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रविवार, 22 जून 2025

लंगड़े पुजारी

 क्यों कहते हैं इस आम को लंगड़ा  !

जब बच्चों ने मारा आम पर ढेला  !

तब राजा तक पहुंच गई बात  !

और फिर आगे जो हुआ  !


जब राजा को आया इतना पसंद…

पुजारी ने अपने आश्रम में आम का एक पेड़ लगा रखा था, जब आसपास के बच्चे उस पेड़ पर लगे आम को तोड़ने के लिए पत्थर मारते थे तो लंगड़ा पुजारी उन बच्चों के पीछे डंडा लेकर दौड़ता. धीरे-धीरे ये किस्सा पूरे नगर में प्रसिद्ध हो गया और लोग उसे लंगड़े वाला आम कहने लगे. यह खबर उस समय के तत्कालीन राजा के पास पहुंची और राजा ने भी उस आम को मंगवाया. उसे देखा, परखा और खाया. राजा को उस आम का स्वाद इतना पसंद आया कि उसने लंगड़े पुजारी के नाम पर उसका नाम “लंगड़ा आम” रख दिया. राजा ने उस आम के पेड़ से दूसरे पेड़ भी तैयार कराए.

गुरुवार, 19 जून 2025

घर में मिला खजाना


 एक घर में एक बुजुर्ग आदमी अकेला रहता था !

वह 92 वर्ष क  था  !

एक दिन उसकी अचानक तबीयत खराब हो...!

तबीयत बिगड़ने के कुछ ही घंटे बाद उसकी मृत्यु हो गई

और फिर उसके बाद !

उस बुजुर्ग व्यक्ति के घर में मिला खजाने का ढेर!

एक बड़ा सा बॉक्स सोने के सिक्कों से भरा  था !

और आगे जो हुआ....

 एक घर में दीवारों के पीछे दुर्लभ सोने के सिक्कों और सिल्लियों का एक विशाल संग्रह मिला. इस घर को उसके बुजुर्ग मालिक के निधन के बाद नीलाम कर दिया गया. वहीं घर से मिले सोने के सिक्कों और अन्य सामान की भी नीलामी हुई. 

न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस के कैस्टिलोनस में पॉल नार्से नाम का शख्स अकेले अपने घर में रहता था. 89 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. उसके बाद नोटरी अधिकारियों  उनके घर की दीवार के पीछे सोने के सिक्कों से भरा एक बॉक्स मिला जिसमें सोने के सिक्के पड़े हुए थे !  सोनी के सिक्के को नीलाम किया गया!

शनिवार, 14 जून 2025

कर्ज में डूबा शहर

 एक पर्यटक एक ऐसे शहर में आए,

जो शहर उधारी में डूबा हुआ था ?

   पर्यटक ने ₹500 का नोट,

होटल काउंटर पर रखा और कहां....

मैं जा रहा हूं आपके होटल के अंदर,

कमरा पसंद करने !

होटल का मालिक फौरन भाग,

घी वाले के पास,

और उसकी ₹500 का नोट देकर,

घी का उधार चुकता कर दिया ?



घी वाला भाग

 दूध वाले के पास,

और उसकी ₹500 का नोट देकर,


दूध का हिसाब चुकता कर दिया?


दूध वाला भाग भूसे वाले के पास,


उसने ₹500 का नोट देकर,

भूसे का हिसाब चुकता कर दिया !


भूसे वाला गया वही होटल पर,


वह कभी-कभी उधार लेकर के खाना खाता था!

भूसे वाले उसे रेस्टोरेंट को ₹500 देकर,


अपना पूरा हिसाब पुराना चुका दिया !

 

पर्यटक वापस आया उसने कहा 

हमारा ₹500 का नोट वापस कर दीजिए !

अब हमको कोई रूम पसंद नहीं आया !



ना किसी ने कुछ लिया...

ना किसी ने कुछ दिया 

सबका हिसाब झुकता हो गया

बताओ गड़बड़ कहां हुई !







बुधवार, 4 जून 2025

सपनों की उड़ान

 एक और हकीकत.......

3कहानी वाला

सपनों की उड़ान ( Sapno ki udaan) कितनी सुन्द....


K

सपनों की उड़ान (Sapno ki udaan) कितनी दूर ?

रामू एक छोटे से गाँव में रहता थाजहाँ धूल भरी सड़कें और मिट्टी के घर उसकी दुनिया थे। उसके मातापिता अशिक्षित थे और बेहद गरीब। दोनों दिहाड़ी मजदूरी करके किसी तरह घर चलाते थे। रामू पढ़ने में बहुत तेज और मेहनती था। गाँव के स्कूल में हमेशा अव्वल आता था। उसकी आँखों में बड़े सपने थेजिन्हें पूरा करने के लिए वह जीतोड़ मेहनत करता था। उसकी किताबों में खोई एक दुनिया थीजो उसे इस गरीबी और अभाव से दूर ले जाती थी।

करियर” शब्द

एक दिन उसने करियर” शब्द सुना। उसे समझ नहीं आया कि इसका मतलब क्या होता है। उसने अपने स्कूल के अध्यापक से पूछा, “गुरुजीये करियर क्या होता है?”

अध्यापक ने समझाया, “रामूकरियर का मतलब है जीवन में तुम क्या बनना चाहते होक्या काम करना चाहते हो। जैसे कोई डॉक्टर बनता हैकोई इंजीनियरकोई शिक्षकये सब उनका करियर है।

रामू को बात समझ आ गई। उसने सोचा, “मुझे भी कुछ बनना हैबड़ा आदमी बनना है।” उसने अपना लक्ष्य तय किया। उसने ठान लिया कि वह खूब पढ़ेगा और अपने परिवार को गरीबी से निकालेगा।

दिन रात पढ़ाई में जुट गया। गाँव में बिजली नहीं थीतो वह लालटेन की रोशनी में पढ़ता था। कभीकभी तो भूखे पेट ही पढ़ाई करता थालेकिन उसकी लगन कम नहीं हुई। उसकी आँखों में एक ज्वाला थीजो उसे हर मुश्किल से लड़ने की ताकत देती थी।

परीक्षा का परिणाम और सपनों की उड़ान (Sapno Ki Udaan)

समय बीतता गया। रामू ने दसवीं की परीक्षा में पूरे जिले में टॉप किया। गाँव में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। उसके मातापिता की आँखों में आँसू थेपर ये आँसू खुशी के थे। रामू की माँ ने उसे सीने से लगाया और कहा, “बेटातू हमारा नाम रोशन करेगा।

बारहवीं के बाद रामू ने शहर के कॉलेज में दाखिला लिया। ये उसके जीवन का एक नया मोड़ था। शहर की चकाचौंध देखकर वह थोड़ा डरापर जल्द ही उसने अपने आप को संभाल लिया। कॉलेज में भी उसने अपनी मेहनत और लगन से पढ़ाई की। उसने ग्रेजुएशन में यूनिवर्सिटी में टॉप किया।

साजिशें

लेकिन यहीं से कहानी में एक मोड़ आया। रामू की सफलता से जलने वाले कुछ लोगखासकर कॉलेज का एक रईस छात्र विक्रमउसके खिलाफ साजिशें रचने लगे। विक्रम रामू की प्रतिभा और लोकप्रियता से ईर्ष्या करता था। वह चाहता था कि रामू किसी भी कीमत पर आगे न बढ़े।

एक दिनरामू पर परीक्षा में धांधली करने का आरोप लगाया गया। सबूत विक्रम ने ही तैयार करवाए थे। रामू टूट गया। उसे लगा जैसे उसकी सारी मेहनत बेकार हो गई। गाँव के लोग भी उस पर शक करने लगे। उसके मातापिता भी चिंतित थे।

लेकिन रामू ने हार नहीं मानी। उसने सच साबित करने की ठान ली। इस मुश्किल दौर में उसे एक लड़की का साथ मिलाअंजलि। अंजलि एक साधारण परिवार से थीपर वह बहुत बुद्धिमान और साहसी थी। उसने रामू का हौसला बढ़ाया और उसे सही राह दिखाई। अंजलि रामू की सच्चाई और उसकी मेहनत को जानती थी। धीरेधीरे दोनों करीब आने लगे। एक दूसरे के दर्द को समझने लगे। एक दूसरे में उन्हें एक सहारा मिला। प्यार के अंकुर फूटने लगे।

साजिश का पर्दाफाश

अंजलि ने रामू को विक्रम की साजिश के बारे में बताया। उसने विक्रम को किसी और के साथ रामू के खिलाफ बातें करते हुए सुना था। रामू और अंजलि ने मिलकर विक्रम का पर्दाफाश करने की योजना बनाई। उन्होंने कुछ और छात्रों की मदद ली जो विक्रम की गलत हरकतों से परेशान थे।

उन्होंने विक्रम के खिलाफ सबूत इकट्ठा किए। और सही समय आने पर सबके सामने उसकी सच्चाई ला दी। विक्रम की साजिश सबके सामने आ गई। वह कॉलेज से निकाल दिया गया। रामू निर्दोष साबित हुआ।

साथ का फैसला

इस मुश्किल दौर में रामू और अंजलि का प्यार और भी गहरा हो गया। दोनों ने एक दूसरे का साथ देने का फैसला किया।

रामू ने फिर से अपनी पढ़ाई शुरू की। उसने कई प्रतियोगी परीक्षाओं में भाग लिया और सब में सफलता प्राप्त की। अंततः उसे एक अच्छी नौकरी मिल गई।

रामू की सफलता ने उसके परिवार की जिंदगी बदल दी। उसने अपने मातापिता को गाँव से शहर बुला लिया। अब वे आराम से जीवन बिता रहे थे। रामू ने अपने मातापिता को वो सारी खुशियाँ दींजिनके वे हकदार थे। रामू ने अंजलि से शादी कर ली। दोनों ने मिलकर एक खुशहाल संसार बसाया।

कहानी की प्रेरणा (Sapno Ki Udaan)

रामू की कहानी एक प्रेरणा है। यह कहानी हमें सिखाती है कि अगर इंसान के अंदर जुनून हो और वह लगातार मेहनत करे, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत क्यों न हों, सच्ची लगन और दृढ़ संकल्प के आगे हर बाधा हार मान लेती है।

“मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है।
पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है!”

तो आप भी अपने सपनों को पूरा करने के लिए कभी हार न मानें। क्योंकि जीत उसी की होती है, जो लड़ना नहीं छोड़ता!


कहानी का सारमेहनत, धैर्य और ....

मंगलवार, 3 जून 2025

मुश्किल में मित्र की मदद !

    *♨️ आज का प्रेरक प्रसंग ♨️*


               *!! चूहे दानी !!*

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बहुत समय पहले की बात है रहमान चाचा के यहाँ एक चूहा रहता था. हर दिन की तरह उस दिन भी बाज़ार से गाँव लौटते वक़्त चाचा झोले में कुछ सामान लेकर आये. झोले से बिस्कुट का पैकेट निकलते देख कर चूहे के मुंह में पानी आ गया, लेकिन ये क्या अगले ही पल उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई, चाचा आज बाकी सामन के साथ एक चूहेदानी भी खरीद कर लाये थे.


चूहा फ़ौरन भाग कर मुंडेर पर बैठे कबूतर के पास गया और घबड़ा कर कहने लगा– “यार, आज बड़ी गड़बड़ हो गई, चाचा मुझे मारने के लिए चूहे दानी लेकर आये हैं, मेरी मदद करो किसी तरह इस चूहेदानी को यहाँ से गायब कर दो!”


कबूतर मुस्कुराया और बोला, “पागल हो गया है, भला मुझे चूहेदानी से क्या खतरा, मैं इस चक्कर में नहीं पड़ने वाला. ये तेरी समस्या है तू ही निपट.”


चूहा और भी निराश हो गया और मुर्गो के पास हांफता हुआ पहुंचा, “भाई मेरी मदद करो, चाचा चूहेदानी लेकर आये हैं….”


मुर्गे दाना चुगने में मस्त थे. चूहे से कन्नी काटते हुए बोले, “अभी हमारा खाने का टाइम है, तू बाद में आना.”


अब चूहा भागा-भागा बकरे के पास पहुंचा और अपनी समस्या बताई.


बकरा जोर-जोर से हंसने लगा, “यार तू पागल हो गया है, चूहेदानी से तुझे खतरा है मुझे नहीं. और तेरी मदद करके मुझे क्या मिलेगा? मैं कोई शेर तो हूँ नहीं जो शिकारी मुझे जाल में फंसा लेगा और तू मेरा जाल कुतर कर मेरी जान बचा लेगा!”


और ऐसा कह कर बकरा जोर-जोर से हंसने लगा. बेचारा चूहा उदास मन से अपने बिल में वापस चला गया.


रात हो चुकी थी, चाचा और उनका परिवार खा-पीकर सोने की तैयारी कर रहे थे तभी खटाक की आवाज़ आई. चचा की छोटी बिटिया दौड़कर चूहेदानी की ओर भागी, सभी को लगा कि कोई चूहा पकड़ा गया है. कबूतर, मुर्गे और बकरे को भी लगा कि आदत से मजबूर चूहा खाने की लालच में मारा गया.


लड़की पलंग के नीचे हाथ डालकर चूहेदानी खींचेने लगी, तभी हिस्स की आवाज़ आयी…. ये क्या चूहेदानी में चूहा नहीं बल्कि एक ज़हरीला सांप फंस गया था और उसने बिजली की गति से फूंफकार मारते हुए बिटिया को डस लिया.


बिटिया की चीख सुन सब वहां इकठ्ठा हो गए. रहमान चाचा सर पर पैर रख कर पड़ोस में रहने वाले ओझा के यहाँ भागे.


ओझा ने कुछ तंत्र-मन्त्र किया और बिटिया के हाथ पर एक लेप लगाते हुए बोले, बच्ची अभी खतरे से बाहर नहीं है, मुझे फ़ौरन कबूतर का कंठ लाकर दो मैं उसे उबालकर एक घोल तैयार करूँगा जिसे पीकर यह पूरी तराह स्वस्थ हो जायेगी.


ये सुनते ही रहमान चाचा कबूतर को पकड़ लाये. ओझा ने बिना देरी किये कबूतर का काम तमाम कर दिया.


बिटिया की हालत सुधरने लगी.


अगले दिन कई नाते-रिश्तेदार बिटिया का हाल-चाल जानने के लिए इकट्ठा हो गए. चाचा भी बिटिया की जान बचने से खुश थे और इसी ख़ुशी में उन्होंने सभी को मुर्गा खिलाने की ठानी. कुछ ही घंटों में मूढ़ों का भी काम तमाम हो गया.


ये सब देख कर बकरा भी काफी डरा हुआ था पर जब सभी मेहमान चले गए तो वो भी बेफिक्र हो गया. पर उसकी ये बेफिक्री अधिक देर तक नहीं रह पाई.


चची ने रहमान चाचा से कहा, “अल्लाह की मेहरबानी से आज बिटिया हम सबके बीच है, जब सांप ने काटा था तभी मैंने मन्नत मांग ली थी कि अगर बिटिया सही-सलामत बच गई तो हम बकरे की कुर्बानी देंगे. आप आज ही हमारे बकरे को कुर्बान कर दीजिये.


इस तरह कबूतर, मुर्गे और बकरा तीनो मारे गए और चूहा अभी भी सही-सलामत था.


*शिक्षा:-*

दोस्तों, जब हमारा दोस्त या पडोसी मुसीबत में हो तो हमें उसकी मदद करने की भरसक कोशिश ज़रूर करनी चाहिए. किसी समस्या को दूसरे की समस्या मान कर आँखें मूँद लेना हमें भी मुसीबत में डाल सकता है. इसलिए मुश्किल में पड़े मित्रों की मदद ज़रूर करें, ऐसा करके आप कहीं न कहीं खुद की ही मदद करेंगे.



तोतला बेटा...

 मां  अपने तोतले बेटे से कहा।      बेटा  आज हम जहां, लड़की देखने जा रहें हैं। तुम वहां बोलना मत ।     वर्ना  वह लोग भी मना कर देंगे।    बेटा...

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