एक गांव में नंदराम नाम के किसान रहता था !
उसके दो बेटा और एक बेटी थी !
किसान ने अपने मेहनत के बल पर,
तीनों बच्चों को खूब अच्छी शिक्षा दी !
और आगे चलकर तीनों बच्चों को,
नौकरी मिल गई !
किसान बहुत खुश था कि हमारे तीनों बच्चों को नौकरी मिल गई !
उसने खुशी-खुशी तीनों बच्चों की शादी कर दी !
दोनों बेटे बाहर नौकरी करने चले गए !
बेटी की भी शादी करती होगी अपने घर चली गई !
किसान बूढ़ा हो चला था !
एक दिन किसान ने सोचा...
क्यों ना अपने बच्चों की परीक्षा ली जाए !
किसान ने रुपए से भरा बैग,
अपने कंधे पर रखकर,,
अपने बच्चों से मिलने घर से निकल पड़ा !
किसान पहले अपने बड़े बेटे के पास गया,
और बोल बेटा हमारे घुटनों में दर्द हो रहा है,,
हमें इलाज के लिए कुछ पैसे चाहिए !
बड़े बेटे इनकार कर दिया पापा हमारे पास पैसे नहीं है !
और फिर किस दूसरे बेटे के पास गया.....
और बोल बेटा हमारे घुटनों में दर्द हो रहा है,
इलाज के लिए पैसे चाहिए !
छोटे बेटे ने मन कर दिया कि पापा मेरे पास पैसे नहीं है !
और अंत में किसान अपनी बेटी के घर जाता है ,,
और कहता है बेटा हमारे घुटनों में दर्द हो रहा है इलाज के लिए पैसे चाहिए,,
तब बेटी ने कहा...
क्यों नहीं पापा हमारे पास पैसे हैं हम आपका इलाज कराओगी
आपने हमें पढ़ा लिखा है इतना बड़ा किया ,
कि आज हम अपने पैरों पर खड़े हुए हैं !
पापा बिल्कुल परेशान मत हो आप यही रखो यही से आपका इलाज होगा !
तब किसान बोला....
बेटा हम कुछ लेने नहीं कुछ देने आए हैं !
रुपए से भरा बैग अपनी बेटी को देते हुए कहा...
बेटा हम दोनों बेटों के पास गए थे उन्होंने मुझे मना कर दिया !
मैं देखना चाहता था हमारे तीनों बच्चों में कौन सबसे अच्छा लड़का है, तीनों बच्चों में सबसे अच्छी तुम ही हो बेटा
!
इसलिए इस रुपए पर सिर्फ तुम्हारा हक है !
इसीलिए कहा गया है....
बेटा तब तक बेटा रहता है जब तक उसकी शादी नहीं होती..
लेकिन बेटी जिंदगी भर बेटी रहती है !
बेटी हमेशा अपने पापा के सुख और दुख में हमेशा साथ खड़ी होती है.......