🎂:.........÷सही सोच.......🎂 कूडा इधर उधर न फेको.। सदा थूक दानो मे थूको.।।गाली मत दो ,झूठ न बोलो.। बिना बात के मुह न खोलो.।। रोज शाम को खेलो खेल .। मित्रो से रखो तुम मेल.।।पहले सो कर,पहले जागो.। आलस को तुम पहले भगाओ.।।.......किलिक टेच मनी.काम..............
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गुरुवार, 29 जून 2017
💐......"तीन साथी".......💐एक खेत मे तीन खरगोश रहते थे।....तीनो साथ साथ रहते थे।...अगर पहले खरगोश के सामने ,कोई मुसीबत आती तो ,वह उसे सुलझाने की कोशिश करता।.....किसी की राह नही देखता था।....दूसरा खरगोश भी हुशियार था।...लेकिन वह हडबडा कर कुछ करने मे यकीन नही करता था।....वह सोचता था समय पर जैसा उचित होगा कर लिया जाएगा।....अभी हम परेशान नही होगे।.....तीसरा खरगोश कुछ भी नही सोचता था।....वह यह मानता था कि ,भगवान जो करेगे वही होगा।.....एक दिन उसने कुछ शिकारी को आते हुऐ देखा।....वह आपस मे बात कर रहे थे कि इस खेत मे बहुत बढिया खरगोश है।....इनको पकडना चहिऐ।....पहला खरगोश यह सचनते ही ,दूर दूसरे खेत मे चला गया।....दूसरे ने सोचा पहले शिकारी को आने दो, तब जैसा ठीक समझछ गा कर लछगा।....सुना तीसरे खरगोश ने भी ,लेकिन उसे कोई गम न था।.....और मन ही मन सोचख ,जो होना है वह त़ होगा ही,उसे कौन रोक सकता ।......शिकारी दछसरे दिन जाल लेकर आ पहुंचे।.......पहला खरगोश ,दूसरे खेत मे चला गया था।....दूसरा जाल को देखते ही ऐसे लेट गया जैसे मर गया हो।......शिकारी ने उसे देखा और मरा हुआ समझ कर,एक तरफ फेक दिया।......वह उझला और तेजी से भाग कर ,दूसरे खेत मे चला गया।....तीसरे ने न कुछ सोचा,नकुछ किया।.............वह जाल में फस गया..।..........किलिक टेच मनी.काम....सीईओ....फांउडर......आर.के.......।।।।।..........................................................।।।।।।ः
💐.....आम का पेड़.....💐 ः गांव के किनारे बहुत बडा पुराना आम का पेड था।....जब उस पेड पर पके हुऐ आम लगे हुऐ होते थे,तब वह दूर से देखने मे बहुत ज्यादा अचछा लगता था।......एक बार आमो को मजाक सूझा।....उसने पेड की जड़ को बदसूरत कहा।...उसकी खूब हसी उडाई।...लेकिन जड़ चुप ही रही कुछ भी न बोली।.....बरसात आई।...बादल जोर से गरजे।...बिजली जोर से चमकी।...फिर आम के पेड़ पर आकाश से आग की लपट झपटी।...और बिजली गिरने से ,आम का पेड़ झुलस गया।...एक दम ठूंठ सा हो गया।......बरसात बीती,जाडा गया,और बसंत आया।...फिर हुआ एक चमतकार।...उसी आम के ठूंठ पर कोपले आयी।...शाखाओ पर नये पतते निकले,और वह पेड फिर से हरा भरा हो गया।....फिर कलियां बनी और कलियो से फूल।....जमीन के अंदर सेजड़ ने फूलो से पूछा,कहो भाई फूल ,।...तुम कैसे हो.....फूल समझ गये थे,कि जड़ की सेवा और मेहनत से ही ,पेड फिर से पनपा है।.....इस बार फूलो ने अपना सिर आदर से झुकाया और कहा ,...हमने भूल की थी.....जो तुमारी हंसी उड़यी...हमे क्षमा कर दो.........👍किलिक टेच मनी.काम...सी ई ओ...फांउडर......आर.के
🎂....भलाई की बुराई पर बिजय.....🎂 दूर गांव मे धरम चंद नाम का एक किसान रहता था।वह बडा घमंडी और झगडालू था।गांव वाले भी उससे दूर ही रहते थे।उस गांव मे बीर सिंह नाम का एक किसान आकर बस गया।बीर सिंह मीठा बोलता और सबकी सहायता करता था।..........गांव वालो ने बीर सिंह से कहा तुम धरम चंद से दूर ही रहना ।वह बहुत झगडालू है।.....बीर सिंह ने गांव वालो से कहा ....धरमचंद अगर मुझसे झगडा करेगा हम उसे सही पाठ पडा दूगा।.....धरम चंद को यह बात क्षात हुई,..वह यह बात सुन कर आग बूला हो गया।...एक दिन उसने बीरसिंह के खेत मे अपने बैल छोड दिये।...बीरसिंह ने खेत से बैलो को बाहर कर दिया ,लेकिन वह धरमचंद से कुछ न कहा।...एक बार बीरसिंह के एक मित्र ने धरमचंद के लिए मीठे ..आम..भेजे।...बीर सिंह ने सभी गांव वालो के घर मीठे आम भेज दिए।...धरमचंद ने ..आम..यह कह कर लौटा दिया कि वह भिखारी नही है।...बरसात आई धरमचंद अपना अनाज बैल गाडी पर भरकर शहर चला।....थोडी दूर चल कर एक नाला था ,बैलगाडी उसी मे जाकर फस गयी।...बहुत कुछ करने के बाद भी बैलगाडी कीचड से बाहर न निकली।..कोई भी गांव वाला धरमचंद की सहायता के लिए नही आया।....बीरसिंह को भी यह बात क्षात हुई।..वह तुरंत अपना बैल लेकर नाले पर पहुंचा।...धरमचंद ने कहा ,हमको तुमहारी सहायता नही चहिए।..तचम लौट जाओ।..बीर सिंह ने कहा,म कुछ भी कहो,..हम तुमको रात मे अकेला छोड कर नही जाऊगा।..बीर सिंह ने बैल गाडी मे अपने बैल जोत दिये।..उनके बलवान बैलो ने ,गाडी को खीच कर बाहर निकाला।........धरमचंद का घमंड टूट कर चूर हो गया।...धरमचंद को अपने पर पछतावा हुआ।।.....अब धरमचंद पूरी तरह बदल गया।...👍भलाई की बुराई पर बिजय हुई👍...किलिक टेच मनी....सी ई ओ ...फाउंडर....आर.के................................................................................................
मंगलवार, 27 जून 2017
👍-अगर घर भी चलते होते👍.......अगर घर भी चलते होते,,।कितने मजे हमारे होते,,।।...बाध मै घर को रसी से,,चाहे जहां घर को ले जाते,,।।जहां कही भी लगती धूप,,घर मे छट से हम छिप जाते,,।।भूख सताती अगर अचानक,,घर के अंदर खाना बनाते खाते,,।।आता पानी ,लगे बरसने,,झट उसके अंदर हो जाते,,।।.....किलिक टेच मनी...फाउंडर...सी ई ओ.... ...........................................................................................................................................💐लोमडी ओर चीटे की दौड्💐.......-लोमडी और चीटे दोनो साथी थे।दोनो ने मिलकर गेहूं बोया।लोमडी हर रोज पेट दरद का बहाना करती और काम से बच जाती।चीटा अकेले सुबह से शाम तक मेहनत करता रहता था।.....जब गेहू पक कर तैयार हुआ तब लोमडी ने सोचा,,...यदि हम पूरा का पूरा गेहू मै रख लू,.....उसने चीटे से कहा ,...गेहू का बटवारा कर ले।....चीटा बोला ,....फिर आगे कय होगा।....लोमडी बोली,.....हम दोनो यहां से दौड लगाते है,,...जो पहले खलिहान पहुचे गा ,,...वह पूरा गेहू ले जाएगा।चीटा तैयार हो गया,,..लोमडी बोली ,,,,एक..दो....तीन..फिर वह पूरा जोर लगा कर दौडी।चीटा चालाक था वह झट से लोमडी के दुम मे चिपक गया।.....लोमडी को पता नहीं चला।....खलिहान मे पहुच कर लोमडी ने ,अपनी दुम जोर से हिलायी।....चीटा झिटक कर ,..गेहू के ढेर पर जा गिरा।....चीटा ,जोर से बोला,,...लोमडी तुम कहां ,रह गई थी।...मै कब का यहां ,...आ गया।...लोमडी चुप रह गयी।....चीटा सारा गेहू ले गया।............।...किलिक टेच मनी...सी ई ओ...फाउंडर....आर.के..........।।............।।।।।।।।।।।।।।।।।।....................................................ःःःःः🎂::-बढिया आदत🎂::-.......उठो सुबह तुम कभी न रोओ..।हाथ आंख ,मुह, पहले थोओ.।।शौच,कृया से आकर ,रंजन.।करो दातंमे सुंदर मंजन.।।जीभ नाक कीकरो सफाई.।...पैरो की भी करो धुलाई.।...मल कर बदन करो नहाओ.।खेलो कूदो कुछ तो पाओ.।।।ः.....किलिक टच मनी..सी ई ओ ...फाउंडर...आर.के....................।......................।....................।................।.............।.................
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