माधौपुरा गांव मे कुछ परिवार रहता था।वह सब आपस मे घुलमिल कर रहते थे।एक दूसरे के शुख दुख मे सहयोग करते थे।उसी गाँव में परबीन भाई भी रहते थे।परबीन भाई का एक लडका था,जो बहुत ही सरारती था,जिसका नाम हीरा था।हीरा कुछ न कुछ रोज सरारत करता ही रहता था।पर हीरा के घर वालेकभी भी उसपर केयर नही करते थे।धीरे धीरे उसकी सरारत गांव मे बढती गई।जब भी गांव के लोग उसकी शिकायत दर्ज करने उसके घर जाते, उसके घर के लोग अपने लडके को डटने के बजाय,वह उलटे गांव के लोगो से ही लडने को तैयार हो जाते थे।इधर हीरा धीरे धीरे बडा होता गया ,और उसकी सरारत और बढती चली गई।इतनी गलतीयां होने के बाद भी हीरा के मां बाप ने हीरा पर ध्यान नहीं दिया।इधर हीरा बुरे संगत मे फसता चला गया।और वह गलत लोगो के साथ रहकर उसको शराब जुआ और अनेक प्रकार की गलत लत लग गई।हीरा के पास आमदनी का कोई जरिया नही था।गलत लत लगने के बाद हीरा करें तो क्या करें।अब वह गलत लोगों के साथ चोरी भी करने लगा।क ई जगह चोरी करने के बाद आखिर कर एक दिन वह पकडा गया।और उसको जेल हो गई।और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई।उसदिन उसके मांता पिता को अपनी गलती का एहसास हुआ।इसीलिए कहते है..लडका हो या लडकी उतनी ही छूट दो जितनी चल जाए उससे अधिक नही।
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शनिवार, 26 मई 2018
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