लकड़हारे ने साधु महात्मा से बोला महाराज हम बहुत गरीब हैं। हमारे पास आप सभी को खिलाने का पर्याप्त भोजन नहीं हो पाएगा। आप बताओ हमें क्या करना चाहिए, साधुओ ने कहा ठीक हैं, आपके के पास हम सभी को खिलाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं हैं तो कोई बात नहीं, हम चारों में से कोई एक आज आपके घर पर भोजन करेगा। लेकिन ध्यान रहें, हम चारों में से जिसे आप अपने घर पर आमंत्रित करोगे वह अपने नाम जैसा प्रभाव लेकर आपके घर में आएगा। आप हमें बताओ सबसे पहले किसको आमंत्रित करना चाहते हो।
लकड़हारा चिंता में पड़ गया और सोचने लगा पहले किसको आमंत्रित करें? क्योंकि धन, वैभव, सफलता और श्रम चारों ही हर किसी के लिए जरूरी होता हैं। लकड़हारा कुछ समय के लिए अपने घर में गया और अपने पत्नी से पूछा, दोनों ने आपस में कुछ देर विचार विमर्श करने के बाद निश्चय किया कि जिसकी वजह से हमारा घर चलता हैं, उस साधु को हमें पहले बुलाना चाहिए।
फिर लकड़हारा अपने घर से बाहर आया और सबसे पहले श्रम आमंत्रित किया। जैसे ही श्रम ने घर के अंदर अपने कदम रखे, बाकी के तीनों साधु धन, वैभव, और सफलता भी अंदर आने लगे। यह सब देख, लकड़हारे ने साधुओं से पूँछ कि महाराज मै कुछ समझा नहीं, अभी तो आपने कहा था कि कोई एक भोजन के लिए आएगा। फिर तीनों साधुओं ने लकड़हारे को समझाया कि जिस घर में श्रम रहता हैं, जिस घर में मेहनत और लगन होती हैं। वहाँ पर हम तीनों धन, वैभव और सफलता अपने आप आ जाते हैं।
नैतिक शिक्षा: श्रम के द्वारा आप धन, वैभव और सफलता के अलावा और बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं। इसलिए, हमें श्रम, मेहनत से पीछे नहीं भागना चाहिए।

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें