खोला।बाहर बरामदे मेतेजी से पानी बढ रहा था।वह भाग कर घर मे लौटी और घर का सामान ऊंची जगह पर रखने लगी।देखते..देखते पानी घर मे घचसने लगा।थोडी देर में पानी कमर तक आ गया।........सीमा बरामदे मे आईत़ उसे लगा कि वह पानी मे डछब जायेगघ।सामने बास की सीढी रखी थी।..आगन मे सीढी लगा कर वह छत पर चढ गयी।...सीमा रात भर छत पर बैठी रही।सभी को अपनी जान की पडी ।उसकी याद किसे आती।.......सुबह हुई ।सीमा घर के खपरैल पर बैठी चारो ओर देख रही थी।उसके चेहरे पर उदासी थी।पडोस मे एक बहचत बडा मकान था।उसके छत पर बैठे लोगो ने सीमा को देखा।उनको सीमा को बचाने की चिंता हुइ।उन लोगों ने एक मजबूत रंसी सीमा के पास फेंका।उसने रंसी पकड ली।लोगोने रसी के सहारे उसे ऊपर खीच लिया।उसे खाना के लिए भोजन दिया पर वह खाना न खाई।.....उसी दिन बचाव कायँ के लिए दो नाव और ऐक मोटर बोट आई।....एक नाव मे कुल मिलाकर दस लोग बैठे हुए थे।......सीमा भी उसी नाव मे सुरक्षित जगह पर पहुंची।.....उसके पिता भी वहां आ चुके थे।.......सीमा से मिलकर वे बहुत खुश हुए।।।..... रमेश कुमार ...किलिक टेच मनी.काम....सी ई ओ ...फाउंडर

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बनंदर का अखबार:::👍-बनंदर ने अखबार निकाला,,।नाम पू पू रखा निराला,,।.अक्षर उसमे रंग रगीले,,।.हिरन किरन जैसे चमकीले,,।छपे हुए थे बनंदर मामा,,।पहने धारी दार पजामा,,।.पंछी की करतूत छपी थी,,।.बात नही यह छूठ छपी थी,,।ःहो गया पंछी कैसे काला,,।ःबंदर ने अखबार निकाला,,।ःसभी यहां पर थे अपने,,।ः सुंदर सपने थे अपने,,। सी ई ओ ःफाउंडरःःआर.के...................

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👍-लाल गाजर-👍-लाल गाजर लाल गाजर,मै तो तुमको खाउगा,,।"अभी न खाओ ,मै कुछ दिन मे,और अधिक पक जाऊगा,।।लाल गाजर लाल गाजर,मुझको,भूख लगी भारी,।"भूख लगी तो तुम खा लो,यह रखी मूली सारी,।।लाल गाजर लाल गाजर,मुझको तो तुम भाते हो,।तचमको जो अंचछा लगता है,उसको ही खा जाते हो,।।लाल गाजर,लाल गाजर ,ठीक तुमको न खाउगा,।मगर उखाण कर तुमको मै ,अपने घर ले जाऊगा,,।।ः👍सी ई ओ ..फाउंडर किलिक टेच मनी.काम

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श्रगार फूलो का.....दर्पण को देखा तूने जब जब,किया श्रगार फूलो को देखा, जब आई बहार, एक बदनसीब हूँ मैं मुझे नहीं देखा एकबार...1 सूरज की पहली किरणों को देखा, तूने अलसाते हुए,,रातो मे तारो को देखा सपनों में खो जाते हुए,यू किसी न किसी बहाने, तूने देखा सब संसार,, दर्पण को देखा तूने जब जब किया श्रगार......... आर .फाउंडर........

अच्छे इंसान ही ठगे जाते हैं...

 ठगे जाने पर भी, अफ़सोस नहीं होना चाहिये।     क्यों कि  ठगे जाने के लिए, इंसान के भीतर क ई      खूबियां होती हैं। अच्छे दिल, साफ सोच,,   और ...

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