www.clicktechmoney.com

गुरुवार, 31 जुलाई 2025

एक राजकुमार की कहानी

 एक रात, राजकुमार मजनूं के अपने पिता के देश आने से कुछ समय पहले, जब वह सो रही थी, खुदा ने उसके पास एक पुरुष के रूप में एक दूत भेजा जिसने उसे बताया कि उसे राजकुमार मजनूं से ही शादी करनी चाहिए, किसी और से नहीं, और यह खुदा का उसके लिए आदेश था।

जब लैली जागी तो उसने अपने पिता को निर्देश दिया कि वह सोते समय उसके पास जाए; हालाँकि उसके पिता ने उसकी कहानी में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई ।

उस समय से वह बार-बार कहने लगी, "मजनूं, मजनूं; मुझे मजनूं चाहिए" और इसके अलावा कुछ नहीं बोली।

यहाँ तक कि जब वह बैठकर खाना खाती थी, तब भी वह कहती थी, "मजनूँ, मजनूँ; मुझे मजनूँ की ज़रूरत है।" उसके पिता उससे बहुत चिढ़ते थे।

लैली ने कहा, "वह वह व्यक्ति है जिससे मुझे शादी करनी है।"

इस बीच, मजनूं और हुसैन महामत फलाना राज्य में खोज करने आए; और जब वे गाड़ी चला रहे थे, लैली हवा का आनंद लेने के लिए अपने घोड़े पर सवार होकर उनके पीछे सवार हो गई।

वह लगातार कहती रही, "मजनूं, मजनूं; मुझे मजनूं चाहिए।" राजकुमार ने उसकी बात सुनी और उसके पास गया।

इस पर लैली ने उसकी ओर देखा, और उसे देखते ही वह उससे प्रेम करने लगी, और उसने मन ही मन कहा, "मुझे यकीन है कि यही वह राजकुमार मजनूं है जिससे खुदा ने कहा है कि मुझे विवाह करना है।" और वह अपने पिता के घर गई और बोली, "पिताजी, मैं आपके देश में आए राजकुमार से विवाह करना चाहती हूँ; क्योंकि मैं जानती हूँ कि यही वह राजकुमार मजनूं है जिससे मुझे विवाह करना है।"

जैसा कि हुआ, राजकुमार ने उसी रात फलाना देश छोड़ दिया, और जब लैली को पता चला कि वह चला गया है, तो वह बहुत गुस्से में आ गई।

वह अपने पिता, या अपनी माँ, या अपने नौकरों द्वारा कही गई एक भी बात नहीं सुन सकती थी, बल्कि जंगल में चली गई, और जंगल से जंगल भटकती रही, जब तक कि वह अपने देश से दूर और दूर नहीं चली गई।

वह कहती रही, "मजनूं, मजनूं; मुझे मजनूं चाहिए;" और इस तरह वह लगभग बारह वर्षों तक भटकती रही।

बारह वर्ष बीतने पर उसकी मुलाक़ात एक फ़क़ीर से हुई - वह वास्तव में एक फ़रिश्ता था, लेकिन वह यह नहीं जानती थी - जिसने उससे पूछा, "तुम बार-बार 'मजनूं, मजनूं' क्यों कहती हो; मुझे मजनूं चाहिए?" उसने उत्तर दिया, "मैं फ़लाना राज्य के राजा की बेटी हूँ, और मैं राजकुमार मजनूं को ढूँढ़ना चाहती हूँ; मुझे बताओ कि उसका देश कहाँ है।"

"मुझे लगता है कि तुम वहाँ कभी नहीं पहुँच पाओगे," फ़कीर ने कहा, "क्योंकि यहाँ से यह बहुत दूर है, और वहाँ पहुँचने के लिए तुम्हें कई नदियाँ पार करनी होंगी।" लेकिन लैली ने कहा कि उसे अब कोई परवाह नहीं है; उसे राजकुमार मजनूं से मिलना था।

“अब, जब आप भागीरथी नदी पर आएंगे, तो आपको एक बड़ी मछली, लोहू दिखाई देगी।”

वह बार-बार आगे बढ़ती रही और अंततः भागीरथी नदी तक पहुंच गई।

वहाँ एक बड़ी मछली थी जिसे रोफिश कहा जाता था।

वह हमेशा कहती थी, "मजुनुन, मजुनुन!" रौफ़ मछली इससे बहुत परेशान हो जाती थी और पूरी ताकत से नदी में तैरने लगती थी।

धीरे-धीरे वह थक गया और उसकी गति धीमी हो गई, तभी एक कौआ आया और उसकी पीठ पर बैठ गया और बोला, "काटो, कौए।" "ओह, मिस्टर कौए," बेचारी मछली बोली।

"अच्छा," कौवे ने कहा। लोमड़ी ने अपना मुँह खोला और कौवा उड़ गया, लेकिन कौवा तुरंत वापस आ गया।

"मेरे पेट में रक्षा है," कौआ बोला और उड़ गया। बेचारे रॉफ़ को इस खबर से कोई तसल्ली नहीं हुई और वह बार-बार तैरता रहा, जब तक कि वह शहज़ादे मजनूं के इलाके में नहीं पहुँच गया।

तभी एक सियार पानी पीने के लिए नदी पर आया।

"अरे सियार," लोहू बोला। "बता मेरे अंदर क्या है?"

"मैं क्या कहूँ?" सियार ने कहा।

"जब तक तुम अंदर नहीं जाओगे, तुम इसे देख नहीं पाओगे।" इसलिए रसेत्सु ने अपना मुँह पूरा खोला। तभी सियार उसके गले में कूद पड़ा। लेकिन वह बहुत डरा हुआ लग रहा था और बहुत तेज़ी से उठा और बोला, "तुम्हारे पेट में एक राक्षस है। मैं हूँ।" और वह भाग गया।

सियार के पीछे एक बड़ा साँप आया। मछली बोली, "ओह, बताओ मेरे पेट में क्या है?"

सोमवार, 28 जुलाई 2025

चतुर बंदर और मगरमच्छ की कहानी


 चतुराई ताकत को मात दे सकती है। एक चतुर बंदर और मगरमच्छ दोस्त बन गए। एक दिन, मगरमच्छ की पत्नी ने बंदर का दिल खाने की माँग की। मगरमच्छ ने बंदर को अपनी पीठ पर सवार होने के लिए आमंत्रित किया, उसे डुबोने की योजना बनाई। लेकिन चतुर बंदर ने मगरमच्छ को यह कहकर चकमा दिया कि उसने अपना दिल एक पेड़ पर छोड़ दिया है, और भाग निकला। यह कहानी सिखाती है कि बुद्धिमत्ता अक्सर पाशविक शक्ति पर विजय पा लेती है।

रविवार, 27 जुलाई 2025

एक शेर की कहानी


 प्यार हमें ख़तरे के प्रति अंधा बना सकता है। एक शेर को एक लकड़हारे की बेटी से प्यार हो गया। डरे हुए लकड़हारे ने शेर से कहा कि वह अपनी सुरक्षा के लिए अपने पंजे और दाँत निकाल दे। शेर ने ऐसा ही किया, लेकिन लकड़हारे ने उसे भगा दिया। शेर ने सीखा कि प्यार हमें कभी भी वास्तविकता के प्रति अंधा नहीं बनाना चाहिए।

राजा मिडास की कहानी


 लालच दुःख की ओर ले जाता है। राजा मिडास की एक इच्छा पूरी हुई थी, और वह चाहता था कि वह जिस चीज़ को भी छुए वह सोने में बदल जाए। पहले तो वह बहुत खुश हुआ, लेकिन जब उसने गलती से अपना खाना और यहाँ तक कि अपनी बेटी को भी सोने में बदल दिया, तो उसे एहसास हुआ कि उसके लालच की उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी। शिक्षाओं से भरपूर यह छोटी सी अंग्रेजी कहानी लालच के खतरों को दर्शाती है।

शुक्रवार, 25 जुलाई 2025

एक गुलाम व्यक्ति की कहानी

5

 शेर ने चुकाया एहसान Small Story 

 
एक गुलाम व्यक्ति था। उसका मालिक बहुत ही निर्दयी था। इसलिए गुलाम जंगल में भाग गया। वहां उसने एक शेर देखा। शेर को दर्द हो रहा था। उसके पंजे में एक कांटा फंसा हुआ था। गुलाम व्यक्ति शेर के पास गया और उसका कांटा निकाल लिया। अब शेर का दर्द कम हो गया। 
 
एक दिन गुलाम को उसके मालिक ने पकड़ लिया। उसका मालिक उसे भूखे शेर का सामना करने का आदेश देता है। गुलाम समझ चुका था कि उसकी मृत्यु निश्चित है।  लेकिन क्या आश्चर्य हुआ, जब शेर दहाड़ता हुआ आया लेकिन उसने गुलाम को नहीं बल्कि उसके मालिक को मार डाला। यह वही शेर था जिसकी गुलाम ने जान बचाई थी। 

बुधवार, 23 जुलाई 2025

कुम्हार का गुस्सा एक कहानी

 किसी गाँव में एक कुम्हार और उसकी पत्नी रहते थे। कुम्हार अपना घर चलाने के लिए मिट्टी के बर्तन बनाता और बेचता था। जिससे उसके परिवार का जीवन यापन होता था। कुम्हार बहुत ही नेक, शांत और सहनशील इंसान था। जबकि, कुम्हार की पत्नी बहुत गुस्सैल थी। उसे हर किसी बात में गुस्सा आ जाता था। वह समझ नहीं पाती थी की उसे इतना गुस्सा क्यों आता हैं। बाद में उसे महसूस होता था कि उसने अपना कितना नुकसान कर लिया हैं। कितने लोगों से अपने रिश्ते खराब कर लिए हैं।

उसकी इस आदत को कुम्हार बहुत अच्छे से जनता था। एक बार कुम्हार घड़ा बना रहा था, तभी कुम्हार की पत्नी,अपने पति से बोली,”देखो मुझे हर बात-बात में गुस्सा आ जाता हैं”। जिसे आप समझ जाते हो, लेकिन कोई और नहीं समझ सकता कि यह मेरी बीमारी हैं। यही वजह हैं कि आज मेरी पड़ोस की औरत से झगड़ा हो गया। आप ही कुछ करो। मेरे इस गुस्से का इलाज कराओ।

अगली सुबह कुम्हार अपनी पत्नी को एक बहुत ही प्रसिद्ध वैद के पास लेकर गया। वैद ने कुम्हार की पत्नी की बातें बहुत ध्यान से सुनी। उसकी बातों को सुनकर वैद कुछ देर शांत होकर बैठ गया और सोचने लगा। तभी कुम्हार की पत्नी ने वैद से पूँछ,”क्या यह मेरी बीमारी ठीक नहीं हो सकती”? आप कुछ बोल क्यों नहीं रहे हो। वैद ने बोला ठीक इसी प्रकार की बीमारी मुझे भी थी। जिसकी दवा मैं कही से लाया था।

मैं उसी दवा के बारें में सोच रहा था कि वह दवा कहां रखी हैं। फिर वैद उठकर अपने घर में जाता हैं और कुछ समय बाद दवा की पुड़िया के साथ घर से बाहर निकलता हैं। कुम्हार की पत्नी को दवा देते हुए बोलता हैं कि यह कुछ दवाएं हैं। जिसे आपको जब भी गुस्सा आए इस दवा को मुँह में रखकर चूसना हैं, ध्यान रहे इसे चबाना नहीं हैं, सिर्फ चूसते रहना हैं।

एक सप्ताह बाद कुम्हार और उसकी पत्नी वैद के पास फिर से आए। कुम्हार की पत्नी वैद के चरणों में पड़ गई। वैद ने पूछा,”क्या हुआ आप ऐसा क्यों कर रही हो, मुझे विस्तार से बताओ”। कुम्हार की पत्नी ने बोला आप की दावा ने तो कमाल कर दिया जिसकी वजह से हमारे कई सारे रिश्ते टूटते-टूटते बच गए। आज मैं अपने पति के साथ झगड़ रही थी तभी मेरी सासू माँ आ गई। जैसे ही मैंने उनको देखा आपकी दावा खा ली और मैं बिल्कुल शांत हो गई।

इस प्रकार से मेरे रिश्ते बिगड़ते-बिगड़ते बच गए। ठीक यही घटना मेरे पड़ोसी के साथ हुई, मुझे गुस्सा आ ही रहा था कि मैंने वह दवा खाई और मेरी लड़ाई होते-होते रह गई। अब जब भी मुझे गुस्सा आता हैं या कोई मुझ पर गुस्सा करता हैं तो मैं यह गोलियां खा लेती हूँ, जिसका मुझे बहुत लाभ मिल रहा हैँ। वैद ने हँसते हुए कुम्हार की पत्नी से कहा, यह दवा नहीं हैं, यह तो सिर्फ मीठी गोलियां हैं।

आपके रिश्ते ठीक हो रहे हैं जिसका कारण ये मीठी गोलियां नहीं हैं। समाधान आपका शांत रहना हैं, आपकों जब भी गुस्सा आता हैं उस समय आप शांत हो जाए, गुस्से में कोई निर्णय न लें, अपने आपको शांत होकर सोचने दें कि क्या सही हैं और क्या गलत हैं।    

नैतिक सीख: गुस्से में अपने आप को शांत रखे, गुस्से में लिया गया निर्णय हमेशा नुकसान पहुंचाता हैं।

रविवार, 20 जुलाई 2025

परिश्रम की कहानी


 एक गांव में गोपाल नाम का आदमी रहता था  !

एक दिन उसके द्वारा पर साधु है पहुंचे !

उसे साधु ने कहा हम तीन लोग हैं !

श्रम धन और वैभव !

पहले अंदर किसको बुलाओगे !

गोपाल ने कहा...

पहले हम श्रम को अंदर बुलाएंगे !

। जैसे ही श्रम ने घर के अंदर अपने कदम रखे, बाकी के तीनों साधु धन, वैभव, और सफलता भी अंदर आने लगे। यह सब देख, लकड़हारे ने साधुओं से पूँछ कि महाराज मै कुछ समझा नहीं, अभी तो आपने कहा था कि कोई एक भोजन के लिए आएगा। फिर तीनों साधुओं ने लकड़हारे को समझाया कि जिस घर में श्रम रहता हैं, जिस घर में मेहनत और लगन होती हैं। वहाँ पर हम तीनों धन, वैभव और सफलता अपने आप आ जाते हैं।

नैतिक शिक्षा: श्रम के द्वारा आप धन, वैभव और सफलता के अलावा और बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं। इसलिए, हमें  श्रम, मेहनत से पीछे नहीं भागना चाहिए।

शुक्रवार, 18 जुलाई 2025

मेहनत के फल की कहानी


 लकड़हारे ने साधु महात्मा से बोला महाराज हम बहुत गरीब हैं। हमारे पास आप सभी को खिलाने का पर्याप्त भोजन नहीं हो पाएगा। आप बताओ हमें क्या करना चाहिए, साधुओ ने कहा ठीक हैं, आपके के पास हम सभी को खिलाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं हैं तो कोई बात नहीं, हम चारों में से कोई एक आज आपके घर पर भोजन करेगा। लेकिन ध्यान रहें, हम चारों में से जिसे आप अपने घर पर आमंत्रित करोगे वह अपने नाम जैसा प्रभाव लेकर आपके घर में आएगा। आप हमें बताओ सबसे पहले किसको आमंत्रित करना चाहते हो।

लकड़हारा चिंता में पड़ गया और सोचने लगा पहले किसको आमंत्रित करें? क्योंकि धन, वैभव, सफलता और श्रम चारों ही हर किसी के लिए जरूरी होता हैं। लकड़हारा कुछ समय के लिए अपने घर में गया और अपने पत्नी से पूछा, दोनों ने आपस में कुछ देर विचार विमर्श करने के बाद निश्चय किया कि जिसकी वजह से हमारा घर चलता हैं, उस साधु को हमें पहले बुलाना चाहिए।

फिर लकड़हारा अपने घर से बाहर आया और सबसे पहले श्रम आमंत्रित किया। जैसे ही श्रम ने घर के अंदर अपने कदम रखे, बाकी के तीनों साधु धन, वैभव, और सफलता भी अंदर आने लगे। यह सब देख, लकड़हारे ने साधुओं से पूँछ कि महाराज मै कुछ समझा नहीं, अभी तो आपने कहा था कि कोई एक भोजन के लिए आएगा। फिर तीनों साधुओं ने लकड़हारे को समझाया कि जिस घर में श्रम रहता हैं, जिस घर में मेहनत और लगन होती हैं। वहाँ पर हम तीनों धन, वैभव और सफलता अपने आप आ जाते हैं।

नैतिक शिक्षा: श्रम के द्वारा आप धन, वैभव और सफलता के अलावा और बहुत कुछ हासिल कर सकते हैं। इसलिए, हमें श्रम, मेहनत से पीछे नहीं भागना चाहिए।

गुरुवार, 17 जुलाई 2025

तीन चोर की कहानी


 तीन चोर थे। एक रात उन्होंने एक मालदार आदमी के यहाँ चोरी की। चोरों के हाथ खूब माल लगा। उन्होंने सारा धन एक थैले में भरा और उसे लेकर जंगल की ओर भाग निकले। जंगल में पहुँचने पर उन्हें जोर की भूख लगी। वहाँ खाने को तो कुछ था नहीं, इसलिए उनमें से एक चोर पास के एक गाँव से खाने का कुछ सामान लाने गया। बाकी के दोनों चोर चोरी के माल की रखवाली के लिए जंगल में ही रहे।


जो चोर खाने का सामान लाने गया था, उसकी नीयत खराब थी। पहले उसने होटल में खुद छककर भोजन किया। फिर उसने अपने साथियों के लिए खाने का समान खरीदा और उसमें तेज जहर मिला दिया। उसने सोचा कि जहरीला खाना खाकर उसके दोनों साथी मर जाएँगे तो सारा धन उसी का हो जाएगा।

इधर जंगल में दोनो चोरों ने खाने का समान लाने गए अपने साथी चोर की हत्या कर डालने की योजना बना ली थी। वे उसे अपने रास्ते से हटाकर सारा धन आपस में बाँट लेना चाहते थे।

तीनों चोरों ने अपनी-अपनी योजनाओं के अनुसार कार्य किया। पहला चोर ज्योंही जहरीला भोजन लेकर जंगल में पहुँचा कि उसके साथी दोनों चोर उसपर टूट पड़े। उन्होंने उसका काम तमाम कर दिया। फिर वे निश्चिंत होकर भोजन करने बैठे। मगर जहरीला भोजन खाते ही वे दोनों भी तड़प-तड़प कर मर गए।

इस प्रकार इन बुरे लोगों का अंत भी बुरा ही हुआ।

शिक्षा -बुराई का अंत बुरा ही होता है।

मंगलवार, 15 जुलाई 2025

जेनेटिक ट्रेन की कहानी


 1911 में, जेनेटी ट्रेन 106 यात्रियों के साथ रोम से रवाना हुई और एक सुरंग में घुसते ही गायब हो गई. कुछ यात्रियों को सुरंग के बाहर पाया गया, लेकिन बाकी का कोई पता नहीं चला, जिससे यह एक प्रसिद्ध रहस्य बन गया. आज तक यह कहानी एक रहस्य बना हुआ है !!

गरीब परिवार की कहानी


 कहानी उस गरीब परिवार की है

जिनमें दो ही सदस्य थे पति और पतनी,बाकी
स्वर्ग सिधार गये थे ।जिसे गांव
वालो से दगा मिलती रहती थी । गांव के धनी
लोग उन्हें बहुत साताया करते थे
।पहले तो इस परिवार के सदस्य भी अच्छे लोगों
की तरह जीते थे , पर जब वक़्त
अपना रुख बदलता है तो सब कुछ बदल जाता हैI

ऐसा ही इनके साथ हुआ । लोगों
की गालियां सुनने की आदत हो गई थी ।
धीरे धीरे बक्त गुजरता गया और बक्त के साथ
साथ उनके घर एक बच्चे ने जन्म
लिया ।वो बडा होकर बडा विद्वान बना ।धीरे
धीरे उसने अपनी पढाई के लिये
स्कूल में जाना शुरू किया । बच्चे के माता पिता
बडे खुश थे ।वो बच्चे को
पढाकर विद्वान बनाना चाहते थेI चाहे दुख दर्द
क्यों ना मिल जाये ।लोगों से
पैसे इकट्ठा कर कर के बच्चे को पढाया
लिखाया ।वो,इतने कर्जे में डूब चुके
थे जैसे बीते हुये दिन दोबारा से आ खडे हुये ।वो
अपने बच्चे को ऐसे माहौल
से दूर रखना चाहते थेI मगर लोग भी कम नहीं थे
।बस मौका देखते थे ताना
मारने को ।एक दिन अचानक बच्चे को सब
मालूम पड गया,कि उसके घर वालो ने
कैसे उसकी परवरिश की ।थोड़े दिन वो
सोचने समझने में वयस्त रहा ।उससे
ये हाल ना देखा गया और कुछ करने की ठान ली
।इसमें भगवान ने भी साथ
दिया।इसको अच्छी कंपनी में जाव लगी ।अब
इनको दर्द भरे दिनों से छुटकारा मिलने
वाला था ।धीरे धीरे ये क़र्ज़ मुक्त हो गये ।
पहले ये लोगों के पीछे घूमते
थे अब लोग इनके पीछे घूमने लगे हैं।


 

सोमवार, 14 जुलाई 2025

हंस और सोने का अंडा


 

हंस और सोने का अंडा

हंस और सोने का अंडाएक बार एक देहाती व्यक्ति था जिसके पास सबसे अद्भुत हंस था जिसकी आप कल्पना कर सकते हैं, क्योंकि हर दिन जब वह घोंसले में जाता था, तो हंस एक सुंदर, चमकदार, सुनहरा अंडा देता था।

देहाती आदमी अंडे बाज़ार ले गया और जल्द ही अमीर बनने लगा। लेकिन जल्द ही वह हंसनी से परेशान हो गया क्योंकि हंसनी उसे दिन में सिर्फ़ एक ही सोने का अंडा देती थी। वह जल्दी अमीर नहीं बन रहा था।

फिर एक दिन, जब वह अपने पैसे गिन चुका था, तो उसके मन में विचार आया कि वह हंस को मारकर और उसे चीरकर एक साथ सारे सोने के अंडे निकाल सकता है। लेकिन जब यह काम पूरा हुआ, तो उसे एक भी सोने का अंडा नहीं मिला, और उसका प्यारा हंस मर चुका था।

जिनके पास बहुत कुछ है वे और अधिक चाहते हैं और इसलिए अपना सब कुछ खो देते हैं।


सोने के अंडे की कहानी


 सोने के अंडे की कहानी एक प्रसिद्ध कहानी है जो लालच के बुरे परिणामों को दर्शाती है। यह कहानी एक किसान और उसकी पत्नी के बारे में है जिनके पास एक ऐसी मुर्गी होती है जो हर दिन एक सोने का अंडा देती है। शुरुआत में, वे खुश होते हैं और सोने के अंडे बेचकर अमीर बनते हैं। लेकिन फिर, वे लालची हो जाते हैं और सोचते हैं कि मुर्गी के पेट में और भी अंडे होंगे। इसलिए, वे मुर्गी को मार डालते हैं, लेकिन उसके पेट में कोई अंडा नहीं मिलता। इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि लालच बुरी बला है और हमें हमेशा संतुष्ट रहना चाहिए। 

कहानी का सारांश:
एक गरीब किसान और उसकी पत्नी के पास एक मुर्गी थी जो हर दिन एक सोने का अंडा देती थी। वे अंडे बेचकर अमीर हो जाते हैं और खुश रहते हैं। लेकिन, वे और भी अमीर होने के लालच में आ जाते हैं। वे सोचते हैं कि मुर्गी के पेट में बहुत सारे सोने के अंडे होंगे, इसलिए वे मुर्गी को मार डालते हैं। जब वे मुर्गी का पेट चीरते हैं, तो उन्हें कोई अंडा नहीं मिलता। वे अपना सब कुछ खो देते हैं क्योंकि उन्होंने लालच में आकर मुर्गी को मार डाला है !

रविवार, 13 जुलाई 2025

काला जादू की कहानी


 कहते हैं कि जादू, टोना-टोटका हमेशा से लोगों के लिए एक उत्सुक विषय रहा है। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण क्योंकि मनुष्य हमेशा जीवन और मृत्यु को देखने के लिए उत्साहित रहता है। हालांकि, आधुनिक विज्ञान तंत्र-मंत्र को स्वीकार नहीं करता है। लेकिन वह इसके पीछे के मनोविज्ञान को जरूर समझता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

यही एक वजह भी है कि जब भी तंत्र-मंत्र या ज्योतिष विद्या की बात आती है, तो ज्यादातर लोग इसमें रूचि लेने लगते हैं। कुछ लोग जहां इसे पढ़कर ही छोड़ देते हैं, तो कई व्यावहारिक अभ्यासों की तरफ बढ़ते हैं। कहते हैं कि जादू, टोना-टोटका हमेशा से लोगों के लिए एक उत्सुक विषय रहा है। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण क्योंकि मनुष्य हमेशा जीवन और मृत्यु को देखने के लिए उत्साहित रहता है। हालांकि, आधुनिक विज्ञान तंत्र-मंत्र को स्वीकार नहीं करता है। लेकिन वह इसके पीछे के मनोविज्ञान को जरूर समझता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

एक समय की बात है रामू नाम का लड़का बहुत तेज बीमार हुआ !

गांव के लोगों ने समझा भूत प्रेत की यह काला जादू लग गया!

तब गांव के लोगों ने उसे एक तांत्रिक के पास लेकर गए !

तांत्रिक  बोला ऐसे तो भूतों ने गैर रखा है इसको काला जादू लग गया

त्तांत्रिक ने कहा....

जो 27 घाट से पानी लेकर के आ जाओ

27 पेड़ों की लकड़ी लेकर के आ जाओ

राजा के द्वारा की मिट्टी लेकर के आ जाओ

तब हमें इस बालक को ठीक करेंगे और उसे काला जादू से मुक्त करेंगे

गांव वालों ने सारी चीजों को इकट्ठा कर बाबा को उपलब्ध करा

बाबा देव सभा करके लकड़ी को जला दिया

27 घाटों का पानी उसे बालक के ऊपर छिड़क दिया

और उसे बालक को घर भेज दिया

घर जाते बालक और तेज से बीमार पड़ गया

तब गांव के लोगों ने उसे बालक को डॉक्टर के पास ले गए

डॉक्टर नर्स बालक को देखा और उसका इलाज किया

उसका इलाज बताइए कुछ घंटा के बाद बालक ठीक हुआ और उठकर खड़ा हो गया

तब गांव वालों ने यह सोचा बाबा लोगों को ठग रहा है

 गांव वाले इकट्ठा होकर बाबा के पास गया और उसे पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया

!

बाबा ऐसे होते हैं..



शनिवार, 12 जुलाई 2025

सोने की चिड़िया की कहानी


 प्राचीन काल में, एक राजा था जिसके पास एक जादुई, सोने की चिड़िया थी। यह चिड़िया अपने पंखों को फड़फड़ाती थी, तो सोने के सिक्के गिरते थे। एक दिन, एक दुष्ट जादूगर ने चिड़िया को चुरा लिया और उसे एक पिंजरे में बंद कर दिया। राजा ने अपने सबसे बहादुर योद्धाओं को चिड़िया को वापस लाने के लिए भेजा, लेकिन वे असफल रहे। फिर, राजा ने एक युवा, बुद्धिमान राजकुमार को भेजा, जिसने अपनी बुद्धिमत्ता और साहस से जादूगर को हराया, चिड़िया को बचाया, और उसे वापस राजा के पास ले आया। 

कहानी का नैतिक: यह कहानी हमें सिखाती है कि बुद्धिमत्ता और साहस से, हम किसी भी मुश्किल को पार कर सकते हैं। यह यह भी सिखाती है कि हमें लालच से बचना चाहिए और दूसरों की मदद करनी चाहिए। 
कहानी का सारांश.....!

शुक्रवार, 11 जुलाई 2025

राजा और चोर की कहानी


 किसी जमाने में एक चोर था। वह बडा ही चतुर था। लोगों का कहना था कि वह आदमी की आंखों का काजल तक उडा सकता था। एक दिन उस चोर ने सोचा कि जबतक वह राजधानी में नहीं जायगा और अपना करतब नहीं दिखायगी, तबतक चोरों के बीच उसकी धाक नहीं जमेगी। यह सोचकर वह राजधानी की ओर रवाना हुआ और वहां पहुंचकर उसने यह देखने के लिए नगर का चक्कर लगाया कि कहां कया कर सकता है।


उसने तय कि कि राजा के महल से अपना काम शुरू करेगा। राजा ने रातदिन महल की रखवाली के लिए बहुतसे सिपाही तैनात कर रखे थे। बिना पकडे गये परिन्दा भी महल में नहीं घुस सकता था। महल में एक बहुत बडी घडीं लगी थी, जो दिन रात का समय बताने के लिए घंटे बजाती रहती थी।

चोर ने लोहे की कुछ कीलें इकठटी कीं ओर जब रात को घडी ने बारह बजाये तो घंटे की हर आवाज के साथ वह महल की दीवार में एकएक कील ठोकता गया। इसतरह बिना शोर किये उसने दीवार में बारह कीलें लगा दीं, फिर उन्हें पकड पकडकर वह ऊपर चढ गया और महल में दाखिल हो गया। इसके बाद वह खजाने में गया और वहां से बहुत से हीरे चुरा लाया।

अगले दिन जब चोरी का पता लगा तो मंत्रियों ने राजा को इसकी खबर दी। राजा बडा हैरान और नाराज हुआ। उसने मंत्रियों को आज्ञा दी कि शहर की सडकों पर गश्त करने के लिए सिपाहियों की संख्या दूनी कर दी जाय और अगर रात के समय किसी को भी घूमते हुए पाया जाय तो उसे चोर समझकर गिरफतार कर लिया जाय।

जिस समय दरबार में यह ऐलान हो रहा था, एक नागरिक के भेष में चोर मौजूद था। उसे सारी योजना की एक एक बात का पता चल गया। उसे फौरन यह भी मालूम हो यगा कि कौन से छब्बीस सिपाही शहर में गश्त के लिए चुने गये हैं। वह सफाई से घर गया और साधु का बाना धारण करके उन छब्बीसों सिपाहियों की बीवियों से जाकर मिला। उनमें से हरेक इस बात के लिए उत्सुक थी कि उसकी पति ही चोर को पकडे ओर राजा से इनाम ले।

एक एक करके चोर उन सबके पास गया ओर उनके हाथ देख देखकर बताया कि वह रात उसके लिए बडी शुभ है। उसक पति की पोशाक में चोर उसके घर आयेगा; लेकिन, देखो, चोर की अपने घर के अंदर मत आने देना, नहीं तो वह तुम्हें दबा लेगा। घर के सारे दरवाजे बंद कर लेना और भले ही वह पति की आवाज में बोलता सुनाई दे, उसके ऊपर जलता कोयला फेंकना। इसका नतीजा यह होगा कि चोर पकड में आ जायगा।

सारी स्त्रियां रात को चोर के आगमन के लिए तैयार हो गईं। अपने पतियों को उन्होंने इसकी जानकारी नहीं दी। इस बीच पति अपनी गश्त पर चले गये और सवेरे चार बजे तक पहरा देते रहे। हालांकि अभी अंधेरा था, लेकिन उन्हें उस समय तक इधर उधर कोई भी दिखाई नहीं दिया तो उन्होंने सोचा कि उस रात को चोर नहीं आयगा, यह सोचकर उन्होंने अपने घर चले जाने का फैसला किया। ज्योंही वेघर पहुंचे, स्त्रियों को संदेह हुआ और उन्होंने चोर की बताई कार्रवाई शुरू कर दी।

फल वह हुआ कि सिपाही जल गये ओर बडी मुश्किल से अपनी स्त्रियों को विश्वास दिला पाये कि वे ही उनके असली पति हैं और उनके लिए दरवाजा खोल दिया जाय। सारे पतियों के जल जाने के कारण उन्हें अस्पताल ले जाया गया। दूसरे दिन राजा दरबार में आया तो उसे सारा हाल सुनाया गया। सुनकर राजा बहुत चिंतित हुआ और उसने कोतवाल को आदेश दिया कि वह स्वयं जाकर चोर पकड़े।

उस रात कोतवाल ने तेयार होकर शहर का पहरा देना शुरू किया। जब वह एक गली में जा रहा रहा था, चोर ने जवाब दिया, ″मैं चोर हूं।″ कोतवाल समझा कि लड़की उसके साथ मजाक कर रही है। उसने कहा, ″मजाक छाड़ो ओर अगर तुम चोर हो तो मेरे साथ आओ। मैं तुम्हें काठ में डाल दूंगा।″ चोर बाला, ″ठीक है। इससे मेरा क्या बिगड़ेगा!″ और वह कोतवाल के साथ काठ डालने की जगह पर पहुंचा।

वहां जाकर चोर ने कहा, ″कोतवाल साहब, इस काठ को आप इस्तेमाल कैसे किया करते हैं, मेहरबानी करके मुझे समझा दीजिए।″ कोतवाल ने कहा, तुम्हारा क्या भरोसा! मैं तुम्हें बताऊं और तुम भाग जाओं तो ?″ चोर बाला, ″आपके बिना कहे मैंने अपने को आपके हवाले कर दिया है। मैं भाग क्यों जाऊंगा?″ कोतवाल उसे यह दिखाने के लिए राजी हो गया कि काठ कैसे डाला जाता है। ज्यों ही उसने अपने हाथ-पैर उसमें डाले कि चोर ने झट चाबी घुमाकर काठ का ताला बंद कर दिया और कोतवाल को राम-राम करके चल दिया।

जाड़े की रात थी। दिन निकलते-निकलते कोतवाल मारे सर्दी के अधमरा हो गया। सवेरे जब सिपाही बाहर आने लगे तो उन्होंने देखा कि कोतवाल काठ में फंसे पड़े हैं। उन्होंने उनको उसमें से निकाला और अस्पताल ले गये।

अगले दिन जब दरबार लगा तो राजा को रात का सारा किस्सा सुनाया गया। राजा इतना हैरान हुआ कि उसने उस रात चोर की निगरानी स्वयं करने का निश्चय किया। चोर उस समय दरबार में मौजूद था और सारी बातों को सुन रहा था। रात होने पर उसने साधु का भेष बनाया और नगर के सिरे पर एक पेड़ के नीचे धूनी जलाकर बैठ गया।

राजा ने गश्त शुरू की और दो बार साधु के सामने से गुजरा। तीसरी बार जब वह उधर आया तो उसने साधु से पूछा कि, ″क्या इधर से किसी अजनबी आदमी को जाते उसने देखा है?″ साधु ने जवाब दिया कि “वह तो अपने ध्यान में लगा था, अगर उसके पास से कोई निकला भी होगा तो उसे पता नहीं। यदि आप चाहें तो मेरे पास बैठ जाइए और देखते रहिए कि कोई आता-जाता है या नहीं।″ यह सुनकर राजा के दिमाग में एक बात आई और उसने फौरन तय किया कि साधु उसकी पोशाक पहनकर शहर का चक्कर लगाये और वह साधु के कपड़े पहनकर वहां चोर की तलाश में बैठे।

आपस में काफी बहस-मुबाहिसे और दो-तीन बार इंकार करने के बाद आखिर चोर राजा की बात मानने को राजी हो गया ओर उन्होंने आपस में कपड़े बदल लिये। चोर तत्काल राजा के घोड़े पर सवार होकर महल में पहुंचा ओर राजा के सोने के कमरे में जाकर आराम से सो गया, बेचारा राजा साधु बना चोर को पकड़ने के लिए इंतजार करता रहा। सवेरे के कोई चार बजने आये। राजा ने देखा कि न तो साधु लौटा और कोई आदमी या चोर उस रास्ते से गुजरा, तो उसने महल में लौट जाने का निश्चय किया; लेकिन जब वह महल के फाटक पर पहुंचा तो संतरियों ने सोचा, राजा तो पहले ही आ चुका है, हो न हो यह चोर है, जो राजा बनकर महल में घुसना चाहता है। उन्होंने राजा को पकड़ लिया और काल कोठरी में डाल दिया। राजा ने शोर मचाया, पर किसी ने भी उसकी बात न सुनी।

दिन का उजाला होने पर काल कोठरी का पहरा देने वाले संतरी ने राजा का चेहरा पहचान लिया ओर मारे डर के थरथर कांपने लगा। वह राजा के पैरों पर गिर पड़ा। राजा ने सारे सिपाहियों को बुलाया और महल में गया। उधर चोर, जो रात भर राजा के रुप में महल में सोया था, सूरज की पहली किरण फूटते ही, राजा की पोशाक में और उसी के घोड़े पर रफूचक्कर हो गया।

अगले दिन जब राजा अपने दरबार में पहुंचा तो बहुत ही हतरश था। उसने ऐलान किया कि अगर चोर उसके सामने उपस्थितित हा जायगा तो उसे माफ कर दिया जायगा और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कीह जायगी, बल्कि उसकी चतुराई के लिए उसे इनाम भी मिलेगा। चोर वहां मौजूद था ही, फौरन राजा के सामने आ गया ओर बोला, “महाराज, मैं ही वह अपराधीह हूं।″ इसके सबूत में उसने राजा के महल से जो कुछ चुराया था, वह सब सामने रख दिया, साथ ही राजा की पोशाक और उसका घोड़ा भी। राजा ने उसे गांव इनाम में दिये और वादा कराया कि वह आगे चोरी करना छोड़ देगा। इसके बाद से चोर खूब आनन्द से रहने लगा।

तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

Popular post.रावण का कुल और गोत्र