मिट्टी की पकड बहुत मजबूत होती है कैसे-
पानी के बिना...........नदी बेकार है ।
अतिथि के बिना........ आंगन बेकार है ।
किसी से लगाव न हो तो...सगे सम्बबन्धी बेकार हैैं ।
जीवन में दोस्त न हो तो....जीवन बेकार है।
बरसात मे बारिश न हो...तो बारिश बेकार है।
"खपरैल व छप्पर "का घर देखकर किसी से रिश्ता न तोडना, मिट्टी की पकड़ बहुत मजबूत होती है, संंगमरमर पर तो अक्सर पैर फिसलता है।
पानी के बिना...........नदी बेकार है ।
अतिथि के बिना........ आंगन बेकार है ।
किसी से लगाव न हो तो...सगे सम्बबन्धी बेकार हैैं ।
जीवन में दोस्त न हो तो....जीवन बेकार है।
बरसात मे बारिश न हो...तो बारिश बेकार है।
"खपरैल व छप्पर "का घर देखकर किसी से रिश्ता न तोडना, मिट्टी की पकड़ बहुत मजबूत होती है, संंगमरमर पर तो अक्सर पैर फिसलता है।

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